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उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक दल अपने-अपने वादों और घोषणाओं के साथ मैदान में हैं। इसी क्रम में समाजवादीपार्टी द्वारा ग़रीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा के इस घोषणा पत्र-शैली वादे पर अब लोकदलके राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने एक कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुनील सिंह ने कहा कि यूपी की राजनीति फिर से उसी पुरानी स्क्रिप्ट पर लौट आईहै, जहाँ चुनाव आते ही बड़ी-बड़ी घोषणाएँ और सपने परोसे जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों का कोई अता-पता नहीं रहता।

वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीति
लोकदल प्रमुख ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि बीजेपी और सपा में मूल अंतर केवल प्रतीकों और नारों का है, नीयत का नहीं। उनके अनुसार बीजेपी नेमहंगाई, बेरोज़गारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जनता को निराश किया। दूसरी ओर, सपा अपने पुराने शासन के विफल रिकॉर्ड कोभुलाकर नए वादों की चमक से जनता को फिर से भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। सुनील सिंह ने कहा कि दोनों ही पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड यहदिखाता है कि वादे बड़े होते हैं, लेकिन काम शून्य। जनता को चुनाव से पहले सपने दिए जाते हैं, और बाद में वही सपने टूटे हुए मिलते हैं। समाजवादीपार्टी की 40,000 रुपये वाली योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं को वोट बैंक समझने की राजनीति सबसे खतरनाकराजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों को महिलाओं की याद केवल चुनाव के समय आती है। पाँच साल तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर कोई ठोस काम नहीं होता। और जैसे ही चुनाव नज़दीक आते हैं, पार्टियाँ वादों की झड़ी लगा देती हैं।सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के लिए वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीति, संवेदना और निरंतर प्रयास कीज़रूरत है न कि चुनावी लुभावने दावों की।

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