8931 दिनों की जनसेवा यात्रा नरेन्द्र मोदी के कामकाज को वीरेन्द्र सचदेवा ने बताया देश के लिए प्रेरणा

सरिता साहनी नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन को लेकर एक विस्तृत बयानदिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 8931 दिनों तक लगातार देश की सेवा कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सचदेवा के अनुसार, यह सिर्फसमय का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह मेहनत, समर्पण और जनता के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल है। 8931 दिनों की यात्रा क्या बताती हैवीरेन्द्र सचदेवा ने बताया कि 24 फरवरी 2002 को जब नरेन्द्र मोदी पहली बार गुजरात में विधायक बने, तब से लेकर आज 22 मार्च 2026 तकउन्होंने लगातार जनता के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक सक्रिय रहना और लगातार जिम्मेदारी निभाना आसान नहीं होता।यह यात्रा दिखाती है कि प्रधानमंत्री ने हमेशा देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है और हर समय नई सोच के साथ काम किया है। गुजरात से शुरू हुआ विकास का मॉडलसचदेवा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन में सबसे पहले गुजरात में विकास का मॉडल तैयार किया। उन्होंने वहां बुनियादी सुविधाओं, उद्योग, सड़क, बिजली और पानी जैसे क्षेत्रों में काम किया। इसके बाद जब वे 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इसी विकास मॉडल को पूरेभारत में लागू करने की कोशिश की। पूरे देश को विकास की राह पर लाने का प्रयासवीरेन्द्र सचदेवा के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने देश को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के जरिए गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं तक विकास पहुंचाने की कोशिश की गई है। उनका मानना है कि आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया में अपनी अलगपहचान बना रहा है। जनता का भरोसा और लगातार जीतसचदेवा ने यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी को बार-बार जनता ने चुनकर उनके काम पर भरोसा जताया है। चार बार गुजरात से विधायक और तीन बार उत्तरप्रदेश से सांसद चुना जाना यह दिखाता है कि लोगों का विश्वास लगातार उनके साथ बना रहा।उन्होंने कहा कि यह किसी भी नेता के लिए बहुत बड़ी बात होती है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदमवीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश में नई योजनाएं, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। साथ ही भारत अब दुनिया में भी मजबूत स्थिति में खड़ा है और कई मामलों में नेतृत्व कर रहा है। नाम बदलने के पीछे की सोचसचदेवा ने प्रधानमंत्री के कुछ फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजपथ का नाम कर्तव्यपथ करना, प्रधानमंत्री आवास का पता लोक कल्याण मार्गकरना और राजभवनों को लोकभवन कहना सिर्फ नाम बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे एक सोच है, जो लोगों को यह बताती है कि सत्ताका मतलब सेवा और जिम्मेदारी है। यह कदम लोगों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। सेवा और समर्पण की राजनीतिसचदेवा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की राजनीति का मुख्य उद्देश्य हमेशा सेवा और समर्पण रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने हर फैसले मेंदेशहित को सबसे ऊपर रखा है। इसी वजह से वे इतने लंबे समय तक लोगों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं। देश को वैश्विक पहचान दिलाने का दावावीरेन्द्र सचदेवा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की वजह से आज भारत की पहचान दुनिया में और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत बड़ेदेशों के साथ बराबरी से खड़ा है और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखता है। यह देश के लिए गर्व की बात हैवीरेन्द्र सचदेवा के बयान से यह साफ होता है कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 8931 दिनों की जनसेवा यात्रा को एक बड़ी उपलब्धि मानती है।यह यात्रा केवल एक नेता के राजनीतिक जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि देश के विकास, बदलाव और नई सोच की भी कहानी है। आने वाले समयमें भी इस तरह की सोच और काम देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आतिशी का विधानसभा अध्यक्ष को पत्र पूरे विपक्ष के निष्कासन पर उठाए गंभीर सवाल, लोकतंत्र बचाने की अपील

सरिता साहनी नई दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र लिखकर हाल हीमें हुए घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने पूरे विपक्ष को सदन और विधानसभा परिसर से बाहर किए जाने को लोकतंत्र के लिए खतरनाकबताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले से न केवल जनप्रतिनिधियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि जनता की आवाज भी दब जातीहै। विधानसभा सिर्फ सरकार का मंच नहीं, लोकतंत्र का केंद्रआतिशी ने अपने पत्र में कहा कि विधानसभा केवल सरकार का मंच नहीं होती, बल्कि यह लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां सत्ता पक्षऔर विपक्ष दोनों की बराबर भागीदारी होती है। उन्होंने समझाया कि सदन में स्वस्थ बहस, चर्चा और विचार-विमर्श के जरिए ही सही फैसले लिए जातेहैं। विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता के मुद्दों को सामने रखने की होती है। अगर विपक्ष को ही बाहर कर दियाजाएगा, तो लोकतंत्र अधूरा रह जाएगा। पूरे विपक्ष का निष्कासन बताया अभूतपूर्वआतिशी ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे विपक्ष को एक साथ सदन और परिसर से बाहर कर दिया गया। उन्होंनेइसे बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि देश की किसी भी विधानसभा, लोकसभा या राज्यसभा में ऐसा उदाहरण पहले कभी नहीं देखागया। उनका कहना है कि यह फैसला लोकतंत्र पर सीधा हमला है और इससे गलत परंपरा की शुरुआत हो रही है। अध्यक्ष के रवैये पर सवालआतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अध्यक्ष को चुना गया था, तब सभी ने उम्मीद की थी कि वे निष्पक्षरहकर सदन को सही तरीके से चलाएंगे। लेकिन अब जो घटनाएं सामने आई हैं, उनसे लगता है कि विपक्ष के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं हो रहा है।उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। सत्ता पक्ष को छूट, विपक्ष पर कार्रवाईआतिशी ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने कई दिनों तक सदन नहीं चलने दिया, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्तकदम नहीं उठाया गया। इसके विपरीत, जब विपक्ष ने अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो उन्हें तुरंत सदन से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कियह साफ तौर पर दोहरा रवैया है, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। विधायकों को गेट पर रोकना बताया गलतआतिशी ने कहा कि विपक्षी विधायकों को न केवल सदन से बाहर किया गया, बल्कि उन्हें विधानसभा के गेट पर ही रोक दिया गया। उन्हें समितियोंकी बैठकों में भी शामिल नहीं होने दिया गया, जबकि यह उनका अधिकार है। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकारों का हनन बताया और कहाकि इससे वे अपने काम नहीं कर पाए। जनता की आवाज दबाने का आरोपआतिशी का कहना है कि विपक्ष का सबसे बड़ा काम जनता की समस्याओं को उठाना होता है। लेकिन अगर विपक्ष को ही बोलने नहीं दिया जाएगा, तो जनता की आवाज कौन सुनेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जनहित के मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो उसे भी रोक दिया गया और उसेविशेषाधिकार हनन का मामला बना दिया गया। नई और खतरनाक परंपरा की शुरुआतआतिशी ने कहा कि पूरे विपक्ष को बाहर करना एक नई और खतरनाक परंपरा की शुरुआत है। अगर यह जारी रहा, तो भविष्य में विपक्ष की भूमिकाखत्म हो सकती है और लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताया। अधिकार तुरंत बहाल होंआतिशी ने अपने पत्र में मांग की है कि सभी निष्कासित विपक्षी विधायकों को तुरंत सदन में वापस बुलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सदन कोनिष्पक्ष तरीके से चलाया जाए और विपक्ष को बोलने का पूरा मौका दिया जाए। साथ ही, जनहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। आतिशीका यह पत्र दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। उन्होंने साफ कहा है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा, जब सत्ता और विपक्षदोनों को बराबर अधिकार मिलेंगे। अब यह देखना अहम होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और क्या विपक्ष को उसकाअधिकार वापस मिलता है या नहीं।