महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना से राज्य की अन्य कल्याणकारीयोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग बजटीय प्रावधान किए गए हैं। महाराष्ट्र बीजेपीके अध्यक्ष बावनकुले ने कहा, “हमारी सरकार ने हर योजना के लिए अलग से बजट आवंटित किया है, जिसमें लाडकी बहिन योजना के लिए भी अलगसे बजट है।” उन्होंने कहा, “कृषि फसल बीमा योजना के लिए भी अलग से बजट रखा गया है, और कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने कीकोशिश कर रहे हैं।”
‘लाडकी बहिन योजना’ का उद्देश्य और लाभ
मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव से पहले शुरू की थी, और महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना कोजारी रखा गया। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिनकीवार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इस योजना में पात्रता की अन्य शर्तें भी हैं, जैसे कि लाभार्थी के पास चार पहिया वाहन नहीं होनाचाहिए और परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।
लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमी
जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या घटकर 2.41 करोड़ रह गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या2.46 करोड़ थी। इस बदलाव का कारण यह था कि विभिन्न कारणों से पांच लाख महिलाएं अपात्र पाई गईं। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदितितटकरे ने कहा कि जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच इन महिलाओं के खातों में कुल 450 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, हालांकि यह राशि वापसनहीं ली गई है और राज्य सरकार का इस राशि को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है।
अपात्र पाई गई महिलाएं
अधिकारियों ने बताया कि जिन पांच लाख महिलाओं को अपात्र माना गया, उनमें से 1.5 लाख महिलाएं 65 वर्ष से अधिक आयु की थीं। वहीं, 1.6 लाख महिलाएं वे थीं जिनके पास चार पहिया वाहन था या जो ‘नमो शेतकरी योजना’ जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की लाभार्थी थीं। इसके अलावा, करीब 2.3 लाख महिलाएं संजय गांधी निराधार योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही थीं, जिससे वे ‘लाडकी बहिन योजना’ के लिए अपात्र हो गईं।