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बदायूं के सहसवान-रामपुर संगीत घराने की परंपरा के संगीतकारों का नाम देश ही नहीं दुनिया में रोशन रहा है। बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले भले ही बदायूं नहीं आईं लेकिन वह सहसवान घराने के उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के शार्गिंदों (शिष्य) में शामिल थीं। बताया जाता है कि आशा भोसले ने उनसे शास्त्रीय संगीत की तालीम ली थी। आशा भोसले ने ‘झुमका गिरा रे…’ गीत गाकर बरेली शहर को भी नई पहचान दी। यह सदाबहार गीत आज भी हर किसी की जुबान पर रहता है।

भोसले का निधन
तीनों पद्म पुरस्कार पाने वाले उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का निधन 2021 में मुंबई में हुआ था। उन्हें 1991 में पदम श्री, 2006 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण मिला था। वर्ष 2021 में 89 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। सहसवान घराने से जुड़े संगीतकारों को अब तक नौ पदम पुरस्कार मिल चुके हैं। दिग्गज शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के शागिर्दों में आशा भोसले के अलावा सोनू निगम, एआर रहमान, लता मंगेशकर, हरिहरन, शान, और गीता दत्त जैसे प्रसिद्ध गायक शामिल हैं। अन्य प्रसिद्ध नाम जसपिंदर नरूला, अलीशा चिनॉय, शिल्पा राव भी उनकी शिष्य परंपरा में शामिल रहे हैं। पद्म भूषण स्वर्गीय उस्ताद निसार हसन खां के पौत्र मुज्तबा हसन खां ने आशा भोसले के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि आशा भोसले का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

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