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सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड फूड उत्पादों पर चेतावनी लेबल (Warning Label) लगाए जाने को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकारको तीन महीनों के भीतर जरूरी सिफारिशें लागू करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया, जिसने याचिका पर केंद्र की दलीलें सुनने के बाद मामले का निपटारा कर दिया।

सरकार ने बनाई विशेषज्ञ समिति
सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत को बताया कि उसने खाद्य पदार्थों की लेबलिंग को लेकर विचार के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।सरकार ने यह भी कहा कि उसे इस विषय में करीब 14,000 सुझाव और आपत्तियां मिली हैं, जिनकी समीक्षा के बाद FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षाऔर मानक प्राधिकरण) के ‘लेबलिंग और डिस्प्ले विनियम 2020’ में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

पैकेज पर सामग्री की जानकारी देने की मांग
यह याचिका ‘3S एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ नामक संस्था द्वारा दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि खाद्य उत्पादों के पैकेज के अगलेहिस्से पर स्पष्ट रूप से यह जानकारी दी जाए कि उसमें चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट्स की कितनी मात्रा है। संस्था का तर्क था कि भारत में हर चार मेंसे एक व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है और इस तरह के उत्पादों का अत्यधिक सेवन लोगों को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है।

नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों का खतरा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि पैकेज्ड फूड में मौजूद हानिकारक तत्व जैसे कि अतिरिक्त शुगर, ट्रांस फैट्स और नमक, डायबिटीज, हृदय रोग औरकैंसर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की प्रमुख वजह बन रहे हैं। इसके कारण भारत में हर साल करीब 60 लाख लोगों की मौत होती है। खासकरबच्चों पर इन खाद्य उत्पादों की आक्रामक मार्केटिंग का गहरा प्रभाव पड़ता है।

कोर्ट की टिप्पणी: “बच्चों को पैकेट में क्या है, इससे फर्क नहीं पड़ता”
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की कि बच्चों को यह नहीं दिखता कि पैकेट पर क्या लिखा है, उन्हें तो बसपैकेट के अंदर की चीज़ में दिलचस्पी होती है। उन्होंने कहा कि यदि लोग जान जाएं कि ये उत्पाद वास्तव में क्या हैं, तो वे शायद इन्हें खरीदने से पहलेसोचेंगे।

FSSAI पर तीन महीने में निर्णय का दबाव
कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI से तीन महीनों के भीतर इस विषय में निर्णय लेने को कहा है ताकि जरूरी नियामकीय बदलाव किए जा सकें।समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद FSSAI इन सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

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