नई दिल्ली भगदड़: रेलवे स्टेशन पर किए गए 5 बड़े बदलाव, सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिका दाखिल

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का मामला गरमाया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। याचिका में मांगकी गई है कि केंद्र और सभी राज्य मिलकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएं, जो क्राउड मैनेजमेंट और भगदड़ रोकने के लिए गाइडलाइन तैयार करें। सुप्रीमकोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने ये जनहित याचिका दाखिल की है। जनहित याचिका में भारतीय रेलवे को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह रेलवे स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपाय करे, जिसमें गलियारों को चौड़ा करना, बड़े ओवरब्रिज और प्लेटफार्मों का निर्माण करना, रैंप और एस्केलेटर के माध्यम से प्लेटफार्मों तक आसान पहुंचसुनिश्चित करना, व्यस्त समय के दौरान आगमन या प्रस्थान प्लेटफार्मों में किसी भी तरह के बदलाव से सख्ती से बचना शामिल है।नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर किए गए 5 बदलाव -प्लेटफार्म टिकट बंद कर दिया गया है।-टिकट चेक करने के बाद ही प्लेटफार्म पर एंट्री मिलेगी।-ट्रेन आने से पहले कतार की व्यवस्था होगी।– स्टेशन के बाहर वेटिंग एरिया बनाया जाएगा। (छठ पूजा की तरह)-प्लेटफार्म नंबर 16 और 15 पर एस्कलेटर बंद कर दिए गए हैं।
महाराजगंज: निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद ने की आत्महत्या, यूपी कांग्रेस ने की न्याय की मांग

जनपद महाराजगंज से निषाद पार्टी के प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद ने हाल ही में आत्महत्या कर ली। उन्होंने अपने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखनेके बाद अपने घर के अंदर फांसी लगाकर जान दी। इस पोस्ट में उन्होंने निषाद पार्टी के अध्यक्ष और भाजपा सरकार में मंत्री संजय निषाद, उनके दोनोंबेटों और पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। इस दुखद घटना पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कुशासनके इस दौर में अब केवल विपक्ष के लोग ही नहीं, बल्कि पक्ष के लोग भी पीड़ित हो रहे हैं। राय ने धर्मात्मा निषाद के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएंव्यक्त की और कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। घटना की जानकारी मिलते ही अजय राय के निर्देश पर कांग्रेस पार्टी के विधायक वीरेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल स्व. धर्मात्मा निषाद केआवास पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिवारजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की और घटना की पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद स्थानीय प्रशासन सेमिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की। अजय राय ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरीप्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और न्याय की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और सभी की निगाहें अब इस मामले की निष्पक्ष जांच पर टिकी हुई हैं।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा का बयान: आतिशी मार्लेना को खुद की राजनीतिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए

नई दिल्ली, 17 फरवरी: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आज एक प्रेस वार्ता में कार्यवाहक मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री पद पर रहते हुए आतिशी मार्लेना ने बार-बार अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई, और अब जब वह कार्यवाहक मुख्यमंत्रीहैं, तब भी उनका बयानबाज़ी का तरीका उतना ही निरंतर है। मुख्य मंत्री पद की गरिमा को लेकर उठाए सवालसचदेवा ने कहा कि जब आतिशी मार्लेना को मुख्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया, तो उन्होंने कुर्सी के साथ एक खाली कुर्सी रखी, और आमआदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने उन्हें अस्थाई मुख्य मंत्री के रूप में संबोधित किया। इससे मुख्य मंत्री पद की गरिमा को ठेसपहुंची। उन्होंने यह भी पूछा कि जब केजरीवाल जेल में थे और मुख्यमंत्री पद खाली था, तो आतिशी को इस बात की चिंता क्यों नहीं थी? आतिशी मार्लेना के नेतृत्व पर सवालसचदेवा ने कहा कि आतिशी मार्लेना जानती हैं कि वह एक बार फिर विधायक बन गई हैं, लेकिन उनके पास कोई मजबूत राजनीतिक जमीन नहीं हैऔर न ही वह एक विपक्षी नेता में जो संघर्ष शक्ति होनी चाहिए, वह रखती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आतिशी मार्लेना ने दिल्ली में बिजलीकटौती और भाजपा विधायकों के खिलाफ निराधार टिप्पणियां की हैं। आंतरिक कलह पर सवाल और विपक्षी नेता की भूमिका पर चुप्पीसचदेवा ने कहा कि इससे पहले कि आतिशी मार्लेना भाजपा पर आंतरिक कलह की बातें करें, उन्हें अपनी पार्टी में चल रहे सत्ता संघर्ष पर जवाब देनाचाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि 3-5 बार विधायक चुने गए नेताओं जैसे मतीन अहमद, गोपाल राय, संजीव झा, कुलदीपकुमार, जरनैल सिंह और अन्य किसी भी विधायक ने आतिशी मार्लेना को नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। सचदेवा का सुझाववीरेन्द्र सचदेवा ने अंत में यह भी कहा कि बेहतर होगा कि आतिशी मार्लेना भाजपा पर टिप्पणी करने से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति और जमीन कोसंभालें।
कांग्रेस ने सैम पित्रोदा के विवादास्पद बयान से किया किनारा, जयराम रमेश बोले- यह पार्टी के विचार नहीं हैं

भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा द्वारा दिए गए एक और विवादित बयान ने राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा के हमलों केबाद, कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से खुद को पित्रोदा के बयान से अलग कर लिया है। कांग्रेस नेता और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पित्रोदा का बयानपार्टी के विचारों के विपरीत है। इस संदर्भ में जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “सैम पित्रोदा द्वारा चीन के बारे मेंव्यक्त किए गए विचार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विचार नहीं हैं।” चीन पर मोदी सरकार के दृष्टिकोण को लेकर उठाए सवाल अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, “चीन हमारे लिए सबसे बड़ी विदेश नीति, सुरक्षा औरआर्थिक चुनौती बना हुआ है। कांग्रेस ने मोदी सरकार के चीन के प्रति दृष्टिकोण पर बार-बार सवाल उठाए हैं, जिसमें 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्रीद्वारा चीन को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट देना भी शामिल है।” जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस ने 28 जनवरी, 2025 को चीन परअपना हालिया बयान दिया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत दुखद है कि संसद को इस पर चर्चा करने और इस चुनौती का सामनाकरने के लिए सामूहिक संकल्प व्यक्त करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। सैम पित्रोदा का बयान सैम पित्रोदा ने चीन को लेकर अपने बयान में कहा था, “चीन से खतरे को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, और भारतका दृष्टिकोण हमेशा टकरावपूर्ण रहा है। अब समय आ गया है कि देशों को एक-दूसरे से सहयोग करना चाहिए, न कि टकराव। हमें यह मानसिकताबदलने की आवश्यकता है और यह मानना बंद करना होगा कि चीन हमेशा से ही दुश्मन है।”
मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति में बदलाव, 1 अप्रैल से बीयर बार खुलेंगे, 19 शहरों में बंद होंगी शराब दुकानें

मध्य प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस नीति के तहत पहली बार “लोअल्कोहलिक बेवरेज बार” खोले जाएंगे, जबकि 17 पवित्र शहरों समेत 19 स्थानों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इन नए बार मेंकेवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों की अनुमति होगी, जिनमें अधिकतम 10 प्रतिशत अल्कोहल होगा। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन बारों में स्प्रिट (वोडका, रम, व्हिस्की) का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। वर्तमान में मध्य प्रदेश में 460 से470 शराब-सह-बीयर बार संचालित हैं, और नए आउटलेट्स के खुलने के बाद बार की कुल संख्या में काफी वृद्धि होगी। 47 शराब दुकानें बंद होंगीनई नीति के तहत 1 अप्रैल से 17 पवित्र शहरों समेत 19 स्थानों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा, जिसके परिणामस्वरूप कुल 47 मिश्रितशराब दुकानों को बंद कर दिया जाएगा। इन दुकानों में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और देशी शराब की बिक्री होती है। जिन पवित्र शहरोंमें शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा, उनमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंडलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, अमरकंटक और सलकनपुर शामिलहैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 जनवरी को इस नीति को मंजूरी दी थी, जिसके तहत राज्य सरकार को लगभग 450 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसानहोने का अनुमान है। दूसरे शहरों से शराब खरीद सकते हैं लोगजिन क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लागू होगा, वहां लोग बाहर से शराब खरीद कर व्यक्तिगत रूप से उसे पी सकते हैं। इस पर कोई जुर्मानानहीं लगेगा, क्योंकि राज्य में शराबबंदी कानून नहीं है। हालांकि, इन क्षेत्रों में शराब के सेवन पर रोक लगाने के लिए राज्य में बिहार निषेध अधिनियम, 2016 जैसा कानून बनाने की आवश्यकता है। फिलहाल, मध्य प्रदेश में केवल आबकारी अधिनियम लागू है, जो सार्वजनिक स्थानों पर शराब कीबिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से शराब रखने और पीने की अनुमति है। शराब दुकानों के नवीनीकरण शुल्क में 20% बढ़ोतरीनई आबकारी नीति के तहत अगले वित्त वर्ष के लिए शराब की दुकानों के नवीनीकरण शुल्क में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। हालांकि, हेरिटेजशराब और वाइन उत्पादन नीति अपरिवर्तित रहेगी, और हेरिटेज शराब निर्माताओं को वैट से छूट जारी रहेगी। इसके साथ ही, राज्य की अंगूर प्रसंस्करणनीति के तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए फलों के प्रसंस्करण और बागवानी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत अंगूर और जामुन सहित अन्यस्थानीय फलों और शहद से वाइन उत्पादन की अनुमति दी जाएगी।वाइन उत्पादन इकाइयों को नई अनुमतिनई नीति के तहत वाइन उत्पादन इकाइयों को अपने परिसर में खुदरा दुकानों का संचालन करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, वाइनरी परिसर मेंपर्यटकों के लिए वाइन चखने (वाइन टैवर्न) की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, विदेशी शराब की बोतल बनाने वाली इकाइयों कोविशेष शराब बनाने, भंडारण, निर्यात, आयात और बिक्री की अनुमति दी जाएगी।
महाराष्ट्र: लाडकी बहिन योजना से हिला बजट, अन्य योजनाएं हो रहीं प्रभावित? राजस्व मंत्री ने बताई हकीकत

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना से राज्य की अन्य कल्याणकारीयोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग बजटीय प्रावधान किए गए हैं। महाराष्ट्र बीजेपीके अध्यक्ष बावनकुले ने कहा, “हमारी सरकार ने हर योजना के लिए अलग से बजट आवंटित किया है, जिसमें लाडकी बहिन योजना के लिए भी अलगसे बजट है।” उन्होंने कहा, “कृषि फसल बीमा योजना के लिए भी अलग से बजट रखा गया है, और कुछ लोग इस योजना को लेकर भ्रम फैलाने कीकोशिश कर रहे हैं।” ‘लाडकी बहिन योजना’ का उद्देश्य और लाभमुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव से पहले शुरू की थी, और महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना कोजारी रखा गया। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिनकीवार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इस योजना में पात्रता की अन्य शर्तें भी हैं, जैसे कि लाभार्थी के पास चार पहिया वाहन नहीं होनाचाहिए और परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या में कमीजनवरी 2025 में मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों की संख्या घटकर 2.41 करोड़ रह गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह संख्या2.46 करोड़ थी। इस बदलाव का कारण यह था कि विभिन्न कारणों से पांच लाख महिलाएं अपात्र पाई गईं। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदितितटकरे ने कहा कि जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच इन महिलाओं के खातों में कुल 450 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, हालांकि यह राशि वापसनहीं ली गई है और राज्य सरकार का इस राशि को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। अपात्र पाई गई महिलाएंअधिकारियों ने बताया कि जिन पांच लाख महिलाओं को अपात्र माना गया, उनमें से 1.5 लाख महिलाएं 65 वर्ष से अधिक आयु की थीं। वहीं, 1.6 लाख महिलाएं वे थीं जिनके पास चार पहिया वाहन था या जो ‘नमो शेतकरी योजना’ जैसी अन्य सरकारी योजनाओं की लाभार्थी थीं। इसके अलावा, करीब 2.3 लाख महिलाएं संजय गांधी निराधार योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही थीं, जिससे वे ‘लाडकी बहिन योजना’ के लिए अपात्र हो गईं।