
भाजपा के आठ महीने में ही बिगड़ी हालत
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह भाजपा ने शिक्षा के क्षेत्रको निजी स्कूलों की फीस बढ़ाकर बर्बाद किया, उसी तरह अब वह स्वास्थ्य सेवाओं को भी नष्ट कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नेजानबूझकर सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल उपकरण, दस्ताने और दवाइयों की भारी कमी पैदा कर दी है। सौरभ भारद्वाज ने बताया कि स्वास्थ्यमंत्रालय ने अस्पतालों को अपनी ओर से दवाइयाँ खरीदने पर रोक लगा दी है। अस्पताल अधीक्षकों को स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद की अनुमतिनहीं दी जा रही है। इससे हालात इतने खराब हो गए हैं कि मरीजों को साधारण दवाइयाँ भी अपनी जेब से बाहर जाकर खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंनेकहा कि भाजपा की सरकार को दिल्ली में आए हुए अभी केवल आठ महीने ही हुए हैं, लेकिन इस छोटे से समय में ही सरकारी अस्पतालों की हालतऐसी हो गई है कि मरीजों को स्ट्रेचर तक के लिए तरसना पड़ रहा है।
केजरीवाल सरकार में मुफ्त इलाज की सुविधा
सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि अरविंद केजरीवाल की सरकार के समय में किसी भी मरीज को दवाइयाँ बाहर से खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी।सभी जांचें और ऑपरेशन मुफ्त होते थे। अगर किसी सरकारी अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन या कोई बड़ी जांच संभव नहीं होती थी तो मरीजोंको निजी जांच केंद्रों में भेजकर भी मुफ्त जांच कराई जाती थी उन्होंने कहा कि पहले केजरीवाल सरकार ने व्यवस्था बनाई थी कि अगर किसी सरकारीअस्पताल में डॉक्टर या सर्जन उपलब्ध नहीं हैं और समय पर ऑपरेशन संभव नहीं है, तो मरीज का इलाज निजी अस्पताल में भी मुफ्त कराया जाए।लेकिन भाजपा सरकार ने आते ही यह पूरी व्यवस्था चौपट कर दी।
मनीष सिसोदिया की तीखी प्रतिक्रिया
आप नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सिर्फ छह महीनों मेंदिल्ली के अस्पतालों की व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद कर दी। सिसोदिया ने कहा कि आज हालत यह है कि दिल्ली के लोग दवाई, दस्ताने और स्ट्रेचरजैसी साधारण सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यह वही दिल्ली है जहाँ केजरीवाल सरकार ने बड़ी मेहनत से अस्पतालों को ठीक किया था और यहसुनिश्चित किया था कि मरीज को कभी भी दवाई बाहर से न खरीदनी पड़े।
बजट घटाया, योजनाएँ बंद की गईं
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली आरोग्य कोष का 80 करोड़ रुपये का सालाना बजट भी शून्य कर दिया है। इस वजह से ‘फरिश्तेयोजना’ जैसी ज़रूरी योजनाएँ बंद हो गईं। इससे न केवल सरकारी अस्पताल प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि मोहल्ला क्लीनिक, डिस्पेंसरी और आरोग्यमंदिर भी बदहाल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी है कि मरीजों को इलाज के लिए मजबूर होकर निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।यही भाजपा सरकार का असली इरादा है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर कर निजी अस्पतालों को फायदा पहुँचाया जाए।
मीडिया की चुप्पी पर सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब-जब अस्पतालों में दवाइयों और सुविधाओं की कमी होती थी, तब मीडिया इस मुद्दे को उठाता था। पहले टाइम्स ऑफइंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे बड़े अख़बार इन मामलों पर सक्रिय रिपोर्टिंग करते थे, लेकिन अब मीडिया चुप है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपासरकार दबाव डालकर इन मुद्दों को दबा रही है।