
नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार अब नई तकनीकों के जरिए साफ हवा सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में पर्यावरण एवं वन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए “इनोवेशन चैलेंज” के तहत चुनी गई तकनीकों के ट्रायल शुरू करने के निर्देश दिए।
उच्च स्तरीय बैठक में कई विभाग हुए शामिल
इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली के कई बड़े विभागों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें दिल्ली परिवहन निगम (DTC), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC), नगर निगम (MCD), दिल्ली फायर सर्विस (DFS), दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DTIDC) और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य 22 नई और उपयोगी तकनीकों के ट्रायल को तेजी से शुरू करना और उन्हें सफल बनाना था, ताकि दिल्ली की हवा को साफ किया जा सके।
284 में से चुनी गई 22 बेहतरीन तकनीकें
दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए इस इनोवेशन चैलेंज में देशभर से कुल 284 प्रस्ताव आए थे। इनमें से 48 को पहले चरण में चुना गया और फिर विशेषज्ञों की टीम ने जांच के बाद 22 तकनीकों को ट्रायल के लिए फाइनल किया। इन तकनीकों का चयन एक विशेष तकनीकी समिति (ITEC) ने किया, जिसमें IIT दिल्ली, CPCB, ARAI, NPL, DTU और Maruti Suzuki के विशेषज्ञ शामिल थे।
वाहनों और वातावरण दोनों पर फोकस
इन 22 तकनीकों में से 13 तकनीकें वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित हैं। इनमें गाड़ियों में लगने वाले एयर फिल्टर, PM कलेक्टर, BS-IV वाहनों के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) और भारी डीजल वाहनों के लिए विशेष सिस्टम शामिल हैं। वहीं 9 तकनीकें वातावरण की हवा को साफ करने के लिए हैं, जैसे बड़े एयर प्यूरीफायर, एयर ट्रीटमेंट टावर, रोड डिवाइडर पर लगने वाले डस्ट कलेक्टर और नई रेडियो वेव तकनीक।
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में होंगे ट्रायल
इन सभी तकनीकों का ट्रायल दिल्ली के कई प्रमुख स्थानों पर किया जाएगा। इनमें ISBT कश्मीरी गेट, लाल किला मैदान, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, फायर स्टेशन और पंजाबी बाग, कीर्ति नगर, रोहिणी जैसे इलाके शामिल हैं। इन जगहों पर इन डिवाइस को लगाकर देखा जाएगा कि वे कितनी प्रभावी हैं और हवा को कितना साफ कर पाती हैं।
30 से 90 दिनों तक चलेगा परीक्षण
इन तकनीकों का परीक्षण 30 से 90 दिनों तक किया जाएगा। इस दौरान सभी डिवाइस के कामकाज पर नजर रखी जाएगी और डेटा इकट्ठा किया जाएगा।
इस पूरे ट्रायल की निगरानी IIT दिल्ली, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) जैसी संस्थाएं करेंगी, ताकि पूरा काम वैज्ञानिक तरीके से हो।
मई के अंत तक डेटा इकट्ठा कर लिया जाएगा, उसके बाद मई-जून में उसका विश्लेषण होगा और जुलाई 2026 तक सरकार को अंतिम रिपोर्ट और सुझाव दिए जाएंगे।
सरकार करेगी आर्थिक मदद और देगी इनाम
दिल्ली सरकार इन ट्रायल्स के लिए हर तकनीक पर लगभग 10 लाख रुपये तक खर्च करेगी, ताकि उनका सही परीक्षण हो सके। इसके साथ ही जो तकनीकें सबसे अच्छा प्रदर्शन करेंगी, उन्हें पुरस्कार भी दिया जाएगा। पहले स्थान पर 50 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर 25 लाख रुपये और तीसरे स्थान पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा गया है।
सभी विभागों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे इन ट्रायल्स में पूरी तरह सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जगह की अनुमति, बिजली कनेक्शन, डिवाइस लगाने की अनुमति और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने का एक बड़ा और जरूरी प्रयास है।
“हर एजेंसी बदलाव की भागीदार है”
बैठक के दौरान मंत्री श्री सिरसा ने कहा,
“हर एजेंसी सिर्फ लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाली नहीं है, बल्कि वह इस वैज्ञानिक बदलाव की भागीदार है, जो दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के लोगों को साफ हवा देना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
भविष्य में बड़े स्तर पर लागू होंगी सफल तकनीकें
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जो तकनीकें ट्रायल में सफल साबित होंगी, उन्हें पूरे शहर में बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। सरकार की योजना है कि इन नई तकनीकों को अपनाकर दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाई जाए और लोगों को स्वस्थ वातावरण दिया जाए।
साफ हवा की दिशा में मजबूत कदम
दिल्ली सरकार का यह इनोवेशन चैलेंज एक नई सोच और नई दिशा का प्रतीक है। इसमें वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी से ऐसे समाधान खोजे जा रहे हैं, जो सस्ते भी हों और असरदार भी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में यह पहल दिल्ली को साफ और सुरक्षित हवा देने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।