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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और ओखला क्षेत्र से विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 केखिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर प्रत्यक्ष हमलाबताया है।

विधेयक को बताया धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध
अमानतुल्लाह खान ने अपनी याचिका में कहा कि नया संशोधन मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को सीमित करता है। उनके अनुसार, इससे कार्यपालिका को धार्मिक संस्थानों में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिल जाता है, जो अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मार्थ कार्यों परनकारात्मक प्रभाव डालेगा।

सरकार की भूमिका पर सवाल
खान का मानना है कि वक्फ संपत्तियों और धार्मिक संस्थाओं का संचालन समुदाय की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसमें प्रशासनिक दखल अनुचितहै। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

पहले भी उठी हैं आपत्तियां
गौरतलब है कि इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद भी इसी विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मेंयाचिका दाखिल कर चुके हैं। इन सभी ने इसे अल्पसंख्यक विरोधी और असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की है।

विधानसभा और राज्यसभा में पारित हुआ विधेयक
यह विधेयक 4 अप्रैल को राज्यसभा में 128 बनाम 95 वोटों से पारित हुआ, जबकि इससे एक दिन पहले लोकसभा में इसे 288 बनाम 232 मतों सेमंजूरी मिली थी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून का रूप ले सकता है।

क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2025?
वक्फ संशोधन विधेयक 2025, वक्फ अधिनियम 1995 में बदलाव करता है। इसके तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और अधिक सहभागी बनाने का प्रस्ताव है। सरकार का दावा है कि इससे वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और संपत्तियों काबेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

समाज और राजनीति में व्यापक प्रभाव
यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील बन चुका है। अब यह देखना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्टइस याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

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