2019 में केंद्रीय गृह मंत्री का पदभार संभालने के बाद अमित शाह ने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में पाया। उन्होंने इस चुनौतीको स्वीकार करते हुए 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया। शाह का कहना है कि यह केवल आत्मविश्वास से नहीं बल्कि ठोसकार्ययोजना और कड़े कदमों के आधार पर संभव हो पाया है।
नक्सलवाद खत्म करने की रणनीति
अमित शाह के अनुसार, नक्सलवाद का उदय विकास की कमी और असंतोष से हुआ। 1990 तक संसाधनों की कमी के कारण देश के कई हिस्सेविकास से वंचित रहे, जिससे नक्सल विचारधारा को पनपने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाईकरते हुए सुरक्षाबलों के प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों का उपयोग बढ़ाया।
कड़ी कार्रवाई और आत्मसमर्पण की नीति
सरकार की रणनीति का पहला पहलू नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना था। पिछले दस वर्षों में 7,500 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कियाहै। इनमें से कई अब राज्य पुलिस बलों में शामिल होकर सुरक्षा का हिस्सा बन गए हैं।
शाह ने बताया कि नक्सली नेतृत्व को खत्म करने के लिए सरकार ने उनके पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्यों को निशाना बनाया। पिछलेपांच सालों में 15 बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया है।
नक्सलियों की भर्ती पर नकेल
नक्सली संगठनों की भर्ती पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंच को सीमित किया। साथ ही, अवैध वसूली और आर्थिकमदद पर रोक लगाने के लिए ऑनलाइन भुगतान प्रणाली लागू की गई।
विकास कार्यों का विस्तार
शाह का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया। पिछले दस साल में 11,503 किलोमीटर सड़केंबनाई गईं और अतिरिक्त 17,589 किलोमीटर सड़कों के लिए 20,815 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इसके अलावा, मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने केलिए 2,343 टावर भी लगाए गए।
युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की पहल
गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए युवाओं को कौशल विकास के जरिए सशक्त बनाने का प्रयास किया गया। नक्सल प्रभावित जिलों मेंऔद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की गई।
केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय
नक्सलवाद से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया। मंत्री, राज्य और जिला स्तर पर समन्वय के माध्यम सेरणनीतियों को क्रियान्वित किया गया। विपक्ष शासित राज्यों से भी समर्थन मिला, हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान कुछ चुनौतियाँ सामनेआईं।
नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र को नक्सल मुक्त तभी घोषित किया जाएगा जब वहां पूरे साल कोई नक्सली घटना न हो। उनका मानना हैकि नक्सलवाद का खात्मा केवल आत्मविश्वास से नहीं बल्कि ठोस रणनीति और ठोस कार्यवाही से ही संभव है।