राहुल गांधी ने एक बार फिर से सॅाफ्ट हिंदुत्व का रास्ता अख्तियार करने के बजाय ममता बनर्जी और लालू यादव जैसा स्टैंड ले लिया है. राहुल गांधीजिस दिन रायबरेली पहुंचे थे. उसे दिन उनके महाकुंभ में जाने की बात चल रही थी. यह बात इसलिए गंभीर लग रही है. क्योंकि अखिलेश यादव नेसंगम में डुबकी लगाने वाली तस्वीर को पहले से ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुके हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो राहुल का अलग ही रूपदेखने को मिला था. लोकसभा चुनाव से बिल्कुल अलग और हरियाणा चुनाव से तो बहुत ही अलग बल्कि आगे बढ़कर सामने से विपक्षी खेमे केनेताओं को ही चलेंज कर रहे थे. अखिलेश यादव और राहुल गांधी परस्पर विरोध छोड़ पर खड़े थे. अरविंद केजरीवाल तो औपचारिक रूप से कांग्रेसविरोधी छोड़ पर खड़े थे. लेकिन ममता बनर्जी और अखिलेश यादव भी तो अरविंद केजरीवाल की ही तरफ थे. लालू यादव और तेजस्वी यादव ने झगड़ेसे दूर रहने का फैसला किया था. लेकिन राहुल गांधी तो पटना तक जाकर इशारा कर ही आए कि दिल्ली की जंग की झलक बिहार में भी देखने कोमिलने वाली है.
राहुल का भी कुंभ को लेकर था प्लान
दिल्ली चुनाव में तो राहुल गांधी विपक्षी नेताओं की दबाव से मुख्य दिखे लेकिन महाकुंभ को लेकर लगता है. वैसे ही दबाव में आ गए हैं. जैसेअयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन समारोह के दौरान देखने को मिला था. जैसी ही ममता बनर्जी ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह के बहिष्कार की घोषणा की. कांग्रेस की तरफ से भी बयान आ गया पहले तो यह कहा गया कि कांग्रेस का कोई भी नेता अयोध्या नहीं जाएगा. लेकिन जैसे ही कुछ नेताओं नेअयोध्या चलो जैसा नारा दिया राहुल गांधी ने फैसला नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया. महाकुंभ के मामले में राहुल गांधी की तरफ सेपहले जैसा कोई संकेत नहीं मिल रहा था. खासकर अखिलेश यादव ने महाकुंभ जाने के बाद क्योंकि पहले तो वह भी महाकुंभ के व्यवस्थाओं के लेकरलगातार सवाल उठा चुके है. आखिरकार अचानक ऐसा क्या हुआ कि राहुल गांधी ने महाकुंभ दौरे की चर्चा ही बंद कर दी. दरअसल राहुल गांधी केकुंभ जाने की खबर आ रही थी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी अपने पूरे परिवार के साथ कुंभ स्नान के लिए जाएगें.करीब 19- 20 फरवरी को कुंभजाने का प्लान बनाया गया था. लेकिन अचानक राहुल गांधी अपने चुनाव क्षेत्र रायबरेली पहुंच गये.