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चौथी बार दिल्ली की कमान महिला के हाथ में, सुषमा, शीला और अतिशी के बाद अब रेखा गुप्ता

Delhi New CM:दिल्ली में 27 साल के बाद बीजेपी की सरकार बनी है.दिल्ली बीजेपी विधायक दल की बैठक में फैसला ले लिया गया है. किदिल्ली की नई सीएम रेखा गुप्ता होगीं. दरअसल रेखा गुप्ता दिल्ली के शालीमार बाग से विधायक है.पर अब बीजेपी सरकार ने रेखा गु्प्ता के नाम पर दिल्ली के नए सीएम के नाम की मोहर लगा दी है. कल दोपहर 12:35 के करीब विधायक दल केनेता शपथ लेंगें. बीजेपी पार्टी ने फिलहाल ही में आम आदमी पार्टी के हराकरदिल्ली में अपनी सरकार बनाई है.जिसके नतीजों को 8 फरवरी को घोषित किया गया था. पीएम मोदी और अमित शाह सहित बीजेपी के शीर्ष नेतृत्वने कई दौर की बैठक के बाद दिल्ली के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल कर दिया है. करीब एक लाख लोगों के आने की उम्मीदबीजेपी पार्टी की तरफ से करीब एक लाख लोगों को बुलाने का अनुमान है. जिसमें दिल्ली की झुग्गी बस्ती वाले भी शामिल है. इसके अलावा पंडितोऔर ग्रंथियों को भी इस समारोह में बुलाया जा रहा है. अरविंद केजरीवाल की दिल्ली मेंराजनीति का आधार झुग्गी बस्ती वाले ही है. ऐसे में बीजेपी पार्टी का प्लान है कि केजरीवाल की राजनीति को बिल्कुल ही खत्म कर दिया जाए.इससेपहले दिल्ली की पूर्व सीएम अतिशी ने कहा था कि दिल्ली की जनता ने बीजेपी के 48एमएलए चुनकर दिए है. लेकिन इसके बाबजूद भी पार्टी इनमें से एक चेहरे का चयन नहीं कर पा रही है. साफ है कि दिल्ली उन्हें इनमें से एक भी योग्यउम्मीदवार सीएम पद के लिए नहीं नजर आ रहा है.

बीजेपी और कांग्रेस में फिर हुई जुबानी जंग, स्मृति ईरानी की हुई धमाकेदार एंट्री

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के यूएसएड और अमेरिका अरबपति निवेशक जार्ज सोरोस के साथ कथित संबंधो के दावों पर मंगलवार को बीजेपी औरकांग्रेस के बीच जुबानी जंग हो गई. जिसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे तथा कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने देश में युएसएडपरियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए स्मृति ईरानी की आलोचना की. उन्होनें स्मृति ईरानी पर जार्ज सोरोस का असली एजेंट होने के आरोप लगाते हुएकहा कि ईरानी ने भारत में यूएसएड सद्भावना राजपूत के रुप में काम किया है.उन्होनें बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए जार्ज सोरोस को बदनामकरने का आरोप लगाया है. निशाना साधते हुए कहा सत्तारुढ़ पार्टी के दोहर मापदंडों को उजागर करने के लिए उत्तराधिकारी दस्तावेज भी साझा किएहै. दरअसल यूएसएड दुनिया कि सबसे बड़ी अमेरिकी सहायता कंपनियों में से एक है. बीजेपी की तरफ से की गई तीखी प्रतिक्रियाइस पर दूसरे देशों में लोकतांत्रिक रुप से निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने का आरोप रहे है. फिलहाल कांगेस के आरोपों पर बीजेपी की ओर सेत्वरित और तीखी प्रतिक्रिया आई है. बीजेपी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस की सप्रसंग सरकार के समय स्मृति ईरानी कोटेलीविजन धारावाहिक ” सास भी कभी बहू थी” स्मृति को इसके लिए काफी लोकप्रियता मिली थी. इसके आधार पर उन्हें विश्न स्वास्थ्य संगठन द्धाराउन्हें तीन साल के लिए (2002 से 2005 तक) ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) सद्भावना ब्रांड एंबेसडर के रुप में चुना गया था. इंदौर की रिपोर्ट में किया गया उल्लेखइस कार्यक्रम को 2002 से 2003 तक आश्चर्यजनक सफलता मिली और आइआइएम – इंदौर की रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया.लेकिनउन्होनें पार्टी पर प्रहार करते हुए कहा कि असफल व्यक्ति द्धारा संचालित कांग्रेस पार्टी इसका इस्तेमाल नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए कररही है.स्मृति ईरानी की मौजूदगी वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस कार्यक्रम का दिल्ली परिवहन निगम समेत अन्य ने भी समर्थन किया था.डीटीसी नेभी अपनी बसों में इससे जुड़ी प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति पहले से ही दी थी.

राजस्थान के 21 जिलों की बदलेगी तस्वीर, हजारों करोड़ो को होगा खर्चा’रामजल सेतु योजना’ में

राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी ने बुधवार को भजनलाल सरकार का दूसरा पूर्ण बजट पेश किया दरअसल उनके बजट स्पीच लगभग 2 घंटे कीथी इस बजट में राजस्थान को 350 अब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया था.अब राइजिंग राजस्थान समित के बाद यहबजट दोबारा से एनर्जी ग्रामीण विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित होगा जिसे ग्रीन थीम बजट का नाम दिया जाएगा. इस बजट में खास तौर परकिसान महिलाओं युवाओं और बुजुर्गों के लिए कई अहम घोषणाएं की गई है जिसको लेकर राज्य में जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने केलिए रमजाल सेतु परियोजना को बड़े पैमाने पर लागू किया गया. 9300 करोड़ से किया जाएगा पूराइस योजना के तहत 9300 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न कार्यों को पूरा किया जाएगा इसके साथ ही राजस्थान वॉटर ग्रेड कॉरपोरेशन का गठनकिया जाएगा जिससे लगभग चार लाख से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधाओं का भी लाभ मिल सकता है. इसके तहत किसने की सुविधाओं कोखासतौर पर ध्यान में रखते हुए 50000 फॉर्म 10000 डिग्रियां और 50000 सूर्य संयंत्र स्थापित किए जाएंगे.इसके अलावा 90 करोड रुपए कीलागत से जल संरक्षण परियोजना को भी शुरू किया जाएगा. इस पर दिया कुमारी ने कहा की जलसेतु पिंक परियोजना में 9400 करोड़ रुपए के कामको शुरू कर दिया गया. 12400 करोड़ के टेंडर हो चुके है पूरे12400 करोड़ के टेंडर हो चुके हैं और 12 807 करोड़ रुपए के काम को मंजूरी भी दे दी गई है. दरअसल इस योजना के लिए 9300 करोड रुपएलागत के तौर पर काम में लाये जायेंगे.दिया कुमारी ने बजट की घोषणा की और बताया की 9400 करोड़ रुपए की सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं. दरअसल 12800 करोड़ रुपए के नाम की मंजूरी भी दे दी गई है. 3.5 लख रुपए क्षेत्र में ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम के लिए अनुदान भी कियाजाएगा नई तालाब भी बनाए जाएंगे और करीब 20 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइपलाइन के लिए 900 करोड रुपए का अनुदान भी किया जाएगा.

यूक्रेन युद्ध के चौथे वर्ष में प्रवेश, ट्रंप ने कहा ‘समझौता ही युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता

यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से बदल गया है. दरअसल पिछले कुछ दिनों यहकहकर यूक्रेन समेत सभी को चौंका दिया था कि जंग की जिम्मेदारी कीव की है. जब जो वाइडन सरकार यूक्रेन का समर्थन कर रही है. तो रूस को इसजंग की वजह बता रही है ऐसे में अब युद्ध का जिम्मा यूक्रेन के ऊपर फोड़ कर डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बदली नीति का संकेत दिया है. उन्होंने कहा है किरूस और यूक्रेन युद्ध के लिए कीव जिम्मेदार है. यूक्रेन में युद्ध का अगला प्रवेशयूक्रेन में युद्ध अगले सप्ताह अपनी चौथी वर्ष में प्रवेश कर जाएगा. इसी बीच यूक्रेन और रूस के लिए अमेरिकी दूत कीव पहुंचे हैं यहां राष्ट्रपतिजेलिस्की एवं अन्य कमांडरों के साथ बातचीत करेंगे दरअसल रूस को अलग करने की अपनी वर्षो पुरानी नीति है ये अमेरिका के बदलाव लाने के बीचयूक्रेन का दौरा कर रहे हैं सऊदी अरब में शीर्ष अमेरिकी और रूस राजनायकों के बीच वार्ता हुई थी इसमें यूक्रेन और उसके यूरोपीय समर्थकों कोदरकिनार कर दिया गया था. दरअसल ट्रंप की टिप्पणियां यूक्रेन अधिकारियों को आए दिन परेशान पैदा कर रही है. यूरोपीय देशों से आग्रहजिससे रूस के आक्रमणों से लड़ने में यूरोपीय देशों से मदद करने में आग्रह किया गया था. रूस यूक्रेन युद्ध 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ था इसदौरान रूस सेवा के द्वारा यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में लगातार हमले हमले से यूक्रेनी सेना कमजोर हो रही है. जिसे धीरे-धीरे लेकिन लगातार 1000 किलोमीटर की अग्रिम पंक्ति कुछ मोचन पर पीछे धकेला जा रहा है.ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान कहा कि यूक्रेन को युद्ध शुरु ही नहींकरना चाहिए था. इसे रोकने के लिए वह समझौता कर रहा है इसे रोकने की सिर्फ एक तरीका है और वो है समझौता, अगर युद्ध को लेकर समझौताहोता है तो ही युद्ध खत्म होगा.केलाँग ने इस पर कहा कि उनकी यात्रा कुछ सार्थक, ठोस बातचीत करने का मौका है जेलेस्की ने फिलहाल सऊदी अरबकी यात्रा को भी रद्द कर दिया है.

RSS ने नई दिल्ली में किया केशव कुंज का उद्घाटन,जानें क्यों से है ये महत्वपूर्ण

राष्ट्रीय स्वयं सेवत संघ RSS ने नई दिल्ली के झंडेवालान में अपने अत्याधुनिक मुख्यालय ‘केशव’कुंज का आधिकारिक उद्घाटन किया.यह विशालपरिसर चार एकड़ में फैला हुआ है. जिसे संघ की बढ़ती गतिविधियों के रुप के अनुरुप विकसित किया गया है.इसकी इमारतों की बात करें तो इसकेमुख्यालय में तीन ऊंची इमारतें, आँडिटोरियम, पुस्तकालय, अस्पताल, कैंटीन और हनुमान जी का मंदिर भी है. इस भवन को खास अद्भुत तरीकों सेबनाया गया है. बीजेपी मुख्यालय से भी बड़ाजिसमें पर्यावरण- संवेदनशील डिजाइन के साथ निर्मित यह परिसर आकार में बीजेपी मुख्यालय से भी बड़ा है. इसमें 150 करोड़ की लागत से निर्मितइस परियोजना को पूरी तरह से जनसहयोग से वित्तपोषित किया गया है.जो RSS को मिले व्यापक समर्थन को दर्शाता है.प्रेरणा और अर्चना टावर केबीच एक विशाल हरा- भरा लाँन है. जहां आरएसएस के संस्थापक की प्रतिमा को स्थापित किया गया है यह स्थान संघ की दैनिक शाखाओं औरसंगठात्मक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित है.इस नए विशाल मुख्यालय में तीन विशाल आँडिटोरियम बनाए गए है जिनकी 1300 से अधिक लोगों केबैठने की व्यवस्था की गई है. इसका नाम विश्न हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के नाम पर रखा गया है. खासतौर पर किया गया डिजाइनकेशव कुंज को खास तौर पर डिजाइन किया गया है.इमारत की डिजाइन राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित है. जो आधुनिकभवन को सांस्क्रतिक स्पर्श प्रदान करती है.केशव कुंज परियोजना की सबसे बड़ी बात ये है कि सबसे उल्लेखनीय बात ये है कि इसका निर्माण पूरी तरहसे जनसहयोग से वित्तपोषित किया गया है. इसमें करीब 75,000 से अधिक लोगों ने इस भवन के निर्माण में योगदान दिया है. आरएसएस प्रमुखमोहन भागवत ने इस नए मुख्यालय में कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम की मेजबानी करेंगें.

शपथ ग्रहण को लेकर दिल्ली रामलीला मैदान में जोरों से तैयारियां, कौन करेंगा पीएम का स्वागत

Delhi New CM:दिल्ली रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण को लेकर सारी तैयारियां हो चुकी है. कल सुबह 11 बजे के करीब दिल्ली के नएमुख्यमंत्री शपथ लेंगें.Delhi New Cm :दिल्ली के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी ने गजब का चला दिया है दरअसल पार्टी ने अबकी बार तयकिया है कि समारोह में पीएम मोदी का स्नागत झुग्गी के प्रधानों से कराया जाएगा. इस फैसले के जरिए बीजेपी पार्टी सभी 250 झुग्गी क्लस्टर्स मेंबड़ा मैसेज पहुंचाने की तैयारी में लगी है. मंगलवार की देर रात बीजेपी पार्टी ने पदाधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया है दरअसल पहले सेझुग्गी बस्तियों में आम आदमी पार्टी की झुग्गी बस्तियों में आम आदमी पार्टी की अच्छी पैठ है. ऐसे में बीजेपी अपने इस नए कदम के जरिए ऐसेइलाकों में अपनी अच्छी पकड़ बनाने की तैयारी में है. शपथ ग्रहण को लेकर सारी तैयारियांदरअसल बीजेपी पार्टी के नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी है. शपथ ग्रहण समारोह 20 फरवरी की शाम होनाहै.दिल्ली के रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होना है. पहले इसके लिए शाम 4:30 बजे का समय निर्धारित किया गयाथा.जिसको सुबह के वक्त बदलकर 11बजे कर दिया गया है. इसके बाद इसमें तीसरी बार बदलाव हुआ है. इस कार्यक्रम में तीन तरह के स्टेज बनाएजाएंगें. इस मौके पर मुख्य मंच पर पीएम मोदी और उपराज्यपाल वीके सक्सेना के साथ ही मनोनीत मुख्यमंत्री और मंत्री परिषद के सहयोगी सदस्यहोगें.पास में ही दूसरे मंच पर धर्मगुरु और विशिष्ट अतिथि मौजूद होगें. मुख्य मंच पर होगें पीएमपहले मंच पर पीएम मोदी समेत कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहेंगें. इसके साथ ही तीसरे मंच पर संगीत कार्यक्रम से जुड़े कलाकार रहेंगें.इस समारोह मेंकैलाश खेर के प्रस्तुति देने की चर्चा की है.शपथ ग्रहण से पहले एक बैठक होगी इसके बाद सीएम के चेहरे का ऐलान होगा. इससे पहले पीएम मोदीके आवास पर केंद्रीय कैबिनेट बैठक हुई है. पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में भी दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा होने के बात सामने आई है.

महाराष्ट्र सरकार में अनबन की खबरों पर एकनाथ शिंदे का बयान – हमारे बीच सब कूल-कूल है

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच मतभेद की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं। हालांकि, इन अटकलोंको खारिज करते हुए मंगलवार को एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सरकार में किसी तरह का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई कोल्डवार नहीं है, सब कुछ ठंडा-ठंडा, कूल-कूल है। सरकारी बैठकों में दूरी और समानांतर निर्णयों से बढ़ा तनावमहायुति सरकार को बने कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस की कई अहमबैठकों में उपमुख्यमंत्री शिंदे की अनुपस्थिति, समानांतर विभागीय समीक्षा बैठकें, वार रूम तैयार करना और मुख्यमंत्री राहत कोष के समान चिकित्साराहत प्रकोष्ठ स्थापित करना—इन सभी मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद की अटकलें तेज हो गई थीं। महायुति में न कोल्ड वार, न हॉट वार – शिंदेइन सभी अटकलों को लेकर एकनाथ शिंदे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महायुति की तीनों पार्टियों के बीच कोई कोल्ड वार नहीं है और नही कोई मतभेद। हमारा मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना है, और हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। यह महाविकास आघाड़ी नहीं है, जहां मतभेद औरकोल्ड वार हो। चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ पर शिंदे की सफाईमुख्यमंत्री राहत कोष पहले से ही मौजूद होने के बावजूद उपमुख्यमंत्री कार्यालय में अलग से चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ स्थापित करने पर सवाल उठरहे थे। इस पर शिंदे ने सफाई देते हुए कहा कि हम जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। महायुति की तीनों पार्टियां मिलकर अधिक से अधिकजनसेवा करना चाहती हैं, इसलिए यह पहल की गई है। शिंदे के करीबी सहयोगी मंगेश चिवटे इस नए प्रकोष्ठ का नेतृत्व करेंगे। फडणवीस ने किया शिंदे के फैसले का समर्थनमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे द्वारा चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ शुरू करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।जब मैं उपमुख्यमंत्री था, तब मैंने भी इसी तरह की पहल की थी। इसका उद्देश्य लोगों की मदद करना है। राजनीतिक स्थिरता पर बनी रहेंगी निगाहेंहालांकि शिंदे और फडणवीस दोनों ने मतभेदों की खबरों को खारिज किया है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इन घटनाक्रमों पर लगातार चर्चा बनीरहेगी। महायुति सरकार के समन्वय को लेकर भविष्य में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

दिल्ली में सात साल की बच्ची से दुष्कर्म, कानून व्यवस्था पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर हमला

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के तिलक नगर में सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म की घटना को लेकर भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परतीखा प्रहार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा के शासन में दिल्ली की कानूनव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अपराधियों के मन में कानून का कोई डर नहीं बचा है, जिसके कारण इस तरह की भयावह घटनाएं हो रही हैं। अब चुनाव खत्म, भाजपा को काम करके दिखाना होगामनीष सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने जितनी राजनीति करनी थी, कर ली। लेकिन अब दिल्ली केलोगों को सुरक्षित महसूस कराने के लिए कुछ काम करना होगा। केवल अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने से अब काम नहीं चलेगा। भाजपा कोयह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराधियों और बलात्कारियों में कानून का भय पैदा हो। दिल्ली में अपराध ज्यादा हो गएआम आदमी पार्टी के तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह ने दिल्ली में बढ़ते अपराधों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में चेन स्नैचिंग, स्कूटी चोरी और वाहन चोरी जैसी घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन पुलिस इन्हें रोकने में विफल रही है। अब तो फिरौती, हत्या और दुष्कर्म जैसी घटनाएंभी रोज़मर्रा का हिस्सा बनती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इन अपराधों पर काबू पाने में पूरी तरह नाकामसाबित हुए हैं। दिल्ली के लोग गुस्से में, लेकिन हम उनके साथ खड़े हैंजरनैल सिंह ने आश्वासन दिया कि आम आदमी पार्टी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की इस लड़ाई में दिल्लीवासियों के साथ खड़ी है। उन्होंनेन्यायपालिका से अनुरोध किया कि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। भाजपा कानून व्यवस्था पर ध्यान दे, बहानेबाजी न करेमनीष सिसोदिया ने भाजपा से मांग की कि वह दिल्ली की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि अब चुनाव खत्म हो चुके हैं, इसलिए भाजपा कोअपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली के सात सांसद और केंद्र सरकार कानून व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठा रहेहैं? अगर अपराधियों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो दिल्ली के हालात और खराब हो सकते हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को बड़ी राहत, लोकायुक्त ने भूमि आवंटन मामले में दी क्लीन चिट

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और दो अन्य को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) के साइट आवंटन मामले में बड़ी राहतमिली है। लोकायुक्त ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है। जांच में निष्कर्ष निकला कि आरोप दीवानी प्रकृति के थे औरआपराधिक कार्यवाही की आवश्यकता नहीं थी। शिकायतकर्ता को नोटिस जारीलोकायुक्त ने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा को नोटिस जारी कर जांच के निष्कर्षों से अवगत कराया। उन्हें रिपोर्ट को नामितमजिस्ट्रेट के समक्ष चुनौती देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। नोटिस में कहा गया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले औरयह भी संभावना जताई गई कि विवाद कानूनी प्रावधानों की गलतफहमी के कारण उत्पन्न हुआ हो सकता है। क्या था मामला?शिकायत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और अन्य पर MUDA के साइट आवंटन में अनियमितता का आरोप लगाया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंडसंहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम और कर्नाटक भूमि हड़पने अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।हालांकि, लोकायुक्त की जांच में कोई आपराधिक गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके कारण अंतिम रिपोर्ट में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। अब भी जारी रहेगी जांचक्लीन चिट मिलने के बावजूद, लोकायुक्त ने स्पष्ट किया कि 2016 से 2024 के बीच MUDA द्वारा किए गए प्रतिपूरक भूमि आवंटन की जांच अभीजारी है। पूरक जांच के बाद रिपोर्ट को सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत अदालत में पेश किया जाएगा। MUDA और भूमि आवंटन विवादमैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) मैसूर शहर के विकास के लिए जिम्मेदार एक स्वायत्त संस्था है। इसका कार्य भूमि अधिग्रहण और आवंटनसे जुड़ा है। विवाद 2004 से जुड़ा है, जब MUDA ने मुआवजे के रूप में भूमि का आवंटन किया था। संपत्ति को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?1992 में, MUDA ने रिहायशी इलाके के विकास के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित की थी। 1998 में, अधिग्रहण की गई भूमि का एक हिस्सावापस कर दिया गया, जिससे वह फिर से कृषि भूमि बन गई। विवाद 2004 में तब शुरू हुआ जब सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई बी.एम. मल्लिकार्जुन ने इस जमीन में 3.16 एकड़ खरीदी। उस समय कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार थी और सिद्धारमैया उपमुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री का बचावमुख्यमंत्री सिद्धारमैया का दावा है कि उनकी पत्नी को जो जमीन मुआवजे के रूप में मिली, वह उनके भाई मल्लिकार्जुन ने 1998 में उपहार में दी थी।हालांकि, RTI कार्यकर्ता कृष्णा का आरोप है कि मल्लिकार्जुन ने 2004 में इस संपत्ति को अवैध रूप से हासिल किया और जाली दस्तावेजों के जरिएइसे पंजीकृत कराया। राजनीतिक विवाद और जांच का नतीजा2014 में, जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, उनकी पत्नी ने इस जमीन के लिए मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब मुआवजा दिया गयाथा, तब राज्य में बीजेपी की सरकार थी और यह उनका कानूनी अधिकार था। लोकायुक्त ने मामले में कोई आपराधिक गड़बड़ी नहीं पाई और इसीआधार पर क्लीन चिट दे दी गई। हालांकि, MUDA से जुड़े अन्य मामलों की जांच अभी जारी है।

यूपी विधानसभा बजट सत्र: हिंदी की उपभाषाओं पर गरमाई राजनीति, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया। पहले ही दिन विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सदन में विभिन्न भाषाओं के उपयोग कोलेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता माताप्रसाद पांडेय नेकार्यवाही में अंग्रेज़ी भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और उन्हें दोहरेमापदंड अपनाने का आरोप लगाया। योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर प्रहारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन आम लोगों के बच्चों को गांव के स्कूलों में पढ़ाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा,“अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाएंगे और दूसरे से कहेंगे कि उर्दू पढ़ो, मौलवी बनो। यह नहीं चलेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा दोहरी मानसिकता रखती है और अपने निजी हितों के लिए अलग रणनीति अपनाती है, जबकिजनता के सामने कुछ और कहती है। हिंदी की उपभाषाओं को सम्मान देने की बातसीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न भारतीय भाषाओं और उपभाषाओं को उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि ब्रज, भोजपुरी, अवधी, बुंदेलखंडी जैसी भाषाएं हिंदी की उपभाषाएं हैं और इन्हें समान दर्जा मिलना चाहिए। “हमारी सरकार ने इन बोलियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अलग-अलग अकादमियों का गठन किया है। ये भाषाएं हिंदी की बेटियां हैं और इन्हेंसदन की कार्यवाही का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।” सदन में सभी तबकों की आवाज़ को मिलेगी जगहमुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सदस्यों का यह सदन केवल साहित्य और व्याकरण के विद्वानों के लिए नहीं बना है। इसमें समाज के हर तबके केप्रतिनिधि मौजूद हैं। इसलिए, अगर कोई हिंदी में अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख सकता, तो उसे अपनी क्षेत्रीय भाषा में बोलने की अनुमति होनीचाहिए। सदन में अंतिम पायदान के व्यक्ति की आवाज़ को मुखरता मिले, इसके लिए यदि वह हिंदी में असमर्थ है तो अवधी, बुंदेलखंडी, भोजपुरी जैसीभाषाओं में बोल सकता है। भाषाई विविधता का सम्मान जरूरीयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कईदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग इन्हीं भाषाओं का उपयोग करते हैं। आज मॉरीशस, फिजी जैसे देशों में रहने वाले भारतीय अवधी भाषा बोलते हैं। हम चाहते हैं कि इन भाषाओं को भी सदन की कार्यवाही का हिस्साबनाया जाए और उन्हें उचित सम्मान मिले। विपक्ष के विरोध की आलोचनामुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हर अच्छे कार्य का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा विकास और सांस्कृतिक संरक्षण कीनीतियों का विरोध करती आई है। हमारी सरकार मानती है कि अवधी, भोजपुरी, बुंदेली जैसी भाषाओं को सदन की कार्यवाही में जगह मिलनी चाहिए। लेकिन विपक्ष हर अच्छे काम काविरोध करता है, जो कि निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।