आतंकी हमले के बाद भारत ने उठाए पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम,FTF की ग्रे सूची में शामिल कराने की कोशिश

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठा चुका भारत अब आतंकवाद के पनाहगाह पर आर्थिक शिकंजा कसने कीतैयारी में है. इस रणनीति के तहत भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से पाकिस्तान को दिए गए ऋणों की समीक्षा करने को कहा है. साथही उसने पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में शामिल कराने की कोशिश भी शुरू कर दी है. एफएटीएफ की ग्रे सूचीमें शामिल होने और आईएमएफ के ऋण मंजूरी नहीं देने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगेगा. एक भारतीय सरकारी सूत्र ने शुक्रवारको बताया कि भारत ने आईएमएफ के समक्ष पाकिस्तान को दिए गए ऋण पर चिंता जताई और इसकी समीक्षा करने की मांग की है. सूत्र ने बतायाकि पाकिस्तान ऋण से मिले पैसों का इस्तेमाल आतंकी हमलों और नापाक गतिविधियों में कर रहा है. आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड विस्तारितवित्तपोषण सुविधा की पहली समीक्षा के लिए 9 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात करेगा. तकनीकि सहायता देने की जताई थी प्रतिबद्धताआईएमएफ बोर्ड अपने जलवायु लचीलापन ऋण कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब डॅालर की नई व्यवस्था का मूल्यांकन करेगा. साथही वह पहले जारी 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज का भी आकलन करेगा.पिछले साल एशियाई विकास बैंक ने पाकिस्तान को 764 सार्वजनिकक्षेत्र के ऋण, अनुदान और तकनीकी सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई थी. इसकी कुल कीमत 43.4 अरब डॉलर है. इसके अलावा इस साल जनवरीमें विश्व बैंक ने पाकिस्तान के लिए 20 अरब डॉलर के ऋण पैकेज को मंजूरी दी थी.ताकि नकदी की कमी से जूझ रहे देश को अपनी चुनौतियों सेउबरने में मदद मिल सके. भारत एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक से पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद और ऋण पर पुनर्विचार करने कोकहेगा. भारत ने की ग्रे सूची में शामिल करने की कोशिशभारत का कहना है कि पड़ोसी मुल्क अंतरराष्ट्रीय मंचों से मिलने वाली आर्थिक सहायता और ऋण का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियोंमें करता है.भारत ने पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे सूची में शामिल कराने की अपनी कोशिश शुरू कर दी है. वैश्विक संस्था एफएटीएफ मनीलॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण पर नजर रखती है इसकी बैठक अगले महीने जून में होनी है एफएटीएफ का फैसला लेने वाला निकाय प्लेनरीसाल में तीन बार फरवरी, जून और अक्तूबर में बैठक करता है. इनमें सदस्य देश एक दूसरे के कामकाज की समीक्षा करते हैं इन रिपोर्ट के आधार परकिसी देश को ग्रे या ब्लैक सूची में डाला जाता है. ग्रे सूची में उन देशों को डाला जाता है जो पैसों की हेराफेरी करते हैं और आतंकवाद को रोकनेसंबंधी नियमों का पालन करने में नाकाम रहते हैं.
पहलगाम आतंकी हमले की साजिश में पाकिस्तान सेना की ISI भी है शामिल, मोबाइल का डाटा खंगाल रही NIA

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में पहलगाम आतंकी हमले में लश्कर-ए-ताइबा के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई औरवहां की सेना की मिलीभगत का खुलासा हुआ है. एनआईए ने कश्मीर घाटी के करीब 20 ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) की पहचान की है. इन परहमलावर आतंकियों की मदद करने का आरोप है एजेंसी इन सभी से पूछताछ कर रही है. सूत्रों के अनुसार एनआईए जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंददो ओजीडब्ल्यू निसार अहमद उर्फ हाजी तथा मुश्ताक हुसैन से भी पूछताछ करेगी. जांच में पता चला कि लश्कर ने आईएसआई और पाकिस्तानी सेनाके साथ मिलकर पहलगाम के बायसरन में हुए आतंकी हमले की साजिश रची थी. दो हमलावर हाशमी मूसा उर्फ सुुलेमान और अली भाई उर्फ तल्हापाकिस्तानी नागरिक हैं. ये पाकिस्तान में बैठे अपने सरगनाओं के लगातार संपर्क में थे और उनसे निर्देश ले रहे थे जांच में खुलासा हुआ कि हमलावरहमले से कुछ हफ्ते पहले ही सीमापार से घुसपैठ कर कश्मीर में दाखिल हुए थे. उन्हें इसमें स्थानीय ओजीडब्ल्यू ने मदद की इन स्थानीय लोगों नेआतंकियों को रहने की जगह मुहैया कराने के साथ ही पूरे इलाके के चप्पे-चप्पे की जानकारी दी और आने-जाने में सहायता की. घाटी में मिलें 40 से ज्यादा कारतूसइसको लेकर सूत्रों का कहना है कि आतंकियों ने बायसरन घाटी, अरु घाटी, बेताब घाटी और एक स्थानीय मनोरंजन पार्क की रेकी की थी. सुरक्षाव्यवस्था कम होने के चलते हमलावरों ने बायसरन को अपना निशाना बनाया.एनआईए को बायसरन घटनास्थल से 40 से अधिक कारतूस बरामद हुएहैं. इनकी जांच कराई जा रही है एनआईए ने बायसरन इलाके का 3डी नक्शा भी बनवाया है और आसपास के मोबाइल टॉवरों से डाटा निकालकरजानकारी जुटाई जा रही है कि हमले से कुछ दिन पहले इलाके में सैटेलाइट फोन की गतिविधियां बढ़ गई थीं. बायसरन और इसके आसपास केइलाकों में तीन सैटेलाइट फोन सक्रिय थे इनमें से दो के सिग्नल का पता लगाया गया और विश्लेषण किया गया. एनआईए अब तक 2800 सेअधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा 180 से अधिक लोग अभी हिरासत में हैं. हिरासत में लिए गए संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर, जमात-ए-इस्लामी और हुर्रियत के विभिन्न गुटों से जुड़े लोग हैं. एजेंसी पहलगाम के आसपास के मार्गों और सार्वजनिक जगहों के सीसीटीवी फुटेज भीखंगाल रही है.पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही पाकिस्तान डरा हुआ है वह भारत की जवाबी कार्रवाई के डर से छटपटा रहा है. दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा परपहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. पाकिस्तान कसे डर है किभारत सर्जिकल और एयर स्ट्राइक से भी खतरनाक ऑपरेशन कर पहलगाम के मासूम लोगों का बदला लेने की तैयारी कर रहा है.जम्मू-कश्मीर केपहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी. सेना की वर्दी में आएदहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा परिचय पत्र देखे और फिर गोली मार दी थी. इसके बाद से भारत नेकई मोर्चों पर पाकिस्तान की नींदें उड़ा रखी है. सिंधु जल संधि के निलंबन से लेकर पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने तक भारत ने पाकिस्तानपर कई पाबंदियां लगा दी हैं. पाकिस्तान भी अनरगल बयानबाजी कर रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है.
इस्राइल ने रोकी गाजा पट्टी में मानवीय सहायता,बच्चों से लेकर बड़े तक कर रहे भुखमरी का सामना

इस्राइल ने गाजा पट्टी में मानवीय सहायता रोक दी है जिससे वहां भुखमरी का आलम है बच्चों से लेकर बड़ों तक भोजन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आलम यह है कि लोग थोड़े से चावल के लिए भी भीख मांग रहे हैं खाने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है जिसके चलते उन्हें धक्का-मुक्कीका सामना करना पड़ रहा है. दक्षिणी गाजा के खान यूनिस में शुक्रवार को भोजन पाने के लिए संघर्ष के चलते सामुदायिक रसोई पर भारी भीड़ जमा होगई. जिससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। निवेन अबू अरार नामक 33 वर्षीय महिला वहां समय पर नहीं पहुंच सकी. जिसके चलते उसेखाली हाथ लौटना पड़ा उसकी आखों में आंसू भरे थे. अबू अरार आठ बच्चों की मां है और उसका नौवां बच्चा (लड़का) 2023 की युद्ध की शुरुआत मेंइस्राइली हमले में मारा जा चुका है. छोटे बच्चे को गोद में लिए अबू अरार ने कहा कि आखिर कब तक जिंदगी ऐसी ही रहेगी। हम धीरे-धीरे मर रहे हैं. दरअसल उन्होंने बताया कि हमने डेढ़ महीने से रोटी नहीं खाई है। आटा नहीं है हमें नहीं पता कि क्या करना है हमारे पास पैसे नहीं हैं. हम बच्चों केलिए क्या लाएं समझ में नहीं आ रहा है. अबू ने दूध न होने के कारण बच्ची की बोतल में पानी डाला ताकि उसकी भूख मिट सके.बीते दो महीने सेइस्राइल ने गाजा में खाना दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें भेजना बंद कर दिया है. सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि गाजा की नागरिक आबादीभुखमरी का सामना कर रही है वहीं इस्राइल का कहना है कि उसने यह सब इसलिए किया है. ताकि आतंकवादी संगठन हमास पर बंधकों की रिहाई केलिए दबाव डाला जा सके वहीं सहायता समूहों का कहना है कि मानवीय सहायता रोकना सामूहिक दंड है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघनहै.भुखमरी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के बारे में पूछे जाने पर इस्राइली अधिकारियों ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. हमास पर लगाया सहायता चुराने का आरोपहालांकि अतीत में उन्होंने आतंकवादी समूह हमास पर सहायता चुराने का आरोप लगाया है. गाजा में मानवीय संकट पर चर्चा करने के लिए सहायतासमूहों से पत्रकारों ने बात की इस दौरान उन्होंने बताया कि गाजा में अब लगभग कुछ भी नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि न तो खाना है और न ही पानीऔर ईंधन जो थोड़ा-बहुत बचा है उसकी कीमत बहुत ज्यादा है. गरीब लोगों की पहुंच से बाहर है.संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गाजा की लगभग पूरीआबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है। गोदाम खाली हैं. सामुदायिक रसोई बंद हो रही हैं और परिवार भोजन छोड़ रहे हैं गाजा में ऑक्सफैम केमीडिया समन्वयक गदा अल हद्दाद ने बताया कि 25 किलोग्राम आटे का एक बैग अब 1,300 शेकेल (360 अमेरिकी डॉलर) में मिलता है. उन्होंनेबताया कि मां अपने बच्चों को दिन में एक बार यानी रात का खाना खिलाती हैं. जिससे कि वह सुबह उठकर भूखे रहने की शिकायत न कर सकें.
सुपरस्टार आमिर खान ने भारत को बताया फिल्मों से प्रेम करने वाला देश, बोले पहली बार किसी सरकार ने भारत को मनोरंजन में अगुआ बनानेकी ठानी

सुपरस्टार आमिर खान ने शुक्रवार को कहा कि भारत फिल्मों से प्रेम करने वाला देश है लेकिन यहां के अधिकांश लोगों की सिनेमा हॉल तक पहुंच नहींहै. जबकि अमेरिका और चीन जैसे देश स्क्रीन की संख्या के मामले में काफी आगे हैं आमिर ने कहा पिछले 35 साल में कई सरकारें रहीं लेकिन किसीहमारे बारे में नहीं सोचा. यह पहली बार है जब किसी सरकार ने ठाना कि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लिए कुछ किया जाए इंडिया को इसमें लीडरबनाया जाए.यहां पहले विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) के दूसरे दिन आमिर खान ने ‘भविष्य के स्टूडियो विश्व स्टूडियो मानचित्रपर भारत’ शीर्षक सत्र में भाग लिया. आमिर ने कहा कि मनोरंजन उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश की गंभीरआवश्यकता है. उन्होंने कहा भारत में और अधिक सिनेमाघरों की आवश्यकता है. देश में ऐसे जिले हैं जहां एक भी थिएटर नहीं है.उन्होंने कहा कि यहांतक कि ब्लॉकबस्टर फिल्में भी भारतीयों का एक छोटा हिस्सा ही उन्हें सिनेमाघरों में देख पाता है. केवल दो प्रतिशत आबादी ही सिनेमाघरों में हमारीसबसे बड़ी हिट फिल्में देखती है. बाकी 98 प्रतिशत लोग कहां फिल्म देखते हैं. निवेश को लेकर बोले आमिरअभिनेता ने कहा मेरे हिसाब से हमें इसमें निवेश करना चाहिए. भारत में अपार संभावनाएं हैं लेकिन इसका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब देशभरमें अधिक स्क्रीन होंगी. अगर ऐसा नहीं होगा तो लोग फिल्में नहीं देखेंगे आमिर ने कहा कि सिनेमा स्क्रीन की संख्या के मामले में भारत अमेरिका औरचीन से काफी पीछे है.आमिर ने कहा देश के आकार और आबादी के हिसाब से हमारे पास बहुत कम सिनेमाघर हैं. मुझे लगता है कि हमारे पास करीब10,000 स्क्रीन हैं. अमेरिका जिसकी आबादी भारत की एक-तिहाई है 40,000 स्क्रीन हैं. इसलिए वे हमसे बहुत आगे हैं चीन में 90,000 स्क्रीन हैंउन्होंने कहा इन 10,000 में से भी आधे दक्षिण में हैं और बाकी आधे देश के बाकी हिस्सों में हैं. इसलिए एक हिंदी फिल्म के लिए आमतौर पर यहकरीब 5,000 स्क्रीन होती है.आमिर खान ने इस बात पर भी दुख जताया कि भारत के कई क्षेत्रों में जिनमें कोंकण जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. फिल्मों के बारे में सुनेंगे और देखेंगे ऑनलाइन चर्चादरअसल वहां पर कोई सिनेमाघर नहीं हैं उन क्षेत्रों में लोग फिल्मों के बारे में सुनेंगे ऑनलाइन चर्चा देखेंगे. लेकिन उनके पास इन फिल्मों को देखने काकोई तरीका नहीं है यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. इसलिए पहली चीज जो हमें करने की जरूरत है वह यह है कि हमारे पास अधिक स्क्रीन होनीचाहिए.आमिर ने कहा कि किसी फिल्म के थियेटर में रिलीज होने और स्ट्रीमिंग पर आने के बीच का समय बहुत छोटा होता है. उन्होंने कहा आप अपनाखुद का व्यवसाय खत्म कर रहे हैं. पहले फिल्में थियेटर में आती थीं और एक साल बाद सैटेलाइट पर आती थीं. फिर यह सैटेलाइट पर आठ और छहमहीने बाद आने लगी. इसलिए एक दर्शक के रूप में मेरे पास एक विकल्प है कि मैं थिएटर में फिल्म देख सकता हूं या मैं छह महीने तक इंतजार करसकता हूं और सैटेलाइट पर देख सकता हूं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने की सुप्रीम कोर्ट से अपील,DOGE को सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों तक दें पहुंच

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से एक अपील की. जिसमें कहा गया है कि एलन मस्क के सरकारी दक्षताविभाग (DOGE) को अमेरिका के लाखों लोगों के निजी डेटा वाले सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों तक पहुंचने की अनुमति दी जाए. यह अपील मैरीलैंडके एक न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ की गई है जिसमें उन्होंने संघीय गोपनीयता कानूनों के तहत मस्क की टीम की सामाजिक सुरक्षा तक पहुंचको प्रतिबंधित कर दिया था.न्यायालय के दस्तावेजों के अनुसार सामाजिक सुरक्षा अमेरिका में लगभग सभी लोगों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड रखती है. जिसमें स्कूल रिकॉर्ड, बैंक विवरण, वेतन, विकलांगता प्राप्तकर्ताओं के लिए चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवदेनशील दस्तावेज शामिल हैं.ट्रंप सरकार का कहना है कि DOGE टीम को सरकारी खर्चों और गड़बड़ियों की जांच करने के लिए इस डेटा की जरूरत है. एलन मस्क ने सामाजिक सुरक्षा को पोंजी स्कीम बताया है उन्होंनेदावा किया है कि सामाजिक सुरक्षा में कथित धोखाधड़ी और पैसे की बर्बादी होती है.DOGE टीम डाल रही है काम में बाधावह इसे रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर ने शुक्रवार को तर्क दिया कि सामाजिक सुरक्षा डेटा तक पहुंच में न्यायाधीशका प्रतिबंध DOGE टीम के महत्वपूर्ण कार्य में बाधा डाल रहा है. यह सरकार के फैसलों में अनुचित रूप से हस्तक्षेप है उन्होंने लिखा अप्रभावित रहनेपर यह प्रारंभिक निषेधाज्ञा केवल आंतरिक एजेंसी निर्णय लेने में न्यायिक हस्तक्षेप को आमंत्रित करेगी. सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से कहाकि वे मैरिलैंड में यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एलेन हॉलैंड के आदेश को रोक दें. क्योंकि मुकदमा चल रहा है एक अपील अदालत ने पहले DOGE कीसामाजिक सुरक्षा तक पहुंच पर रोक को तुरंत हटाने से इनकार कर दिया था हालांकि इस दौरान जजों के बीच वैचारिक मतभेद रहे. अल्पमत मेंरूढ़िवादी न्यायाधीशों ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि DOGE टीम ने कोई ‘लक्षित जासूसी’ की है या व्यक्तिगत जानकारी उजागर कीहै.सेवानिवृत्त लोगों के एक समूह द्वारा किया गया था मुकदमामुकदमा मूल रूप से डेमोक्रेसी फॉरवर्ड समूह द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए श्रमिक संघों और सेवानिवृत्त लोगों के एक समूह द्वारा दायर किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने उनसे 12 मई तक प्रशासन की अपील पर जवाब मांगा है.DOGE के काम को लेकर अब तक 24 से अधिक मुकदमे दायर किए जाचुके हैं. इनमें संघीय एजेंसियों में भारी कटौती और बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी शामिल है. यूएस डिस्ट्रिक्ट जज हॉलैंड का कहना है किसामाजिक सुरक्षा में DOGE के प्रयास धोखाधड़ी के संदेह के आधार पर की जा रही एक बड़ी खोजबीन जैसी लगती है. हॉलैंड के आदेश सेDOGE कर्मियों को गुमनाम बनाए गए डेटा तक पहुंचने की अनुमति मिलती है लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि DOGE उन प्रतिबंधों के साथप्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकता है.