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आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे बड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तरपर चर्चित राज्य को भाजपा ने ऐसे चला दिया है जैसे कोई साधारण पंचायत हो। भारद्वाज ने कहा कि पहले गाँवों में देखा जाता था कि महिला सीटपर महिला चुनाव जीतती थी, लेकिन काम असली में उसका पति करता था। पति फैसले लेता था और पत्नी केवल दस्तखत करती थी। आज वहीहाल दिल्ली में दिखाई दे रहा है और यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

मुख्यमंत्री के पति की भूमिका पर सवाल
भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पति अधिकारियों की मीटिंग लेते हैं और सरकारी अफसरों को निर्देश देते हैं। मुख्यमंत्री खुदसामने नहीं आतीं बल्कि उनके पति अफसरों को आदेश देते हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस अधिकार से मुख्यमंत्री के पति सरकारी कामकाजमें दखल दे रहे हैं। भारद्वाज ने इसे मजाक का विषय मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है क्योंकि इससे पूरे दिल्ली प्रशासनको संदेश जाता है कि असली ताकत मुख्यमंत्री नहीं बल्कि उनके पति के पास है। यह न केवल गैरकानूनी है बल्कि संविधान के खिलाफ भी है।

भाजपा पर सीधा वार
सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री खुद सक्षम नहीं हैं तो भाजपा बताए कि क्या उसके पास कोई योग्य व्यक्ति नहींहै जो उनका सचिव या सहायक बन सके। क्या मुख्यमंत्री का पति ही सारी जिम्मेदारी निभाएगा? उन्होंने कहा कि यह मामला केवल नैतिकता का नहींबल्कि सीधा-सीधा कानून के उल्लंघन का है। उन्होंने चिंता जताई कि यह तो केवल वे वीडियो हैं जो सामने आए हैं, लेकिन हो सकता है मुख्यमंत्री केपति और भी कई मौकों पर अधिकारियों से मिलकर सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करते हों।

अमित मालवीय पर जवाब
भारद्वाज ने भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को भी घेरा। उन्होंने कहा कि मालवीय ने ट्वीट कर यह मान लिया है कि मुख्यमंत्री कीविधानसभा उनके पति संभालते हैं। भारद्वाज ने कहा कि जैसे पहले शीला दीक्षित की बहन दिल्ली के कामों में दखल देती थीं, वैसे ही अब यह परंपराभाजपा भी शुरू कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इस पर रोक नहीं लगी तो आगे हालात और बिगड़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री से जवाब की मांग
सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर आदर्शों और सिद्धांतों की बातेंकरते हैं, लेकिन क्या उन्हें यह मंजूर है कि मुख्यमंत्री की जगह उनके पति सरकारी फैसले लें। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से असंवैधानिक है औरप्रधानमंत्री को जनता के सामने अपनी राय रखनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति चुनाव पर टिप्पणी
भारद्वाज ने उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह मौजूदा उपराष्ट्रपति को अपमानित करके हटाया गया, उसनेइस पद की गरिमा और मर्यादा को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब जो भी नया उपराष्ट्रपति बनेगा, वह केवल एक “रबर स्टंप” की तरह काम करेगाऔर उसकी कोई स्वतंत्र भूमिका नहीं रहेगी।

राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर बयान
राहुल गांधी की मलेशिया यात्रा पर भी सौरभ भारद्वाज ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी जाने से रोका नहीं जा सकता, यह उसका अधिकार है। लेकिन फिलहाल समय सही नहीं था क्योंकि हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में आपदा आई हुई है।अगर विपक्ष का नेता इस कठिन समय में प्रभावित इलाकों में होता तो वह प्रधानमंत्री से सवाल कर सकता था और जनता की आवाज बन सकता था।लेकिन आज स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री भी बाहर हैं और विपक्ष का नेता भी बाहर है, जिसकी वजह से जनता के सवाल कमजोर पड़ गए हैं।
सौरभ भारद्वाज की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य संदेश यही रहा कि भाजपा ने दिल्ली को संवैधानिक मर्यादाओं से बाहर चलाने की कोशिश की है। मुख्यमंत्रीकी जगह उनके पति का सरकारी कामों में दखल देना न केवल लोकतंत्र का मजाक है बल्कि यह अधिकारियों को भी गलत संदेश देता है। भारद्वाज नेप्रधानमंत्री से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उन्हें यह सब स्वीकार है। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि लोकतंत्र औरसंविधान की मर्यादा का है।



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