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नई दिल्ली, 7 जुलाई।

कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को देशवासियों की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले ने भाजपा और आरएसएस का “चाल, चरित्र और चेहरा” देश के सामने उजागर कर दिया है। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि श्रीराम मंदिर में आने वाला चढ़ावा देशभर के लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है। लाखों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से मंदिर निर्माण के लिए दान दिया और आज यदि उसी चढ़ावे में गड़बड़ी या चोरी की बातें सामने आती हैं तो यह बेहद दुखद और चिंताजनक है।

अशोक गहलोत ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग करने की मांग की
अशोक गहलोत ने कहा कि मंदिर का संचालन कर रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रस्ट पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है, इसलिए इसकी जगह एक नया ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में देश के शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि मंदिर का संचालन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ हो सके।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग
अशोक गहलोत ने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की। उनका कहना था कि इस मामले की निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब इसकी देखरेख किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा की जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो सच्चाई देश के सामने आएगी और लोगों का भरोसा भी दोबारा मजबूत होगा।

मंदिर को मिले पूरे चढ़ावे का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
अशोक गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की गई थी, उसी तरह श्रीराम मंदिर को मिले पूरे चढ़ावे का भी हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर को नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य रूपों में कितना चढ़ावा मिला तथा उसका उपयोग कैसे किया गया, इसकी पूरी जानकारी देश की जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब देने की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम मंदिर निर्माण के हर महत्वपूर्ण अवसर का श्रेय प्रधानमंत्री ने स्वयं लिया था, तो अब जब मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का मामला सामने आया है, तब भी उन्हें देश के सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वे श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दें।

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना शुरू से ही सही तरीके से नहीं बनाई गई। उनका आरोप था कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों ने ट्रस्ट पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया, लेकिन जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय होती तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

अगर केवल लापरवाही थी तो एफआईआर और गिरफ्तारियां क्यों हुई
अशोक गहलोत ने ट्रस्ट की उस दलील पर भी सवाल उठाया जिसमें पूरे मामले को चोरी नहीं बल्कि लापरवाही बताया गया। उन्होंने पूछा कि यदि मामला सिर्फ लापरवाही का था तो फिर एफआईआर क्यों दर्ज की गई? एसआईटी जांच क्यों बनाई गई? लोगों की गिरफ्तारियां क्यों हुईं? इस्तीफे क्यों दिए गए और उन्हें स्वीकार क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं से साफ है कि मामला गंभीर है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार और ट्रस्ट को इस मामले की एसआईटी जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच सही तरीके से हुई है तो उसकी रिपोर्ट लोगों से छिपाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा।

कोषाध्यक्ष के बयान पर भी उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चोरी का मामला सामने आने के बाद कोषाध्यक्ष खुद को केवल नाम मात्र का पदाधिकारी बता रहे हैं। गहलोत ने कहा कि यदि कोषाध्यक्ष को एसओपी की जानकारी ही नहीं थी और उन्होंने किसी चेक पर हस्ताक्षर भी नहीं किए, तो फिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था आखिर चल कैसे रही थी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कई नए सवाल खड़े करती है।

जमीन खरीद के पुराने विवाद का भी किया उल्लेख
अशोक गहलोत ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद को लेकर विवाद सामने आया था। उन्होंने कहा कि उस समय आरोप लगा था कि कम कीमत वाली जमीन को बहुत अधिक कीमत पर खरीदा गया। उनके अनुसार उस मामले में भी पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाई गई थी।

‘देशभर के लोगों ने दिया था मंदिर निर्माण के लिए चंदा’
अशोक गहलोत ने कहा कि श्रीराम मंदिर किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश के हर वर्ग और हर विचारधारा के लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया। कांग्रेस समर्थकों, समाजवादी पार्टी के समर्थकों और आम नागरिकों ने भी श्रद्धा के साथ दान दिया।
उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि केवल भाजपा या आरएसएस से जुड़े लोगों ने ही मंदिर निर्माण में योगदान दिया।

लोगों में नाराजगी और आक्रोश का दावा
अशोक गहलोत ने दावा किया कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खबर देशभर में फैल चुकी है और गांव-गांव तथा घर-घर में लोग इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं इस मामले से जुड़ी हुई हैं और लोग चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने इस मामले में कई मांगें रखीं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करना, नया ट्रस्ट बनाना, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराना, एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करना, मंदिर को मिले पूरे चढ़ावे का विवरण सार्वजनिक करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक गड़बड़ी का नहीं बल्कि देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर सच्चाई देश के सामने लाई जानी चाहिए।

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