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जयशंकर की अमेरिका यात्रा सुरक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग पर बनी सहमति, वाशिंगटन डीसी में एफबीआई निदेशक काशपटेल से की मुलाकात

International Relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं यहां उन्होंने वाशिंगटन डीसी में एफबीआई निदेशक काशपटेल से मुलाकात की. इस दौरान जयशंकर ने संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद का मुकाबला करने में भारत और अमेरिकाके बीच सहयोग की सराहना की. इस मुलाकात के बारे में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर भी पोस्ट किया. एक्स पर पोस्ट में जयशंकर ने लिखाकि एफबीआई निदेशक काश से मिलकर खुशी हुई. संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद का मुकाबला करने में हमारे मजबूतसहयोग की सराहना करता हूं. तुलसी गबार्ज के साथ की बैठकइससे पहले जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के साथ भी बैठक की. इस दौरान दोनों के बीच वैश्विक स्थिति और द्विपक्षीयसहयोग पर चर्चा हुई. इसके अलावा विदेश मंत्री जयशंकर ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट से भी मुलाकात की. जहां दोनों केबीच, भारत में चल रहे ऊर्जा परिवर्तन और भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी के लिए अवसरों के बारे में बात की. बता दें कि एस जयशंकर अमेरिकीविदेश मंत्री मार्को रुबियो के निमंत्रण पर इन दिनों अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं. इस यात्रा के दौरान उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक(QFMM) में भाग लिया. जयशंकर ने वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (क्यूएफएफएम) के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सेमुलाकात की और सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और गतिशीलता के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चाकी. ये बैठकें मंगलवार को ‘क्वाड’ समूह के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन से इतर थी. आवाजाही जैसे विषय है शामिलउन्होंने आगे बताया इस बातचीत में व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और लोगों की आवाजाही जैसे विषय शामिल थे. इनमें खासतौर पररक्षा और ऊर्जा ऐसे विषय हैं, जिन पर गहराई से चर्चा की जरूरत थी. इसलिए मेरी अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हगसेथ के साथ अलग से बैठक हुई. इसकेअलावा, मेरी ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया के साथ भी उपयोगी बातचीत हुई. हमने उन दौरों परचर्चा की जो निकट भविष्य में होने हैं और हमारे प्रधानमंत्रियों की आगामी बैठकों की तैयारी पर भी बात की. एस जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कोरुबियो के निमंत्रण पर इन दिनों अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर है. इस यात्रा के दौरान उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (QFMM) में भागलिया. जयशंकर ने वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर कई मंत्रियों से भी मुलाकात की.

दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनाव में चीन को फटकार, किरेन रिजिजू ने कहा निर्णय केवल दलाई लामा और स्थापित संस्था का अधिकार

दलाई लामा के उत्ताराधिकारी के चुनाव को लेकर विवाद के बीच अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन को फटकार लगाई है. रिजिजू नेगुरुवार को साफ शब्दों में कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने का निर्णय स्थापित संस्था और दलाई लामा ही लेंगे. इसमें किसी अन्य कीकोई भूमिका नहीं होगी. तिब्बत के सर्वोच्च धमर्गुरु 14वें दलाई लामा ने जब से अपने उत्तराधिकारी को चुनने का एलान किया है. तब से चीन इसचुनाव में हस्तक्षेप करना चाहता है चीन का कहना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को बीजिंग सरकार से मंजूरी लेनी होगी. बुधवार को तिब्बतीआध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा कि दलाई लामा संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट को ही उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देने काअधिकार होगा. रिजिजू ने कहा कि दलाई लामा बौद्धों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक संस्था हैं. उन्होंने आगे कहा कि उनके अगले अवतार काचुनाव स्थापित परंपरा और दलाई लामा की इच्छा के अनुसार होना चाहिए. निर्णय लेने का अधिकार नहींउनके और मौजूदा परंपराओं के अलावा किसी और को इसका निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. बौद्ध धर्म को मानने वाले रिजिजू और उनके साथीकेंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह 6 जुलाई को धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिन समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 14वेंदलाई लामा तिब्बतियों और बौद्ध धर्म की नालंदा परंपरा का पालन करने वाले सभी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संस्था हैं.अल्पसंख्यक मामलों केमंत्री किरेन रिजिजू ने चीन को फटकार लगाते हुए कहा कि दलाई लामा के अगले उत्ताराधिकारी चुनने का अधिकार केवल स्थापित संस्था और दलाईलामा के पास ही होगा. उनके और मौजूदा परंपराओं के अलावा किसी और को इसका निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. हालांकि बुधवार को दलाईलामा ने यह स्पष्ट किया कि दलाई लामा संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देने का अधिकारहोगा. रिजिजू ने कहा, “दलाई लामा बौद्धों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक संस्था हैं. उनके अगले अवतार का चुनाव परंपरा और उनकी इच्छाके अनुसार ही होना चाहिए. किसी और को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. 6 जुलाई को धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिनसमारोह में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और राजीव रंजन सिंह भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. दलाई लामा तिब्बतियों और नालंदा परंपरा केबौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की तैयारी, जली हुई नोटों की बोरियों से उठा विवाद

केंद्र सरकार जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायधीश यशवंत वर्मा को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है. विपक्षी दलों ने भीसैद्धांतिक समर्थन दे दिया है वर्मा के सरकारी आवास में जली हुई नोटों की बोरियों के मिलने के बाद यह विवाद गहराया था. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कामसे अलग कर दिया है. देश की न्यायपालिका से जुड़ा बड़ा मामला इन दिनों चर्चा में है। केंद्र सरकार जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशयशवंत वर्मा को हटाने के लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू करने वाली है. इसके तहत संसद सदस्यों से हस्ताक्षर जुटाने का अभियान जल्द शुरू होगा. कानूनमंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को यह जानकारी दी. कानून मंत्री रिजिजू ने बताया कि फिलहाल सरकार ने यह तय नहीं किया है कि प्रस्ताव लोकसभा मेंलाया जाएगा या राज्यसभा में लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं. न्यायमूर्ति को हटाने की प्रक्रियाजबकि राज्यसभा में यह संख्या 50 सांसदों की है प्रस्ताव पेश करने से पहले इसी के अनुसार हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे. संसद का मानसून सत्र 21 जुलाईसे 21 अगस्त तक चलेगा माना जा रहा है कि इसी दौरान न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. अगर प्रस्ताव पेश होता है औरउसे स्वीकार कर लिया जाता है. तो आगे की कार्रवाई न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत होगी. अधिनियम के मुताबिक प्रस्ताव स्वीकारहोने के बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति एक तीन सदस्यीय समिति गठित करते हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या कोईन्यायाधीश, किसी एक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होता है. जांच करके देती है सिफारिशयह समिति जांच करके सिफारिश देती है. दरअसल मार्च में दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना हुई थी. इस दौरानउनके घर से जली हुई नोटों से भरी कई बोरियां बरामद हुईं हालांकि न्यायाधीश ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की थी. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्टद्वारा गठित समिति ने गवाहों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया. सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना नेजस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने की सलाह दी थी. लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया इसके बाद उन्हें वापस उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजदिया गया. लेकिन वहां उन्हें कोई न्यायिक काम नहीं सौंपा गया. मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा कोहटाने की सिफारिश की थी. बता दें कि उच्च न्यायपालिका के सदस्यों को हटाने की यही संवैधानिक प्रक्रिया होती है. अब केंद्र सरकार ने विपक्षी दलोंसे भी समर्थन मांगा है ताकि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके.

क्रिस वोक्स की DRS पर नाराज़गी कहा भारत के पक्ष में गए फैसले, खेल की दिशा सकते थे बदल

इंग्लैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स ने स्वीकार किया कि दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन अंपायरों के कुछ फैसले भारत के पक्ष में जाने के बाद वहनिराश हो गए थे. वोक्स अपनी शानदार लाइन और लेंथ के साथ मेजबान टीम के लिए सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए और उन्होंने पहले दिन 18 ओवर में 59 रन देकर दो विकेट लिए. उनकी गेंदबाजी पर इंग्लैंड ने दो रिव्यू लिए जिन पर तीसरे अंपायर का फैसला भारत के पक्ष में गया इस तेजगेंदबाज ने इसे निराशाजनक करार दिया. वोक्स ने बुधवार को पहले दिन खेल समाप्त होने के बाद कहा, ‘यह वास्तव में निराशाजनक था. जब आपटीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के लिए बेताब होते हैं तो भावनाएं हावी हो जाती हैं अगर ये फैसले हमारे पक्ष में होते तो दिन पूरी तरह से अलग होतालेकिन यह टेस्ट क्रिकेट है और हम इन चीजों को आत्मसात करके आगे बढ़ते हैं.इनमें से पहला मामला सातवें ओवर में आया जब भारत का स्कोर बिनाकिसी नुकसान के 14 रन था और वोक्स ने यशस्वी जायसवाल के खिलाफ एलबीडब्ल्यू की अपील की थी. डीआरएस से चला पतादूसरा मामला 11वें ओवर में आया, जब भारत का स्कोर एक विकेट पर 21 रन था और करुण नायर भी इसी तरह के रिव्यू से बच गए। दोनों अवसरोंपर डीआरएस से पता चला कि गेंद स्टंप से टकराई थी. लेकिन यह बांग्लादेशी अंपायर शरफुद्दौला के नॉट आउट के फैसले को पलटने के लिए पर्याप्तनहीं था. वोक्स ने कहा, ‘अगर यह फैसले हमारे पक्ष में जाते तो हम उनका स्कोर तीन विकेट पर 30 रन कर सकते थे और तब स्थिति पूरी तरह से भिन्नहोती. यह फैसले हमारे पक्ष में भी जा सकते थे लेकिन हम इस खेल को इसी तरह से खेलते हैं. जायसवाल ने 87 और नायर ने 31 रन बनाए, जिसकेबाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 114 रन बनाकर पारी को संभाला और स्टंप तक अपनी टीम का स्कोर पांच विकेट पर 310 रन तकपहुंचाया. हालांकि वोक्स ने माना कि डीआरएस ने क्रिकेट में निर्णय लेने की प्रक्रिया में सामान्य सुधार किया है. लेकिन उन्होंने इसमें एक विशेषबदलाव की मांग की उन्होंने कहा, ‘निर्णय समीक्षा प्रणाली ने सामान्य तौर पर अच्छे फैसले दिए हैं लेकिन मैं केवल यही कहना चाहूंगा कि यदिबल्लेबाज गेंद को छोड़ने का निर्णय लेता है और गेंद तब भी स्टंप्स पर लग रही है. तो मुझे लगता है कि उसे आउट दिया जाना चाहिए.