महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में एक साक्षात्कार में संकेत दिया है कि वह अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मतभेदभुलाने को तैयार हैं। राज ठाकरे का कहना है कि उनके और उद्धव के बीच के झगड़े व्यक्तिगत नहीं हैं और इन मतभेदों को दरकिनार कर महाराष्ट्र औरमराठी भाषा के हित में एकजुट हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा, “एक साथ आना मुश्किल नहीं, यह केवल इच्छाशक्ति की बात है।”
हिंदी अनिवार्यता पर दोनों दलों का विरोध
राज ठाकरे की MNS और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) दोनों ने ही फडणवीस सरकार द्वारा कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य बनाने केनिर्णय का विरोध किया है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के एक जैसे विचार सामने आए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि भविष्य में वे एक मंच पर आसकते हैं।
‘व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बड़ी सोच की जरूरत’
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत इच्छा नहीं है, बल्कि सभी मराठी लोगों को एकजुट होकर एक बड़ी राजनीतिक ताकतबनानी चाहिए, जो महाराष्ट्र के हितों के लिए कार्य करे।
उद्धव ठाकरे का जवाब: पहले नीति स्पष्ट हो
वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह छोटे-मोटे विवादों को किनारे रखने को तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्टकिया कि सहयोग उन्हीं के साथ संभव है, जो महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ नहीं जाते। उद्धव ने कहा, “हम बार-बार समर्थन और विरोध नहीं कर सकते।पहले यह तय हो कि कौन सच में महाराष्ट्र के पक्ष में है, फिर हम मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।”
मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए एक मंच की जरूरत
दोनों नेताओं ने यह स्वीकार किया है कि मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए सभी मराठी समर्थक दलों को एकजुट होने की आवश्यकता है।यह देखा जाना बाकी है कि क्या यह बयानबाज़ी किसी ठोस राजनीतिक गठबंधन में बदलेगी या सिर्फ एक भावनात्मक अपील बनकर रह जाएगी।