कविंदर गुप्ता ने लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली, संवेदनशील क्षेत्र में पहली बार सक्रिय राजनेता की नियुक्ति

कविंदर गुप्ता ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के नए उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस संवैधानिक पद परनियुक्त किए जाने के चार दिन बाद उन्होंने पदभार संभाला.गुप्ता को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अरुण पाली ने लद्दाख राज निवास, लेह में आयोजित एक समारोहमें शपथ दिलाई. समारोह में मुख्य सचिव पवन कोटवाल ने राष्ट्रपति द्वारा गुप्ता की नियुक्ति का वारंट पढ़ा. कविंदर गुप्ता लद्दाख के तीसरेउपराज्यपाल बने हैं वे ब्रिगेडियर बी. डी. मिश्रा का स्थान ले रहे हैं. जिन्होंने 19 फरवरी 2024 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. लद्दाख के पहले थे राज्यपालमिश्रा से पहले आर. के. माथुर लद्दाख के पहले उपराज्यपाल थे. जिन्हें 2019 में जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के बाद इस पद पर नियुक्त कियागया था. वरिष्ठ भाजपा नेता कविंदर गुप्ता ने लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में लेह में शपथ ली. उन्होंने ब्रिगेडियर बी. डी. मिश्रा का स्थान लियाऔर इससे पहले जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री समेत कई अहम पदों पर रह चुके हैं। उनके साथ परिवार (पत्नी बिंदु, बेटियाँ चारु व पारुल, बेटे राघव, और अन्य सदस्य) भी उपस्थित थे जो इस अवसर को उनके लिए गर्व का क्षण बता रहे थे राष्ट्रीय कांग्रेस (NC) ने उनकी नियुक्ति की निंदा की है. औरइसे “वादों का विरोधाभास” बताया है. विशेषकर लद्दाख को बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के स्वतंत्र प्रशासन की आवश्यकता के मद्देनज़र राजनीतिकजानकार यह देख रहे हैं कि एक सीनियर BJP नेता का लद्दाख के संवेदनशील क्षेत्र में तैनात होना रणनीतिक संकेत हो सकता है. सक्रिय राजनेता बनाजिससे प्रशासन में केंद्रीय दृष्टिकोण प्रभावी रूप से दिखे. यह पहली बार है जब लद्दाख का उपराज्यपाल कोई सक्रिय राजनीतिक नेता (पूर्वउपमुख्यमंत्री) बना है. इससे क्षेत्रीय विकास व प्रशासनिक जवाबदेही (governance) को तेज़ी पाने की उम्मीद है. हालांकि ऐसा समीकरण सरकारके वादों और जनता की अपेक्षाओं के बीच के तनाव की ओर भी संकेत करता है. गुप्ता का कार्यकाल लद्दाख के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होसकता है विशेषकर, उनकी सक्रिय और राजनीतिक पहचान ने प्रशासनिक दृष्टिकोण में बदलाव की उम्मीद जगाई है. उनका यह कहना कि “शपथ केबाद मैं BJP का प्रतिनिधि नहीं रहूंगा. गुप्ता के कार्यकाल में 20 जुलाई को गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता में छहवींअनुसूची, राज्य‑सदन (statehood), अतिरिक्त लोकसभा सीटें, स्थानीय लोक सेवा आयोग जैसे मुद्दों पर बन पड़ेगा कि वे कितने आगे बढ़ते हैं. जमीनी विकास व जवाबदेही गुप्ता ने घोषणा की है कि वे लोक‑सुनवाई, क्षेत्रीय दृष्टिकोण, बेहतर कनेक्टिविटी (विशेषकर जोजिला सुरंग) औरइंटरनेट, स्वास्थ्य, शिक्षा सेवाओं में सुधार के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे.
तेजस्वी का बयान लोकतंत्र पर हमला, जंगलराज की वापसी की चेतावनी भाजपा नेता संजय खंडेलिया

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खंडेलिया ने राजद नेता तेजस्वी यादव के मीडिया को धमकाने वाले बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसेलोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया है. खंडेलिया ने खगड़िया में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि तेजस्वी की भाषा औरमानसिकता बिहार को फिर से 1990 से 2005 तक के ‘काले दौर’ में ले जाने की चेतावनी दे रही है. खंडेलिया ने कहा “तेजस्वी यादव अपने पितालालू प्रसाद यादव की ‘जंगलराज’ की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंच से मीडिया को धमकाया और पार्टी समर्थित दबंगों औरबाहुबलियों का हवाला देकर पत्रकारों को डराने की कोशिश की. यह आपराधिक मानसिकता का परिचायक है. भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि एकलोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता अगर मीडिया को अपने क्षेत्र में घुसने से मना करें. तो यह लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफसीधा हमला है. लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमलाखंडेलिया ने कहा, “जनता ने उन्हें नकार दिया है और अब सत्ता से बाहर होने के बाद वह बौखलाहट में देश, धर्म और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला कररहे हैं. ”खंडेलिया ने कहा कि भाजपा और उसके कार्यकर्ता लोकतंत्र, संविधान और मीडिया की स्वतंत्रता के सजग प्रहरी हैं. उन्होंने पत्रकारों से अपीलकी कि वे भयभीत न हों और सच को निर्भीकता से सामने लाते रहें. इस मौके पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रमोद शाह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अश्विनी सिंह, अश्वनी चौधरी, नगर अध्यक्ष रितेश शर्मा, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष संजय ठाकुर, और पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष वंदना सिंहपटेल भी मौजूद रहे। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष संजय खंडेलिया ने खगड़िया में प्रेस वार्ता कर तेजस्वी यादव द्वारा मीडिया को धमकाने वाले बयान कीकड़ी निंदा की. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला और ‘जंगलराज’ की मानसिकता बताया. खंडेलिया ने मीडिया से निर्भीक होकर सच दिखाने की अपीलकी और कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संकल्पित है. “तेजस्वी यादव का रवैया जंगलराज की पुनरावृत्ति की चेतावनी है. खुलेमंच से मीडिया को धमकाने और बाहुबलियों का हवाला देकर डर फैलाने की कोशिश शर्मनाक और आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है. तेजस्वी को लगाया यह आरोपखंडेलिया ने 1990–2005 के बिहार को “काले दौर” कहा और तेजस्वी को यह आरोप लगाया कि वे अपने पिता लालू प्रसाद यादव की ‘जंगलराज’ पद्धति को आगे ले जा रहे हैं. उस युग को “हत्या, लूट, फिरौती और अपहरण” की पहचान बताया गया । उन्होंने कहा कि तेजस्वी का यह रवैयासंविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की चौथी शक्ति मीडिया पर सीधा हमला है. भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों से अपीलकी कि वे निर्भीक बने रहें और “हम मीडिया पर आक्रमण के इस प्रयास को कभी सफल नहीं होने देंगे. खंडेलिया ने कहा कि राजद अब “जनताप्रतिनहीं, बल्कि परिवार के प्रति उत्तरदायी” बन गया है, और उसमें निर्णय वंशानुगत तरीके से होते हैं. न कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से इस प्रेस वार्ता मेंभाजपा के जिला उपाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रमोद शाह, प्रदेश कार्य समिति सदस्य अश्विनी सिंह, अश्वनी चौधरी, नगर अध्यक्ष रितेश शर्मा, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष संजय ठाकुर व पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष वंदना सिंह पटेल भी उपस्थित थे बिहार में चुनावी परिवेश और राजनीतिक वामप्रक्षेपण की स्थिति में, भाजपा और राजद के बीच यह ताजा विवाद बढ़ चुका है. जिसमें BJP तेजस्वी के बयान को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों कीअवहेलना मान रही है.
भाषा जोड़ने का है माध्यम नफरत की जड़ नहीं, रवि किशन ने हिंदी–मराठी विवाद को बताया चुनावी राजनीति

जब-जब भाषा को लेकर राजनीति गर्म होती है तब देश के कलाकार बार-बार याद दिलाते हैं कि भाषा जोड़ने का काम करती है तोड़ने का नहीं कुछऐसा ही अब भोजपुरी एक्टर और सांसद रवि किशन ने भी किया है. उन्होंने हिंदी और मराठी को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय दी है. रवि किशनने क्या कुछ कहा चलिए बताते हैं. रवि किशन ने कहा ‘हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है. वो पूरी तरह से एक सोची-समझी राजनीति का हिस्सा है. ये सब निकाय चुनावों के आसपास ही क्यों उभरता है इसका जवाब खुद में साफ है. भाषा के नाम पर लोगों को बांटनाबेहद अफसोसजनक है।उन्होंने आगे कहा’मैं खुद मराठी फिल्मों में काम कर चुका हूं. मुझे मराठी बोलनी भी आती है लेकिन जब भाषा को नफरत फैलाने का जरिया बना दियाजाता है. हमारी कला छूती है हर दिल कोतो तकलीफ होती है ये हमारी संस्कृति नहीं है. एक कलाकार की कोई एक भाषा नहीं होती हमारी असली भाषा हमारी कला होती है जो हर दिल कोछूती है. एकता का मैसेज देते हुए उन्होंने अपनी बात पूरी करते हुए कहा ‘जो लोग हिंदी और मराठी के बीच दीवार खड़ी कर रहे हैं वो दरअसल देश की एकता पर हमला कर रहे हैं. हिंदी हो या मराठी, ये दोनों हमारी ही भाषाएं हैं. हमारे ही खून में रची-बसी हैं। इनको आपस में भिड़ाना शर्मनाक है इसे खुलकर नकारा जाना चाहिए. देश को जोड़ने की जरूरत है बांटने की नहीं. बता दें रवि किशन जल्द ही फिल्म ‘सन ऑफ़ सरदार […]
महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा और एनसीपी विधायकों के समर्थकों में झड़प, पडलकर ने मांगी माफी “सुरक्षा और गरिमा पर उठे सवाल”

महाराष्ट्र की राजनीति उस समय गरमा गई जब गुरुवार को विधान भवन में भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर और एनसीपी (शरद पवार गुट) केविधायक जितेंद्र आव्हाड के समर्थकों के बीच झड़प हो गई. घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे औरअन्य नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं. मामले में भाजपा विधायकपडलकर ने माफी भी मांगी है. यह झगड़ा विधान भवन की ग्राउंड फ्लोर लॉबी में हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों गुटों के बीच कहासुनी तेजी सेझगड़े में बदल गई. हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को और बिगड़ने से पहले दोनों गुटों को अलग कर दिया. सुरक्षा कर्मियों ने दोनों पक्षों सेएक-एक व्यक्ति को हिरासत में लिया. जान से मारने की दी गई धमकीघटना के बाद मीडिया से बातचीत में जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि अगर विधायक ही विधान भवन में सुरक्षित नहीं हैं तो जनता का क्या होगा उन्होंनेआरोप लगाया कि वह सिर्फ ताजी हवा लेने बाहर निकले थे तभी यह झगड़ा हुआ. आव्हाड ने आरोप लगाया कि यह हमला उन्हें निशाना बनाकरकिया गया था. वहीं पडलकर ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है और उन्होंने किसी को नहीं पहचाना. जितेंद्र आव्हाड ने आगे कहा कि पूरामहाराष्ट्र जानता है कि हमलावर कौन थे? हमसे बार-बार सबूत मांगे जा रहे हैं. जबकि पूरा देश देख चुका है कि हमला किसने किया। गुंडों कोविधानसभा में घुसने दिया जा रहा है और विधायकों की सुरक्षा खतरे में है. मुझे गालियां दी गईं, जान से मारने की धमकी दी गई. मेरे लिए कईअपशब्दों का इस्तेमाल किया गया क्या विधानसभा में यही होना अपेक्षित था? मैं अभी भाषण देकर बाहर आया हूं और ये लोग मुझसे भिड़ने आ गए. अगर विधानसभा में विधायक सुरक्षित नहीं हैं. तो हम विधायक क्यों रहें? यह घटना बुधवार को दोनों नेताओं के बीच हुए एक बहस के अगले दिनहुई. उस दिन आव्हाड ने आरोप लगाया था कि पडलकर ने जानबूझकर कार का दरवाजा तेजी से बंद किया जिससे उन्हें चोट लगी. राजनीतिक खींचतान से जोड़कर जा रहा है देखाइस झगड़े को दोनों नेताओं की पुरानी राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है. पडलकर पहले भी शरद पवार और सुप्रिया सुले पर टिप्पणीकर चुके हैं जिससे विवाद हुआ था. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ऐसी घटनाएं विधानसभा की गरिमा के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि यह मामलाविधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस पर जांच जरूरी है उन्होंने कहा कि जो लोग इसमें शामिल हैं. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं उद्धव ठाकरे ने पूछा कि जब गुंडे विधानसभा में घुस रहे हैं तो राज्य के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री कीजिम्मेदारी क्या है? घटना के बाद गोपीचंद पडलकर ने अपने समर्थकों के व्यवहार के लिए माफी मांगी. वहीं विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने पूरेमामले की रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि इस पर जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे. सभी दलों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विधानसभा परिसरकी गरिमा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. विधान भवन को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है. ऐसे में इस तरह की घटनाएं उसके सम्मान कोठेस पहुंचाती हैं। कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने भी इस पर नाराजगी जताई और कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई का भरोसा दिया है. मंत्रीआशीष शेलार ने मांग की कि उस दिन पास किसे और कैसे जारी हुए. इसकी भी जांच होनी चाहिए.
शक्तिसिंह गोहिल का सवाल – मोंटू पटेल पर चुप क्यों हैं प्रधानमंत्री मोदी? भ्रष्टाचार पर दोहरी नीति क्यों?

देश में न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर तब गंभीर सवाल उठने लगते हैं, जब कुछ मामलों में कार्रवाई बेहद तेज़ी से होती है औरकुछ मामलों में सालों तक कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसे ही एक मामले को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं — फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया केअध्यक्ष मोंटू पटेल के खिलाफ। आरोप हैं कि मोंटू पटेल ने फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता देने के लिए मोटी रकम ली। बिना भवन, स्टाफ या जरूरीसंसाधनों के कॉलेजों को सिर्फ पैसे के आधार पर मान्यता दी गई। हालात इतने गंभीर हैं कि केवल 13 दिनों में 870 कॉलेजों को मंजूरी दे दी गई।यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है। दो साल तक न एफआईआर, न गिरफ्तारीमोंटू पटेल के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने दो वर्षों तक न तो कोई प्राथमिकी दर्ज की और न ही उन्हेंगिरफ्तार किया। जब अदालत ने सवाल किया कि आखिर अब तक समन क्यों नहीं भेजा गया, तो सीबीआई का जवाब था — हमने उनसे फोन परबात कर ली थी। यह जवाब सुनकर सभी हैरान रह गए।वहीं दूसरी ओर, यदि कोई आम नागरिक या विपक्षी दल का कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ लिख दे, तो उसे रातोंरात गिरफ़्तारकर लिया जाता है। यह स्थिति देश में न्याय के दोहरे मापदंडों को उजागर करती है। भाजपा का चेहरा और भ्रष्टाचार का खेलभाजपा का असली चेहरा अब जनता के सामने आने लगा है। लोगों का कहना है कि भाजपा का एक सूत्र बन चुका है — भाजपा का मुखौटा पहनिएऔर खुलकर भ्रष्टाचार कीजिए। पकड़े भी गए, तो जेल नहीं जाना पड़ेगा। यह स्थिति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है। जबभाजपा की सरकार में कोई गुनाह करता है, तो उसके खिलाफ या तो कार्रवाई नहीं होती या फिर जानबूझकर कमजोर जांच की जाती है। केस दर्जजरूर किए जाते हैं, लेकिन अदालत में तथ्य ही नहीं रखे जाते। यही वजह है कि दो साल तक पाँच हज़ार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के बावजूद भी कोईठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। रॉबर्ट वाड्रा मामला: 11 साल बाद चार्जशीट?प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी जी हर मंच से रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ बोलते थे, लेकिन सत्ता में आए 11 साल हो चुके हैं, फिर भी उन्हें कुछ हाथनहीं लगा। अब जाकर 11 साल बाद एक चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि अदालतों में यह साफ नियम है कि चार्जशीट समय पर दाखिल कीजानी चाहिए।हरियाणा में खट्टर सरकार ने इस मामले की जांच के लिए आयोग बनाया, विशेष जांच दल गठित किया, लेकिन दोनों बार कुछ भी साबित नहीं होसका। फिर से एक और जांच बैठाई गई, लेकिन वहां भी कुछ नहीं मिला। इससे साफ हो जाता है कि भाजपा केवल दिखावे की राजनीति करती है। कांग्रेस नेताओं पर दमन, लेकिन भाजपा के भ्रष्ट नेताओं पर चुप्पीआज जब विपक्ष सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है, तो उस पर कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस नेता भूपेश बघेल जीजब झुकने को तैयार नहीं हुए, तो उनके बेटे को डराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन कांग्रेस ने साफ कर दिया है — “हम न डरेंगे, न झुकेंगे।”राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जनता की समस्याओं को लेकर सड़कों से संसद तक संघर्ष कर रहे हैं। देश का एक बड़ा वर्ग आज उनके साथखड़ा है। प्रधानमंत्री से मांगेंदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ सीधी मांगें की जा रही हैं, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी कथित प्रतिबद्धता को परखा जासके —भाजपा में शामिल सभी भ्रष्ट नेताओं को पार्टी से बाहर किया जाए।सीबीआई को निर्देश दिए जाएं कि वह अदालत के सामने सच्चाई और सभी तथ्य रखे।इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिसके लिए आयकर विभाग और अन्य संस्थानों को लगाया जाए।फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए नया कानून बनाया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।फार्मेसी काउंसिल में भाजपा द्वारा भरे गए सभी अपने लोगों को हटाया जाए।काउंसिल की जिम्मेदारी किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए, ताकि उसका संचालन निष्पक्ष हो सके।आज देश एक गंभीर मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ विपक्ष पर जांच और गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर सत्ता के करीब बैठे भ्रष्टनेताओं पर सरकार चुप है। ऐसे में यह सवाल उठता है- क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल विपक्ष के लिए है? जनता सब देख रही है और अब जवाब मांग रही है। यदि प्रधानमंत्री वाकई भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, तो उन्हें तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, वरना देशका विश्वास टूटता जाएगा।
आतिशी का भाजपा पर बड़ा हमला – गुजरात में जीत से घबराई भाजपा, फर्जी मुकदमों में फंसा रही है आम आदमी पार्टी ने कहा: डरने वाले नहीं, गुजरात में बदलाव तय हैI

आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने एक प्रेस वार्ता में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहाकि गुजरात में ‘आप’ की बढ़ती लोकप्रियता और हाल ही में विसावदर उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत से भाजपा बुरी तरह घबरा गई है। इसीघबराहट में भाजपा अब केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ झूठे और फर्जी मुकदमेदर्ज करवा रही है। आतिशी ने कहा कि भाजपा की यह रणनीति बिल्कुल साफ है — जब भी कोई पार्टी उसे चुनौती देती है या कहीं से उसे हार का डरहोता है, तो वह सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं को उस पार्टी के खिलाफ खड़ा कर देती है। उन्होंने कहा कि यही अब आम आदमी पार्टी के साथकिया जा रहा है, लेकिन ‘आप’ का कोई भी नेता इन फर्जी मामलों से डरने वाला नहीं है। आप’ की बढ़ती ताकत से डरी भाजपाआतिशी ने कहा कि गुजरात के विसावदर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत ने भाजपा को बौखला दिया है। उन्होंने बताया कि चुनावके दौरान भाजपा ने हरसंभव कोशिश की ‘आप’ को हराने की — पैसा बहाया, शराब बंटवाई, ‘आप’ कार्यकर्ताओं को धमकाया, प्रशासन का दुरुपयोगकिया और प्रत्याशी से सेटिंग तक की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने वहां भारी मतों से जीत दर्ज की। इस जीत के बादगुजरात में आम आदमी पार्टी का जनसमर्थन तेजी से बढ़ रहा है और जनता अब भाजपा को हटाकर ‘आप’ को विकल्प के रूप में देख रही है। यही बातभाजपा को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। हर विभाग की जांच, फिर भी नहीं मिला एक भी पैसा भ्रष्टाचार का आतिशी ने बताया कि भाजपा सरकार ने दिल्ली सरकार के लगभग हर विभाग की जांच करवाई है — चाहे वो स्कूल हों, अस्पताल, दवाइयां, क्लासरूम, सड़कों का निर्माण या फिर फ्लाईओवर। यहां तक कि दिल्ली सरकार की 400 फाइलें केंद्र सरकार ने छह-छह महीने तक रोककर रखीं, लेकिन आज तक एक पैसे का भ्रष्टाचार नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि आम आदमी पार्टी ने कुछ गलत किया है, तो उसेसबूत पेश करने चाहिए। मगर सच्चाई यह है कि भाजपा की एजेंसियां इतने सालों की जांच के बाद भी एक पैसा नहीं ढूंढ पाई हैं।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और जांच एजेंसियों का दुरुपयोगआतिशी ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट तक ने सीबीआई और ईडी को ‘पिंजरे का तोता’ कहा था और इनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। उन्होंनेकहा कि भाजपा अब फिर से इन एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है, जो साफ तौर पर कानून और संविधान का मजाक उड़ाने जैसा है। फर्जीमुकदमे दर्ज कराना, नेताओं को डराने की कोशिश करना — ये सब लोकतंत्र के खिलाफ है। गुजरात की जनता बदलाव चाहती हैआतिशी ने गुजरात की हालत पर बात करते हुए कहा कि पिछले 30 सालों से भाजपा ने गुजरात में कुछ नहीं किया है। सूरत जैसे शहरों में लोगों कोघुटनों तक पानी में रहना पड़ता है, अस्पतालों की हालत बदतर है, स्कूल टूट रहे हैं और सड़कें खस्ताहाल हैं। लोग बदलाव चाहते हैं, और अब उन्हें‘आप’ में एक सच्चा विकल्प नजर आ रहा है। डरने वाले नहीं हैंआतिशी ने दो टूक कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता न कभी भ्रष्टाचार में शामिल हुए हैं और न ही किसी एजेंसी से डरते हैं। उन्होंने भाजपा को चुनौतीदेते हुए कहा कि आप चाहे जितनी जांच करा लो, एक पैसा भी भ्रष्टाचार का नहीं मिलेगा। ‘आप’ ईमानदारी की राजनीति करती है और गुजरात मेंबदलाव तय है। उन्होंने कहा, भाजपा जितनी कोशिश कर ले, अब गुजरात की जनता जाग चुकी है। इस बार आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी औरजीतकर गुजरात में सरकार बनाएगी।यह प्रेस वार्ता भाजपा की रणनीतियों के खिलाफ आम आदमी पार्टी का एक सशक्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब था। आतिशी के बयान ने साफकर दिया कि ‘आप’ झुकने या डरने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि वो हर हाल में जनता के लिए लड़ने वाली पार्टी है।