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सुधा मूर्ति का संदेश तकनीक नहीं, समाज बदलने वाले नवाचारों को भी मिले सम्मान “नवाचार के लिए बने विशेष अवार्ड श्रेणी”

राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने गुरुवार को कहा कि हम तकनीकी उपलब्धियों की तो खूब सराहना करते हैं, लेकिन वहीं समाज की रोजमर्राकी समस्याओं का हल निकालने वाले असली नवाचार करने वालों को पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक नवाचार करनेवाले लोग, जो आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए नए तरीके और समाधान खोजते हैं, उन्हें भी उतनी ही अहमियत और सम्मान मिलनाचाहिए। उनका काम सीधे समाज की भलाई से जुड़ा होता है। शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए मूर्ति ने कहा कि इडली ग्राइंडर जैसे नवाचारोंने जीवन को बदल दिया है, विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को, फिर भी उनके आविष्कारकों को काफी हद तक भुला दिया गया है। आगे उन्होंनेकहा, “जब आप कोई तकनीकी नवाचार करते हैं, तो आपकी उपलब्धियों के लिए आपका सम्मान किया जाता है, आपको पुरस्कार मिलता है, लोगताली बजाते हैं, लेकिन जब अन्य उपलब्धियों की बात आती है, तो लोग परवाह नहीं करते।” राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहावैश्विक उदाहरणों की करते हुए मूर्ति ने क्यूआर कोड के जापानी आविष्कारक का हवाला दिया, जिन्होंने अपने नवाचार का पेटेंट नहीं कराने का विकल्पचुना, जिससे यह दुनिया भर में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हो गया। उनका कहना था कि इसे मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसाइसलिए किया क्योंकि ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ (बहुत से लोगों के कल्याण और सुख के लिए)।” मनोनीत सदस्य ने कहा कि अगर सरकार नेविभिन्न श्रेणियों में कई पुरस्कार स्थापित किए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के विभाग द्वारा सीएसआर मान्यता से लेकर वाणिज्य और उद्योग विभाग द्वाराप्रौद्योगिकी पुरस्कार तक। लेकिन सामाजिक नवाचार के लिए कोई समर्पित पुरस्कार श्रेणी नहीं है। “मैं भारत सरकार से अनुरोध करती हूं कि वह एकनई पुरस्कार श्रेणी सामाजिक नवाचार श्रेणी शुरू करे, ताकि सामाजिक नवाचार को मान्यता और सम्मान मिल सके और हम सभी समाज को इसकालाभ मिल सके।”राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहा है कि जो लोग आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें सम्मान मिलनाचाहिए। उन्होंने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया।

भारत से दूर, पाकिस्तान-चीन की ओर! बांग्लादेश में नया भू-राजनीतिक झुकाव, यूनुस शासन में दिल्ली से दूरी, इस्लामाबाद से नजदीकी

बांग्लादेश में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद से ही स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश लगातारकट्टरपंथ की तरफ बढ़ा है। आलम यह है कि उसकी विदेश नीति भी भारत से दूर होकर पाकिस्तान पर केंद्रित होती दिख रही है। इसका एक उदाहरणबुधवार को मिला, जब बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह कूटनीतिक तौर पर संभव है किबांग्लादेश, पाकिस्तान के उस क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो जाए, जिसमें भारत शामिल नहीं है। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी संवाद संस्था (बीएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, तौहीद ने कहा कि इस तरह के कूटनीतिक समूह में नेपाल और भूटान का शामिल होना शायद संभव न हो। उन्होंने कहा, “यहहमारे लिए (बांग्लादेश के लिए) कूटनीतिक तौर पर संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान का पाकिस्तान के साथ किसी समूह में शामिल होना, वह भीजिसमें भारत न हो, के साथ जुड़ना मुमकिन नहीं है।” ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुएतौहीद ने कहा कि इशाक डार ने कुछ कहा है और किसी मौके पर इसमें प्रगति भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने मामले पर आगे टिप्पणी से इनकारकर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे गठबंधन के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार नेहाल ही में दावा किया था कि बांग्लादेश-चीन और पाकिस्तान का त्रिपक्षीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसे बाकी क्षेत्रीय और क्षेत्रके बाहर की ताकतों को शामिल कर के बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस कीअंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस देश का रुख पाकिस्तान की तरफ नरम हुआ है। बांग्लादेश ने उसी देश के साथ अपने रिश्तों कोगहरा करना शुरू कर दिया है, जिसकी सत्ता ने कभी पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषियों पर जुल्म ढाए थे। यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश और पाकिस्तानके बीच रक्षा, व्यापार, कूटनीतिक और ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुए हैं। यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिलीगौरतलब है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अलग-अलग देशों के गठबंधन की चर्चाओं को चीन ने ही जोर-शोर से बढ़ाया। इस एवज में चीन नेइस साल जून में एक त्रिपक्षीय बैठक भी रखी थी, जिसमें चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सचिव स्तर के अधिकारियों की मुलाकात हुई थी। इसबैठक को चीन के कुनमिंग में रखा गया था। इसी दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और चीन साथ में एक नया क्षेत्रीय गठबंधन बनाने कीतैयारी कर रहे हैं, जो कि सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपेशन) का विकल्प बन सकता है। चूंकि सार्क में भारत सबसे प्रमुखताकत वाला देश है, इसलिए पाकिस्तान की आवाज इस संगठन में कमजोर पड़ जाती है। सार्क बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह से निष्क्रिय है। 2016 मेंपाकिस्तानी आतंकी संगठनों की तरफ से अंजाम दिए गए उड़ी हमले के बाद से ही इस संगठन की प्रमुख बैठकें नहीं हुई हैं। इसी मौके का फायदाउठाकर पाकिस्तान ने चीन की मदद से दक्षिण एशिया में भारत के बिना एक गठबंधन बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। चूंकि बांग्लादेश में भी भारत कासमर्थन करने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान को यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन! पौड़ी के DFO तुरंत हटाए गए, मानव–वन्यजीव संघर्ष पर सख्त आदेश

वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को एस्कार्ट की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरानअधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने पौड़ी में मानव -वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ कोतत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मानव वन्यजीवसंघर्ष को खत्म करने के लिए वन विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन के स्तर पर भी प्रभावी प्रयास किए जाने की बात कही। कहा कि यह सुनिश्चितकिया जाए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना की सूचना मिलने के 30 मिनट के अंदर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच जाए। इसके लिए संबंधितडीएफओ और रेंजर की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रभावितों को आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाएमुख्यमंत्री ने पौड़ी में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का अधिक भय है, ऐसे क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और घर तक लाने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा एस्कॉर्ट की व्यवस्था की जाए। सीएम धामी ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी परिवार से कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना, ऐसी स्थिति से निपटने के लिएवन विभाग प्रभावित परिवार की आजीविका को सहायता देने के लिए दो सप्ताह के अंदर नीति बनाकर दें। कहा कि जनपदों में मानव-वन्यजीव संघर्षको कम करने के लिए जिन भी उपकरणों की आवश्यकता है, उन्हें यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाए। वन्य जीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाएसीएम ने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी वन्यजीवों से लोगों के जीवन को बचाना है, इसके लिए नई तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दियाजाए। जंगली जानवर आबादी क्षेत्रों में न आये, इसके लिए स्थाई समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों मेंकैमरों के माध्यम से निरंतर नजर बनाये रखें। वन कर्मी लगातार निगरानी रखें, साथ ही ग्रामीणों के साथ अपना संवाद मजबूत रखें। मुख्यमंत्री ने कहाकि बस्तियों के आस पास जंगली झाडियों को अभियान चलाकर साफ किया जाए, साथ ही बच्चों और महिलाओं को विशेष तौर पर आस पास वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाए।

कुपवाड़ा – पुंछ में अब शिक्षक करेंगे आवारा कुत्तों की निगरानी, स्कूलों में नई जिम्मेदारी लागू कड़ा मॉनिटरिंग सिस्टम

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा और पुंछ जिलों में शिक्षक कक्षा से इतर अब कुत्तों की निगरानी करेंगे। दोनों जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) नेसरकारी और निजी दोनों स्कूलों के शिक्षकों को अलग तरह की ये एक नई जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षक अब स्कूलों के भीतर और बाहर आवारा कुत्तों वइनसे संबंधित घटनाओं की निगरानी और प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने ये कदम स्कूलों में विद्यार्थियोंऔर स्टाॅफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अप्रत्याशित रूप से उठाया है। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नामितकरना अनिवार्य है। कुपवाड़ा के सीईओ ने जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों, जोनल एजुकेशन अफसर (जेडईओ) और हेडमास्टरों को आधिकारिकनिर्देश जारी किया है। स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगाइसमें कहा गया है कि स्कूलों के अंदर और बाहर प्रमुख स्थानों पर ”कुत्तों से सावधान रहें” संदेश वाले साइनबोर्ड लगाए जाएं। ये अनिवार्य हैं ताकिआवारा कुत्तों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। नोडल अधिकारी को अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसी तरह के निर्देश सीईओ पुंछ नेजारी किए हैं। यहां मुख्य जोर समन्वय पर है और सभी सरकारी और निजी स्कूलों के ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) और संस्थानों के प्रमुखों(एचओआई) को आवारा कुत्तों पर निगरानी और समन्वय के लिए नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया है। सीईओ की ओर से जारीआधिकारिक निर्देश में लिखा है कि नोडल अधिकारी आवारा कुत्तों को देखे जाने और उनसे जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार होगा। इसकेअलावा नोडल अधिकारी जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित नगर पालिका, पशुपालन, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगा। एक सख्त प्रयास माना जा रहासुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुंछ जिले में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए जिला उपायुक्त ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक ली थी।इसमें आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और पशु जन्म नियंत्रण पर गंभीर चर्चा की गई थी। इस बैठक के बाद अब सीईओ ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किएहैं। सीईओ के जारी निर्देशों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इनके पालन में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा औरसंबंधित अधिकारियों व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त प्रयास मानाजा रहा है

लोकदल प्रमुख सुनील सिंह का सपा बीजेपी पर आरोप “नीतियाँ नहीं, सिर्फ नारे बदलते हैं… महिलाओं को फिर बनाया जा रहा वोट बैंक”जानें क्या कुछ कहा”

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक दल अपने-अपने वादों और घोषणाओं के साथ मैदान में हैं। इसी क्रम में समाजवादीपार्टी द्वारा ग़रीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा के इस घोषणा पत्र-शैली वादे पर अब लोकदलके राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने एक कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुनील सिंह ने कहा कि यूपी की राजनीति फिर से उसी पुरानी स्क्रिप्ट पर लौट आईहै, जहाँ चुनाव आते ही बड़ी-बड़ी घोषणाएँ और सपने परोसे जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों का कोई अता-पता नहीं रहता। वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीतिलोकदल प्रमुख ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि बीजेपी और सपा में मूल अंतर केवल प्रतीकों और नारों का है, नीयत का नहीं। उनके अनुसार बीजेपी नेमहंगाई, बेरोज़गारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जनता को निराश किया। दूसरी ओर, सपा अपने पुराने शासन के विफल रिकॉर्ड कोभुलाकर नए वादों की चमक से जनता को फिर से भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। सुनील सिंह ने कहा कि दोनों ही पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड यहदिखाता है कि वादे बड़े होते हैं, लेकिन काम शून्य। जनता को चुनाव से पहले सपने दिए जाते हैं, और बाद में वही सपने टूटे हुए मिलते हैं। समाजवादीपार्टी की 40,000 रुपये वाली योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं को वोट बैंक समझने की राजनीति सबसे खतरनाकराजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों को महिलाओं की याद केवल चुनाव के समय आती है। पाँच साल तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर कोई ठोस काम नहीं होता। और जैसे ही चुनाव नज़दीक आते हैं, पार्टियाँ वादों की झड़ी लगा देती हैं।सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के लिए वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीति, संवेदना और निरंतर प्रयास कीज़रूरत है न कि चुनावी लुभावने दावों की।