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सरिता साहनी
नई दिल्ली, 20 मार्च 2026

दिल्ली में पढ़ाई को आसान और आधुनिक बनाने के लिए एक अच्छी पहल की गई है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शिक्षा विभाग को 15 लैपटॉप सौंपे हैं। इन लैपटॉप का इस्तेमाल अब सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई में किया जाएगा, जिससे उन्हें कंप्यूटर और तकनीक सीखने का मौका मिलेगा।

हर सरकारी चीज का सही इस्तेमाल जरूरी
विजेंद्र गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि सरकार के पास जो भी चीजें हैं, उनका सही उपयोग होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि हर सरकारी संपत्ति का सबसे बड़ा मकसद देश और समाज के काम आना होना चाहिए। अगर कोई चीज इस्तेमाल में नहीं आ रही है, तो उसे बेकार छोड़ने के बजाय लोगों के काम में लाना ज्यादा जरूरी है। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा से बड़ा कोई काम नहीं होता, इसलिए इन लैपटॉप को स्कूलों में देना एक सही फैसला है।

पुराने लैपटॉप अब बच्चों की पढ़ाई में आएंगे काम
ये लैपटॉप नए नहीं हैं, बल्कि पहले विधानसभा में इस्तेमाल हो चुके हैं। विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि ये लैपटॉप साल 2019 में खरीदे गए थे और अभी भी अच्छी हालत में हैं। अब जब विधानसभा में नए सिस्टम आ गए हैं, तो पुराने लैपटॉप खाली पड़े थे। ऐसे में उन्हें स्कूलों को देना एक अच्छा और समझदारी भरा कदम है। इससे सरकारी सामान का सही इस्तेमाल भी होगा और बच्चों को फायदा भी मिलेगा।

पहले 15 लैपटॉप दिए, आगे और मिलेंगे
इस योजना की शुरुआत 15 लैपटॉप से की गई है। आने वाले समय में 50 से 60 लैपटॉप और दिए जाएंगे। ये काम धीरे-धीरे यानी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा स्कूलों तक ये सुविधा पहुंच सके। खास ध्यान उन बच्चों पर दिया जाएगा जिनके पास घर पर कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं है, ताकि उन्हें भी बराबरी का मौका मिल सके।

नेवा सिस्टम आने के बाद खाली हुए लैपटॉप
दिल्ली विधानसभा में अब काम डिजिटल तरीके से होने लगा है। इसके लिए नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NEVA) लागू किया गया है। इस सिस्टम के आने के बाद नए लैपटॉप और कंप्यूटर लगाए गए, जिससे पुराने लैपटॉप इस्तेमाल में नहीं रहे। अब उन्हीं पुराने लेकिन अच्छे हालत वाले लैपटॉप को स्कूलों में भेजा जा रहा है, ताकि उनका सही उपयोग हो सके।

बच्चों को मिलेगा कंप्यूटर सीखने का मौका
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों के पास घर पर कंप्यूटर नहीं होता। ऐसे में उन्हें तकनीक सीखने का ज्यादा मौका नहीं मिल पाता। इन लैपटॉप के मिलने से बच्चे खुद कंप्यूटर चलाना सीखेंगे, इंटरनेट का इस्तेमाल समझेंगे और नई-नई चीजें सीख पाएंगे। इससे उनकी पढ़ाई आसान भी होगी और वे आगे के समय के लिए तैयार भी हो पाएंगे।

डिजिटल पढ़ाई से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास
आज का समय पूरी तरह तकनीक पर आधारित है। हर काम में कंप्यूटर और इंटरनेट की जरूरत होती है। अगर बच्चों को स्कूल में ही यह सब सीखने को मिल जाए, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। वे पढ़ाई में भी अच्छा करते हैं और आगे चलकर नौकरी या करियर में भी पीछे नहीं रहते। इसलिए यह पहल बच्चों के भविष्य के लिए बहुत जरूरी मानी जा रही है।

सरकारी संसाधनों के सही उपयोग की अच्छी मिसाल
यह कदम इस बात की मिसाल है कि अगर सोच सही हो, तो पुरानी चीजों से भी बड़ा काम किया जा सकता है। जो लैपटॉप पहले केवल दफ्तर में काम आ रहे थे, अब वही बच्चों की पढ़ाई में मदद करेंगे। इससे यह भी साबित होता है कि संसाधनों का सही इस्तेमाल करके समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। दिल्ली विधानसभा की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक अच्छा और सकारात्मक कदम है। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा और उनकी पढ़ाई और बेहतर होगी। अगर इसी तरह के कदम आगे भी उठाए जाते रहे, तो आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के बच्चे भी डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ सकेंगे और अपने सपनों को पूरा कर पाएंगे।

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