
- पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की
- दान घोटाले पर एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
- पीएम मोदी से श्रेय लेने की तरह जिम्मेदारी लेने को कहा
- 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था पर निर्मम हमला: सुप्रिया श्रीनेत
नई दिल्ली, 30 जून: अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए पवित्र दान की कथित बड़े पैमाने पर हुई चोरी को ‘महापाप’ बताते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि इतिहास में कभी भी हिंदुओं की आस्था पर इस तरह का हमला नहीं हुआ।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पार्टी के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विभाग की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने आज यहां आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, “यह सिर्फ दान की चोरी या घोटाला नहीं है, बल्कि यह महापाप है। यह दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था पर सीधा हमला है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने “शिलान्यास से लेकर प्राण प्रतिष्ठा” तक हर उपलब्धि का श्रेय लिया, उसी तरह उन्हें इस चोरी की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि “आरोपी, अभियोजक और न्यायाधीश एक ही व्यक्ति नहीं हो सकते।”
श्रीमती श्रीनेत ने आरोप लगाया कि इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और आरएसएस को बचाने तथा पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पूछा कि इस मामले की जांच करने वाली विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि यह “सामान्य चोरी नहीं बल्कि एक अरब से अधिक हिंदुओं की आस्था और राष्ट्र की आत्मा पर हमला” है। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों पर आरोप लगाया कि वे केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रही हैं, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “जब चोरी वास्तव में राम मंदिर के भीतर हुई है, तो सरकार क्या छिपाना चाहती है? एसआईटी रिपोर्ट को सार्वजनिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए ताकि हर नागरिक सच्चाई जान सके।” उन्होंने आरोप लगाया कि जांच निष्पक्ष नहीं है क्योंकि सरकारी अधिकारियों ने अपनी ही व्यवस्था की जांच की है।
श्रीमती श्रीनेत ने दावा किया कि लगभग 40 दिनों के दौरान हुई करीब 70 चोरी की घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज केवल पूरे घोटाले का एक छोटा हिस्सा हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले साढ़े पांच वर्षों में चोरी का वास्तविक स्तर कितना बड़ा रहा होगा।
उन्होंने कहा, “उपलब्ध फुटेज केवल लगभग 40 दिनों का है क्योंकि उससे पहले का सीसीटीवी रिकॉर्ड अब मौजूद नहीं है। पिछले साढ़े पांच वर्षों का हिसाब कौन देगा?” उनका आरोप था कि यह चोरी वर्षों तक संगठित तरीके से वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में चलती रही।
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 80 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन बाकी दान राशि कहां गई? उन्होंने पूछा, “क्या मामूली वेतन पाने वाले कर्मचारी अकेले इतना बड़ा घोटाला कर सकते हैं? उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल “प्यादों” को गिरफ्तार किया है, जबकि “बड़ी मछलियों” को छोड़ दिया गया है।
कांग्रेस नेता ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि व्यापक सरकारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद एक निजी सुरक्षा एजेंसी को हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 400 निजी सुरक्षा कर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में है और पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में निजी सुरक्षा कर्मियों की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा दान की गिनती और सुरक्षा के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि एसबीआई ने अनियमितताओं की आशंका के चलते दान गिनने वाले कुछ कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश कई महीने पहले ही कर दी थी, लेकिन उन सिफारिशों की अनदेखी कर दी गई।
श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि व्हिसलब्लोअर्स पहले भी आरोप लगा चुके थे कि नियमित रूप से नकदी की हेराफेरी की जा रही है, लेकिन उनकी शिकायतों की प्रभावी जांच करने के बजाय उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह उन्हें बचाने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने पूछा, “यदि इस्तीफा एसआईटी की रिपोर्ट के बाद आया है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। चंपत राय सहित शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई?”
उन्होंने यह भी कहा कि जिन श्रद्धालुओं ने सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान कीं, उन्हें उचित रसीद या स्वीकृति नहीं मिली। उन्होंने ऐसे दानों के लेखा-जोखा पर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस नेता ने एक कर्मचारी का उदाहरण देते हुए कहा कि 12,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी ने छह महीने के भीतर 30 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा और दो मंजिला मकान भी बना लिया।
राज्य और केंद्र की खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यदि सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी, तो खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है। और यदि जानकारी थी लेकिन कार्रवाई नहीं की गई, तो जिम्मेदार लोग समान रूप से जवाबदेह हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए श्रीनेत ने कहा कि दोनों नेताओं की राजनीतिक जिम्मेदारी बनती है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के अयोध्या फैसले के बाद केंद्र सरकार ने ही मंदिर ट्रस्ट का गठन किया था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या जाने का प्रयास कर रहे उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया, जिससे स्पष्ट है कि सरकार आरोपों का जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस ने मांग की कि:
- एसआईटी रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए।
- ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों, जिनमें चंपत राय बंसल भी शामिल हैं, के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
- ट्रस्ट की स्थापना से अब तक मंदिर को प्राप्त सभी दानों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
- सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराई जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रद्धालुओं की आस्था के साथ हुए विश्वासघात के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
अंत में उन्होंने सवाल उठाया, “प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए, आरएसएस से जुड़े लोगों और उनके पसंदीदा नौकरशाहों से बने तथा आरटीआई के दायरे से बाहर रखे गए ट्रस्ट में आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसकी निगरानी में दान की रकम की हेराफेरी होती रही?” उन्होंने मांग दोहराई कि “इस ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाना चाहिए।”