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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन का उद्घाटन किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केजरिये दुनियाभर ने हमारे सैनिकों का जज्बा और युद्ध प्रणाली को देखा आज हमारे रक्षा क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर है.उन्होंने कहा कि दुनिया हमारेरक्षा क्षेत्र की ओर देख रही है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने जो वीरता दिखाई है साथ ही जिस तरह से हमने अपने घरेलू उपकरणों कीक्षमताओं का प्रदर्शन किया है उससे हमारे स्वदेशी रक्षा उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है. 2024 में विश्व सैन्य व्यय बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर सेअधिक हो गया है. इतना बड़ा बाजार हमारा इंतजार कर रहा है.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज रक्षा क्षेत्र में जो परिवर्तनकारी बदलाव हो रहेहैं. वे पहले ऐसे नहीं थे आज के बदलाव गतिशील और अनिश्चित हैं। शांति का समय एक धोखा है. इसके अलावा कुछ नहीं मुझे लगता है कि हमसभी को शांति के समय में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा करनी चाहिए. लेकिन अचानक हम खुद को ऐसी स्थिति में पाते हैं जो हमें जगाती हैऔर हमें कुछ और करने की आवश्यकता का अहसास होता है.

अचानक बढ़ जाती है आवश्यकता
उन्होंने कहा कि अगर किसी उपकरण की अचानक आवश्यकता बढ़ जाती है. तो हम सभी को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। यह सब शांति केसमय में करने की जरूरत है. वित्तीय प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए हम सभी को रक्षा अर्थशास्त्र में एक कदम और आगे बढ़ना चाहिए. इसके पीछेकारण यह है कि पूरा विश्व पुनः शस्त्रीकरण के एक नए युग की ओर बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में कई पूंजी निवेश किए जा रहे हैं.राजनाथ सिंह ने कहाकि आपने नियंत्रक सम्मेलन आयोजित किया है लेकिन मुझे लगता है कि आपका दिमाग खुला और ग्रहणशील होना चाहिए। रक्षा लेखा विभाग कीजिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर हिसाब-किताब रखना नहीं है, बल्कि यह हमारी सुरक्षा व्यवस्था का भी अहम हिस्सा है. जब आप ईमानदारी से काम करतेहैं तो इसका असर हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों तक भी पहुंचता है. उन्हें लगता है कि उनके पीछे एक सिस्टम है जो हर परिस्थिति मेंउनके साथ रहेगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर आप हमारे रक्षा बजट को देखें तो यह दुनिया के कुछ देशों की जीडीपी से भी बड़ा है। जब लोगों कीमेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रक्षा मंत्रालय को आवंटित किया जाता है तो हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है हमें प्रभावी विकास कीआवश्यकता है. हमारा रक्षा व्यय ऐसा होना चाहिए कि न केवल बजट बढ़े बल्कि हम इसका सही तरीके से उपयोग भी कर सकें. सही समय पर सहीउद्देश्य के लिए उचित तैनाती करके. उन्होंने कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पहली बार जैम पोर्टल से पूंजी खरीद की अनुमति दी है यह एकसराहनीय कदम है। मुझे यह भी बताया गया है कि विभाग रक्षा कर्मियों के लिए व्यापक वेतन प्रणाली और केंद्रीकृत डाटाबेस प्रबंधन पर काम कर रहाहै.


2025 सम्मेलन की कर रहा है मेजबानी
रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) सात से नौ जुलाई तक राष्ट्रीय राजधानी में नियंत्रक सम्मेलन 2025 की मेजबानी कर रहा है. इसमें चीफ ऑफ डिफेंसस्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) एसजी दस्तीदार और रक्षा लेखामहानियंत्रक डॉ मयंक शर्मा शामिल हो रहे हैं. यह सम्मेलन नीतिगत संवाद, रणनीतिक समीक्षा और संस्थागत नवाचार का एक प्रमुख मंच है. यह रक्षाऔर वित्त क्षेत्रों में रक्षा लेखा विभाग के शीर्षस्थ नेतृत्व, सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, थिंक टैंक और हितधारकों को एक साथ लाता है. वहीं बात अगरइस सम्मेलन के उद्देश्य की करें तो यह सम्मेलन रक्षा और वित्त क्षेत्रों के विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, थिंक टैंकों और शिक्षाविदों को एक मंचपर लाकर रक्षा वित्तीय प्रणाली की समीक्षा, सुधार और भविष्य की दिशा तय करने का काम करता है. वहीं इस बार का विषय वित्तीय सलाह, भुगतान, ऑडिट और रक्षा वित्त और अर्थशास्त्र के जरिए लेखांकन में बदलाव है. बता दें कि यह डीएडी को पारंपरिक अकाउंटिंग विभाग से बदलकरआधुनिक और रणनीतिक रक्षा वित्त संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब बात अगर इस सम्मेलन में मुख्य बिंदू की करें तोसम्मेलन में आठ उच्चस्तरीय सत्र (मंथन सत्र) होंगे, जिनमें बजट सुधार, आंतरिक ऑडिट में बदलाव, मूल्य निर्धारण (प्राइसिंग), संयुक्त शोध, औरक्षमता निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होगी. यह सत्र रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत वित्तीयसलाहकार (आईएफए) की भूमिका को और स्पष्ट करेंगे.

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