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शुक्रवार को लालकिला मैदान में आयोजित विश्व प्रसिद्ध लव कुश रामलीला में एक अनोखा और प्रभावशाली दृश्य देखने को मिला। इस सालरामलीला में आतंकवाद के खिलाफ जनता का गुस्सा और रोष साफ नजर आया। लालकिला में मौजूद दर्शकों ने आतंकवादियों के प्रतीकात्मक पुतलोंको देखकर अपनी नाराजगी और विरोध व्यक्त किया।रामलीला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, बल्कि यह समाज के संदेश औरजागरूकता का माध्यम भी बन जाती है। इस साल की रामलीला में आतंकवाद के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध ने लोगों के दिलों में भड़के गुस्से कोदिखाया।

पुतलों को जलाने की योजना और बदलाव
रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने पहले ही घोषणा की थी कि इस बार आतंकवादियों के पुतले मंच पर जलाए जाएंगे। यह कदमआतंकवाद के प्रति जनता के आक्रोश को दर्शाने के लिए सोचा गया था। लेकिन प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण पुतलों को आग नहींलगाई जा सकी। इसके बावजूद समिति ने एक अलग योजना बनाई। उन्होंने पुतलों को प्रतीकात्मक रूप से मंच से नीचे गिरा दिया। यह कदम दर्शकोंके लिए संकेत था कि आतंकवाद को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जनता का गुस्सा और विरोध
जैसे ही पुतले मंच से नीचे गिरे, वहां मौजूद लोग अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए पुतलों पर टूट पड़े। हाथ में जो भी आया—जूता, चप्पल या डंडा—वह सब पुतलों पर गिराया गया। पूरे मैदान में जोर-जोर से आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे गूंजने लगे। लोग न केवल आतंकवादियों के खिलाफ अपनागुस्सा दिखा रहे थे, बल्कि यह भी स्पष्ट कर रहे थे कि समाज में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है यह दृश्य यह बताता है कि आम जनता मेंआतंकवाद के खिलाफ कितनी गहरी नाराजगी और घृणा है। सभी लोग एक साथ खड़े होकर आतंकवाद के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे थे।

समिति अध्यक्ष का संदेश
रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने कहा, यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि आतंकवाद को समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। जनता कागुस्सा और नारे यही दर्शाते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ समाज पूरी तरह एकजुट है उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में जागरूकताफैलाने और आतंकवाद के खिलाफ लोगों के मन में नकारात्मकता और असहिष्णुता को रोकने में मदद करते हैं।

रामलीला का सामाजिक महत्व
रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह समाज को एक सकारात्मक संदेश देने और बच्चों व युवाओं को सही मार्ग दिखाने का भी माध्यमहै। इस साल की रामलीला में आतंकवाद के प्रतीकात्मक पुतलों पर जनता का विरोध यह दर्शाता है कि लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं आते, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय व्यक्त करते हैं। इस तरह की गतिविधियाँ लोगों को एकजुट करती हैं और आतंकवाद जैसी गंभीर समस्याओंके प्रति जागरूक करती हैं। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि समाज किसी भी प्रकार के आतंकवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगा।


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