इस्राइल-ईरान टकराव पर विराम अमेरिका ने टाला बड़ा युद्ध, तीनों देशों ने दिखाया अपनी-अपनी जीत का दावा

International News: इस्राइल के लिए यह ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह करने की सफलता है तो ईरान भी दुश्मन को कड़ा जवाब देने का दमभर सकता है, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान निदेशक अली वेज के मुताबिक इस्राइल की मदद के लिए सीधे तौर पर जंग में कूदकर दुनियाभर मेंसनसनी मचा देने वाला अमेरिका आखिरी मौके पर दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम कराकर एक बड़ा संघर्ष टालने का श्रेय ले सकता है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्पष्ट घोषणा के फिलहाल इस्राइल-ईरान के बीच जंग थम गई है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुकाम परयुद्ध रुकना इस्राइल, ईरान और अमेरिका तीनों के लिए अपनी-अपनी जीत का दावा करने का मौका साबित हो सकता है. संघर्ष टालने का ले सकता श्रेयविशेषज्ञों की मानें तो इस्राइल के लिए यह ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह करने की सफलता है तो ईरान भी दुश्मन को कड़ा जवाब देने का दम भरसकता है. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान निदेशक अली वेज के मुताबिक इस्राइल की मदद के लिए सीधे तौर पर जंग में कूदकर दुनियाभर मेंसनसनी मचा देने वाला अमेरिका आखिरी मौके पर दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम कराकर एक बड़ा संघर्ष टालने का श्रेय ले सकता है. सबसे बड़ासवाल है कि तीनों देश अपने-अपने चेहरे कैसे बचाएंगे तो जंग के बीच के घटनाक्रम पर गौर करें तो इसके सिरे इसी में छिपे मिल जाएंगे. ईरान कीसुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सोमवार को एक आपात बैठक की जिसमें अमेरिकी हमले का जवाब देने की रणनीति बनी क्योंकि ईरान कोअपना चेहरा बचाना था. अमेरिका के साथ मोर्चा लेने की नौबतयुद्ध की रणनीति बनाने से जुड़े चार अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई ने एक बंकर के अंदर से इसका निर्देश जारी किया. लेकिन साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया कि यह बेहद सीमित होना चाहिए ताकि सीधे तौर पर अमेरिका के साथ मोर्चा लेने की नौबत न आए. विशेषज्ञ मानरहे हैं कि पर्दे के पीछे जारी घटनाक्रम में ईरानी नेताओं को उम्मीद थी कि सीमित हमले और अग्रिम चेतावनी जारी किए जाने से राष्ट्रपति ट्रंप के रुख मेंनरमी आएगी और ईरान को पीछे हटने का रास्ता मिल सकेगा. और इससे वाशिंगटन की तरफ से इस्राइल पर हवाई हमले रोकने का दबाव भी डालाजा सकता है.ईरान की रणनीति कारगर भी साबित हुई ट्रंप ने बाद में कहा भी कि अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर दागी गई 14 में से 13 ईरानी मिसाइलेंपहले ही मार गिराई गईं और इसके कारण न्यूनतम नुकसान हुआ है. यही नहीं, ट्रंप ने पूर्व चेतावनी देने के लिए ईरानी नेतृत्व का आभार भी जताया. यही नहीं इस हमले के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम कराने की घोषणा भी कर दी.
गृह मंत्री अमित शाह का हमला “आपातकाल तानाशाही मानसिकता की उपज, 25 जून को मनाया संविधान हत्या दिवस

गृह मंत्री ने कहा कि आपातकाल परिस्थिति और मजबूरी की नहीं बल्कि तानाशाही मानसिकता और सत्ता की भूख की उपज होता है. शाह ने यह भीकहा कि 25 जून सभी को याद दिलाता है कि कांग्रेस सत्ता के लिए किस हद तक जा सकती है. देश में आपातकाल 25 जून 1975 को लगा थाजिसके 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर बुधवार को भाजपा देशभर में संविधान हत्या दिवस का आयोजन करेगी. विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के जरियेलोगों को आपातकाल के काले दौर की याद दिलाई जाएगी. जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में मीसा बंदियों का सम्मान किया जाएगा. आपातकाल की 50वीं बरसी की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में श्यामा प्रसाद मुखर्जी न्यास की ओर से आयोजित आपातकाल के 50 साल कार्यक्रम मेंशाह ने कहा कि जब 11 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय किया कि हर वर्ष 25 जून को संविधान हत्या दिवस मनाया जाएगा. देश में आपातकाल लगा था 25 जूनतब यह सवाल उठे कि 50 साल पहले हुई किसी घटना पर बात करके आज क्या हासिल होगा? उन्होंने कहा कि जब किसी अच्छी या बुरी राष्ट्रीयघटना के 50 साल पूरे होते हैं. तो सामाजिक जीवन में इसकी याद्दाश्त धुंधली हो जाती है और अगर आपातकाल जैसी लोकतंत्र की नींव हिलाने वालीघटना को लेकर समाज की याददाश्त धुंधली होती है तो यह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए बहुत बड़ा खतरा होता है.उन्होंने कहा कि मन के भावदरअसल मानव प्रकृति के भाव हैं, जो कभी न कभी दोबारा उभर कर देश और समाज के सामने चुनौती बनकर आ सकते हैं शाह ने कहा कि भारतलोकतंत्र की जननी है यहां तानाशाही को स्वीकार नहीं किया जा सकता. देश में आपातकाल 25 जून 1975 को लगा था. जिसके 50 वर्ष पूरे होने केमौके पर बुधवार को भाजपा देशभर में संविधान हत्या दिवस का आयोजन करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सत्ता के लिए किस हद तक जासकती है इसका सबसे बड़ा उदाहरण आपातकाल है इस दिन की याद दिलाना आवश्यक है ताकि युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के महत्व और उसकी रक्षाकी जिम्मेदारी का एहसास कराया जा सके.