
सिंधु जल संधि पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा यह फैसला भारत सरकार और प्रधानमंत्री का है। संधि स्थगित होने के बारे में कोईअपडेट नहीं है. जो भी फैसला लिया जाएगा उससे देश को ही फायदा होगा. संधि पर बिलावल भुट्टो के कथित बयान पर पाटिल ने कहा, पानी कहींनहीं जाएगा. वह जो कहते हैं वह उनका अपना सवाल है। हम झूठी धमकियों से नहीं डरते. इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टोजरदारी ने बेफिजूल बयान देते हुए कहा था कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत इस्लामाबाद को पानी का उचित हिस्सा देने से इनकार करता है.
1060 के समझोते को किया गया था स्थगित
तो उनका देश युद्ध की ओर बढ़ेगा दरअसल पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के तुरंत बाद भारत ने 1960 के समझौते को स्थगितकर दिया था. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते इस ऐतिहासिक समझौते को कभी बहाल न करने की घोषणा कीथी. सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता था. इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी।इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था.
सिंधू व बेसिन को बांटा गया था दो भागों में
इस संधि के तहत हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया था. पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारतको मिलता था. जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया था. भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधुजल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया था. उससे पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट गई है दरअसल, समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहींहै कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिल रहा है. बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वहपाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे. भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तोपाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा.