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रथ नहीं रुका, आस्था रुकी है-कांग्रेस सांसद अरबिंद दास का सरकार पर तीखा प्रहार

पुरी की पवित्र धरती पर हर वर्ष होने वाली भगवान श्रीजगन्नाथ जी की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि उड़ीसा की आत्मा है। लेकिनइस वर्ष, इस परंपरा पर ऐसा आघात हुआ कि सदियों की आस्था सवालों के कटघरे में आ खड़ी हुई। उड़ीसा से कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद अरबिंद दास नेएक प्रेस वार्ता कर रथ यात्रा से जुड़ी अनियमितताओं और भाजपा सरकार की लापरवाहियों पर तीखा हमला बोला। 1 मीटर में रुकी रथ यात्रा – क्या अब श्रद्धा भी वीआईपी पास से चलेगी? अरबिंद दास ने बताया कि इस वर्ष की रथ यात्रा कुछ कदम चलते ही रोकदी गई। परंपरा अधूरी रह गई, और हजारों भक्तों की भावनाएं कुचली गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह यात्रा इसलिए रोकी गई क्योंकि कुछवीआईपी मेहमान, खासतौर पर कॉरपोरेट उद्योगपति गौतम अडानी के प्रतिनिधि, समय पर नहीं पहुंच सके। क्या अब भगवान जगन्नाथ को भी किसी”मुख्य अतिथि” के आने का इंतजार करना पड़ेगा? 5000 पास बांटे गए — भक्त नहीं, सत्ता के लोग शामिल – प्रेस वार्ता में अरबिंद दास ने खुलासा किया कि रथ यात्रा में लगभग 5000 विशेष पासबांटे गए, जो आम श्रद्धालुओं को नहीं, बल्कि भाजपा के विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिए गए। उन्होंने कहा, न प्रभु का आदर हुआ, नभक्तों का सत्कार। व्यवस्था केवल सत्ता और पैसे वालों के लिए थी। भगवान की यात्रा को बना दिया प्रचार का मंच – सांसद का कहना था कि यह रथ यात्रा अब भक्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक इवेंट बन चुकी है। मोहनमांझी की सरकार ने सदियों पुरानी इस परंपरा को कॉरपोरेट इवेंट में बदल दिया, जहां भगवा झंडों से ज़्यादा कैमरों की फ्लैश चमकती रही, और दर्शनकी जगह दिखावा हुआ। जनता डरी, क्या सरकार सुरक्षा दे सकती है? – इस अव्यवस्था और अविश्वास के माहौल में सवाल खड़ा होता है — क्या ऐसी सरकार पर भरोसा कियाजा सकता है? अरबिंद दास ने कहा, जब आस्था के सबसे बड़े पर्व में आम लोग असुरक्षित महसूस करें, तो वह सरकार अपने आप में असफल है। इसघटना ने लोगों के दिलों में शंका और भय पैदा कर दिया है। मृतकों के परिजनों को 50 लाख, घायलों को 25 लाख की सहायता की मांगप्रेस वार्ता में सांसद ने यह भी बताया कि रथ यात्रा में अव्यवस्था के कारण कई लोगों की मृत्यु हो गई और दर्जनों घायल हुए। उन्होंने सरकार से मांगकी कि मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए और घायलों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता तुरंत दी जाए। यह सरकार की नैतिक जिम्मेदारीहै।मोहन मांझी इस्तीफा दें, प्रभु से क्षमा मांगें – सांसद अरबिंद दास ने मुख्यमंत्री मोहन मांझी से इस्तीफे की मांग की और कहा कि उन्हें भगवान जगन्नाथसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने न केवल परंपरा का अपमान किया, बल्कि पूरी श्रद्धा को मज़ाक बना दिया।आस्था पर सत्ता का हस्तक्षेप कब तक? भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि उड़ीसा की आत्मा है। इसे किसी भीराजनीतिक या कॉरपोरेट हस्तक्षेप से अछूता और पवित्र रहना चाहिए। सांसद अरबिंद दास की इस मांग के साथ एक बड़ा सवाल खड़ा होता है क्याहम अपने धार्मिक मूल्यों को सत्ता के इशारों पर खोने को तैयार हैं?

शिक्षा में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा अंकुश नारंग-एक सशक्त बयान जो व्यवस्था की नींव को झकझोरता है

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अंकुश नारंग ने हाल ही में एक गंभीर मुद्दे पर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि शिक्षा केवल एक विभाग नहीं, बल्कि हमारे जीवन और समाज की बुनियाद है। जब दिल्ली सरकार में आम आदमी पार्टी सत्ता में थी, तब हर वर्ष शिक्षा के लिए 25% से 40% तकबजट आवंटित किया जाता था। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्कूलों में आधारभूत सुधार किए, अध्यापकों की स्थिति बेहतर की और विद्यार्थियों कोएक सम्मानजनक माहौल देने का प्रयास किया। नगर निगम के स्कूलों में भी बदलाव की उम्मीद थी – नारंग ने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी ने जब नगर निगम में कामकाज शुरू किया, तो यहीसोचकर आगे बढ़े थे कि नगर निगम के स्कूल भी सरकारी स्कूलों की तरह सुधरेंगे। लेकिन वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सिर्फ अरविंद केजरीवाल याआतिशी जैसे नेताओं से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि हर नागरिक को आगे आकर अपने स्तर पर योगदान देना होगा। भाजपा शासन में फैला भ्रष्टाचार शिक्षा पर सबसे बड़ा खतरा – उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में नगर निगम के अंदर जिसप्रकार भ्रष्टाचार फैल चुका है, वह चौंकाने वाला है। हाल ही में भाजपा ने एक सर्कुलर जारी कर सीनियरिटी सूची (वरिष्ठता सूची) तैयार करने की बातकही है। प्रश्न यह है कि भाजपा ने इतने वर्षों तक यह सूची क्यों नहीं बनाई? अब जब 2025 चल रहा है, तब यह 2002 तक की सूची बनाना केवलराजनीतिक लाभ लेने का प्रयास प्रतीत होता है।सीनियरिटी सूची में धांधली और नियमों की अवहेलना – नारंग ने सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी की वरिष्ठता उसीदिन से मानी जानी चाहिए, जिस दिन उसने सेवा में योगदान दिया हो। ऐसे में जब वरिष्ठता सूची ही गलत है, तो उस पर आधारित पदोन्नति (प्रमोशन) भी कैसे वैध हो सकती है? अपनों को लाभ देने के लिए बनाई गई फर्जी सूची – उन्होंने खुलासा किया कि भाजपा के कुछ पूर्व नेताओं ने 1997-98 में अपने नजदीकी लोगों कोनगर निगम के स्कूलों में नियुक्त कराया था, और अब उन्हीं लोगों को इस फर्जी वरिष्ठता सूची में डालकर अन्य मेहनती और वरिष्ठ शिक्षकों के ऊपरपदोन्नति दी जा रही है। यह न केवल अन्याय है, बल्कि पूरी प्रणाली के साथ छलावा है। अंकुश नारंग ने यह भी बताया कि हाल ही में नगर निगम ने46 शिक्षकों का स्थानांतरण (ट्रांसफर) किया है, जिनमें से 23 ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने कभी स्थानांतरण की मांग ही नहीं की थी। यह इसलिए कियागया ताकि भाजपा के नजदीकी 23 लोगों को मनचाही जगहों पर समायोजित किया जा सके। यह प्रक्रिया पूरी तरह से अपारदर्शी और मनमानी से भरीहुई है। मेयर को करनी चाहिए निष्पक्ष जांच – अंकुश नारंग ने दिल्ली के मेयर श्री राजा इकबाल से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सघन और निष्पक्ष जांचकरवाई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक या कर्मचारी का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्रका नुकसान है। अंकुश नारंग का यह बयान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने बच्चों के भविष्य से समझौता कर रहे हैं? यदि शिक्षामें पारदर्शिता, ईमानदारी और न्याय नहीं होगा, तो समाज का भविष्य भी अंधकारमय होगा। अब समय आ गया है कि हम शिक्षा को राजनीति से ऊपररखें और योग्य व्यक्तियों को उनका अधिकार दिलाएं।

विधायिका का अपमान या वोट बैंक की राजनीति, तेजस्वी के बयान पर भाजपा का पलटवार ” जानें क्या है पूरा मामला”

विपक्षी इंडी गठबंधन ने वक्फ कानून के खिलाफ रविवार को पटना के गांधी मैदान में मुस्लिम संगठनों की विशाल रैली का आयोजन किया. इस दौरानतेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में उनकी सरकार बनी तो वक्फ कानून राज्य में लागू नहीं होगा और उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस कानून कोकूड़ेदान में फेंकने का काम करेगी. अब भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर तीखा हमला बोला. भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कोसंबोधित करते हुए कहा कि ‘भारत के लोकतांत्रित इतिहास के सबसे काले अध्याय आपातकाल की हाल ही में 50वीं वर्षगांठ मनाई गई. कानून को फेंक देंगें कूड़ेदान मेंलेकिन ये दुख की बात है कि कल पटना के गांधी मैदान में आयोजित रैली में तेजस्वी यादव ने कहा कि वे संसद द्वारा पारित कानून को कूड़ेदान में फेंकदेंगे. उन्होंने वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कही जिसे भारत की संसद के दोनों सदनों ने पारित किया. इसका मतलब है कि उनके मन मेंविधायिका न्यायपालिका के लिए कोई सम्मान नहीं है. तेजस्वी यादव और इंडी गठबंधन के नेताओं ने वोट बैंक के लिए ऐसा कहा इससे साफ है किये लोग अभी भी 50 साल पुरानी संविधान को कूड़ेदान में फेंकने वाली मानसिकता से बाहर नहीं आए हैं. भाजपा सांसद ने कहा कि ‘मैं इंडी गठबंधनके लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या वे बिहार में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं. नेता बार- बार साध रहे है निशानावक्फ कानून के जिन प्रावधानों के खिलाफ विपक्षी नेता बार-बार बोल रहे हैं क्या वो इस्लाम की जन्मस्थली सऊदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्किये में लागूहैं? नहीं, यहां तक कि आईएसआईएस के प्रभाव वाले सीरिया, इराक में भी ऐसा कानून नहीं है क्या विपक्षी गठबंधन सऊदी अरब, इंडोनेशिया से भीबड़ा शरिया कानून बिहार में लागू करना चाहते हैं?’यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस वक्फ कानून को भारत की संसद के दोनों सदनों ने पारित किया है, उसेतेजस्वी यादव कूड़ेदान में फेंकने की बात कर रहे हैं. यह सीधा-सीधा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था विधायिका और न्यायपालिका का अपमान है. यहां तक कि सीरिया और इराक जैसे आईएसआईएस प्रभावित देशों में भी ऐसा कानून नहीं है तो क्या तेजस्वी यादव इससे भी बड़ा वक्फ या शरियाकानून लागू करना चाहते हैं वक्फ एक्ट 1995 भारत का एक केंद्रीय कानून है, जिसके अंतर्गत मुस्लिम धर्मस्थलों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों, मदरसों आदिकी संपत्तियों की देखरेख के लिए वक्फ बोर्ड बनाए जाते हैं. भाजपा का कहना है कि यह कानून संविधान और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित है वहींविपक्ष इसे ‘जनविरोधी और दखलकारी’ बता रहा है.

कोलकाता गैंगरेप पर सियासी घमासान महुआ बनाम कल्याण, टीएमसी में फूटा आंतरिक विरोध

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में विधि छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर कलत्ता में सियासी पारा हाई हो गया है. जहां विपक्षइसे मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तंज कस रही है वहीं टीएमसी नेताओं में भी एक दूसरे के बयानों को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है. हालांकि पार्टी ने अपनेनेताओं के विवादित बयान से किनारा कर लिया है वहीं बाद में महुआ मोइत्रा ने कल्याण बनर्जी को उनके बयानों के लिए खरीखोंटी सुनाई महुआ नेउन्हें स्त्री विरोधी करार दिया. इसके जवाब में कल्याण बनर्जी ने उनके निजी जीवन को आधार बनाकर पलटवार किया है. महुआ मोइत्रा पर पलटवारकरते हुए पश्चिम बंगाल में सेरामपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले कल्याण बनर्जी ने कहा वे अपने हनीमून के बाद भारत वापस आ गईंऔर अब मुझपर हमला करना शुरू कर दिया. महिला विरोधी होने का आरोपउन्होंने मुझ पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है? लेकिन वह क्या हैं? उन्होंने खुद 40 साल की शादी तोड़कर 65 साल के व्यक्ति से शादीकी. ऐसा करके क्या उन्होंने महिलाओं को ठेस नहीं पहुंचाई? देश की महिलाएं इसका फैसला करेंगी। गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा ने हाल ही मेंबीजद के पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा से शादी की है. बनर्जी ने रविवार को तीखे पलटवार में दावा किया कि मोइत्रा 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता मेंआने के बाद उसमें शामिल हो गयी थीं. मैं किसी भी महिला के प्रति प्रतिगामी मानसिकता या स्त्रीद्वेषी दृष्टिकोण रखने वाला अंतिम व्यक्ति होऊंगा. यह विवाद तब शुरू हुआ जब कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर कल्याण बनर्जी ने विवादित बयान दिया. उनके बयान कोलेकर विपक्षी दलों ने टीएमसी को घेरना शुरू की. जिसके बाद टीएमसी ने उनके बयान की निंदा की और खुद को बयान से अलग कर दिया. इसकेबाद कल्याण बनर्जी पर पार्टी की स्थिति को महुआ मोइत्रा ने खुले तौर पर खारिज कर दिया। और कहा कि वह पार्टी के रुख से पूरी तरह असहमत हैंऔर उन्होंने नेताओं पर मामले से जुड़े लोगों को बचाने का आरोप लगाया. महुआ मोइत्रा ने किया साफकोलकाता में एक लॉ कॉलेज में हुई गैंगरेप की घटना पर अपनी पार्टी के नेताओं के बयानों को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने साफ कहा हैकि महिलाओं के प्रति नफरत किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है फर्क बस इतना है कि टीएमसी ऐसी ‘घिनौनी’ टिप्पणियों की निंदा करती है चाहे वहकोई भी करे.महुआ मोइत्रा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत में महिलाओं के प्रति नफरत सभीराजनीतिक पार्टियों में देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि टीएमसी में फर्क सिर्फ इतना है कि पार्टी ऐसी शर्मनाक टिप्पणियों की खुलकर निंदा करतीहै. साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी के बयान पर बवालमचा हुआ है. कोलकाता दुष्कर्म मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा था कि अगर कोई दोस्त अपने दोस्त के साथदुष्कर्म करता है तो क्या किया जा सकता है. क्या स्कूलों में पुलिस होगी? यह छात्रों द्वारा एक अन्य छात्रा के साथ किया गया. पीड़िता की सुरक्षा कौनकरेगा? सारा अपराध और छेड़छाड़ कौन करता है? कुछ पुरुष ऐसा करते हैं. महिलाओं को किसके खिलाफ लड़ना चाहिए? महिलाओं को इन विकृतपुरुषों के खिलाफ लड़ना चाहिए. उन्होंने मुख्य आरोपी के तृणमूल कांग्रेस से संबंध पर बात करने से इनकार कर दिया. सांसद कल्याण बनर्जी ने कहाकि जिसने भी ऐसा किया है उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए. सुरक्षा और संरक्षा की स्थिति हर जगह एक जैसी है जब तक पुरुषों कीमानसिकता ऐसी ही रहेगी ये घटनाएं होती रहेंगी.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बरेली के IVRI में दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, कहा पशु जीवन भी ‘धन’ हैं जैव विविधता बचाना समय की मांग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के 11वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों कोपदक व उपाधि देकर सम्मानित किया. उन्होंने पशु चिकित्सा क्षेत्र में उपाधि और पदक पाने वाले मेधावियों को बधाई दी. कहा कि इस समारोह मेंछात्राओं की बड़ी संख्या में देखकर गर्व की अनुभूति होती है. बेटियां अन्य क्षेत्रों की तरह पशु चिकित्सा क्षेत्र में भी आगे रही हैं यह बहुत ही शुभ संकेतहै. राष्ट्रपति ने कहा कि आप सब ने निरीह और बेजुबान पशुओं की चिकित्सा और कल्याण के क्षेत्र को अपने करियर के रूप में चुना है. इस चुनाव केपीछे ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:’ की भारतीय सोच का भी योगदान रहा है. योगी आदित्यनाथ ने किया राष्ट्रपति का स्वागतराष्ट्रपति सुबह करीब 9:50 बजे भारतीय वायु सेना के विमान से त्रिशूल एयरबेस पर उतरीं. वहां उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. इस मौके पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि राज्यमंत्रीभागीरथ चौधरी भी मौजूद रहे. यहां से वह सीधे आईवीआरआई परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार पहुंचीं. दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने स्नातक, मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री के विद्यार्थियों को अपने हाथ से प्रमाण पत्र व गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया. राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ईशावास्यम् इदम्सर्वम्’ के जीवन मूल्य पर आधारित हमारी संस्कृति, सभी जीव-जंतुओं में ईश्वर की उपस्थिति को देखती है. पशुओं से हमारे देवताओं व ऋषि-मुनियोंका संवाद होता है. पशुओं के कल्याण की मन में भावनाभगवान के कई अवतार भी इसी विशिष्ट श्रेणी में हैं. उन्होंने कहा कि चिकित्सक या शोधकर्ता के रूप में कार्य करें तो बेजुबान पशुओं के कल्याण कीभावना मन में हो. पशु और मानव में एक परिवार का रिश्ता है. उन्होंने कहा कि पशुओं में बीमारियों की रोकथाम में टीकाकरण की अहम भूमिका है. पशु चिकित्सा अनुसंधान में आईवीआरआई से जुड़े वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं का योगदान सराहनीय है. इस संस्थान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों कोप्राप्त किया है. राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में अनके टीके यहीं पर विकसित किए गए हैं यह गर्व की बात है.द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि पशु हमारेलिए ‘साधन’ (परिवहन के लिए) और किसानों के लिए ‘बल’ रहे हैं. पशु के बिना किसान आगे नहीं बढ़ सकता है पशु जीवन धन हैं उनके बिना हमजिंदगी सोच नहीं सकते.राष्ट्रपति ने विलुप्त हो रहे जीव-जंतुओं पर चिंता जताई. कहा कि जब विभिन्न प्राणियों का संवर्धन होगा, तब जैव-विविधताबढ़ेगी और यह धरती तथा मानव जाति खुशहाल होगी. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान जैसी संस्थाओं से अपील है कि वे जैव-विविधता कोबढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाएं और आदर्श प्रस्तुत करें.

बिहार से सियासी पारी की दोबारा शुरुआत, यूपी की परीक्षा अभी बाकी “मायावती ने आकाश आनंद को दी बड़ी जिम्मेदारी”

पार्टी में वापसी के बाद बसपा के चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने भले ही बिहार से अपनी दूसरी पारी का आगाज किया है पर उनकेसियासी कौशल की असल परीक्षा यूपी में होगी. माना जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती सोची-समझी रणनीति के तहत भतीजे आकाश को बिहारके रास्ते यूपी की सियासत के लिए तैयार कर रही हैं. पटना के कार्यक्रम में जिस प्रकार बसपा सुप्रीमो ने आकाश को रिलॉन्च किया है उससे स्पष्ट है किजल्द ही आकाश के सियासी सफर को यूपी में भी रफ्तार देने की तैयारी है बिहार में विधानसभा चुनाव में अब चंद महीने ही बचे हैं. भाईचारा बनाने की जिम्मेदारी है सौंपीबसपा सुप्रीमो ने आकाश को बिहार के सियासी मैदान में उतारकर एक बड़ा लक्ष्य दिया है. उन्हें जातियों को जोड़कर फिर से भाईचारा बनाने कीजिम्मेदारी सौंपी है. इसके जरिये मतदाताओं के बीच आकाश को एक परिपक्व नेता के रूप में पेश करने की भी कोशिश है माना जा रहा है कि बसपासुप्रीमो अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव में भी आकाश को यूपी के सियासी मैदान में लॉन्च कर सकती है. सूत्रों का कहना है कि मायावती नेआकाश को बिहारी के सियासी पिच पर यूं ही नहीं उतारा है. इसके जरिये वे आकाश की भाषण शैली और उनके प्रति बसपा समर्थकों के रुझान काभी आकलन करना चाहती हैं ताकि आकाश की आगे की सियासी राह की रूपरेखा तय की जा सके. कसौटी पर उतरने की खरी कोशिशयही वजह है कि बिहार के कार्यक्रम में मायावती ने आकाश के साथ अपने सबसे विश्वसनीय नेशनल कोऑर्डिनेटर एवं राज्यसभा सांसद रामजी गौतमाको लगाया है.सूत्रों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों की पूरी कमान देकर मायावती ने आकाश के लिए एक बड़ा मैदान दे दियाहै ताकि यूपी के सियासी मैदान में उतरने पर उन्हें कोई दिक्कत न हो. वहीं आकाश ने भी बिहार के कार्यक्रम में जिस आक्रामक शैली में सीएम नीतीशकुमार की सरकार पर सियासी हमला बोला है. उससे साफ है कि आकाश भी बसपा सुप्रीमो की कसौटी पर खरा उतरने की पूरी कोशिश में जुटे हैं. दरअसल दोबारा वापसी के बाद अब आकाश भी चाहते हैं कि पार्टी सुप्रीमो के सामने वह खुद को साबित कर सकें. इसलिए वह इस बार अपने भाषणपर विशेष ध्यान दे रहे हैं और मायावती की तर्ज पर ही अपने वोट बैंक के बीच बसपा के प्रति विश्वास जगाने की कोशिश कर रहे हैं.

रेखा गुप्ता सरकार की नई पहल, कांवड़ यात्रा अब बनेगी सुविधाजनक और पारदर्शी

Dellhi News: दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक ली. इस बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है अब कांवड़ समितियोंको दिल्ली सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर करेगी सरकार का एक-एक पैसा सीधा समितियों तक जाएगा. सीएम रेखा गुप्ता ने मंगलवार कोसचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम एक और नई नीति लेकर आए हैं कांवड़ यात्रा में हजारों शिवभक्त शामिल होते हैं पहले सरकार टेंट, सर्विस के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किया करती थी. लेकिन भक्तों तक सुविधाएं नहीं पहुंचती थीं. कांवड़ समितियों ने बताया कि आखिरी वक्त तकटेंट नहीं लगता था. कांवड़ समितियां परेशान होती थीं. सीएम रेखा ने आगे कहा कि कांवड़ समितियों को अब सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफरकरेगी. रजिस्टर संस्थाएं डीएम ऑफिस में अप्लाई करेंगी डीएम ऑफिस में सिंगल विंडो सिस्टम पर 72 घंटे के अंतराल पर सारी सुविधाएं दी जाएंगी. चार कैटेगरी में देगें पैसाइससे पहले बिलिंग पेंडिंग रहती थीं अब हम चार कैटेगरी में पैसा देंगे. कम से कम 50 हजार रुपये, अधिकतम 10 लाख रुपये के हिसाब से सरकारफंड देंगी. 50 फीसदी पेमेंट पहले देंगे, 50 फीसदी बाद में मिलेगी। तीन महीने में एकाउंट क्लोज कर दिया जाएगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहाकि सरकार का एक-एक पैसा सीधा समितियों तक जाएगा। जो समितियां रजिस्टर नहीं हैं, वे 30 जुलाई तक पूरे कागजात के साथ रजिस्टर करा लें. सभी डीएम, एसडीएम को बोल दिया गया है रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है.इस पहल का नाम मुख्यमंत्री धार्मिक उत्सव योजना रखागया है. इसमें डॉक्टर, मेडिकल, सफाई, टेंट लगाने, लाइट की सुविधा दी जाएगी। सभी कांवड़ समितियों को 1200 यूनिट तक फ्री बिजली मिलेगी. ट्रैफिक, पुलिस प्रशासन से बैठक कर ली गई है, सिविल डिफेंस और होम गार्ड कांवड़ शिविरों में सेवाएं देंगे. कांवड़ यात्रा एक धार्मिक आयोजन नहीं हैबल्कि ये एक सामाजिक उत्सव है हम दिल्ली के बॉर्डर पर कांवड़ियों का स्वागत करेंगे हम चाहते हैं कि एक भी कांवड़िये के पैर में एक भी कंकड़ नलगे. दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक हुई. बैठक में अहम फैसला लिया गया है कांवड़ समितियों को अबदिल्ली सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर करेगी.

भाजपा का संगठनात्मक चुनाव शुरू, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के लिए जारी अधिसूचना

भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए चुनाव अधिसूचना के साथ मतदाता सूची जारी कर दी है. महेंद्र भट्ट का दोबारा प्रदेशअध्यक्ष बनना तय है केवल भट्ट का ही नामांकन हुआ है इस दौरान सीएम धामी, केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत , सांसदअजय भट्ट समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कल एक जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी रविवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय मेंचुनाव अधिकारी खजान दास ने राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चुनाव पार्टी संविधान की उपधारा के अनुसार होगा. परिषदके सदस्य उतनी संख्या में चुने जाएंगे, जितनी उस राज्य में लोकसभा सीटें हैं साथ ही SC/ST प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक होगा. प्रदेश कोलोकसभा क्षेत्रों के हिसाब से जोन में बांटकर प्रत्येक से प्रतिनिधि चुना जाएगा.लक्ष्मण के निर्देशानुसार चुनाव अधिसूचना जारी की. भाजपा का चुनावआधिकारिक तौर पर पारदर्शिता और संगठनिक संयम से संचालित हो रहा है.महेंद्र भट्ट की निर्विरोध वापसी पार्टी को स्थिरता प्रदान करती नजर आ रहीहै. वहीं उनकी भूमिका आगामी चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है संगठनात्मक अखंडता और रणनीतिक तैयारी के लिहाज़ से भट्ट की यह दोबारीपारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 12 बजे तक किया जाएगा नामांकनउन्होंने बताया कि अध्यक्ष पद के चुनाव में कुल 125 मतदाता मतदान के लिए अधिकृत हैं आज 12 बजे तक नामांकन किया जाएगा. उसी दिन 12से 2 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी इसके बाद तीन से चार बजे तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. प्रदेश चुनाव अधिकारी ने बताया किपार्टी संविधान के तहत प्रदेश परिषद व राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार चुनाव कराए जाएंगे. प्रदेश अध्यक्ष के लिए जो भीकार्यकर्ता नामांकन करना चाहते हैं वह फार्म (च) भरेंगे. प्रदेश अध्यक्ष के लिए वही कार्यकर्ता नामांकन कर सकेंगे. जो तीन साल तक पार्टी का सक्रियसदस्य और 10 वर्ष तक प्राथमिक सदस्य रहा हो. प्रदेश निर्वाचक मंडल के कोई भी 10 सदस्य प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वालेकार्यकर्ता के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर करेंगे. लेकिन यह प्रस्ताव कम से कम एक तिहाई निर्वाचित जिलों से आना चाहिए. उन्होंने बताया किराष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चुनाव पार्टी के संविधान की उपधारा (2) के अनुसार प्रदेश परिषद की ओर से किया जाएगा. प्रदेश परिषद के सदस्यअपने प्रदेश से राष्ट्रीय परिषद के लिए उतनी संख्या में सदस्य निर्वाचित करेंगे जितनी उस राज्य में लोकसभा हैं. बशर्ते कि सदस्यों में अनुसूचित जाति, जनजाति के सदस्य उस राज्य से इन वर्गों के लिए आरक्षित सीटों संख्या से कम न हो. प्रदेश के दो-दो लोकसभा क्षेत्रों को मिलाकर भागों में बांटाजाएगा. प्रत्येक भाग से कम से कम एक प्रतिनिधि अवश्य चुना जाएगा.

पीएम मोदी ने हूल दिवस पर संथाल क्रांतिकारियों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सिदो–कान्हू और फूलो झानो को किया नमन

हूल दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संथाल क्रांति के वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. ऐतिहासिक संथाल विद्रोह को यादकरते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो, के साथ-साथ अन्य बहादुर आदिवासी शहीदों कीचिरस्थायी विरासत को नमन किया. जिन्होंने औपनिवेशिक उत्पीड़न के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति दी.पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ”हूल दिवस हमें अपने आदिवासी समाज के अदम्य साहस और अद्भुत पराक्रम की याद दिलाता है. ऐतिहासिक संथालक्रांति से जुड़े इस विशेष अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो के साथ ही उन सभी वीर-वीरांगनाओं का हृदय से नमन और वंदन जिन्होंनेविदेशी हुकूमत के अत्याचार के खिलाफ लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान कर दिया. आदिवासी बहन- भाइयों को किया नमनउनकी शौर्यगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी.लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संथाल क्रांति केयोद्धाओं को श्रद्धांजलि देते हुए एक्स पर लिखा आज हूल दिवस पर हम उन वीर आदिवासी भाइयों-बहनों को नमन करते हैं. जिन्होंने महान सिदो औरकान्हू के नेतृत्व में औपनिवेशिक शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संथाल हूल विद्रोह का बिगुल फूंका. यह जनक्रांति न केवल अपनी जमीन, संस्कृतिऔर स्वाभिमान की रक्षा के लिए थी. बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण अध्याय भी बनी इस विद्रोह में हजारों आदिवासी भाइयों-बहनोंने प्राणों की आहुति दी. इसने अन्याय के खिलाफ एकजुटता की मिसाल कायम की उन वीर हुतात्माओं का साहस और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हूल दिवस पर वीर शहीदों को याद करते हुए लिखा’हूल दिवस’ पर संथाल विद्रोह के अमर बलिदानियों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो सहित सभी वीर-वीरांगनाओं के चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं. संथाल हूल विद्रोह की याद में जाता है मनायाअंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो’ का नारा बुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंक देने वाले सभी जनजातीय भाई-बहनों की गौरव गाथा सदैव भावी पीढ़ियों कोअन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद करने तथा मातृभूमि के लिए मर-मिटने की प्रेरणा देती रहेंगी. हूल दिवस हर साल 30 जून को मनाया जाता है। यहदिन 1855 के संथाल हूल विद्रोह की याद में मनाया जाता है. जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम के पहले बड़े जनजातीय विद्रोहों में से एक था. साल1855 में झारखंड (अब का संथाल परगना क्षेत्र) में दो संथाल भाइयों ने ब्रिटिश शासन, जमींदारों और महाजनों के शोषण के खिलाफ एक बड़ा जन-विद्रोह खड़ा किया इस आंदोलन को ‘हूल विद्रोह’ कहा जाता है.हूल दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक संथाल विद्रोह को यादकरते हुए सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो, के साथ-साथ अन्य बहादुर आदिवासी शहीदों की चिरस्थायी विरासतको नमन किया.हूल दिवस पर सिदो–कान्हू चांद–भैरव और फूलो–झानो सहित सभी वीर-वीरांगनाओं को कोटि-कोटि नमन करता हूं. अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो का नाराबुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले आदिवासियों की गाथा भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करे.

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता ट्रंप की समयसीमा से पहले तय, 8 जुलाई को हो सकता है ऐलान

International Relations: भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आई है एक ओर दुनियाभर में दहशत है कि टैरिफको लेकर ट्रंप अपनी नौ जुलाई की समयसीमा के बाद क्या करेंगे? वहीं दूसरी ओर अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की सभी शर्तों परसहमति बन गई है. बताया जा रहा है कि इस समझौते का औपचारिक एलान ट्रंप की समयसीमा से एक दिन पहले आठ जुलाई को हो सकता है। इससमझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक दल वॉशिंगटन में है.अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ को निलंबित किए जाने की समयसीमा नौ जुलाई को समाप्त हो रही है. इसे लेकर दुनियाभर के देशों की चिंताबढ़ हुई है शुक्रवार को ट्रंप ने कहा था कि नौ जुलाई के बाद वैश्विक टैरिफ से राहत नहीं मिलेगी. समय समाप्त होने से पहले देगें देशों को पत्रइसके बाद वह अधिकांश देशों पर टैरिफ पर 90 दिवसीय रोक को बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे हैं.ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका समय सीमा समाप्तहोने से पहले देशों को पत्र भेजेगा. जिसमें लिखा होगा कि हम आपको अमेरिका में खरीदारी करने की अनुमति दे रहे हैं, आपको 25, 35, 50 या 10 फीसदी टैरिफ देना होगा. उन्होंने कहा ‘हम देखेंगे कौन-सा देश हमें अच्छा या बुरा ट्रीट करता है. कुछ देशों से हमें फर्क नहीं पड़ता उन्हें बस ज्यादा टैक्सदेना होगा. अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारत से आने वाले सामानों पर 26 फीसदी अतिरिक्त कर (टैरिफ) लगाने का एलान किया था. लेकिन ट्रंपप्रशासन ने इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया था हालांकि 10 फीसदी का मूल टैक्स अभी भी लागू है भारत चाहता है कि उसे इस 26 फीसदीअतिरिक्त कर से पूरी तरह छूट मिल जाए. भारत चाहता है कि प्रस्तावित 26 फीसदी शुल्क वापस लिया जाए और स्टील व ऑटो पार्ट्स पर पहले सेलगे अमेरिकी शुल्कों में छूट मिले. आसान करने की चाहता है प्रतिबध्तामगर अमेरिका पहले भारत से सोयाबीन, मक्का, कार और शराब पर यातायात शुल्क घटाने और गैर-शुल्क बाधाओं को आसान करने की प्रतिबद्धताचाहता है. कथित तौर पर समझौते के लिए बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 190 बिलियन डॉलर सेबढ़ाकर 2030 तक 500 बिलियन डॉलर करना है. 10 जून को वार्ता समाप्त होने पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था किभारत और अमेरिका एक निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यापार समझौते पर बातचीत करने की प्रक्रिया में हैं. जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा. उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फरवरी 2025 में मिले, हमारे दोनों नेताओं ने एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते में प्रवेशकरने का फैसला किया है. जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं दोनों पक्षों के व्यवसायों और दोनों देशों के लोगों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा. हमव्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक अच्छा, निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित समझौता करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.