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‘श्री बाबा नीब करौरी महाराज’ फिल्म रिव्यू

रेटिंग: 3.5 स्टार

सरिता साहनी

आज के समय में जहां सिनेमाघरों में एक्शन, थ्रिलर और रोमांस फिल्मों का बोलबाला देखने को मिलता है, वहीं धार्मिक और आध्यात्मिक फिल्मों का बनना काफी कम हो गया है। फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े निर्माता यह मान बैठे हैं कि आज की युवा पीढ़ी केवल तेज रफ्तार और मसालेदार फिल्मों को ही पसंद करती है। लेकिन इस शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म बाबा नीब करौरी महाराज इस सोच को पूरी तरह बदलती नजर आती है। फिल्म के प्रेस शो और प्रिव्यू शो में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी यह साबित करती है कि नई पीढ़ी आज भी अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत-महात्माओं के जीवन को जानने में रुचि रखती है। यही कारण है कि यह फिल्म सिर्फ बुजुर्ग दर्शकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

बाबा के जीवन को करीब से दिखाती है फिल्म
यह फिल्म नीब करौरी बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं को बेहद सरल और भावनात्मक तरीके से दर्शाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके लाखों भक्त हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह बाबा ने लोगों को प्रेम, सेवा, सादगी और मानवता का संदेश दिया। उनके जीवन की कई घटनाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। बाबा के आश्रमों में आज भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं। फिल्म की कहानी किसी भारी-भरकम ड्रामे की तरह नहीं लगती, बल्कि एक सच्ची और आत्मीय यात्रा जैसी महसूस होती है। यही बात इसे बाकी धार्मिक फिल्मों से अलग बनाती है।

विदेशों तक फैली बाबा की लोकप्रियता
नीब करौरी बाबा की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया की कई बड़ी हस्तियां भी उनके भक्तों में शामिल रही हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसे नामी लोग भी बाबा से प्रभावित रहे हैं। कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स भारत आकर बाबा के आश्रम पहुंचे थे और वहीं से उन्हें जीवन को नई दिशा मिली। बाद में मार्क जुकरबर्ग को भी भारत आकर आश्रम जाने की सलाह दी गई थी। फिल्म इन बातों को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाती है, जिससे दर्शकों को यह समझ आता है कि बाबा का प्रभाव केवल एक धर्म या देश तक सीमित नहीं रहा। भारत में भी कई बड़ी हस्तियां बाबा की श्रद्धालु हैं। अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली सहित कई प्रसिद्ध लोग बाबा के प्रति अपनी आस्था जता चुके हैं।

लंबे रिसर्च के बाद तैयार हुई फिल्म
फिल्म के निर्माता शरद सिंह ठाकुर ने इस प्रोजेक्ट पर कई वर्षों तक मेहनत की। उन्होंने बाबा के जीवन को सही तरीके से समझने और पर्दे पर उतारने के लिए लंबी रिसर्च की। फिल्म बनाने से पहले बाबा के परिवार से मुलाकात की गई और उनकी अनुमति लेने के बाद इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया। बताया जाता है कि फिल्म पर काम शुरू करने से पहले करीब चार साल तक रिसर्च की गई। आज बाबा की बेटी गिरिजा जी लगभग 80 वर्ष की हैं और फिल्म के मेकर्स ने उनसे भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। यही वजह है कि फिल्म में सच्चाई और भावनात्मक जुड़ाव साफ महसूस होता है। फिल्म के निर्माता खुद भी बाबा के बड़े भक्त हैं। शायद यही कारण है कि फिल्म में केवल कहानी नहीं, बल्कि गहरी श्रद्धा और भावनाएं भी दिखाई देती हैं।

सुबोध भावे का दमदार अभिनय
मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता सुबोध भावे ने नीब करौरी बाबा की भूमिका को बेहद सादगी और गहराई के साथ निभाया है। उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। उन्होंने बाबा के शांत स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और आध्यात्मिक प्रभाव को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। कई दृश्यों में उनका अभिनय दर्शकों को भावुक कर देता है। समीक्षा भटनागर और राजेश शर्मा सहित बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। फिल्म का हर कलाकार कहानी को मजबूत बनाने में योगदान देता है।

रियल लोकेशन पर शूटिंग बनी फिल्म की खासियत
आजकल कई फिल्में बड़े सेट बनाकर शूट की जाती हैं, लेकिन ‘श्री बाबा नीब करौरी महाराज’ की खास बात यह है कि इसे कई वास्तविक स्थानों पर शूट किया गया है। फिल्म के दृश्य प्राकृतिक और वास्तविक महसूस होते हैं। आश्रमों और धार्मिक स्थानों को जिस तरह कैमरे में दिखाया गया है, वह दर्शकों को सीधे कहानी से जोड़ देता है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी काफी शांत और आध्यात्मिक एहसास देता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां बिना ज्यादा संवाद के भी भावनाएं दिल तक पहुंच जाती हैं।

परिवार के साथ देखने लायक फिल्म
आज के दौर में परिवार के साथ बैठकर देखने लायक फिल्मों की कमी महसूस होती है। ऐसे समय में यह फिल्म एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आती है।
फिल्म में कोई अनावश्यक विवाद, फालतू मसाला या जबरदस्ती डाला गया मनोरंजन नहीं है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी है। यही वजह है कि हर उम्र का दर्शक इस फिल्म से जुड़ाव महसूस करता है। यह फिल्म केवल बाबा के भक्तों के लिए नहीं बनी है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो धार्मिक और प्रेरणादायक सिनेमा देखना पसंद करता है।

टैक्स फ्री होनी चाहिए ऐसी फिल्में
इस तरह की फिल्में समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं। युवाओं को अपनी संस्कृति और संतों की शिक्षाओं से जोड़ती हैं। इसलिए ऐसी फिल्मों को बढ़ावा मिलना चाहिए। अगर राज्य सरकारें इस फिल्म को टैक्स फ्री करती हैं तो ज्यादा से ज्यादा लोग अपने परिवार के साथ इसे देख पाएंगे। इससे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर बनने वाली अच्छी फिल्मों को प्रोत्साहन मिलेगा। बाबा नीब करौरी महाराज’ एक सरल, भावनात्मक और प्रेरणादायक फिल्म है जो दर्शकों को अध्यात्म, मानवता और सेवा का संदेश देती है। फिल्म में भक्ति, भावनाएं और सादगी का सुंदर मेल देखने को मिलता है। यह फिल्म उन लोगों के लिए खास है जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि सिनेमा के माध्यम से प्रेरणा और सकारात्मक सोच भी पाना चाहते हैं।
फिल्म धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, लेकिन अपनी भावनात्मक गहराई और सच्चाई के कारण दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है। अगर आप धार्मिक और पारिवारिक फिल्में पसंद करते हैं तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।

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