
रेगुलर शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर लगाने से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित, सरकार पर गंभीर सवाल
नई दिल्ली, 3 जुलाई 2026।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार पर सरकारी स्कूलों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले रेगुलर शिक्षकों को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) के काम में लगाया जा रहा है। इससे स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि जब स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है, तब उन्हें गैर-शैक्षणिक कामों में लगाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा SIR के काम को दी जा रही प्राथमिकता
देवेंद्र यादव ने कहा कि इस समय दिल्ली में कोई चुनाव नहीं होने वाला है, फिर भी बड़ी संख्या में शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की चिंता करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय गैर-जरूरी कामों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब, सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे बच्चों के माता-पिता महंगी निजी ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते। इसलिए उनके लिए स्कूल की पढ़ाई ही सबसे बड़ा सहारा होती है। अगर स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे पूरी होगी।
शिक्षकों की कमी के बीच और बढ़ी परेशानी
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली के अधिकतर सरकारी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कई स्कूल समय पर अपना पूरा पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने रेगुलर शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर भेजने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक स्कूल में रहकर बच्चों को पढ़ाते, तो छात्र आने वाली परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकते थे। लेकिन अब कई कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों का नुकसान हो रहा है।
भलस्वा और GTB नगर के स्कूलों का उदाहरण दिया
देवेंद्र यादव ने कहा कि भलस्वा के एक सरकारी स्कूल में लगभग 1200 छात्र पढ़ते हैं। इस स्कूल के 20 से ज्यादा रेगुलर शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर भेज दिया गया है। अब वहां केवल लगभग 15 गेस्ट शिक्षक ही बच्चों की पढ़ाई संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह GTB नगर के सरकारी स्कूल से भी 22 शिक्षकों को SIR ड्यूटी पर लगाया गया है। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के बाहर जाने से स्कूलों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। कई कक्षाओं की पढ़ाई बाधित हो रही है और छात्रों को पूरा समय नहीं मिल पा रहा है।
गरीब बच्चों का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है
देवेंद्र यादव ने कहा कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास अतिरिक्त संसाधन और ट्यूशन की सुविधा होती है, लेकिन सरकारी स्कूलों के अधिकांश छात्रों के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होगी तो सबसे ज्यादा नुकसान गरीब परिवारों के बच्चों का होगा। यही बच्चे आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों में पीछे रह जाएंगे। सरकार को इस बात को गंभीरता से समझना चाहिए।
सरकार सरकारी स्कूलों से ध्यान हटा रही है
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 15 महीनों में सरकार की नीतियों से ऐसा लगता है कि सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकारी स्कूल कमजोर होंगे तो लोगों को मजबूरी में निजी स्कूलों की ओर जाना पड़ेगा, जहां शिक्षा बहुत महंगी है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार इस खर्च को नहीं उठा सकते।
शिक्षकों का काम पढ़ाना है, गैर-शैक्षणिक काम नहीं
देवेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति बच्चों को पढ़ाने के लिए होती है। उन्हें चुनाव या अन्य प्रशासनिक कामों में बार-बार लगाना शिक्षा व्यवस्था के लिए सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को SIR ड्यूटी करने के लिए अतिरिक्त पैसे का लालच भी दिया जा रहा है और कई मामलों में उन्हें मजबूरी में यह काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य करने से शिक्षक मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं। इसके बाद उन्हें दोबारा पूरी क्षमता के साथ कक्षा में पढ़ाने में भी समय लगता है।
सरकार से शिक्षकों को वापस स्कूल भेजने की मांग
देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार से मांग की कि सरकारी स्कूलों के रेगुलर शिक्षकों को तुरंत SIR ड्यूटी से मुक्त किया जाए और उन्हें वापस स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को बच्चों की पढ़ाई को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते यह फैसला नहीं बदला गया तो हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी और इसका असर उनके भविष्य पर पड़ेगा। सरकार का पहला कर्तव्य बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है, इसलिए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय कक्षा में पढ़ाने का अवसर दिया जाना चाहिए।