जामा मस्जिद सर्वे बवाल की साजिश में सांसद जियाउर्रहमान बर्क और कमेटी सदर जफर अली मुख्य आरोपी, पुलिस चार्जशीट में खुलासा

जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल का मुख्य साजिशकर्ता तो पुलिस ने सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अलीएडवोकेट को माना है. चार्जशीट में इसका उल्लेख भी किया गया है. इसके अलावा सांसद के व्यक्तिगत सहायक अब्दुल रहमान के पिता रिजवान कीभूमिका भीड़ को एकत्र करने में सामने आई है. सांसद के कहने पर रिजवान ने ही फोन कर जामा मस्जिद के आसपास इलाके के साथ सरायतरीन सेभीड़ को सर्वे रोकने के लिए बुलाया था. यह सभी खुलासे रिजवान की सीडीआर सामने आने के बाद हुए थे. पुलिस ने चार्जशीट में लिखा है किरिजवान जामा मस्जिद में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर काम भी करता है. पुलिस ने आगे की छानबीन की तो भीड़ एकत्र करने की पुष्टि हुई। जिन लोगों सेफोन पर बातचीत हुई थी. बवाल की साजिश में गए थे पाएउनकी भूमिका की जांच करने पर वह भी बवाल की साजिश में शामिल पाए गए. इन सभी 23 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीटफाइल कर दी है. इसमें कुछ गिरफ्तार किए गए हैं जबकि कुछ को धारा 35 (3) का नोटिस दिया गया है.चार्जशीट के अनुसार 24 नवंबर की सुबहसर्वे होगा. इसकी जानकारी जब जामा मस्जिद कमेटी के सदर को हुई तो उन्होंने 23 नवंबर की देर रात में ही सबसे पहले यह सूचना सांसद को दी थी. सांसद ने कहा था कि सर्वे नहीं होने देना है. भीड़ को एकत्र किया जाए और इसके बाद रिजवान के फोन पर भी कई बार सांसद ने बातचीत की. जिसमेंभीड़ को एकत्र करने और सर्वे होने से रोकने का संदेश दिया गया. इसके चलते सर्वे को रोकने के लिए बड़ी तादाद में भीड़ एकत्र हुई और बवाल कियाजफर अली पर आरोप है कि उन्होंने पूरी साजिश को सांसद के साथ मिलकर रचा और बवाल के बाद प्रेसवार्ता कर झूठे बयान दिए. अपराध के संबंध में गंभीर आरोपजो गंभीर अपराध के संबंध में दिए गए थे. अलग-अलग दौर की पूछताछ में वह कोई साक्ष्य नहीं दे सके और उन्होंने कबूल किया कि सांसद ने ही भीड़एकत्र करने के लिए कहा था. इसके बाद ही भीड़ एकत्र हुई जामा मस्जिद कमेटी सदर 23 मार्च से जेल में बंद हैं.सांसद ने 22 नवंबर को जामा मस्जिदके बाहर खड़े होकर कहा था कि मस्जिद का सर्वे गलत किया जा रहा है. यह मस्जिद थी और मस्जिद ही रहेगी इसी तरह की बयानबाजी से सांसद कीमुसीबत बढ़ी है. पुलिस ने चार्जशीट में इस बयान का जिक्र भी किया है और बवाल की जड़ इसी बयान से पनपने की बात कही है. इस बयान के बादअतिसंवेदनशील स्थिति बनी और 24 नवंबर को बवाल हो गया पुलिस इस बयान को भी सबूत के तौर पर अहम मान रही है. जिसको कोर्ट में पेशकिया जाएगा.
सीएम उमर अब्दुल्ला का विपक्ष पर वार “सत्ता में चुप थे महबूबा और सज्जाद”, अब आरक्षण पर कर रहे राजनीति

राब्ता कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद सीएम अब्दुल्ला ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन की आलोचनाकी. सीएम ने कहा कि वे आरक्षण को लेकर राजनीति कर रहे हैं उन्होंने कहा कि जब उनके पास मौका था तब उन्होंने भर्ती में आरक्षण का मुद्दा नहींउठाया. अब्दुल्ला ने सवाल उठाया और कहा जब महबूबा मुफ्ती को वोटों की जरूरत थी. तो उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्यों को आरक्षण के बारे मेंबात करने से भी सख्ती से मना कर दिया था जब अनंतनाग से चुनाव लड़ रही थीं और राजोरी और पुंछ से वोटों की जरूरत थी तब उन्होंने आरक्षण केबारे में बात क्यों नहीं की? जब ये सब हो रहा था. तब सज्जाद लोन पांच साल तक सरकार के करीब थे. सुरक्षा कर दी गई कमहमें हमारे सरकारी घरों से बेदखल कर दिया गया और हमारी सुरक्षा कम कर दी गई. जबकि वे सरकारी घर में बैठे थे उन्होंने तब आरक्षण के बारे मेंबात क्यों नहीं की? उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने छह महीने के भीतर आरक्षण रिपोर्ट पेश कर दी थी और यह पहली बार है. जब इस तरह कीप्रगति हुई है, अगर मुझे समय बर्बाद करना होता तो मैं उप-समिति को छह महीने और दे देता, तब वे क्या करते? क्या उनके पास मुझे छह महीने मेंयह रिपोर्ट पूरी करने के लिए मजबूर करने का कोई तरीका था? कैबिनेट ने उप-समिति की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और इसे कानून विभाग को उनकीटिप्पणियों के लिए भेज दिया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरक्षण मुद्दे पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और पीपुल्स कांफ्रेंस नेता सज्जाद लोन परराजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब ये नेता सत्ता में थे तब चुप थे, अब विपक्ष में आकर मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं.
भुवनेश्वर में पीएम मोदी का रोड शो, नई रेल लाइन से लेकर इलेक्ट्रिक बसों तक कई परियोजनाओं का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के दौरे पर है इस दौरान उन्होंने राजधानी भुवनेश्वर में रोड शो किया. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा सरकार केएक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भुवनेश्वर में राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता करेंगे. वह 18,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कईविकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. इन परियोजनाओं में पेयजल, सिंचाई, कृषि अवसंरचना, स्वास्थ्य अवसंरचना, ग्रामीणसड़कें और पुल, राष्ट्रीय राजमार्गों के खंड और एक नई रेलवे लाइन शामिल हैं. राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के साथ बौध के एकीकरण के ऐतिहासिक क्षण परपीएम मोदी पहली बार जिले में रेल संपर्क बढ़ाने वाली नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे. इसके साथ ही पीएम ओडिशा विजन दस्तावेज भीजारी करेंगे। यह 2036 के ऐतिहासिक वर्षों पर आधारित है जब ओडिशा भारत के प्रथम भाषाई राज्य के रूप में 100 वर्ष पूरे करेगा तथा 2047 जबदेश स्वतंत्रता के 100 वर्ष मनाएगा. राज्य की सफल महिलाओं को किया गया सम्मानितदरअसल वह राज्य की सफल महिलाओं को सम्मानित करने सहित कई अन्य पहलों का हिस्सा भी बनेंगे.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में आयोजित जनसभा में पहुंचे पर लोगों का अभिवादन किया. इस दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भीमौजूद रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भुवनेश्वर में राज्य स्तरीय समारोह की अध्यक्षता करेंगे. वह18,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भुवनेश्वर मेंआयोजित जनसभा में शामिल हुए. कुछ ही देर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18,600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओंका उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने भुवनेश्वर में राजधानी क्षेत्र शहरी परिवहन (सीआरयूटी) प्रणाली के अंतर्गत 100 इलेक्ट्रिक बसोंको हरी झंडी दिखाई.