कांग्रेस ने महिला सुरक्षा के गंभीर हालातों के लिए भाजपा सरकारों को जिम्मेदार ठहराया- महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की-अलका लांबा बोलीं,अपराधियों का समर्थन करना बंद करे भाजपा

नई दिल्ली, 03 अगस्त- कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में महिला सुरक्षा के गंभीर हालातों को लेकर भाजपा सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए प्रज्वलरेवन्ना मामले की तर्ज पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराए जाने की मांग की है। महिला कांग्रेस ने ओडिशा में 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची की जिंदा जलाकर हत्या, मध्यप्रदेश में दो वर्षों में 7,418 दलित-आदिवासी महिलाओं केसाथ बलात्कार और गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस द्वारा लड़कियों के लिए जारी शर्मनाक पोस्टर को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यहमांग उठाई। इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने ओडिशा की 15 वर्षीय नाबालिगबच्ची का उल्लेख किया, जिसे तीन लोगों ने अगवा कर जिंदा जला दिया था और जिसने इलाज के दौरान दिल्ली एम्स में दम तोड़ दिया। इस मामलेमें पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब अपराधी तीन लोग थे तो पुलिस उन्हें पकड़ने के बजाय यह कह रही है कि बच्ची कोजलाने में किसी का हाथ नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा-शासित राज्य की पुलिस अपराधियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है। लांबा ने भाजपा शासित मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 2022 से2024 के बीच राज्य में 7,418 एससी-एसटी महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हुईं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा शासित राज्यों मेंअपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। अलका लांबा ने बताया कि महिला कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र के दौरान महिलाओं पर हो रहे अपराधों के खिलाफ ‘न्याय मार्च’ निकाला था।उन्होंने बताया कि 21 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें उनके घर से उठाकर नजफगढ़ थाने में नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सत्ता के दबावमें महिला कांग्रेस के शांतिपूर्ण मार्च को दबाने की कोशिश की, जिससे कई कार्यकर्ताओं को चोटें आईं। गुजरात में पुलिस के पोस्टर और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर पीएम मोदी को घेरा लांबा ने गुजरात पुलिस द्वारा अहमदाबाद में लगाए गए एक पोस्टर को शर्मनाक बताया, जिसमें लड़कियों को रात में बाहर न निकलने की सलाह दीगई थी। उन्होंने कहा कि यह मानसिकता दर्शाती है कि भाजपा शासित राज्यों में अपराध को रोकने के बजाय महिलाओं को ही घरों में रहने के लिएकहा जा रहा है। लांबा ने प्रज्वल रेवन्ना के मामले में कर्नाटक सरकार की सराहना करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाकर मास रेपिस्ट कोउम्रकैद की सजा दिलाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रज्वल रेवन्ना के लिए प्रचार किया, जबकि उन्हें उसके खिलाफ लगे आरोपों कीजानकारी थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रज्वल को जर्मनी भागने में भी मदद की थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के प्रयासों से उसे सजा दिलाई गई।
तेजस्वी यादव का वोटर लिस्ट विवाद गरमाया विपक्ष-भाजपा आमने-सामने, लोकतंत्र पर प्रहार या बचाव?

राजद नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के मतदाता सूची में नाम न होने वाले बयान पर सियासत तेज हो गई है. विपक्ष और भाजपाने इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर हमला बोला है सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने में लगी हुई है. वहीं भाजपा नेता बूरा नरसैया गौड़ ने कहा कि विपक्षी गठबंधन लोकतंत्र की जड़ यानी चुनाव पर प्रहार करना चाहता है. सपा सांसद अवधेश प्रसाद नेकहा कि भाजपा इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने में लगी हुई है. वोट का अधिकार ही गरीबों की ताकत है भाजपा इसी ताकत और सम्मान कोखत्म करना चाहती है इसकी शुरुआत हो चुकी है. बिहार में लोकसभा में पूरा विपक्ष चल रहे एसआईआर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है हमकह रहे हैं कि यह वोट की चोरी है और इसे रोका जाना चाहिए. लेकिन सरकार इसे नहीं समझ रही है. कल भी संसद का सत्र है। देखते हैं क्या होता है. प्रहार करने का सही समयवहीं भाजपा नेता बूरा नरसैया गौड़ ने कहा ने कहा कि इस रवैये से बहुत गंभीरता से निपटा जाना चाहिए. अभी तक एनडीए सरकार और प्रधानमंत्रीमोदी चुपचाप देख रहे हैं. राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और इंडिया गठबंधन जैसे लोकतंत्र विरोधियों पर प्रहार करने का यह सही समय है. उन्होंने कहाकि राहुल गांधी और उनकी टीम, तेजस्वी यादव और बिहार व पूरे भारत में इंडिया गठबंधन गोएबल्स विश्वविद्यालय के मास्टर बन गए हैं. वे लोकतंत्रकी जड़ यानी चुनाव पर प्रहार करना चाहते हैं वे फर्जी मतदाता सूचियों के ज़रिये चुनाव जीतना चाहते हैं। इसीलिए वे बिहार में एसआईआर केखिलाफ हैं ये लोग रोते-बिलखते बच्चे बन गए हैं क्योंकि वे अपनी जीत के लिए नकली मतदाताओं, बांग्लादेशी मतदाताओं, धोखेबाज मतदाताओंऔर नकाबपोश मतदाताओं पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई और देश होता तो इन लोगों को जेल हो जानी चाहिए थी. गंभीरता से होगा निपटनाक्योंकि यह देशद्रोह के अलावा और कुछ नहीं है इस रवैये से बहुत गंभीरता से निपटना होगा. अभी तक एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री मोदी चुपचापदेख रहे हैं राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और इंडिया गठबंधन जैसे लोकतंत्र-विरोधियों प्रहार करने का समय आ गया है. राजद नेता तेजस्वी यादव नेशनिवार को चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया था. उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि मेरा नाम मतदातासूची में नहीं है. मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा? तेजस्वी ने चुनाव के एप को दिखाते हुए कहा कि उनके ईपीआईसी नंबर को सर्च करने पर उनका नाम मतदातासूची में नहीं आ रहा है. हालांकि, निर्वाचन आयोग ने तुरंत ही तेजस्वी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया. राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार कोचुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि मेरा नाम मतदाता सूची में नहीं है. मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा? उनके इस बयान पर सियासत तेज हो गई है.
दिल्ली को साफ़ और हरा-भरा बनाने के लिए – डॉ. पंकज कुमार सिंह ने शुरू किया जन अभियान स्वच्छता, हरियाली और जनता से संवाद-एक नई दिशा की शुरुआत

विकासपुरी में चला दिल्ली को कूड़े से आज़ादी अभियानदिल्ली के स्वास्थ्य, परिवहन और आईटी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र के रनहौला गांव में सफाई अभियान चलाकरदिल्ली को कूड़े से आज़ादी कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। यह अभियान मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में 1 अगस्त से शुरू किया गया है और 31 अगस्त 2025 तक चलेगा। इसका उद्देश्य है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली को पूरी तरह स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाया जाए।डॉ. सिंह ने कहा कि यह सिर्फ सफाई करने का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक को जागरूक करने का आंदोलन है। जब तक लोग खुद आगे नहींआएंगे, तब तक दिल्ली को साफ और स्वस्थ नहीं बनाया जा सकता। हर नागरिक लगाए एक पेड़ – एक पेड़ माँ के नामसफाई अभियान के बाद डॉ. सिंह ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पौधारोपण किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान हमारे पर्यावरण को बचानेऔर माँ के प्रति प्रेम दिखाने का एक अनोखा तरीका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हर साल कम से कम एक पेड़ अपनी माँ के नाम पर लगाएंऔर उसकी देखभाल करें। यह काम सिर्फ एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि इसे हमेशा के लिए अपनाना होगा। पेड़ लगाना प्रकृति से प्यार है और माँके नाम पेड़ लगाना एक भावनात्मक जुड़ाव है। हम सबको मिलकर पेड़ लगाने की इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। कैंप कार्यालय में भी चला सफाई अभियानडॉ. पंकज कुमार सिंह ने केवल जनता के बीच जाकर ही नहीं, बल्कि अपने कार्यालय में भी स्वच्छता अभियान चलाया। विकासपुरी के कैंप कार्यालयमें उन्होंने सफाई की शुरुआत की और सभी कर्मचारियों को इसमें शामिल किया। उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपनी जगह साफ़ रखनी चाहिए, चाहेवह घर हो, दफ्तर हो या सार्वजनिक स्थल। जब हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझेगा तभी दिल्ली साफ़ हो सकेगी। उन्होंने कर्मचारियों से यह भी कहाकि वे सफाई के संदेश को समाज में फैलाएं और खुद उदाहरण बनें। जनता से सीधा संवाद और समस्याओं का समाधानसफाई और पौधारोपण के बाद डॉ. सिंह ने अपने कैंप कार्यालय में जनता से मुलाकात की।लोग विभिन्न मोहल्लों से आए थे। उन्होंने बिजली, पानी, सड़क, सीवर और अन्य समस्याएं बताईं। डॉ. सिंह ने सबकी बातें ध्यान से सुनींउन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए और लोगों से कहा कि आपकी समस्याएं मेरी समस्याएं हैं। मैं खुद हर एक मामले कीनिगरानी करूंगा।उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी बात अनसुनी नहीं की जाएगी और हर समस्या का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा। स्वच्छता और हरियाली सिर्फ योजना नहीं, जन आंदोलन हैइस पूरे अभियान के दौरान डॉ. पंकज कुमार सिंह ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही, वह यह थी “स्वच्छता और हरियाली सिर्फ कुछ दिन चलने वालेअभियान नहीं हैं। इन्हें हमें अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। जब तक जनता खुद नहीं जुड़ेगी, तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने बतायाकि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत मिशन और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी की सोच से प्रेरित है। सरकार की यह कोशिशहै कि दिल्ली को देश की सबसे साफ और हरी राजधानी बनाया जाए।दिल्ली को साफ़ और हरा-भरा बनाने में हर नागरिक की भागीदारी ज़रूरी डॉ. पंकज कुमार सिंह का यह अभियान यह साबित करता है कि अगर नेताखुद सफाई और पर्यावरण के लिए आगे आएं, तो लोग भी उनसे प्रेरित होते हैं। स्वच्छता, हरियाली और जनता से सीधा संवाद—इन तीन चीज़ों से हीएक अच्छी और ज़िम्मेदार सरकार बनती है। अब समय है कि हर दिल्लीवासी आगे आए और यह संकल्प ले मैं अपने घर और आसपास की जगह कोसाफ़ रखूंगा, मैं हर साल एक पेड़ लगाऊंगा, मैं अपने मोहल्ले में सफाई का संदेश फैलाऊंगा क्योंकि साफ़ और हरा-भरा दिल्ली हम सबकी ज़िम्मेदारीहै, सिर्फ सरकार की नहीं। आइए, मिलकर एक नई, स्वच्छ और सुंदर दिल्ली बनाएं।
झुग्गी-झोपड़ी वालों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस का बड़ा अभियान – देवेन्द्र यादव

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के अधिकारों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने बड़ाअभियान छेड़ दिया है। संगठन सृजन अभियान के तहत सभी 258 ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने दिल्ली के विभिन्न जेजे क्लस्टरों में मासिक बैठकेंआयोजित कीं। इन बैठकों में बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों ने भाग लिया और अपना दुख-दर्द कांग्रेस नेताओं के साथ साझा किया।बैठकों के दौरान लोगों ने साफ कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जिसने हर मुश्किल घड़ी मेंउनके साथ खड़े रहकर लड़ाई लड़ी है। कांग्रेस कल से करेगी आंदोलन की शुरुआतदेवेन्द्र यादव ने घोषणा की कि राहुल गांधी द्वारा झुग्गीवासियों को दिए गए भरोसे को साकार करने के लिए 4 अगस्त से दिल्ली कांग्रेस सड़कों परउतरेगी और विधानसभा का घेराव करेगी। यह प्रदर्शन झुग्गीवासियों को उजाड़ने, दिल्ली की बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिलाओं के साथवादाखिलाफी, जलभराव, और बढ़ते नशाखोरी जैसे मुद्दों को लेकर होगा। उन्होंने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले नागरिकोंसे अपील की कि 4 अगस्त को सुबह 11 बजे चंदगीराम अखाड़ा, ट्रॉमा सेंटर पर एकत्र हों और विधानसभा की ओर मार्च करें। झुग्गी–झोपड़ी को उजाड़ने की दोहरी नीति पर सवालदेवेन्द्र यादव ने भाजपा और दिल्ली सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री दावा करती हैं कि एकभी झुग्गी नहीं उजड़ेगी, वहीं दूसरी ओर वह रेलवे लाइन के पास की झुग्गियों को बचा न पाने की बात कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्लीसरकार की नीति पूरी तरह भ्रमित करने वाली और झुग्गीवालों के खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जब भी झुग्गियोंको हटाने की नौबत आई, तो पहले उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई। राजीव रत्न आवास योजना के तहत बनाए गए हजारों फ्लैटआज भी बिना आवंटन के खड़े हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इन फ्लैट्स को गरीबों को नहीं दिया औरयोजना का नाम बदलने में ही 11 साल बर्बाद कर दिए। व्यापक भागीदारी, संगठन की एकजुटताइन मासिक बैठकों में ब्लॉक अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, लोकसभा और जिला पर्यवेक्षक, निगम पार्षद, पूर्व विधायक, महिला एवं युवा कांग्रेस के नेता, विभागों के चेयरमैन, मंडल और सेक्टर अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। इससे यह साफ हुआ कि कांग्रेस पार्टी पूरी तैयारी केसाथ झुग्गीवासियों के हक के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरने को तैयार है। सेवा कार्यों में भी सक्रिय रहे कांग्रेस अध्यक्षइसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आज नेत्र, चिकित्सा और रक्तदान शिविरों में हिस्सा लेकर समाज सेवा की मिसाल पेश की। बादलीविधानसभा में उन्होंने नेत्र एवं चिकित्सा जांच शिविर का दौरा किया। रोहिणी में लक्ष्मी तारू फाउंडेशन द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में शामिलहोकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ सेवा ही सच्चा धर्म है और ऐसे आयोजन उन लोगों के लिए जीवनदायी हैं जोअस्पतालों तक नहीं पहुंच सकते। कांग्रेस पार्टी दिल्ली के झुग्गीवासियों के मुद्दों को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए इस जन आंदोलन सेदिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में कांग्रेस न केवल सड़कों पर उतर रही है बल्कि सेवा कार्यों के जरिए जनता केबीच मजबूत संदेश भी दे रही है कि वह उनके साथ खड़ी है।
राज्य सरकार साध्वी प्रज्ञा व अन्य के खिलाफ तुरंत हाई कोर्ट जाए-एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव सैयद जलालुद्दीन की मांग, सीएम से जल्दमुलाकात संभव, हम संविधान की सर्वोच्चता और समानता चाहते हैं- सैयद जलालुद्दीन

मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव और अल्पसंख्यक विंग के अध्यक्ष सैयदजलालुद्दीन ने आज यहां मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि जिस तरह सीएम फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने मुंबई विस्फोट मामले में बरीहुए मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ फैसले को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है, उसी तरह उम्मीद है कि मालेगांव विस्फोट मामले में भीसरकार बरी हुई साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित व अन्य के खिलाफ हाई कोर्ट जाएगी और फैसले को रद्द करने के लिए अपील करेगी। सैयद जलालुद्दीन ने कहा कि मोदी सरकार का एजेंडा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का है और तभी यह जमीनी हकीकत बनेगा जबऐसा होगा। अन्यथा कानून के क्रियान्वयनपर लोगों, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय में दोहरे मापदंड और भेदभाव की भावना पैदा होगी – मृतकों केउत्तराधिकारी, पीड़ित और न्यायप्रिय व धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोग इस निर्णय से स्तब्ध हैं – उन्होंने कहा कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रहैं। यहाँ नागरिक अपने-अपने धर्मों का पालन करते हैं और कई ऐसे भी हैं जो किसी भी धर्म को नहीं मानते, अर्थात नागरिकों को धर्म के मामलों में पूरीस्वतंत्रता है, लेकिन सरकार का कोई धर्म नहीं होता और सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह सभी नागरिकों के धर्मों का सम्मान करे और किसी कोकिसी का अपमान न करने दे तथा समानता और बराबरी सुनिश्चित करे और अपने किसी भी कार्य से ऐसा कोई संदेश न दे जिससे यह संदेश जाए किसरकार एक धर्म का समर्थन करती है और दूसरे धर्मों के लोगों के खिलाफ है या उनके साथ असमंजस की स्थिति में है। इसलिए मालेगांव विस्फोटमामले में यह आवश्यक है कि फडणवीस सरकार तुरंत हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर निर्णय को निरस्त घोषित कराने की पहल करे और अदालतसे अपील करे कि निर्णय पर न केवल तुरंत सुनवाई हो बल्कि उस पर तुरंत रोक भी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन अगर सरकार एक मामले में इतनी चुस्त और दूसरे मामले में इतनी सुस्त होगी, तो लोगों के दिलों में दोहरे मापदंड की भावना पैदा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कांग्रेस पार्टी और खासकर उसकी मुंबई अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ की राय भी उसी तरह सामने आनीचाहिए, जैसी मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में आई थी। सैयद जलालुद्दीन ने आगे कहा कि हम राज्य स्तर पर सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन हम एकधर्मनिरपेक्ष पार्टी हैं और संविधान की सर्वोच्चता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे और उनसेमुलाकात भी करेंगे।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर नेशनल सिटिजन पार्टी का हमला ‘लोकतंत्र की राह धीमी, लेकिन जरूरी सुधार अभी बाकी’

बांग्लादेश की नई राजनीतिक पार्टी ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला है नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा किमोहम्मद यूनुस की सरकार पिछले एक साल में कानून व्यवस्था कायम करने में नाकाम रही है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल कोलेकर भी बात की साथ ही भारत के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए कहा. नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा किपिछले एक साल में सरकार की एक नाकामी यह है कि वे कानून प्रवर्तन ढांचे को फिर से स्थापित करने के लिए कानूनी बल को नियंत्रित या स्थापितनहीं कर पाए. जुलाई के विद्रोह के दौरान पुलिस, विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ही आम लोगों पर, छात्रों पर, हत्याओं को लेकर सामूहिकनरसंहार में हिस्सा लिया था इसलिए अंतरिम सरकार की प्राथमिकता पुलिस, आरएबी, डीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी बलों को फिर से स्थापितकरना होना चाहिए. वे ऐसा नहीं कर पाए. मैं कह सकती हूं कि यह इस सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण नाकामियों में से एक है. फर्जी मुकदमे फर्जी आरोपइस भीड़तंत्र में आपने जो भी कहा वही हुआ एक ही मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं. ये मुकदमे फर्जी हैं फर्जी मुकदमे और फर्जीआरोप. इसलिए ये सही बात नहीं है. उन्होंने कहा कि जुलाई विद्रोह को एक साल हो गया है. हमें निरंकुश फासीवादी शेख हसीना से छुटकारा मिलगया है लगभग 15 साल तक निरंकुशता कायम रही. इसलिए सारी कानून प्रवर्तन एजेंसियां, नौकरशाही, पूरा प्रशासन फासीवादी शासन के अधीनथा. हम रातोंरात निरंकुशता से लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकते. लेकिन एक साल बाद हम हर चीज पर बात कर सकते हैं. हम अपनीअंतरिम सरकार से उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों और लोकतांत्रिक परिवर्तन के पक्ष में जिन सुधारों पर हम चर्चा कर रहे हैं उनके बारे में पूछ सकते हैंहर कोई बातचीत, संवाद और सेमिनारों में भाग ले रहा है हर कोई देश के लिए खुला है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल हमने कोई बातचीत नहीं कीसरकार के खिलाफ बात करने का कोई मौका नहीं मिला। हमारी आवाज दबाने के लिए एक कानून था. जबरन गायबियां, न्यायेतर हत्याएं और सभीनिजी बैंकों की लूट हुई. निरंकुशता का साम्राज्य था। लेकिन पिछले साल यह रुक गया और हमने फिर से शुरू कर दिया है. स्तंभ होने चाहिए स्वतंत्रलोकतंत्र में तब्दील होने की प्रक्रिया धीमी है इसलिए मुझे लगता है कि यह वैसी नहीं है जैसी हमने एक साल पहले उम्मीद की थी. लेकिन यह हो रहाहै. प्रगति हो रही है. नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा कि हमें उम्मीद है क्योंकि चुनाव की तारीख अंतरिम सरकार केकार्यकाल की शुरुआत में ही घोषित कर दी गई थी. दिसंबर से जुलाई 2026 तक का समय है इसलिए यह संभवतः फरवरी या अप्रैल में होगा. अंतरिम सरकार के प्रेस सचिव, हमारे मुख्य सलाहकार, ने कल कहा कि चुनाव एक दिन के लिए भी स्थगित नहीं होंगे. राष्ट्रीय सहमति आयोग में सभीराजनीतिक दलों ने बातचीत में हिस्सा लिया। उन्होंने सभी सुधार प्रस्तावों पर चर्चा की, बातचीत की और वे एक आम सहमति पर पहुंचे। हमें जुलाईचार्टर मिलने की उम्मीद है. जुलाई के बाद हमें राष्ट्रीय चुनाव की तारीख तय होने की उम्मीद है. हम मूलभूत सुधार चाहते हैं. सांविधानिक संस्था जोकार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो. कार्यपालिका, न्यायपालिका और संसद ये तीनों स्तंभ स्वतंत्र होने चाहिए.
राहुल गांधी का चुनावी सिस्टम पर बड़ा हमला: ‘2014 से थी गड़बड़ी , अब हमारे पास है सबूत

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश के चुनावों में होने वाली कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर लगातार आक्रामक हैं. उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव- 2025 में कहा, ‘मैं आज-कल देश की चुनाव प्रणाली के बारे में बोल रहा हूं।मुझे हमेशा से संदेह था कि 2014 से ही कुछ गड़बड़ है. मुझे गुजरात विधानसभा चुनावों में पहले से ही संदेह था. उन्होंने चुनाव प्रणाली की आलोचनाके अलावा प्रधानमंत्री मोदी को 2024 के चुनाव में मिले बहुमत पर गंभीर सवाल भी खड़े किए. राहुल गांधी ने भाजपा को बीते लगभग 12 साल केदौरान मिले प्रचंड बहुमत की तरफ संकेत करते हुए कहा, लगातार कई चुनावों में इस तरह की बड़ी जीत हासिल करने की क्षमता हैरान करने वाली थी. कांग्रेस पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात में एक भी सीट नहीं मिलती, यह और आश्चर्यजनक था. बकौल राहुल गांधी, ‘जब भी हम चुनाव केबारे में बोलते थे, लोग कहते थे, सबूत कहां है? फिर, महाराष्ट्र में कुछ हुआ.1.5 लाख मतदाता फर्जीलोकसभा सीटों पर हम चुनाव जीत गए केवल चार महीने बाद, हम न केवल हारे, बल्कि हमारा सफाया हो गया. तीन ऐसे दल अचानक गायब हो गए, जिनका जनाधार मजबूत है। इसके बाद हमने चुनावी कदाचार पर और गंभीरता से मंथन शुरू किया. हमें महाराष्ट्र में पता चला कि लोकसभा औरविधानसभा चुनाव के बीच एक करोड़ नए मतदाता सूची में शामिल हुए. इनमें से अधिकांश वोट भाजपा को गए. इसलिए अब मैं बिना किसी संदेह केकहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं. राहुल ने दावा किया, हमारे पास ऐसे सबूत हैं जो पूरे देश को दिखा देंगे कि चुनाव आयोग जैसी संस्था मौजूद ही नहींहै। यह गायब हो चुकी है. इस सबूत को खोजने में हमें 6 महीने लगातार काम करना पड़ा। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘आप बिना किसी संदेह के देखेंगे किकैसे एक लोकसभा चुनाव चुराया जाता है. 6.5 लाख मतदाता वोट करते हैं और उनमें से 1.5 लाख मतदाता फर्जी होते हैं. सरकार को लिया आड़े हाथोंराहुल गांधी केवल चुनाव आयोग पर हमले तक ही नहीं रुके उन्होंने संविधान से जुड़े मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने संविधान कीप्रति दिखाते हुए कहा ‘हम आने वाले कुछ दिनों में साबित कर देंगे कि कैसे लोकसभा चुनाव में धांधली हो सकती है और ऐसा हुआ भी है। उन्होंनेकहा, ‘सच्चाई यह है कि भारत में चुनाव प्रणाली पहले ही खत्म हो चुकी है. भारत के प्रधानमंत्री बहुत कम बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने. अगर 15 सीटों पर धांधली नहीं हुई होती, तो वे आज भारत के प्रधानमंत्री नहीं होते. राहुल गांधी ने भारत और फ्रांस के बीच हुई डिफेंस डील और लड़ाकूविमानों के सौदे का उल्लेख करते हुए कहा ‘हमारे पास राफेल सौदे पर एक दस्तावेज था. दस्तावेज में साफ-साफ लिखा था कि प्रधानमंत्री कार्यालयऔर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने राफेल सौदे में दखलअंदाजी की और राफेल सौदे को नुकसान पहुंचाया. ऐसा दस्तावेज दुनिया के किसी भीदेश की सरकार गिरा सकता था. लेकिन यहां कुछ नहीं हुआ.’ कांग्रेस सांसद ने सवाल किया, ‘क्या आपको पता है कि वह दस्तावेज कहां गया?’ उन्होंने लंबे समय तक सुर्खियों में रहे एक अन्य ज्वलंत मुद्दे- किसान कानून का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफलड़ रहा था, तो अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था. बकौल राहुल गांधी, अरुण जेटली ने उनसे कहा था, ‘अगर आप सरकारका विरोध करते रहे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, मुझे नहींलगता कि आपको इस बात की सही जानकारी है कि आप किससे बात कर रहे हैं.
‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर घमासान केरल सरकार ने बताया संघ एजेंडा, राज्य का अपमान

द केरल स्टोरी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर सियासी संग्राम तेज हो गया है केरल सरकार के मंत्री और नेता फिल्म को पुरस्कृत किए जाने सेखफा हैं. केरल के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री साजी चेरियन ने कहा कि फिल्म को पुरस्कार देना संघ परिवार के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है. इसफिल्म को शुक्रवार को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी पुरस्कार मिला. राज्य मंत्री साजी चेरियन ने कहाकि सुदीप्तो सेन की यह फिल्म लोगों को बांटती है समाज में नफरत फैलाती है और पूरे राज्य का अपमान करती है. उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म कोबिना किसी मानदंड पर खरा उतरे राष्ट्रीय पुरस्कार दे दिया गया. यह गर्व की बात है कि हमारे कलाकारों उर्वशी और विजयराघवन को पुरस्कार मिले हैं।लेकिन इसके साथ ही फिल्म द केरल स्टोरी को मान्यता कैसे दी जा सकती है? इस तरह से पुरस्कार कैसे दिया जा सकता है? मुझे समझ नहीं आ रहाकि किस मापदंड के आधार पर फिल्म को इस सम्मान के लिए चुना गया. केरल का किया गया अपमानचेरियन ने आरोप लगाया कि किसी फिल्म का मूल्य नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष की रुचि पुरस्कार का आधार होती है. संघ परिवार की ऐसी राजनीतिदेश के लोगों में भय पैदा कर रही है घृणा के माहौल को मजबूत करना देश पर शासन करने वाले राजनीतिक दल की जरूरत है इसे हासिल करने केलिए वे हर चीज में हस्तक्षेप करते हैं यहां तक कि छोटी-छोटी चीजों में भी यह पुरस्कार इसी के तहत दिया गया. यह गलत बात है. द केरल स्टोरी कोपुरस्कार दिए जाने पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि एक ऐसी फिल्म को सम्मानित करना जो केरलकी छवि को धूमिल करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के इरादे से झूठी जानकारी पर आधारित है, यह भारतीय सिनेमा की भाईचारे और राष्ट्रीयएकता की परंपरा का अपमान है. इस तरह की फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार देकर न सिर्फ केरल का अपमान किया गया है. दिया जा रहा राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कारबल्कि यह संघ परिवार के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इस्तेमाल अपने घृणा अभियान के तहत कर रही है. बता दें कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया हैयह फिल्म 5 मई 2023 को रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी. हालांकि, फिल्म को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ, क्योंकि इसमें यह दावा किया गया था कि केरल से 32,000 लड़कियों को धर्मांतरण के बाद आतंकी संगठन आईएसआईएस में भेजा गया. विपक्षीनेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने फिल्म पर झूठ फैलाने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं पश्चिम बंगालसरकार ने तो इस फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध भी लगाया था. अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जा रहा है.
आम आदमी पार्टी के नेताओं को काम नहीं, सिर्फ़ बोलने की आदत है-भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर

सौरभ भारद्वाज झूठ फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, अपने कार्यकाल की विफलता को छुपा रहे हैं दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता श्री प्रवीण शंकरकपूर ने आम आदमी पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज झूठ बोलकर और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराहकर रहे हैं। अगर उन्होंने सरकार में रहते हुए उतनी मेहनत से काम किया होता, जितनी मेहनत आज वे झूठ बोलने में कर रहे हैं, तो जनता उन्हें नकारतीनहीं। झूठे बयान देने में लगे हैं ‘आप’ नेताप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आज सौरभ भारद्वाज सिर्फ़ इसलिए भाजपा सरकार की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि भाजपा ने दिल्ली में जलभराव कीसमस्या को गंभीरता से लिया है और उसका समाधान किया है। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने इस बार समय रहते पूरी तैयारी की औरजलनिकासी का जो मास्टर प्लान तैयार किया गया, उसी का नतीजा है कि इस बार बारिश के बावजूद दिल्ली में गंभीर जलभराव नहीं हुआ और किसीकी जान नहीं गई। 2015 से 2024 तक हर साल डूबती रही दिल्लीभाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में 2015 से 2024 के बीच हर मानसून में दिल्ली पानी में डूबी रहती थी। लोग परेशानरहते थे, सड़कें और गलियां झील बन जाती थीं। लेकिन तब ‘आप’ की सरकार कोई ठोस काम नहीं कर सकी। इसके उलट अब जब भाजपा सरकार नेईमानदारी से काम किया है, तो ‘आप’ के नेता सिर्फ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं। इस बार जलभराव से एक भी मौत नहीं–भाजपा की तैयारी का असरप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इस साल मानसून के पहले चरण में एक भी व्यक्ति की जलभराव के कारण मौत नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जुलाई2024 में, जब सौरभ भारद्वाज दिल्ली सरकार में मंत्री थे, उस समय जलभराव की वजह से 30 लोगों की जान चली गई थी। यह दिखाता है कि जबकाम करने की बारी आई, तब ‘आप’ सरकार पूरी तरह असफल रही। भाजपा बोली–जनता सब समझ चुकी हैभाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अब दिल्ली की जनता सब जान चुकी है। उसे यह समझ आ गया है कि आम आदमी पार्टी के नेता सिर्फ़ मीडिया में दिखनेऔर झूठे वादे करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जनता की भलाई के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है, जबकि ‘आप’ नेताकेवल राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। काम से डर गए हैं सौरभ भारद्वाजप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि सौरभ भारद्वाज भाजपा सरकार के काम से घबरा गए हैं। क्योंकि जब जनता को जमीन पर बदलाव दिखता है, तो उन्हेंझूठी बातों से बहकाना आसान नहीं होता। इसलिए अब ‘आप’ के नेता अपने कार्यकाल की असफलता को छुपाने के लिए भाजपा सरकार पर झूठेआरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने साफ कहा है कि आम आदमी पार्टी अब काम करने की बजाय केवल शोर मचाने की पार्टी बन चुकी है। जनता को भी अब समझ आ गया हैकि कौन उसके लिए सही मायनों में काम कर रहा है और कौन सिर्फ़ राजनीति कर रहा है। भाजपा ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी दिल्लीके हर क्षेत्र में ऐसा काम करेगी, जिससे जनता को राहत और भरोसा दोनों मिलेगा।
निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार का नया कानून, अभिभावकों की जेब पर डाका – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार के स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक को बताया शिक्षा माफिया को खुली छूट देने वाला कानून दिल्ली में शिक्षाव्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। ‘आप’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि भाजपासरकार जो नया स्कूल फीस नियंत्रण कानून ला रही है, वह सीधे-सीधे निजी स्कूलों और शिक्षा माफिया को लाभ पहुंचाने वाला है। इससे दिल्ली केलाखों अभिभावकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। नया कानून शिक्षा माफिया के पक्ष मेंसौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि भाजपा सरकार का यह नया कानून आम लोगों की नहीं, बल्कि निजी स्कूल संचालकोंकी मदद के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की पहले से जताई गई आशंकाएं अब सच होती दिखाई दे रही हैं। ऑडिट की व्यवस्था खत्म, शिकायत करना हुआ मुश्किलउन्होंने बताया कि अब तक यदि किसी एक अभिभावक को भी लगता था कि स्कूल ने फीस गलत तरीके से बढ़ाई है, तो वह शिक्षा निदेशक के पासशिकायत कर सकता था। लेकिन नए कानून में यह प्रावधान खत्म कर दिया गया है। अब शिकायत करने के लिए कम से कम 15 प्रतिशतअभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। यानी अगर किसी स्कूल में 3000 छात्र हैं तो 450 अभिभावकों को एक साथ शिकायत करनी होगी। उन्होंनेसवाल किया कि आखिर इतने अभिभावकों को कौन ढूंढेगा? फीस निर्धारण समिति भी स्कूल के पक्ष मेंनए कानून के अनुसार, फीस बढ़ाने का निर्णय एक 10 सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें से 5 सदस्य स्कूल के होंगे और शेष 5 सदस्य भीलॉटरी के माध्यम से स्कूल द्वारा ही चुने जाएंगे। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऐसे में यह समिति पूरी तरह स्कूल के कब्जे में होगी और फीस बढ़ाने कीखुली छूट देगी। भाजपा सरकार ने खोखले दावे किएसौरभ भारद्वाज ने कहा कि फरवरी में जब भाजपा की सरकार बनी, तभी से निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस में भारी बढ़ोतरी शुरू कर दी थी। कुछस्कूलों ने तो 80-82 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी। इस पर जब अभिभावकों ने विरोध किया तो उन्हें परेशान किया गया, बच्चों को कक्षा में नहीं बैठनेदिया गया, और बाउंसर लगाकर डराया गया। सरकार का दोहरा रवैया उजागरउन्होंने कहा कि पहले भाजपा सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने सभी निजी स्कूलों का ऑडिट कराया है और इसकी जानकारी सार्वजनिक कीजाएगी। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी वह ऑडिट सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब जब कानून लाने की बात आई तो न तो जनता से रायली गई और न ही ऑडिट की कोई व्यवस्था नए कानून में रखी गई। पुराने प्रावधानों को हटाया गया1973 के कानून के अनुसार, जिन स्कूलों को सरकार से जमीन मिली थी, उन्हें फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा निदेशक से अनुमति लेनी होती थी। लेकिननए कानून में यह प्रावधान भी खत्म कर दिया गया है। इसका साफ मतलब है कि अब वह स्कूल जिन्हें सरकार से एक रुपये में करोड़ों की जमीन मिली, वो भी मनमर्जी से फीस बढ़ा सकेंगे। सौरभ भारद्वाज ने पूछे कड़े सवालउन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल करते हुए पूछा अप्रैल में जिन स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई, क्या यह कानून उन स्कूलों से बढ़ी हुई फीस वापस दिलवाएगा? इस कानून में प्रत्येक वर्ष के ऑडिट की व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई?शिकायत करने के लिए 15 प्रतिशत अभिभावकों की बाध्यता क्यों रखी गई है? आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह कानून शिक्षा के अधिकार परकुठाराघात है और यह अभिभावकों की आवाज को दबाने की साजिश है। अब न तो कोई पारदर्शिता रहेगी और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही।आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस कानून को वापस लिया जाए और सभी निजी स्कूलों का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाए।