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जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने दिया बड़ा सुझाव,अमेरिका भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों के साथ

जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था काफी उथल-पुथल का सामना कर रही है इस पर कर सुधार और विनियमन के संभावितसकारात्मक पहलू व टैरिफ व व्यापार युद्ध के संभावित नकारात्मक पहलू का असर पड़ रहा है. डिमॉन ने भारत और ब्राजील जैसे देशों के बारे में क्याकहा है.जेपी मॉर्गन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमॉन ने चेताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से हाल ही में घोषित टैरिफउपायों से महंगाई बढ़ सकती है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है. शेयरधारकों को लिखे अपने सालाना पत्र में उन्होंने यहभी सुझाव दिया है कि अमेरिका को भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध विकसित करने चाहिए बजाय इसके कि वह इन देशोंपर अपनी नीतियां थोपे.उन्होंने कहा हाल ही में लगाए गए टैरिफ से महंगाई बढ़ने की संभावना है और इससे कई लोग मंदी की आशंका जता रहे हैं. जेपी मॉर्गन के सीईओ ने आगाह किया कि बाजार का मूल्यांकन अपेक्षाकृत उच्च बना हुआ है. उन्होंने सोमवार को कहा ये महत्वपूर्ण है और कुछ हदतक अभूतपूर्व ताकतें हमें बहुत सतर्क रहने के लिए मजबूर करती हैं. डिमॉन ने कहा कि भले ही टैरिफ से मंदी न आए लेकिन इससे विकास धीमा होजाएगा.अर्थव्यवस्था काफी उथल-पुथलडिमॉन ने कहा अर्थव्यवस्था काफी उथल-पुथल का सामना कर रही है जिसपर कर सुधार और विनियमन के संभावित सकारात्मक पहलू व टैरिफ और”व्यापार युद्ध” के संभावित नकारात्मक पहलू का असर पड़ रहा है. इसके अलावा मुद्रास्फीति, अधिक राजकोषीय घाटा, परिसंपत्तियों का उच्चतममूल्य और बाजार की अस्थिरता भी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही है.डिमॉन के अनुसार टैरिफ के कारा कुछ महत्वपूर्ण अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकतेहैं. उन्होंने कहा हाल फिलहाल में हमें महंगाई के परिणाम देखने को मिल सकते हैं. इसका असर न केवल आयातित वस्तुओं पर बल्कि घरेलू कीमतोंपर भी पड़ेगा. इससे इनपुट लागत में वृद्धि होगी और घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका के अपने कुछ निकटतम सहयोगियों केसाथ व्यापार समझौते नहीं है. और वाशिंगटन मित्रतापूर्ण हाथ बढ़ाकर भारत जैसे गुटनिरपेक्ष देशों को करीब ला सकता है.डिमॉन ने कहा प्रमुखव्यापारिक साझेदारों के साथ उच्च-मानकों के आधार पर व्यापार करने से अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है. यह एक अच्छी जियो पॉलिटिक्स है हमेंभारत और ब्राजील जैसे कई गुटनिरपेक्ष देशों पर अपनी नीतियां थोपने की जरूरत नहीं है. लेकिन हम व्यापार और निवेश के जरिए मित्रतापूर्ण हाथबढ़ाकर उन्हें अपने करीब ला सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर शुल्क बढ़ाकर 26% कर दिया है और ब्राजील सेआयातित उत्पादों पर 10% टैरिफ लगा दिया है.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वक्फ कानून को लेकर जमकर हंगामा, नेकां और पीपुल्स कांफ्रेंस विधायकों के बीत झड़प

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को दूसरे दिन भी वक्फ कानून पर हंगामा जारी है नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव के पर भाजपा विधायकों ने विरोधकिया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक वक्फ कानून पर चर्चा की मांग पर अड़े हैं.दूसरे दिन हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही शुरू हुई इस दौरान नेकांऔर पीपुल्स कांफ्रेंस के बीच नोकझोंक हुई. नेकां और पीडीपी विधायकों के बीच भी बहस हुई। नेकां के विधायक वक्फ कानून पर विधानसभा मेंबहस की मांग पर अड़ गए.आज सदन में हंगामे और विवाद के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही रोकनी पड़ी. पीडीपी विधायक वाहिद परा को स्पीकरके आदेश पर मार्शलों द्वारा बाहर निकाले जाने के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई.सदन में आम आदमी पार्टी के विधायक महाराज मलिकऔर भाजपा विधायक विक्रम रंधावा द्वारा मुफ्ती पर की गई टिप्पणी के बाद पीडीपी प्रवक्ता मोहित और आप विधायक महाराज मलिक के बीचतीखी बहस हुई। इस बहस ने सदन का माहौल गर्म कर दिया. बाद में स्पीकर ने सदन को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया ताकि सब कुछ शांत होजाए. लेकिन इसके बावजूद प्रश्नकाल की कार्यवाही दूसरे दिन भी नहीं हुई. वक्फ कानून को लेकर हंगामाइस घटनाक्रम ने सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया.इससे पहले सोमवार को वक्फ कानून पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआसत्ता पक्ष के विधायकों ने इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया. भाजपा ने इसका विरोध किया। इससे मामला गरमा गया। दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंकहुई। कांग्रेस विधायक इरफान अहमद लोन और भाजपा विधायक सतीश शर्मा के बीच धक्का-मुक्की हो गई विधेयक के विरोध में लिखे नारों केकागज फाड़ दिए गए. विधानसभा के बजट सत्र का 13 दिनों बाद शुरू हुआ दूसरे चरण का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया. सुबह प्रश्नकाल केशुरू होते ही सत्तापक्ष के तनवीर सादिक, कांग्रेस, पीडीपी व निर्दलीय विधायकों ने वक्फ कानून पर बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की. इसे स्पीकर एडवोकेट अब्दुल रहीम राथर ने खारिज कर दिया. उन्होंने विधानसभा के नियम 58 के उप नियम सात का हवाला दिया कहा न्यायालय मेंविचाराधीन मामलों पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती. इसका सत्तापक्ष के विधायकों व सहयोगियों ने विरोध जताया वे वेल की तरफ आए औरनारेबाजी करने लगे.भाजपा विधायकों ने कानून के समर्थन में की नारेबाजीवहीं भाजपा विधायकों ने कानून के समर्थन में नारेबाजी की. कहा जिस कानून को देश के सदन ने पास किया है उस पर जम्मू-कश्मीर की विधानसभा मेंचर्चा नहीं हो सकती है.कहा सत्तापक्ष इस मामले में लोगों को गुमराह कर रहा है. तीखी नोक-झोंक के बीच नेकां विधायक सलाम सागर सज्जादशहीन, तनवीर सादिक सहित अन्य विधायक वेल की तरफ बढ़े और वक्फ कानून के विरोध में पर्चे लहराए. सलमान ने प्रश्नकाल के पर्चे फाड़े तोतनवीर सादिक ने अपनी काली बास्केट फाड़कर विरोध जताया. विधायकों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल आबादी वाला प्रदेश है. यहां वक्फपर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है तमिलनाडु में इसके लिए प्रस्ताव पारित हुआ है. यह कानून मुस्लिमों पर थोपा गया है इस पर चर्चा करना सांविधानिकअधिकार है. नोक झोंक के बीच सुबह दस से 11 बजे तक का प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया. दिनभर कार्यवाही नहीं हो पाई दो बार सदन कीकार्यवाही स्थगित करने के बाद दोपहर 1:15 बजे स्पीकर ने फिर से कार्यवाही शुरू की. लेकिन विरोध को देखते हुए कार्यवाही को पूरे दिन के लिएस्थगित कर दिया गया.

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना जाहिर की निराशा, कहा बांग्लादेश को विकास के मॅाडल के तौर पर जाता था देखा

शेख हसीना ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि एक समय बांग्लादेश को विकास के मॉडल के तौर पर देखा जाता था. लेकिन आज वह देश आतंकीदेश में बदल चुका है. हमारे नेताओं को जिस तरह से मारा गया. उसे बताया भी नहीं जा सकता.बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा है किअल्लाह ने उन्हें किसी वजह से ही अब तक जिंदा रखा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अवामी लीग के सदस्यों की हत्या की है उन्हें न्याय के कटघरे मेंलाया जाएगा. शेख हसीना ने बांग्लादेश में हिंसा में मारे गए अवामी लीग के नेताओं के परिजनों से वर्चुअली बात करते हुए ये बात कही। शेख हसीनाको हिंसा के चलते बीते साल अगस्त में पीएम पद के साथ ही देश भी छोड़ना पड़ा था.शेख हसीना ने इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार केमुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर निशाना साधा और कहा कि ‘मोहम्मद यूनुस ऐसे व्यक्ति हैं.जिन्होंने कभी भी लोगों से प्यार नहीं किया. पूर्व पीएम ने खोया था अपना परिवारउन्होंने लोगों को ऊंची ब्याज दर पर लोगों को थोड़े-थोड़े पैसे ब्याज पर दिए और उस पैसे से विदेश में आलीशान जिंदगी गुजारी. हम भी उनके दोहरेचरित्र को समझ नहीं सके और हमारी सरकार ने भी उनकी मदद की. लेकिन लोगों को इससे फायदा नहीं हुआ. मोहम्मद यूनुस ने सत्ता की भूख कीवजह से ही अब बांग्लादेश जल रहा है.शेख हसीना ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि ‘एक समय बांग्लादेश को विकास के मॉडल के तौर पर देखाजाता था. लेकिन आज वह देश आतंकी देश में बदल चुका है हमारे नेताओं को जिस तरह से मारा गया. उसे बताया भी नहीं जा सकता अवामी लीगके नेता, पुलिस, वकील पत्रकार और कलाकार सभी को निशाना बनाया जा रहा है. पूर्व पीएम ने कहा कि ‘मैंने अपने पिता, माता, भाई और परिवार केसभी सदस्यों को एक दिन खो दिया था. शेख हसीना ने दी जानकारीउस वक्त भी मुझे देश लौटने नहीं दिया गया था मैं किसी अपने को खोने के दर्द को समझती हूं. अल्लाह ने मुझे बचाया और वह मुझसे कुछ अच्छाकाम कराना चाहता है जो लोग अपराध कर रहे हैं, उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाएगा। ये मेरा वादा है.शेख हसीना ने कहा कि ‘अल्लाह ने उन्हें किसीवजह से ही जिंदा रखा है और मैं जल्द वापस लौटूंगी. शेख हसीना का यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है जब बांग्लादेश की सरकार शेख हसीना केप्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है और जब हाल ही में बिम्सटेक सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की थाईलैंड में मुलाकात हुई थी. उसवक्त भी मोहम्मद यूनुस ने शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग उठाई थी. प्रधानमंत्री मोदी ने भी मोहम्मद यूनुस के सामने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकहिंदुओं के खिलाफ हमलों की घटनाओं पर चिंता जाहिर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को रखा बरकरार,अतिरिक्त शिक्षक पदों की CBI जांच नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था. जिसमें पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में25,000 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण नौकरियों की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था. इसके बाद पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बीतेदिन एक याचिका दायर कर आदेश में संशोधन की मांग की थी.सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल कैबिनेट की ओर से अतिरिक्त पदों के सृजन के फैसले कीसीबीआई जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के एक हिस्से को खारिज कर दिया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के अन्य पहलुओं के संबंध में सीबीआई जांच जारी रहेगी.दरअसल कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के उसहिस्से को खारिज किया गया है. जिसमें राज्य सरकार की ओर से संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में अतिरिक्त पदों के सृजन के पश्चिम बंगालकैबिनेट के फैसले की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. सीबीआई जांच रहेगी जारीहालांकि शीर्ष कोर्ट ने साफ किया कि 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े अन्य पहलुओं की सीबीआई जांच जारी रहेगी.अतिरिक्तपद से मतलब ऐसे अस्थायी पद से है जो किसी ऐसे कर्मचारी को समायोजित करने के लिए सृजित किया गया हो.जो किसी ऐसे नियमित पद काहकदार हो जिसका वर्तमान में कोई वजूद नहीं है.अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कैबिनेट के खिलाफसीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट का निर्देश अनावश्यक था. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के उस हिस्से को रद्द कर दिया है. अब सीबीआई कैबिनेटके फैसले के लिए कैबिनेट सदस्यों के खिलाफ जांच नहीं कर सकती है. यह अन्य चीजों के लिए नहीं है सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीबीआईजांच के निर्देश को छोड़कर अन्य सभी अदालती आदेश लागू रहेंगे.इससे पहले मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने 3 अप्रैल को 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को भ्रष्ट और दागदार करार दिया था.