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किसानों के हक से खिलवाड़: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मीडिया समन्वयक अभय दुबे ने केंद्र सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारकेवल बैठकें कर भ्रम पैदा कर रही है लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने से बच रही है। उनका कहना है कि भाजपा सरकारकिसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और उनके साथ अन्याय कर रही है। किसानों के अधिकारों से वंचित करने का आरोपअभय दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाए हुए है। पहले उनकी जमीनों पर कब्जे के लिए अध्यादेश लायागया, फिर कृषि कानून लागू किए गए, और जब किसानों ने विरोध किया तो सड़कों पर कीलें और कांटे बिछाए गए। अब जब किसान अपनी फसलोंके न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं, तो सरकार उन्हें सिर्फ तारीखों का आश्वासन दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 12 जुलाई2022 को एमएसपी को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति बनाई थी, जिसकी अब तक 7 बैठकें और उप-समितियों की 39 बैठकें होचुकी हैं, लेकिन अब भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।संसदीय समिति की सिफारिश और सरकार की अनदेखीसंसदीय स्थायी समिति (2024-25) ने 17 दिसंबर 2024 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि जब तक एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं मिलेगा, तबतक किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। रिपोर्ट में 13 नवंबर 2024 की बैठक का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकार किसानों को केवलगुमराह कर रही है और कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। एमएसपी पर सरकारी दावों और हकीकत में अंतरसरकार 22 फसलों को एमएसपी पर खरीदने का दावा करती है, लेकिन वास्तव में केवल 0.05% फसलों की ही खरीद होती है। 2022-23 केआंकड़ों के अनुसार, गेहूं की 23% खरीद हुई, जबकि चने की केवल 0.37% और सूरजमुखी की बिल्कुल भी खरीद नहीं हुई। इसी तरह, सरसों कीखरीद महज 9.19% तक सीमित रही। एमएसपी मूल्यांकन में विसंगतियांकृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने रबी सीजन 2024-25 की रिपोर्ट में स्वीकार किया कि कई राज्यों द्वारा प्रस्तुत फसल लागत मूल्य अधिकहै, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में गेहूं की उत्पादन लागत ₹3527 प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकार इसे₹4461 देने को तैयार नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र में चने की लागत ₹5402 प्रति क्विंटल है, लेकिन सरकार ₹7119 प्रति क्विंटल देने से इंकार कर रहीहै। राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की लागत रिपोर्ट को भी अनदेखा किया गया है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों की अनदेखीसंसदीय समिति ने बताया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों (C2+50%) के अनुसार एमएसपी लागू नहीं कर रही है। हाल ही में घोषितरबी सीजन 2025-26 के एमएसपी में वृद्धि केवल 2.4% से 7% तक की गई है, जो किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। कृषि बजट में कटौती2020-21 से 2024-25 तक कृषि बजट में लगातार कटौती देखी गई है, जिससे किसानों को सरकार की नीतियों का सीधा नुकसान हो रहा है। मोदीसरकार ने कृषि बजट के बड़े आंकड़े पेश किए, लेकिन वास्तविक खर्च बहुत कम रहा। अनुसूचित जाति के किसानों के लिए बजट में गिरावटदलित किसानों के लिए अनुसूचित जाति सब-प्लान (SCSP) के तहत आवंटित बजट में भारी कटौती की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारकृषि क्षेत्र में हाशिए पर खड़े किसानों की जरूरतों की अनदेखी कर रही है। किसानों से किए गए वादों का उल्लंघन2024 के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के किसानों से सोयाबीन की खरीद ₹6000 प्रति क्विंटल करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया। निष्कर्ष: किसानों के साथ अन्याय बंद करे सरकारअंत में, अभय दुबे ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में खेती की लागत 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ा दी, लेकिन किसानों को केवल₹6000 सालाना देकर उनकी समस्याओं को हल करने का दिखावा कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एमएसपी की कानूनी गारंटी तुरंत दीजाए और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए।

महाकुंभ 2025 का भव्य समापन, प्रधानमंत्री मोदी ने की योगी सरकार की सराहना

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने आस्था और अध्यात्म के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। यह 45 दिनों तक चला विश्व का सबसे बड़ाधार्मिक आयोजन रहा, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आंकड़ों के अनुसार, इस आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं कीसंख्या 66 करोड़ से अधिक थी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है। विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजनमहाकुंभ 2025 में उमड़ी भीड़ ने इसे अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों की तुलना में कहीं आगे खड़ा कर दिया। जहां अर्बईन तीर्थ यात्रा में लगभग 2 करोड़, हज यात्रा में 25 लाख, रियो कार्निवल में 20 लाख और पुष्कर मेले में करीब 10 लाख लोग शामिल होते हैं, वहीं महाकुंभ में यह संख्या 66 करोड़ से अधिक पहुंच गई। यह आयोजन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए सनातन संस्कृति की भव्यता और इसकी व्यापक स्वीकृति काप्रतीक बन गया। बेहतर प्रबंधन और प्रशासन की सतर्कतामहाकुंभ की सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया जा रहा है, जिनके नेतृत्व में इस आयोजन के लिए दो साल पहलेसे ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने व्यापक स्तर पर योजनाएं बनाई थीं। मुख्यमंत्री स्वयंहर प्रमुख स्नान पर्व से पहले व्यवस्थाओं की समीक्षा करते रहे और आवश्यक निर्देश जारी करते रहे। आंकड़ों में महाकुंभ 2025महाकुंभ 2025 के आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं की गईं। प्रयागराज में लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्रमें इसे आयोजित किया गया। 9 लाख से अधिक साधु-संत, 10 लाख कल्पवासी, और 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु इस महापर्व का हिस्सा बने।यातायात प्रबंधन के लिए 13,830 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, और 50 शहरों से सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा, 2,800 सेअधिक फ्लाइट सेवाएं चलाई गईं और सुरक्षा के लिए 50,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई। कुल आर्थिक गतिविधियों का आंकड़ा लगभग3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मौनी अमावस्या पर भगदड़ और त्वरित कार्रवाईमौनी अमावस्या के दिन अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेप्रयागराज पहुंचकर अधिकारियों की बैठक बुलाई और तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए नई रणनीतियां लागू कीं, जिससे आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सका। प्रधानमंत्री मोदी की सराहनाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन की भव्यता और सफलता की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। उन्होंने इसे भारतकी सनातन संस्कृति की एकता और शक्ति का परिचायक बताया। प्रधानमंत्री ने मां गंगा, यमुना और सरस्वती से प्रार्थना करते हुए श्रद्धालुओं की सेवामें किसी भी कमी के लिए क्षमा भी मांगी। सफाईकर्मियों का सम्मान और स्वच्छता अभियानमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ की सफलता में योगदान देने वाले सफाईकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों, नाविकों, बस चालकों और पुलिसकर्मियोंका विशेष रूप से सम्मान किया। उन्होंने अरैल घाट पर खुद झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया और गंगा पूजन किया। इसके साथ ही, सफाईकर्मियों के लिए 10,000 रुपये के बोनस की घोषणा भी की गई। सनातन संस्कृति की भव्यता से विश्व अचंभितमहाकुंभ 2025 ने न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सनातन संस्कृति की दिव्यता और एकता को दर्शाया। जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव से ऊपरउठकर 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, जो वैश्विक स्तर पर एक अद्वितीय दृश्य था। इस आयोजन ने भारतीय परंपराओं कीव्यापक स्वीकृति को और मजबूत किया। विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाबमहाकुंभ के दौरान विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा), ने भगदड़ और अन्य घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष नेदावा किया कि भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की जान गई, जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 30 थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनआरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुष्प्रचार बताया। उन्होंने 2013 और 2025 के महाकुंभ आयोजनों की तुलना करते हुए कहा कि यहआयोजन भव्यता और सुचारू प्रबंधन का उदाहरण था। महाकुंभ 2025 की ऐतिहासिक उपलब्धिमहाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की संस्कृति, श्रद्धा और एकता का अद्भुत संगम बना। इसकी सफलता ने विश्वपटल पर सनातन परंपराओं की महिमा को पुनः स्थापित किया। यह आयोजन प्रशासनिक दक्षता, धार्मिक भव्यता और भारतीय संस्कृति की शक्ति काप्रतीक बन गया।