नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2025: भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन केराजदूत शुई फ़ीहॉन्ग ने संयुक्त रूप से केक काटकर इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने भी अपने चीनी समकक्षों के साथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया। हालांकि, कांग्रेस ने इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकारकी नीतियों पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने “डिसएंगेजमेंट” के नाम पर लद्दाखमें 2,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र चीन को सौंप दिया है, जो भारत के लिए क्षेत्रीय नुकसान का सबसे बड़ा उदाहरण है।
कांग्रेस ने 2020 के गलवान संघर्ष की भी याद दिलाई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेउस समय यह कहते हुए चीन को क्लीन चिट दे दी थी कि “ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।” उन्होंने दावा किया किमोदी सरकार आज भी चीन के साथ सामान्य संबंध बनाने में जुटी हुई है, जबकि भारतीय संप्रभुता खतरे में है। कांग्रेस ने 21 अक्टूबर 2024 को हुए’डिसएंगेजमेंट’ समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस समझौते के तहत भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों से पीछे हटकर अपनीक्षेत्रीय अखंडता को कमजोर कर लिया है।
कांग्रेस का आरोप है कि इस समझौते के कारण भारतीय सैनिकों की गश्त पर गंभीर असर पड़ा है। डेपसांग मैदानी क्षेत्र में भारतीय सैनिकों को अबगश्त बिंदु 10, 11, 11A, 12 और 13 तक पहुंचने के लिए चीन की अनुमति की आवश्यकता होती है। इसी तरह, गलवान घाटी में बनाए गए “बफरज़ोन” के कारण भारतीय सैनिकों को अपनी दावा रेखा से 2.4 किलोमीटर पीछे हटना पड़ा है, जबकि चीनी सैनिक भारत के करीब तैनात हैं। हॉट स्प्रिंगक्षेत्र में भी बफर ज़ोन भारतीय दावे की सीमा के भीतर 1-3 किलोमीटर तक आ गया है, जिससे भारतीय सेना की स्थिति कमजोर हुई है। पैंगोंग त्सोझील के क्षेत्र में भी भारत को बड़ा नुकसान हुआ है, जहां पहले भारतीय सैनिक फिंगर 8 तक गश्त कर सकते थे, लेकिन अब उन्हें फिंगर 3 तक हीसीमित कर दिया गया है।
इसके अलावा, कांग्रेस ने चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने कहा कि चीन से आयात 100 अरबडॉलर से अधिक हो चुका है और भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय बाजार में चीनीकंपनियों को अवसर दे रही है, जबकि भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) चीनी आयात से प्रभावित हो रहे हैं।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस राष्ट्रीय मुद्दे पर देश को स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। कांग्रेस ने सवाल किया कि जब भारतीय क्षेत्रीय अखंडताखतरे में है, तब सरकार चीन के साथ संबंधों को सामान्य करने और आर्थिक निर्भरता बढ़ाने पर क्यों जोर दे रही है। पार्टी ने मोदी सरकार से इससमझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता क्यों किया गया है।