
जब-जब भाषा को लेकर राजनीति गर्म होती है तब देश के कलाकार बार-बार याद दिलाते हैं कि भाषा जोड़ने का काम करती है तोड़ने का नहीं कुछऐसा ही अब भोजपुरी एक्टर और सांसद रवि किशन ने भी किया है. उन्होंने हिंदी और मराठी को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय दी है. रवि किशनने क्या कुछ कहा चलिए बताते हैं. रवि किशन ने कहा ‘हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है. वो पूरी तरह से एक सोची-समझी राजनीति का हिस्सा है. ये सब निकाय चुनावों के आसपास ही क्यों उभरता है इसका जवाब खुद में साफ है. भाषा के नाम पर लोगों को बांटनाबेहद अफसोसजनक है।
उन्होंने आगे कहा’मैं खुद मराठी फिल्मों में काम कर चुका हूं. मुझे मराठी बोलनी भी आती है लेकिन जब भाषा को नफरत फैलाने का जरिया बना दियाजाता है.
हमारी कला छूती है हर दिल को
तो तकलीफ होती है ये हमारी संस्कृति नहीं है. एक कलाकार की कोई एक भाषा नहीं होती हमारी असली भाषा हमारी कला होती है जो हर दिल कोछूती है. एकता का मैसेज देते हुए उन्होंने अपनी बात पूरी करते हुए कहा ‘जो लोग हिंदी और मराठी के बीच दीवार खड़ी कर रहे हैं वो दरअसल देश की एकता पर हमला कर रहे हैं. हिंदी हो या मराठी, ये दोनों हमारी ही भाषाएं हैं. हमारे ही खून में रची-बसी हैं। इनको आपस में भिड़ाना शर्मनाक है इसे खुलकर नकारा जाना चाहिए. देश को जोड़ने की जरूरत है बांटने की नहीं. बता दें रवि किशन जल्द ही फिल्म ‘सन ऑफ़ सरदार 2’ में नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ अजय देवगन, मृणाल ठाकुर और कुबरा सेठ जैसे कलाकार मौजूद हैं. हालांकि फिल्मों की व्यस्तता के बीच भीरवि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने से पीछे नहीं हटते.
मराठी भाषा पर दी अपनी राय
अभिनेता-सासंद रवि किशन ने कहा कि हिंदी और मराठी भाषा विवाद पर अपनी राय दी है. क्या कुछ कहा है रवि ने कहा कि यह विवाद निकायचुनावों के आसपास ही उठता है. यह स्पष्ट संकेत है कि भाषा के नाम पर राजनीति की जा रही है और समाज को बांटने की कोशिश हो रही है रवि कामानना है कि “एक कलाकार की कोई एक भाषा नहीं होती, असली भाषा उसकी कला होती है जो हर दिल को छूती है” उन्होंने जोर दिया कि हिंदीऔर मराठी के बीच दीवार खड़ी करना देश की एकता पर हमला है. यह शर्मनाक है और इसे स्पष्ट रूप से नकारा जाना चाहिए.भोजपुरी अभिनेता एवंसांसद रवि किशन ने कहा भाषा भाषा है. नफरत की जड़ नहीं हिंदी‑मराठी विवाद चुनावी राजनीति का हिस्सा है। भाषा जोड़ती है तोड़ती नहीं. देश कोबांटने का नहीं जोड़ने का विवाद पूरी तरह से चुनावी राजनीति का हिस्सा है. उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक एकता के खिलाफ बताया और कहा किकलाकार की असली भाषा उसकी कला होती है न कि कोई एक बोली. रवि ने अपील की कि देश को भाषा के नाम पर नहीं बल्कि एकता औरभाईचारे के नाम पर जोड़ा जाए.