
दिल्ली विधानसभा में मनाई गई लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती
दिल्ली विधानसभा परिसर में आज लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी और विशेष प्रदर्शनी काआयोजन किया गया। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंहबिष्ट, दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा और स्वराज आश्रम, बारडोली (गुजरात) की प्रशासक निरंजनाबेन कलारथी उपस्थित रहीं।कार्यक्रम की शुरुआत में सभी गणमान्य अतिथियों ने विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इसअवसर पर सरदार पटेल और भारत के एकीकरण की यात्रा नामक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जिसमें सरदार पटेल के जीवन, संघर्ष औरदेश की एकता में उनके योगदान से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और दस्तावेज़ प्रदर्शित किए गए।
ईंट और पत्थर से नहीं, भावनाओं से बनती है एकता
बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने अपने संबोधन में कहा एकता ईंटों और पत्थरों से नहीं बनती, वह भावनाओं से बनती है, और भावनाविचारों से जन्म लेती है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि किसी देश की सच्ची ताकत उसकी भावनात्मक और नैतिकएकता में निहित होती है। उन्होंने सरदार पटेल की भूमिका की तुलना जर्मनी के बिस्मार्क से करते हुए कहा कि भारत के एकीकरण का जो कार्य सरदारपटेल ने किया, वह इतिहास में किसी भी राष्ट्रनिर्माता के काम से कम नहीं था। खान ने बताया कि सरदार पटेल ने बिना एक बूंद खून बहाए 565 में से562 रियासतों का विलय भारत में कराया, जो विश्व इतिहास की एक अद्भुत उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जबराष्ट्र विकसित भारत के संकल्प की ओर बढ़ रहा है, तो हमें सरदार पटेल के आदर्शों को फिर से स्मरण और आत्मसात करने की आवश्यकता है।
देश की शक्ति उसके हथियारों में नहीं, दिलों की एकता में है – विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारत के एकीकरण के शिल्पी थे। उन्होंने कहादेश की असली शक्ति उसके हथियारों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के दिलों की एकता और उद्देश्य की एकरूपता में होती है। उन्होंने याद दिलायाकि सरदार पटेल ने बारडोली सत्याग्रह से लेकर संविधान सभा तक हर मोर्चे पर देश को जोड़ा। उन्होंने एक बिखरे हुए भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्रके रूप में रूपांतरित किया और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जैसी संस्था की नींव रखी, जिसने भारत की एकता और सुशासन की दिशा तय की।विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आज राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) के अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि जिसएकता की नींव सरदार पटेल ने रखी थी, उसे और मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश फिर से उस भावनात्मकएकता को जी रहा है, जिसकी कल्पना सरदार पटेल ने की थी.
562 रियासतों को बिना खून–खराबे के जोड़ा, यह दुनिया के लिए मिसाल – निरंजनाबेन कलारथी
स्वराज आश्रम, बारडोली की प्रशासक निरंजनाबेन कलारथी ने कहा कि सरदार पटेल के नेतृत्व में भारत का जो एकीकरण हुआ, वह न केवलराजनीतिक दृष्टि से ऐतिहासिक था, बल्कि मानवता और करुणा का भी प्रतीक था। उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि सरदार पटेल ने 565 में से562 रियासतों को जोड़ते समय एक भी बूंद खून नहीं बहने दिया। उन्होंने स्नेह, संवाद और विवेक के बल पर भारत को एक सूत्र में पिरो दिया।उन्होंनेबताया कि जब भावनगर की महारानी ने भारत के हित में अपना स्त्रीधन (Stridhan) देश को अर्पित किया, तब यह स्पष्ट हुआ कि राजघराने सरदारपटेल के नेतृत्व पर कितना भरोसा करते थे। उन्होंने कहा कि सरदार साहब केवल लौह पुरुष नहीं थे, वे एक करुणामय और संवेदनशील हृदय वालेनेता भी थे। निरंजनाबेन ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत को एकता, अनुशासन और प्रशासनिक मजबूती दी। आज जब हम उनके जन्मदिवस कोराष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहे हैं, तो हमें उनके इन आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए।
सरदार पटेल की विरासत आज भी भारत की ताकत है – कपिल मिश्रा
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन भारत की एकता, दृढ़ता और देशभक्ति का प्रतीकहै। उन्होंने कहा, सरदार पटेल की विरासत आज भी भारत की ताकत है। उन्होंने न केवल भारत को जोड़ा, बल्कि उसे आत्मगौरव और आत्मविश्वास भीदिया। कपिल मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल की सराहना की, जिसके तहत सरदार पटेल की स्मृति में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माणकिया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल लोहे की नहीं, बल्कि 130 करोड़ भारतीयों की भावनाओं से बनी है। उन्होंने कहा, जब तक इस देश मेंएक भी सच्चा देशभक्त मौजूद रहेगा, कोई ताकत भारत को विभाजित नहीं कर सकती।
सरदार पटेल पर प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
विधानसभा में लगी प्रदर्शनी सरदार पटेल और भारत के एकीकरण की यात्रा में सरदार पटेल के जीवन से जुड़ी अनेक दुर्लभ तस्वीरें, डाक टिकट, सिक्केऔर ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए।इनमें महात्मा गांधी और सरदार पटेल की रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन की चर्चाओं की झलक, लॉर्ड लेटनके साथ बैठकें, और पंडित नेहरू तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ उनके संवाद की तस्वीरें शामिल हैं। इस प्रदर्शनी ने सभी आगंतुकों को सरदारपटेल के असाधारण योगदान की गहराई से परिचित कराया।
एकता, अखंडता और सेवा का संकल्प
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के इस संकल्प के साथ हुआ कि वे सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों परचलकर देश की एकता, अखंडता और सेवा भावना को आगे बढ़ाएंगे। दिल्ली विधानसभा ने इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश दिया कि एकभारत, श्रेष्ठ भारत की भावना ही भारत की असली पहचान है, और सरदार पटेल की प्रेरणा सदैव राष्ट्र को मार्गदर्शन देती रहेगी।