ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया आरोप पत्र दायर, प्रियंका गांधी का नाम भी जुड़ा जमीन सौदों से

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया है. इसमें कई अन्य व्यक्तियों और कंपनियों के नाम भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, ईडी ने शिकोहपुर भूमि सौदा मामले मेंरॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत दायर की है. मामला सितंबर 2018 का है, जब सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणाके तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और एक प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. एफआईआरमें भ्रष्टाचार, जालसाजी और धोखाधड़ी सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं. 3.5 एकड़ खरीदी थी जमीनवाड्रा पर आरोप हैं कि उनसे जुड़ी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीनखरीदी थी. इस सौदे का म्यूटेशन भी असामान्य तरीके से कर दिया गया. आरोप है कि हरियाणा के तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने इस जमीनमें से 2.70 एकड़ जमीन को कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर डेवलप करने की इजाजत देते हुए रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को इसका लाइसेंस दिया था. आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन की कीमत बढ़ गई। बाद में वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने कंपनी ने ये जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी. आगे चलकर हुड्डा सरकार ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया. आरोप है कि इस पूरी डील में कईअनियिमताएं की गई. हरियाणा पुलिस ने 2018 में इस सौदे से जुड़े मामले में केस दर्ज किया. आगे चलकर ईडी ने भी इस मामले में केस दर्ज करजांच शुरू की. राबर्ट वाड्रा से जुड़े इस मामले में हुई कथित गड़बड़ी का खुलासा आईएएस अशोक खेमका ने किया था इसके बाद वे सुर्खियों में आगए थे. बीते एक दशक से रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ लगे आरापों का इस्तेमाल विपक्षी पार्टियों ने अलग-अलग चुनावों में कांग्रेस पर आरोप साधने केलिए किया है. सुमित चड्ढा के खिलाफ दाखिल की चार्जशीटदिसंबर 2023 में ईडी ने इस मामले में यूएई स्थित व्यवसायी सीसी थंपी और ब्रिटेन के हथियार डीलर संजय भंडारी के रिश्तेदार सुमित चड्ढा केखिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में वाड्रा और उनकी पत्नी प्रियंका गांधी का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है लेकिन उनकी भूमि खरीद-बिक्री का विवरण शामिल है. ईडी ने कहा था कि वाड्रा से कथित तौर पर जुड़े थंपी ने 2005 से 2008 के बीच दिल्ली-एनसीआर स्थित रियल एस्टेटएजेंट एचएल पाहवा के जरिए हरियाणा के फरीदाबाद के अमीरपुर गांव में लगभग 486 एकड़ जमीन खरीदी थी. आरोपपत्र के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा ने2005-2006 में एचएल पाहवा से अमीरपुर में 334 कनाल (40.08 एकड़) जमीन के तीन टुकड़े खरीदे और दिसंबर 2010 में उसी जमीन कोएचएल पाहवा को बेच दिया. ईडी के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अप्रैल 2006 में एचएल पाहवा से हरियाणा केफरीदाबाद जिले के अमीरपुर गांव में 40 कनाल (05 एकड़) कृषि भूमि खरीदी और फरवरी 2010 में उसी जमीन को एचएल पाहवा को बेच दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को बिहार और पश्चिम बंगाल में हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का करेंगें शिलान्यास, सड़क परियोजनाओं को देंगे हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी दोनों राज्यों में हजारों करोड़ रुपये कीपरियोजनाओं की शुरुआत करेंगे. बिहार के मोतिहारी और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे. पीएम मोदी बिहार केमोतिहारी में 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. इसके बाद वे पश्चिम बंगाल का दौराकरेंगे और दोपहर लगभग 3 बजे दुर्गापुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने के अलावा कुछ प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी का लगभग सुबह 11:30 बजे बिहार दौरा शुरू होगा. वह बिहार से कई नई रेल परियोजनाओं को राष्ट्र के नाम समर्पित करेंगे. जिसमेंलागत 580 करोड़ रुपये से अधिक की दरभंगा-समस्तीपुर दोहरीकरण परियोजना भी शामिल है. नई रेल परियोजनाओं का करेंगें शिलान्यासइससे रेल संचालन की क्षमता बढ़ेगी और देरी कम होगी. प्रधानमंत्री कई नई रेल परियोजनाओं का भी शिलान्यास करेंगे. इन परियोजनाओं मेंपाटलिपुत्र में वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है. लगभग 4,080 करोड़ रुपये की दरभंगा-नरकटियागंज रेललाइन दोहरीकरण परियोजना का भी शिलान्यास होगा. इससे अधिक यात्री ट्रेन और मालगाड़ियों का संचालन संभव होगा और उत्तर बिहार कीकनेक्टिविटी देश के अन्य हिस्सों से मजबूत होगी. प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को बिहार के विभिन्न स्थानों से लखनऊ और दिल्ली के लिए चार नईअमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. पीएम राष्ट्रीय राजमार्ग-319 के आरा बाईपास के 4-लेन निर्माण की आधारशिला रखेंगे, जोआरा-मोहानिया राष्ट्रीय राजमार्ग-319 और पटना-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग-922 को जोड़ता है. प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय राजमार्ग-319 के पररिया सेमोहनिया तक के 4-लेन खंड का भी उद्घाटन करेंगे जिसकी लागत 820 करोड़ रुपये से अधिक है। यह खंड आरा शहर को राष्ट्रीय राजमार्ग-02 सेजोड़ता है.परियोजनाओं की एक सीरीज का करेंगें उद्घाटनपीएम मोदी दरभंगा में नए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और पटना में आईटी/आईटीईएस/ईएसडीएम उद्योग औरस्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन करेंगे. बिहार में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को मजबूत करने कीदिशा में एक बड़े कदम के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) के तहत स्वीकृत मत्स्य विकास परियोजनाओंकी एक सीरीज का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी बिहार में लगभग 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपये की सहायताराशि जारी करेंगे। इस दौरान ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत 12,000 लाभार्थियों को ‘गृह प्रवेश’ की चाबियां सौंपी जाएंगी. जबकि 40 हजारलाभार्थियों के लिए 160 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाएगी. बिहार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बांकुरा, पुरुलिया, दुर्गापुर औरबर्धमान जिलों समेत पश्चिम बंगाल के अन्य क्षेत्रों को भी तोहफा देंगे. प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के बांकुरा और पुरुलिया जिले में लगभग 1,950 करोड़रुपये की लागत वाली भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीएलसी) सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) परियोजना की आधारशिला रखेंगे.
विदेश नीति पर आनंद शर्मा का बड़ा बयान – भारत की वैश्विक साख कमजोर हुई, सरकार करे आत्ममंथन

आनंद शर्मा ने भारत की विदेश नीति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार विदेश नीति में दिशा भ्रम दिखाई दे रहा है, उससे भारत की साख और प्रभाव विश्व पटल पर कमजोर हुआ है। भारत जैसी महान परंपरा वाला देश, जिसने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व कियाऔर पूरी दुनिया में नैतिकता तथा मानवता की आवाज़ के रूप में पहचाना गया, वह आज चुप है और दिशाहीन दिख रहा है। भारत की नैतिक शक्ति थी सबसे बड़ी पूंजीआनंद शर्मा ने कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी नैतिकता और मानवता की आवाज़ थी। यही कारण था कि जब कोरिया संकट हुआ था याजब अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में आज़ादी और रंगभेद के खिलाफ आंदोलन हो रहे थे, तब पूरी दुनिया ने भारत की ओर देखा औरभारत की बात सुनी। लेकिन आज यह स्थिति नहीं रही। उन्होंने कहा किआज भारत की नैतिक आवाज़ कमजोर हुई है। जो देश हमें एक मार्गदर्शक मानते थे, वे भी अब हैरान हैं कि भारत चुप क्यों है? विदेश नीति पर देश में बने आम सहमति खत्म हो रहीशर्मा ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हित और आम सहमति के आधार पर बनी थी, लेकिन वर्तमान सरकार में यह परंपरा टूट रही है।संसद को जानकारी दिए बिना, विपक्षी दलों से चर्चा किए बिना, सरकार एकतरफा निर्णय ले रही है, जो देशहित में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा किविदेश नीति पर कोई भी निर्णय केवल सत्ता में बैठे कुछ लोगों का नहीं होना चाहिए। यह विषय पूरे देश से जुड़ा है और इसमें व्यापक विचार-विमर्शजरूरी है। गाज़ा पर भारत की चुप्पी दुखदआनंद शर्मा ने गाज़ा में जारी संकट को लेकर भारत के रवैये पर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि12 जून को जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में युद्धविराम और सहायता पहुंचाने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ, तब 149 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन भारत ने मतदान से दूर रहकर शर्मनाक चुप्पी साध ली। यह वही भारत है जिसे पूरी दुनिया गाँधीजी की धरती के रूप में जानती है। उन्होंने कहाकि जब पूरी दुनिया – यहाँ तक कि ब्रिक्स के सभी सदस्य, यूरोपीय देश और अमेरिका के मित्र देश भी मानवता के पक्ष में खड़े रहे, तब भारत क्यों नहींखड़ा हुआ? वैश्विक दक्षिण में भारत की साख को लगा धक्काशर्मा ने कहा कि भारत को वैश्विक दक्षिण का नेता माना जाता है, लेकिन इस एक निर्णय से भारत की साख को गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने कहा, जबवैश्विक दक्षिण के सभी देश युद्धविराम के पक्ष में थे, तब उनका नेता यानी भारत चुप क्यों था? भारत की यह चुप्पी केवल निंदनीय नहीं, दुखद भी है। सरकार को आत्ममंथन और सुधार की ज़रूरतआनंद शर्मा ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में सुझाव दिया कि अब समय है आत्ममंथन का, नीति पुनर्विचार का और ईमानदारी से अपनी विदेश नीति कापुनर्निर्धारण करने का। सरकार को विपक्षी दलों और देश के तमाम बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर विदेश नीति पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि,भारत को अपनी नैतिक स्थिति फिर से हासिल करनी होगी। जो देश हमारी तरफ देखते हैं, उनके लिए हमें फिर से उम्मीद कीकिरण बनना होगा।आनंद शर्मा का यह वक्तव्य एक साफ संकेत है कि देश की विदेश नीति पर अब चुप नहीं बैठा जा सकता। भारत जैसे लोकतंत्र में विदेश नीति कोईगुप्त विषय नहीं होता, बल्कि यह राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा होना चाहिए। अगर हम अपनी पारंपरिक भूमिका से हटते हैं, तो न सिर्फ हमारी वैश्विक छविको नुकसान होता है, बल्कि हमारे साझेदार देशों का भरोसा भी टूटता है।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बड़ा बयान – मोबाइल शौक नहीं, आज के समय की जरूरत है.

दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने हाल ही में मोबाइल फोन के खर्च को लेकर उठे विवाद पर विपक्षी नेताओं को खुलकर जवाब दिया है।उन्होंने कहा कि आज जनता ने हमें सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी है। अगर हम हर आरोप का जवाब देते रहेंगे तो काम कैसे करेंगे? विपक्ष के कुछनेता जानबूझकर मुद्दों को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।मंत्री ने कहा कि फोन अब सिर्फ बात करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि ये आज के समय में चलता-फिरता ऑफिस बन चुका है। जनप्रतिनिधियोंऔर मंत्रियों को जनता से जुड़े कार्य, मीटिंग्स, फाइलें और संवाद स्थापित करने के लिए हर समय सक्रिय रहना पड़ता है। ऐसे में एक बेहतर स्मार्टफोनकी जरूरत स्वाभाविक है। आम आदमी पार्टी पर सीधा हमलाआशीष सूद ने आम आदमी पार्टी के नेताओं आतिशी, सौरभ भारद्वाज और अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा आतिशी और सौरभभारद्वाज जैसे नेताओं के पास कोई काम नहीं है, इसलिए वे हर दिन किसी न किसी पर आरोप लगाने में लगे रहते हैं। ये नेता खुद कुछ करते नहीं, सिर्फदूसरों को बदनाम करते हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री केजरीवाल को घेरते हुए कहा जब मोबाइल की लिमिट 40-50 हजार रुपये थी, तब खुद केजरीवाल ने लाखों रुपये के मोबाइलखरीदे। पेन दो रुपये का रखते थे, कमीज़ छोटी पहनते थे, लेकिन मोबाइल आईफोन का लेते थे।उन्होंने आगे कहा, इनका दिखावा सिर्फ दिखाने के लिए था, हकीकत कुछ और है। आम आदमी पार्टी के नेता शौकीन मिजाज के हैं और मनीषसिसोदिया तो केजरीवाल से भी आगे निकले। इनका रुतबा बिना आईफोन के शुरू ही नहीं होता। अब चुप नहीं बैठेंगेमंत्री ने कहा कि आम तौर पर वे इन नेताओं की बातों का जवाब नहीं देते क्योंकि उनका मकसद विकास और शिक्षा के काम पर ध्यान देना है, लेकिनजब ये लोग संस्था पर सवाल उठाते हैं, तो चुप रहना मुमकिन नहीं होता।हम आह भी करते हैं तो बदनाम हो जाते हैं, और ये लोग क़त्ल भी करें तो कोई चर्चा नहीं होती। इस शेर के जरिए आशीष सूद ने अपने मन की बातरखी और कहा कि अब इनकी असलियत जनता के सामने लाना ज़रूरी हो गया है। भ्रष्टाचार के जरिए बनी पहचानआशीष सूद ने यह भी कहा कि-जो नेता भ्रष्टाचार से ऊपर चढ़े हैं, वही आज नैतिकता की बातें कर रहे हैं। जबकि खुद उनकी पार्टी के नेताओं परभ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। हम चुप रहें तो हमें कमज़ोर न समझा जाए। जब बात संस्थान और सरकार की साख पर आती है, तो हमें सच बतानापड़ता है।शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अपने बयान में साफ कर दिया कि एक मंत्री या जनप्रतिनिधि के लिए मोबाइल कोई शौक की वस्तु नहीं, बल्कि काम करनेका ज़रूरी साधन है। विपक्ष के निराधार आरोपों से ध्यान भटकाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब सरकार भी चुप नहींबैठेगी। उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि दिल्ली सरकार अब हर आरोप का जवाब तथ्यों के साथ देगी और सच्चाई जनता के सामने रखेगी।
जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में बड़ा घोटाला दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप – मंत्री आशीष सूद ने किया पर्दाफाश

दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा चलाई गई जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना अब बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। दिल्लीसरकार के मंत्री श्री आशीष सूद ने इस योजना में करोड़ों रुपये के गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में अनेक प्रमाण औरआँकड़े प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि यह योजना घोटाले का केंद्र बन चुकी थी। योजना का उद्देश्य और लक्षित वर्गइस योजना का उद्देश्य था कि अनुसूचित जाति (दलित), अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के प्रतिभाशालीविद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, बैंक, अभियान्त्रिकी, चिकित्सकीय, विधि और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं कीतैयारी हेतु निशुल्क कोचिंग प्रदान की जाए। सरकार की ओर से इन विद्यार्थियों को वर्ष भर के लिए एक लाख से ढाई लाख रुपये तक की सहायताराशि दी जाती थी ताकि वे महंगी कोचिंग ले सकें। मंत्री आशीष सूद के प्रमुख आरोपसूद ने इस योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा करते हुए निम्नलिखित आरोप लगाएइस योजना के अंतर्गत पंद्रह हज़ार से अधिक फर्जी नामों पर सरकारी राशि जारी की गई।योजना में दर्ज कई “विद्यार्थियों” की आयु 30 वर्ष से अधिक थी, जबकि योजना केवल विद्यार्थियों के लिए थी।कई कोचिंग संस्थानों ने विद्यार्थियों को नामांकित किए बिना ही सरकार से भुगतान प्राप्त कर लिया।कुछ कोचिंग संस्थानों ने कक्षा में उपस्थिति के फर्जी आँकड़े सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर दिए।बड़ी संख्या में फर्जी जाति प्रमाण पत्र, झूठे आधार कार्ड, और नकली अंक पत्र अपलोड किए गए।योजना की निगरानी, सत्यापन और लेखा परीक्षा की कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं थी, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। जांच और कार्रवाई की घोषणाआशीष सूद ने इस पूरे मामले की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या आर्थिक अपराध शाखा से निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहाकिदलित विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट एक अमानवीय अपराध है। हम इसके दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शेंगे नहीं। जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना एक सराहनीय और जनहितैषी प्रयास था, जिसका उद्देश्य समाज के पिछड़े, दलित और निर्धन वर्ग केयुवाओं को मुख्यधारा में लाना था। किंतु यदि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, तो यह न केवल सरकारी कोष की लूट है, बल्कि उन हज़ारों प्रतिभाशालीविद्यार्थियों के सपनों और भविष्य की हत्या है, जो इस योजना पर आश्रित थे।
21 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, पेश होंगे 8 नए विधेयक मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर भी विचार

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है इस मानसून सत्र में सरकार आठ नए विधेयक पेश करेगी. इनमें मणिपुर में राष्ट्रपति शासन से जुड़ाविधेयक भी शामिल है सरकार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर विचार कर रही है इससे साफ है कि सरकार की इस उत्तर पूर्वी राज्य में फिलहालराष्ट्रपति शासन हटाने की कोई योजना नहीं है. मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. राष्ट्रपति शासन के लिए सरकार को हरछह महीने में संसद की मंजूरी लेनी होती है फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की समयसीमा 13 अगस्त है. संसद के आगामी सत्र में सरकार मणिपुरवस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय संस्थान प्रबंधन (संशोधन) विधेयक2025, कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2025, भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष (संरक्षण एवं रखरखाव) विधेयक 2025, खान एवं खान(विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक 2025 कोलोकसभा में पेश और पारित करा सकती है.सत्र के दौरान हुआ था काफी हंगामासाथ ही गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक 2024, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2024, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 और आयकर विधेयक 2025 को भी लोकसभा में पारित किए जाने की उम्मीद है. बता दें कि बीते अप्रैल माह मेंखत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 18 फीसदी रही थी. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक राज्यसभामें भी भरपूर कामकाज हुआ और इस सदन की उत्पादकता 119 फीसदी रही. संसद के दोनों सदनों में 16 विधेयक पारित किए गए. इस सत्र के दौरानकाफी हंगामा भी हुआ. लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कियागया. बीते अप्रैल माह में खत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 18 फीसदी रही थी. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजूके मुताबिक राज्यसभा में भी भरपूर कामकाज हुआ और इस सदन की उत्पादकता 119 फीसदी रही. गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 कोराष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. राष्ट्रपति शासन की लेनी होती है मंजूरीजिसकी वैधता 13 अगस्त तक है. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार को हर छह महीने में संसद से राष्ट्रपति शासन की मंजूरी लेनी होती है. ऐसेमें यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार फिलहाल मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को हटाने के पक्ष में नहीं है. पिछले बजट सत्र (अप्रैल 2025 में समाप्त) केदौरान लोकसभा की उत्पादकता केवल 18 फीसदी रही थी. इसके विपरीत, राज्यसभा में उल्लेखनीय रूप से 119 फीसदी उत्पादकता दर्ज की गई. इस सत्र में कुल 16 विधेयक पारित किए गए. जिनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 भी शामिल है. हालाँकि, विपक्ष के विरोध और हंगामों केकारण कई बार कार्यवाही बाधित भी हुई। इस मानसून सत्र में सरकार की प्राथमिकता मणिपुर में जारी राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने, जीएसटी मेंसंशोधन, खेल प्रशासन में सुधार, और कराधान कानूनों के आधुनिकीकरण पर रहेगी। साथ ही, राज्यसभा और लोकसभा दोनों में विधेयकों को पारितकराने को लेकर सरकार अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है.
कांग्रेस ने फिर घेरा केंद्र, ट्रंप के संघर्ष विराम दावे पर पीएम मोदी से लोकसभा में जवाब की मांग जानें “क्या है पूरा मामला”

कांग्रेस ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के दावे को लेकर केंद्र पर हमला बोला है. कांग्रेस नेकहा कि मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा में पीएम मोदी को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा. कांग्रेस पिछले कई दिनों से इस मुद्दे को लेकरसरकार को घेर रही है. ट्रंप के नए पोस्ट को साझा करते हुए कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि आज स्कोर 66 दिन, 23 पुनरावृत्तियों का है. ट्रंप के संघर्ष विराम के दावे को लेकर उन्होंने कहा कि संसद 21 जुलाई से फिर से शुरू होगी। इससे पहले स्थिति निश्चित रूप सेबदल जाएगी. लेकिन प्रधानमंत्री को लोकसभा और राज्यसभा में स्पष्ट रूप से जवाब देना होगा. मारे गए थे 26 नागरिकदेश जानना चाहता है. ट्रंप ने कहा कि हमने इंडोनेशिया के साथ समझौता किया है. मैंने उनके राष्ट्रपति से बात की और हमने समझौता कर लिया हमेंइंडोनेशिया तक हर चीज तक पूरी पहुंच है. इंडोनेशिया तांबे के मामले में बहुत मजबूत है. लेकिन हमें हर चीज तक पूरी पहुंच है. हम कोई शुल्क नहींदेंगे. वे हमें इंडोनेशिया में प्रवेश दे रहे हैं जो हमें पहले कभी नहीं मिला. शायद यही इस समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा है. ट्रंप ने कहा कि भारत केसाथ भी बातचीत उसी दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘भारत भी वैसा ही कर रहा है अब हमें भारत तक भी पूरी पहुंच मिल रही है. पहले हमें इनदेशों में ऐसी पहुंच नहीं थी अब हमारी टैरिफ नीति के कारण हम यह हासिल कर रहे हैं.’10 मई के बाद से ट्रंप ने कई बार अपना दावा दोहराया है किउन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की है और उन्होंने परमाणु हथियार संपन्न दक्षिण एशियाई पड़ोसियों से कहा है कियदि वे संघर्ष बंद कर दें तो अमेरिका उनके साथ खूब व्यापार करेगा. हालांकि भारत इसका लगातार खंडन कर रहा है. पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. 7 मई को किया गया ऑपरेशन सिंदूरइसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शरू किया. भारत ने पाकिस्तान और पीओजेके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया. इसके बाददोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू हो गया. दोनों देशों ने 10 मई को संघर्ष विराम करने का फैसला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिरभारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का दावा किया. इस पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस ने पीएम मोदी से इस मुद्दे परजवाब मांगा है. आज स्कोर 66 दिन और 23 बार दोहराया गया दावा है संसद 21 जुलाई से शुरू हो रही है उससे पहले यह स्थिति शायद बदल जाए. लेकिन प्रधानमंत्री को संसद में जवाब देना होगा। देश जानना चाहता है. “हमने इंडोनेशिया के साथ एक व्यापार समझौता किया है जिससे हमें वहांबिना शुल्क के पूरी पहुंच मिली है। अब भारत के साथ भी बातचीत उसी दिशा में आगे बढ़ रही है. पहले हमें इन देशों में ऐसी पहुंच नहीं मिलती थीलेकिन अब टैरिफ नीति के कारण हम यह हासिल कर पा रहे हैं. हमने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की है और दोनों देशोंसे कहा कि यदि वे संघर्ष बंद करें तो अमेरिका उनके साथ बड़े व्यापार सौदे करेगा.
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी को पत्र लिखकर सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का आग्रह किया. उन्होंने लिखा’हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह संसदके आगामी मानसून सत्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए विधेयक लाए. इसके अलावा हम सरकार से अनुरोधकरते हैं कि वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए भी विधेयक लाए. उन्होंने पत्र में लिखा’माननीयप्रधानमंत्री जी, पिछले पांच वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोग पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं. यह मांग जायज होने के साथ-साथउनका संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार भी है. यह समझना जरूरी है कि जहां अतीत में केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य का दर्जा दिए जाने केउदाहरण रहे हैं वहीं जम्मू-कश्मीर का मामला आजाद भारत में कुछ अलग ही रहा है यह पहली बार है. राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदमजब किसी पूर्ण राज्य को उसके विभाजन के बाद केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया है. पत्र में आगे लिखा गया ‘आपने स्वयं कई मौकों पर राज्यका दर्जा बहाल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है. 19 मई 2024 को भुवनेश्वर में दिए अपने साक्षात्कार में आपने कहा था कि राज्य कादर्जा बहाल करना हमारा वादा है. हम इस पर कायम हैं। 19 सितंबर 2024 को श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए आपने फिर से दोहराया थाकि हमने संसद में कहा है कि हम इस क्षेत्र का राज्य का दर्जा बहाल करेंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के मामले में सर्वोच्च न्यायालयके सामने भी इसी तरह का आश्वासन दिया. जिसमें कहा गया कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा. राहुल और खरगे ने पत्र मेंलिखा’हम सरकार से अपील करते हैं कि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिएएक विधेयक पेश करे. इसके अलावा हम सरकार से मांग करते हैं कि वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने केलिए एक विधेयक भी लाए. यह लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक, विकासात्मक और राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्णकदम होगा. कांग्रेस ने लिखा पीएम मोदी को पत्रइसके साथ ही यह उनके अधिकारों, भूमि और पहचान की रक्षा भी करेगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी नेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संसद के मानसून सत्र में कानून लानेका आग्रह किया. उन्होंने सरकार से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए कानून लाने की भी मांग की. कांग्रेस का यह पत्रसिर्फ एक औपचारिक आग्रह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है कि आगामी मानसून सत्र में विपक्ष सरकार से इन विषयों पर जवाबदेही औरविधायी कार्रवाई की मांग करेगा. जम्मू-कश्मीर की स्थिति, अनुच्छेद 370 की बहाली के बाद की राजनीति, और लद्दाख की सांस्कृतिक स्वायत्तता कामुद्दा आने वाले सत्र में गरमा सकता है ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कांग्रेस के इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है. और क्या इन मांगोंको लेकर संसद में विधेयक पेश होता है या नहीं.
मेघालय की बेटी रिफिनीस वारजरी ने रचा इतिहास, एवरेस्ट फतह कर दिखाई उड़ान फिर भी मां की चाय दुकान पर करती हैं काम

सड़क किनारे चाय और नूडल्स परोसने से लेकर सभी सातों महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का सपना, मेघालय की रिफिनीस वारजरीकी कहानी हौसलों की ऊंची उड़ान की कहानी है. 20 साल की पर्वतारोही वारजरी ने हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़करकीर्तिमान रच दिया है. इसके साथ ही वारजरी मेघालय की सबसे युवा पर्वतारोही बन गई हैं जो माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुकी हैंरिफिनीस अपनी इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने अपने पैरों को जमीन पर ही रखा है. न केवल शारीरिक सहनशक्ति औरमानसिक ताकत, बल्कि उनकी विनम्रता और गर्मजोशी भरे स्वभाव ने भी कई लोगों का दिल जीत लिया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत मेंरिफिनीस ने उम्मीद जताई कि उनकी यात्रा कई लोगों को प्रेरित करेगी. साधारण परिवार से रखती है ताल्लुकखासकर उन महिलाओं को जो छोटे शहरों या पिछड़े परिवारों से आती हैं और बड़े सपनों का पीछा कर रही हैं रिफिनीस का जन्म मेघालय के ईस्टखासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई इलाके में हुआ था. लेकिन अब रिफिनीस और उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है. रिफिनीस एकसाधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं वहीं उनके पिता चिकन बेचते हैं. माउंटएवरेस्ट नापने के बाद रिफिनीस को कई सम्मान और पहचान मिल चुकी है. लेकिन अभी भी रिफिनीस ने अपने आप को विनम्र बनाए रखा है और वेअभी भी अपनी मां की दुकान पर काम करती हैं. जहां वे टेबल साफ करने से लेकर लोगों को चाय परोसने जैसे काम करती हैं रिफिनीस ने कहा कि’पहाड़ हमें विनम्र रहना सिखाते हैं. जब मैं माउंट एवरेस्ट पर खड़ी थी तो मुझे अहसास हुआ कि हम कितने छोटे और महत्वहीन हैं ये एक सबक है जिसेमैं साथ लेकर आई हूं और इसे सभी के साथ साझा कर रही हूं. रिफिनीस की सफलता पर उसके परिजन भी बेहद खुश और गौरवान्वित हैं उन्होंने उम्मीदजताई की रिफिनीस को कोई सरकारी नौकरी मिल जाए ताकि वह अपने परिवार की मदद कर सके. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे नहीं चाहते किरिफिनीस अब सपने देखना बंद कर दे. बहन ने जताई खुशीरिफिनीस की बहन उसकी सफलता से बेहद खुश है. वंचित परिवारों के बच्चों के लिए अपने संदेश में रिफिनीस ने कहा कि ‘आपकी पृष्ठभूमि आपकीमहत्वाकांक्षा को कभी सीमित नहीं करनी चाहिए. खुद पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहें. रिफिनीस की सफलता पर मेघालय के सीएम कोनराडसंगमा ने उन्हें सम्मानित किया. साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बधाई दी और रिफिनीस को भारत की युवा पीढ़ी के जुझारूपन का उदाहरणबताया। कई सरकारी विभाग भी रिफिनीस को सम्मानित कर चुके हैं. रिफिनीस का जन्म ईस्ट खासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई गाँव में हुआ। वर्तमानमें उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं. जबकि उनके पिता चिकनविक्रेता हैं बचपन से ही कठिनाइयों के बीच पली-बढ़ीं रिफिनीस ने कभी हार नहीं मानी. रिफिनीस की बहन और परिजन बेहद खुश हैं। परिवार चाहताहै कि उन्हें सरकारी नौकरी मिले, जिससे वह अपने माता-पिता की मदद कर सकें. लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि रिफिनीस अपने सपनों का पीछाकरना छोड़ दे.
कर्नाटक सरकार ने रोका एयरोस्पेस पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण, नारा लोकेश ने दिया आंध्र प्रदेश में निवेश का न्योता

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एयरोस्पेस पार्क के लिए बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली इलाके में भूमि अधिग्रहण का काम रोक दिया है. दरअसलकिसान और सामाजिक संगठन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब इसे लेकर आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री औरसीएम चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने तीखा तंज कसा है और एयरोस्पेस उद्योग से अपील की है कि वे आंध्र प्रदेश में निवेश करें. जैसे हीकर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने का आदेश जारी किया. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करएयरोस्पेस उद्योग से जुड़े लोगों को आंध्र प्रदेश में निवेश करने की पेशकश कर दी, नारा लोकेश ने लिखा कि ‘प्रिय एयरोस्पेस उद्योग, इसके बारे मेंसुनकर दुख हुआ. आपके लिए है बेहतर उपायलेकिन मेरे पास आपके लिए एक बेहतर उपाय है. आप आंध्र प्रदेश में निवेश क्यों नहीं करते? हमारी एयरोस्पेस नीति काफी लुभावनी है और हमबेहतर इनसेंटिव दे सकते हैं. साथ ही हमारे पास 8000 एकड़ तैयार जमीन है वो भी बंगलूरू के बिल्कुल बाहर। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द हीबातचीत की मेज पर दिखेंगे. ‘गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने किसानों और अन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरूके नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसला वापस ले लिया. सीएम सिद्धारमैया ने मंगलवार को इसका एलानकिया और कहा कि सरकार ने पीछे हटने का फैसला किया है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसान भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति जताते हैं तोसरकार उनसे सही दाम पर जमीन खरीदने के लिए तैयार है। सीएम ने कहा कि ‘यह जमीन बंगलूरू के पास है. जहां अच्छी खेती होती है और यह कईकिसानों की आजीविका का साधन है. इसलिए हमने अधिग्रहण रद्द करने का फैसला किया है. चूंकि यह जमीन हवाई अड्डे के पास हरित पट्टी में है. इसलिए किसानों ने सरकार से इसे अधिग्रहित न करने का आग्रह किया था और इस योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए थे. छूट दी जा रही है जमीन के लिएहालांकि सीएम ने साफ किया कि यह छूट सिर्फ इस जमीन के लिए दी जा रही है और कहीं और ये छूट नहीं मिलेगी. कर्नाटक सरकार ने किसानों औरअन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसलावापस ले लिया. जैसे ही कर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने की घोषणा की. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटेनारा लोकेश ने इसे लेकर एक राजनीतिक और व्यावसायिक तंज कस दिया. कर्नाटक सरकार का यह फैसला जहां किसान हितों की जीत के रूप मेंदेखा जा रहा है. वहीं आंध्र प्रदेश इसे औद्योगिक अवसर के रूप में भुनाना चाहता है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि राज्यों के बीच औद्योगिकनिवेश आकर्षित करने की होड़ और भी तेज़ हो सकती है. कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण रोकने का फैसला सामाजिक दृष्टि से सराहनीय है. लेकिन इससेऔद्योगिक नीति और प्रतिस्पर्धा में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अब देखना होगा कि क्या एयरोस्पेस सेक्टर आंध्र प्रदेश की पेशकश को स्वीकारकरता है या कर्नाटक कोई नई रणनीति अपनाता है.