सुपरस्टार आमिर खान ने शुक्रवार को कहा कि भारत फिल्मों से प्रेम करने वाला देश है लेकिन यहां के अधिकांश लोगों की सिनेमा हॉल तक पहुंच नहींहै. जबकि अमेरिका और चीन जैसे देश स्क्रीन की संख्या के मामले में काफी आगे हैं आमिर ने कहा पिछले 35 साल में कई सरकारें रहीं लेकिन किसीहमारे बारे में नहीं सोचा. यह पहली बार है जब किसी सरकार ने ठाना कि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लिए कुछ किया जाए इंडिया को इसमें लीडरबनाया जाए.यहां पहले विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) के दूसरे दिन आमिर खान ने ‘भविष्य के स्टूडियो विश्व स्टूडियो मानचित्रपर भारत’ शीर्षक सत्र में भाग लिया. आमिर ने कहा कि मनोरंजन उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश की गंभीरआवश्यकता है. उन्होंने कहा भारत में और अधिक सिनेमाघरों की आवश्यकता है. देश में ऐसे जिले हैं जहां एक भी थिएटर नहीं है.उन्होंने कहा कि यहांतक कि ब्लॉकबस्टर फिल्में भी भारतीयों का एक छोटा हिस्सा ही उन्हें सिनेमाघरों में देख पाता है. केवल दो प्रतिशत आबादी ही सिनेमाघरों में हमारीसबसे बड़ी हिट फिल्में देखती है. बाकी 98 प्रतिशत लोग कहां फिल्म देखते हैं.
निवेश को लेकर बोले आमिर
अभिनेता ने कहा मेरे हिसाब से हमें इसमें निवेश करना चाहिए. भारत में अपार संभावनाएं हैं लेकिन इसका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब देशभरमें अधिक स्क्रीन होंगी. अगर ऐसा नहीं होगा तो लोग फिल्में नहीं देखेंगे आमिर ने कहा कि सिनेमा स्क्रीन की संख्या के मामले में भारत अमेरिका औरचीन से काफी पीछे है.आमिर ने कहा देश के आकार और आबादी के हिसाब से हमारे पास बहुत कम सिनेमाघर हैं. मुझे लगता है कि हमारे पास करीब10,000 स्क्रीन हैं. अमेरिका जिसकी आबादी भारत की एक-तिहाई है 40,000 स्क्रीन हैं. इसलिए वे हमसे बहुत आगे हैं चीन में 90,000 स्क्रीन हैंउन्होंने कहा इन 10,000 में से भी आधे दक्षिण में हैं और बाकी आधे देश के बाकी हिस्सों में हैं. इसलिए एक हिंदी फिल्म के लिए आमतौर पर यहकरीब 5,000 स्क्रीन होती है.आमिर खान ने इस बात पर भी दुख जताया कि भारत के कई क्षेत्रों में जिनमें कोंकण जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं.
फिल्मों के बारे में सुनेंगे और देखेंगे ऑनलाइन चर्चा
दरअसल वहां पर कोई सिनेमाघर नहीं हैं उन क्षेत्रों में लोग फिल्मों के बारे में सुनेंगे ऑनलाइन चर्चा देखेंगे. लेकिन उनके पास इन फिल्मों को देखने काकोई तरीका नहीं है यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. इसलिए पहली चीज जो हमें करने की जरूरत है वह यह है कि हमारे पास अधिक स्क्रीन होनीचाहिए.आमिर ने कहा कि किसी फिल्म के थियेटर में रिलीज होने और स्ट्रीमिंग पर आने के बीच का समय बहुत छोटा होता है. उन्होंने कहा आप अपनाखुद का व्यवसाय खत्म कर रहे हैं. पहले फिल्में थियेटर में आती थीं और एक साल बाद सैटेलाइट पर आती थीं. फिर यह सैटेलाइट पर आठ और छहमहीने बाद आने लगी. इसलिए एक दर्शक के रूप में मेरे पास एक विकल्प है कि मैं थिएटर में फिल्म देख सकता हूं या मैं छह महीने तक इंतजार करसकता हूं और सैटेलाइट पर देख सकता हूं.