विराट कोहली पहुंचे विंबलडन जोकोविच की जीत पर दी दिल से दाद, बोले ग्लैडिएटर के लिए यह है आम बात

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘किंग’ के नाम से मशहूर विराट कोहली भी सोमवार को नोवाक जोकोविच और एलेक्स डि मिनोर के बीचमुकाबला देखने पहुंचे। इस दौरान कोहली के साथ उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी नजर आईं. जोकोविच ने यह मैच 1-6, 6-4, 6-4, 6-4 से जीताऔर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. सर्बिया का यह दिग्गज खिलाड़ी 63वीं बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में खेलेंगे. जोकोविच काखेल देखकर विराट कोहली हैरान रह गए. मैच के बाद कोहली ने इंस्टाग्राम स्टोरी में जोकोविच की तारीफ भी की किंग कोहली ने लिखा, ‘क्या मैच थायह हमेशा की तरह ग्लैडिएटर (जोकोविच) के लिए एक आम बात थी. कोहली ने जो तस्वीर साझा की है उसमें जोकोविच सर्व करते नजर आ रहे हैं. कोहली इन दिनों पत्नी अनुष्का के साथ लंदन में हैं. हालांकि, वह अब तक इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम का मैच देखने नहीं पहुंचे हैं. कोहली ने एजबेस्टन में टीम इंडिया की जीत के बाद जरूर तारीफ की थी और जीत को ऐतिहासिक बताया था. टेस्ट से ले लिया था सन्यासअब भी तीन टेस्ट बाकी हैं कोहली से 10 जुलाई से लंदन के लॉर्ड्स में शुरू हो रहे टेस्ट में पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. कोहली ने हाल ही में टेस्टसे संन्यास लिया था. अब वह टीम इंडिया के लिए सिर्फ वनडे में खेलते दिखाई पड़ेंगे. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है. कोहली के अलावा सात बार के विंबलडन चैंपियन जोकोविच का मुकाबला देखने के लिए आठ बार के विंबलडन चैंपियन रोजर फेडररभी रॉयल बॉक्स में मौजूद थे. छठे वरीय जोकोविच पर 2016 से विंबलडन में सबसे जल्दी बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था. लेकिन उन्होंने खराबशुरुआत से उबरकर डि मिनोर को 1-6, 6-4, 6-4, 6-4 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. 38 साल के जोकोविच की शुरुआत खराब रहीऔर उन्होंने बेहद एकतरफा पहला सेट गंवा दिया. जोकोविच ने इसके बाद वापसी करते हुए अगले दो सेट जीतकर 2-1 की बढ़त बनाई. चौथे सेट मेंडि मिनोर ने एक बार फिर दबदबा बनाते हुए 4-1 की बढ़त बनाई. लेकिन दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी जोकोविच ने आखिरी पांच गेम औरअंतिम 15 में से 14 अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम किया. चुनौती कर रहे है पेशआठवें विंबलडन और रिकॉर्ड में सुधार करने वाले 25वें एकल ग्रैंडस्लैम खिताब के लिए चुनौती पेश कर रहे जोकोविच अगले दौर में इटली के 22वेंवरीय खिलाड़ी फ्लावियो कोबोली से भिड़ेंगे. कोबोली ने 2014 के अमेरिकी ओपन चैंपियन मारिन सिलिच को 6-4, 6-4, 6-7, 7-6 से हराकरपहली बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के अंतिम आठ में जगह बनाई. जोकोविच 63वीं बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में खेलेंगे.भारत केयुकी भांबरी और अमेरिका के उनके जोड़ीदार रॉबर्ट गैलोवे को सोमवार को विंबलडन पुरुष युगल के तीसरे दौर में स्पेन के मार्सेल ग्रानोलर्स औरअर्जेंटीना के होरासियो जेबालोस की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. युकी और गैलोवे की 16वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी नेचौथी वरीयता प्राप्त प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी. लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा. उन्हें दो घंटे नौ मिनट तक चले इस रोमांचक मुकाबले में4-6, 6-3, 6-7 (10) से हार मिली. युकी के बाहर होने के साथ विंबलडन में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई. मैच के बाद कोहली ने इंस्टाग्राम स्टोरीमें जोकोविच की तारीफ भी की. किंग कोहली ने लिखा, ‘क्या मैच था. यह हमेशा की तरह ग्लैडिएटर (जोकोविच) के लिए एक आम बात थी. कोहली ने जो तस्वीर साझा की है उसमें जोकोविच सर्व करते नजर आ रहे हैं.
बिहार में बेरोजगारी के बीच बड़ी पहल सीएम नीतीश कुमार ने 7468 नवनियुक्त ANM को सौंपे नियुक्ति पत्र, सरकार की नियुक्ति पहल औरहै आगामी चुनावी समीकरण

आगामी बिहार विधान सभा चुनाव को देखते हुए बनता प्रतिपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बेरोजगारी, रोजगार और पलायन के मुद्दों परघेरते नजर आते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेरोजगारी की समस्या से निबटने के लिए शिक्षक और सिपाही भर्ती के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमारने अब 7468 नवनियुक्त महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) को नियुक्ति पत्र प्रदान किया है. नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजनमुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में किया गया था. 7468 नवनियुक्त महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम मेंमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सांकेतिक रूप से मोना कुमारी, नीलू कुमारी, अमृता कुमारी, प्रिया सिन्हा और रीमा कुमारी को नियुक्ति पत्र प्रदान किया. मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त ए०एन०एम० को बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए कहा कि मेरा विश्वास है कि सभी नवनियुक्त कर्मी पूरी ईमानदारी और निष्ठाके साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी. पलायन के मुद्दों को रहे है उछालकार्यक्रम में विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हरित पौधा भेंट कर स्वागतकिया.नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन सह संसदीय कार्यमंत्री विजयकुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डे, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, विकास आयुक्त सह स्वास्थ्यविभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, राज्य स्वास्थ्य समिति केकार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत, बिहार स्वास्थ्य सेवायें एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निलेश देवरे सहित अन्य वरीयअधिकारी एवं नियुक्ति पत्र पानेवालीं ए०एन०एम० उपस्थित थीं. बिहार विधान सभा चुनाव होने में अभी कुछ समय शेष है, इस बीच विपक्ष लगातारबिहार सरकार पर बेरोजगारी और पलायन का आरोप लगा रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7468 नवनियुक्त एएनएम को नियुक्ति पत्र बांटेहैं। राज्य स्वास्थ्य समिति, स्वास्थ्य विभाग, और बिहार स्वास्थ्य सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के सहयोग से यह नियुक्ति की गई. विपक्ष, खासकर राजद और कांग्रेस, लगातार बेरोजगारी, शिक्षा और पलायन के मुद्दों को उछाल रहे हैं. राजनीतिक दृष्टि से भी माना जा रहा अहमबिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह निर्णय राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है. ऐसे में यह कदम युवाओं को सरकारी सेवा में जोड़नेकी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एएनएम की भूमिका गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, प्रसव सेवाएं और महिला स्वास्थ्यसे जुड़ी अन्य ज़रूरतों के लिए अहम होती है. ज्यादातर ANM महिलाएं हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में सुधारहोगा. स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाओं की गुणवत्तापूर्ण डिलीवरी की संभावना बढ़ेगी.सीएम नीतीश कुमार ने कहा कियह नियुक्ति स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार का हिस्सा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम की कमी दूर होगी जिससे टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल एवंमातृ–शिशु स्वास्थ्य में सुधार संभव होगा.उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसका संबंध 30 लाख नौकरियों देने के लक्ष्य से जोड़ा बताया कि यह सरकारके रोजगार सृजन अभियान का हिस्सा है.स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बताया कि इसके अलावा 6,000 डॉक्टरों व सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तिप्रक्रिया चल रही है तथा 4,500 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और आयुष चिकित्सक भी नियुक्त किए जा रहे हैं.
अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा बढ़ाकर भारत को दी व्यापार समझौते के लिए अतिरिक्त समय,भारतीय निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

International Relations: अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर दुनियाभर के देशों की चिंता को कुछ दिनों की राहत दी है. राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने 2 अप्रैल को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा को 1 अगस्त तक बढ़ा दिया है. इस फैसले पर निर्यतकों ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ कीसमयसीमा बढ़ाना अमेरिका की अपनी व्यापारिक साझेदारों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है. भारतीय निर्यात संगठन महासंघ(फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह कदम व्यापारिक वार्ता के लिए अवसर प्रदान करता है। इससे भारत को शेष मुद्दों को सुलझाने केलिए और समय मिला है. उन्होंने कहा कि अगर भारत इस महीने के अंत तक अमेरिका के साथ कम से कम वस्तुओं पर द्विपक्षीय व्यापार समझौता(बीटीए) कर लेता है. तो भारत को अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी लाभ मिल सकता है एक अन्य निर्यातक ने कहा कि इस निर्णय से घरेलूउद्योग को राहत मिलेगी. भारत के लिए रहा राहत भरा कदमभारत को अंतरिम व्यापार समझौते पर अमेरिका के साथ बात करने के लिए 12 से 13 दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है. अंतरराष्ट्रीय व्यापारविशेषज्ञ विश्वजीत धर ने इसे भारत के लिए राहत भरा कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया भारत द्वारा कुछ मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाने केकारण आई है. फियो के अध्यक्ष और लुधियना स्थित इंजीनियरिंग निर्यात ने कहा कि हालांकि यह एक छोटी सी राहत है. फिर भी हम उम्मीद लगाएबैठे हैं. मुंबई के निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज (इंडिया) के संस्थापक शरद कुमार सराफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुतअप्रत्याशित हैं. भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने चाहिए. भारत और अमेरिका इस साल सितंबर-अक्टूबर तक एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापारसमझौते का पहला चरण पूरा करना चाहते हैं. इससे पहले वे एक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। वर्ष 2021-22 सेअमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है. 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरबडॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.51 अरब डॉलर और आयात 45.33 अरब डॉलर था. भारत को 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेषप्राप्त हुआ. अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा को 1 अगस्त का बढ़ा दिया है. सतर्कता होगी बरतनीइस निर्णय पर भारतीय निर्यतकों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया है. उन्होंने कहा है कि इससे कुछ दिनों की राहत जरूर मिली है लेकिन भविष्य के लिएसतर्कता बरतनी होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित नीति के कारण निर्यातकों ने नए बाजार तलाशने की सलाह दी है. भारत औरअमेरिका सितंबर-अक्टूबर तक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। 2024-25 में भारत कोअमेरिका के साथ 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा. लुधियाना के इंजीनियरिंग निर्यातक और फियो के अध्यक्ष ने कहा कि यह छोटा साराहत पैकेज है. लेकिन निर्यातकों की उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं. मुंबई के टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के संस्थापक शरद कुमार सराफ ने कहा कि अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों के चलते भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने होंगे. अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमाको 1 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस कदम को लेकर भारतीय निर्यातकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है. वे मानते हैं कि यह कुछ दिनों की राहत तो देता हैलेकिन दीर्घकालिक रणनीति पर भी ध्यान देना जरूरी है ताकि भारत अपनी निर्यात क्षमता को और बढ़ा सके.
यमुना में अवैध रेत खनन से बढ़ा बाढ़ का खतरा, दिल्ली-यूपी सरकारों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत “रेखा गुप्ता ने की स्पष्ट मांग”

Dellhi Latest News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा. उन्होंने अनुरोध किया है किदिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे यमुना क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रोक लगाई जाए, अवैध खनन के चलते यमुना के तटबंध कमजोर हो रहे हैं. जिससे बाढ़ का खतरा भी पैदा होता है. मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चिंताओं से भी सीएम योगी को अवगत करायाहै.सीएम रेखा गुप्ता का यह भी कहना है कि अवैध खनन गंभीर पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बन रहा है. जो भविष्य में यमुना के लिए गंभीरपरेशानी का कारण बन सकता है. इसके साथ-साथ यमुना के किनारे रहने वाली आबादी भी इस बदलाव से प्रभावित होगी. उनका कहना है कि यहअंतरराज्यीय प्रकृति का मुद्दा है. संयुक्त प्रर्वतन तंत्र की है आवश्यकताइसलिए इस अवैध रेत खनन पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों के बीच एक समन्वित और संयुक्त प्रर्वतनतंत्र की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने यूपी सीएम को जानकारी दी कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी लगातार यमुना में अवैध रेत खनन पर चिंता व्यक्तकरता रहा है. एनजीटी की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि ये अवैध खनन कई प्रकार के दुष्प्रभाव ला रहा है, इसलिए इस पर रोक लगाना जरूरीहै. उन्होंने योगी से अनुरोध किया है कि अपने अफसरों को इस मसले पर संयुक्त अंतरराज्यीय सीमांकन के आवश्यक दिशा-निर्देश देने की कृपाकरें.दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से यमुना क्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने का अनुरोध किया. खनन से तटबंधकमजोर होने और बाढ़ के खतरे के साथ पारिस्थितिक क्षति की चिंता जताई गई.उन्होंने यूपी सीएम को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भी याददिलाई जो इस मुद्दे पर लगातार चिंता व्यक्त करता रहा है और अवैध रेत खनन को रोकने के निर्देश जारी करता रहा है. मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथसे आग्रह किया है कि वे अपने अधिकारियों को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दें ताकि संयुक्त सीमांकन और निगरानी की प्रक्रिया को मजबूत कियाजा सके. तटबंध हुए है कमजोरइस मुद्दे पर दिल्ली सरकार का कहना है कि अवैध रेत खनन की वजह से यमुना के तटबंध कमजोर हुए हैं. जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है औरपारिस्थितिक संतुलन भी बिगड़ रहा है. दोनों राज्यों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना आवश्यक है ताकि यमुना की सुरक्षासुनिश्चित की जा सके.मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी इस अवैध खनन के कारण खतरे में है. उन्होंनेकहा कि यमुना एक अंतरराज्यीय नदी है इसलिए इस समस्या को हल करने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय औरसंयुक्त निगरानी तंत्र की जरूरत है. चूंकि यमुना कई राज्यों से होकर गुजरती है. इसलिए इसके संरक्षण के लिए केवल एक राज्य की पहल पर्याप्त नहींहै। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समस्या अंतरराज्यीय है इसलिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों को मिलकर एक संयुक्त मॉनिटरिंगकमिटी बनानी होगी जो अवैध खनन की लगातार निगरानी करे प्रभावी कानून लागू करे और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे.
एक्सप्रेसवे पर दोपहिया-तीपहिया वाहनों की एंट्री पर नितिन गडकरी का सख्त एक्शन, नियमों के सख्त पालन के निर्देश

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली पुलिस से साफ कहा है कि दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों को हाई-स्पीडकॉरिडोर्स यानी एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़कों पर घुसने से रोकने के लिए कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए. दिल्ली-एनसीआर मेंलगातार इस तरह के वाहन मुख्य लेन में घुसकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. जिससे सड़क हादसों का खतरा काफी बढ़ गया है।मीडिया रिपोर्ट केमुताबिक, गडकरी ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को भी हिदायत दी है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लगे गैरकानूनी होर्डिंग्स और विज्ञापनोंको तुरंत हटाया जाए. क्योंकि ये चालकों का ध्यान भटका सकते हैं और दुर्घटना की वजह बन सकते हैं.यह निर्देश 4 जून को हुई एक अहम बैठक मेंदिए गए. जिसकी अध्यक्षता खुद नितिन गडकरी ने की थी इस बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिलहुए थे. गंभीरता से करना होगा लागूबैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई कि किस तरह नियमों के बावजूद दोपहिया और तिपहिया वाहन तेज रफ्तार वाली सड़कों पर बेधड़क घुस रहे हैं. सरकार पहले ही जनवरी 2024 में UER-II, दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे रूट्स पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों केप्रवेश पर रोक का नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है. उस समय भी ट्रैफिक पुलिस को सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन अधिकारियोंका कहना है कि साइनबोर्ड और कानून होने के बावजूद पालन कमजोर रहा है. जिससे नियमों की अनदेखी आम हो गई है।रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालयके एक अधिकारी ने बताया कि गडकरी ने साफ कहा कि तेज रफ्तार सड़कों पर अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है. तभी सड़क हादसों में कमी लाईजा सकती है और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल सकेगा. उनके मुताबिक “जब तक नियम तोड़ने पर हर बार पकड़े जाने का डर नहीं होगा. तब तक लोगनियम नहीं मानेंगे. पुलिस को इसे गंभीरता से लागू करना ही होगा. ट्रैफिक गए तोड़ेएक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दिल्ली-गुड़गांव और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे एक्सेस-कंट्रोल्ड इलाकों में जितने भी ट्रैफिक नियम तोड़े गए. उनमें से लगभग 63 प्रतिशत मामले दोपहिया और तिपहिया वाहनों के अवैध प्रवेश के कारण हुए. इससे साफ है कि अगर पुलिस ने सख्ती नहीं बरती, तो सड़क हादसों में और इजाफा हो सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली पुलिस से साफ कहा है कि दोपहियाऔर तीन-पहिया वाहनों को हाई-स्पीड कॉरिडोर्स, यानी एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़कों पर घुसने से रोकने के लिए कानूनों को सख्ती से लागूकिया जाए. ये वाहन नियमित रूप से इन हाई-स्पीड लेन में प्रवेश कर दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रहे हैं. खासकर दिल्ली–गुड़गांव, द्वारका एक्सप्रेसवे, UER-II और दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर। प्रहरी प्रणाली लागू है जनवरी 2024 से लेकिन अभी भी उल्लंघन जारी हैं. गडकरी की यह पहल सड़कसुरक्षा सुधार, एवजिलेंस तकनीकों का उपयोग, और नियमों का सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम है. यदि आने वाले समयमें पुलिस और स्वचालित प्रणालियाँ ईमानदारी से लागू होती हैं तो एक्सप्रेसवे पर अनधिकृत वाहन रोकने में भी मदद मिलेगी और दुर्घटनाओं की दर मेंउल्लेखनीय कमी आईगी.
एम्स पीएमआर विभाग का होगा विस्तार, स्पाइनल इंजरी के मरीजों को एक ही छत के नीचे मिलेंगी बेहतर पुनर्वास सुविधाएं

एम्स के भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास (पीएमआर) विभाग में इलाज करवाने आ रहे मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए सेंटर का विस्तार कियाजाएगा. इसकी मदद से सभी प्रकार की सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी. मौजूद समय में मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण सुविधाओंका अभाव रह जाता है. एम्स की प्रोफेसर डॉ. गीता हांडा ठुकराल ने कहा कि विभाग के लिए नए सेंटर बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इसकी मददसे मरीजों को एक जगह पर पुनर्वास की सभी सुविधाएं मिल जाएंगी.विभाग में सबसे ज्यादा मरीज स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के आते हैं इनमें अधिकतर मरीजों की रीढ़ की हड्डी में चोट ऊंचाई से गिरकर लगती है इसमें रीढ़ कीहड्डी को नुकसान होता है. संवेदनशीलता में हो सकती है कमीजिसके कारण गतिशीलता और संवेदनशीलता में कमी हो सकती है. एम्स के विभाग में हर सप्ताह 15-20 मरीज स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के साथ आतेहैं. इन मरीजों को पहले खुद के काम करने के लायक बनाया जाता है इस दौरान बची हुईं मांसपेशियों को बेहतर करने व उन्हें मजबूत करने का प्रयासकिया जाता है. साथ ही मरीज को खुद के कपड़े पहनने व दूसरे काम करने के लायक बनाया जाता है. ऐसा करने से तीमारदार की समस्याएं भी कम होजाती हैं इस कोशिश से मरीज दूसरे पर निर्भर होने से बच जाता है. एम्स में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के सबसे ज्यादा मरीज 20 से 40 साल के युवा होतेहैं। इनमें ज्यादातर मरीज ऊंचाई या पेड़ से गिरकर घायल होते हैं. एम्स की प्रोफेसर डॉ. गीता हांडा ठुकराल ने कहा कि विभाग के लिए नए सेंटर बनानेका प्रयास किया जा रहा है. इसकी मदद से मरीजों को एक जगह पर पुनर्वास की सभी सुविधाएं मिल जाएंगी. ये युवा (20–40 वर्ष) मरीज अपनीस्वायत्तता जब्त क्षमता बहाल करने के लिए फिजियोथेरेपी, मजबूती प्रशिक्षण और व्यक्तिगत कार्यों (जैसे कपड़े पहनना) की सुविधा पाते हैं. संस्थान का बोझ किया जा सके कमविभाग का लक्ष्य है कि नए सेंटर से खुली जगह की कमी दूर हो और मरीजों को बेहतर समग्र पुनर्वास क्षमता प्राप्त हो.इससे मरीजों का इलाज बेहतरहोगा, तीमारदारों की सहायता कम होगी, और AIIMS की सुरक्षा, सुविधाजनक पहुंच और गुणवत्ता सेवाएं भी घटित होंगी हर सप्ताह लगभग 15–20 मरीज स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के साथ आते हैं जिनमें से अधिकांश चोट ऊंचाई या पेड़ से गिरने से लगी होती हैं. NITI Aayog ने हाल ही मेंAIIMS दिल्ली के व्यापक रिवैम्प और NCR-व्यापी सेवा विस्तार का प्रस्ताव रखा है ताकि मुख्य संस्थान का बोझ कम किया जा सके.दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने AIIMS में 1,500 लोगों के लिए प्रतीक्षा हॉल भी लोहे से समर्पित किया है यह मरीजों और तीमारदारों की सुविधा को ध्यान में रखकरकिया गया है.इससे मरीजों का इलाज बेहतर होगा, तीमारदारों की सहायता कम होगी, और AIIMS की सुरक्षा, सुविधाजनक पहुंच और गुणवत्तासेवाएं भी घटित होंगी.
मंत्री नंदी का नौकरशाही पर बड़ा हमला अफसर फाइलें डंप कर रहे, नीति विरुद्ध फैसले दे रहे सीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अफसरशाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने अधिकारियों पर कोईनिर्देश नहीं मानने और अपने लोगों को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया है वह नीतियों को ताक पर रखकर अपने स्तर से फैसले ले रहे हैं औरपत्रावलियों को ही गायब कर रहे हैं. नंदी ने अपने पत्र में कुछ मामलों में बरती गईं अनियमितताओं का जिक्र भी किया गया है. जिसकी उच्चस्तरीयजांच के निर्देश दिए गए हैं। नंदी के लगाए गए आरोपों की जांच के निर्देश के साथ मामले की पूरी रिपोर्ट तलब की गई है. सूत्रों के मुताबिक मंत्री केआरोपों के ठोस जवाब शीर्ष स्तर के अधिकारी तैयार कर रहे हैं. फाइलें मगाकर कर रही है डंपसीएम को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि काम में अड़ंगा डालने के लिए अफसरशाही अपने स्तर पर फाइलें मंगाकर डंप कर रही है. साथ ही कईपत्रावलियों में ऐसे प्रस्ताव हैं जो नियम विरुद्ध होने के बावजूद अपने स्तर से अधिकारी पारित कर रहे हैं. कुछ लोगों को अनुचित लाभ देने के लिएनीतियों के विरुद्ध जाकर प्रस्ताव पारित किए गए हैं. नंदी के पत्र के मुताबिक दो साल से तमाम फाइलें बार-बार मांगने के बाद भी अफसरों ने नहीं दी. आखिर क्यों? इस जवाब में विभाग में तैनात एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने मना किया है. इस पर मंत्री ने पिछले वर्ष 7 अक्तूबर को ऐसी मामलों की सूची सीएम आफिस भेजी। 29 अक्तूबर को एक हफ्ते के अंदर सभी फाइलों को पेश करने के निर्देश दिए गए. लेकिनछह महीने बाद भी फाइलें नहीं दी गईं इसी तरह विभाग में कामकाज का बंटवारा सक्षम स्तर से कराने के निर्देश तीन साल पहले दिए थे. लेकिनमामले की फाइल ही लापता हो गई. अफसरों पर मनमानेपन का आरोप लगाते लगाते हुए लिखा है कि कई मामले ऐसे हैं जिनमें एक जैसीपरिस्थितियों में किसी को फायदा पहुंचाया गया और किसी का केस खारिज कर दिया गया है. अधिकारी को जा चुका है हटायाऐसे ही एक केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाया जा चुका है. योगी सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी ने सीएम योगी को पत्र लिखकर प्रदेश की नौकरशाही की आलोचना की है. इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने उच्च स्तरीय जांच केनिर्देश दिए और पूरी रिपोर्ट तलब की है. शीर्ष अधिकारियों द्वारा जवाब भी तैयार किया जा रहा हैपत्र में कहा गया कि “काम में अड़ंगा डालने” काप्रयास हो रहा है फाइलें डंप की जा रही हैं और तेज़ी से निर्णय लेने में अनियमितताएं मंत्री के मुताबिक, कुछ अधिकारियों द्वारा नीति-विरुद्ध प्रस्तावपारित किए गए और एक जैसी परिस्थिति में भेदभावपूर्ण निर्णय लिए गए उन्होंने बताया कि दो साल से फाइलों को छिपाया जा रहा है. और तीनसाल पहले काम का बंटवारा करने का आदेश था, लेकिन संबंधित दस्तावेज गायब बताए जा रहे हैं इससे पहले मंत्री नंदी ने कानपुर की सहकारीकताई मिल की जांच हेतु FIR और SIT जांच का आदेश भी दिया था. जिससे उनकी सीधी कार्रवाई की छवि बनी.
मेडिकल शिक्षा में सबसे बड़ा घोटाला: देश के भविष्य से खिलवाड़, करोड़ों की रिश्वत, फर्ज़ी कॉलेजों को मिली मंजूरी

देशभर में मेडिकल और फार्मेसी शिक्षा से जुड़ा एक बहुत ही गंभीर और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। यह घोटाला सिर्फ एक राज्य याविभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई राज्यों के मेडिकल और फार्मेसी कॉलेज, बड़े अधिकारी, बिचौलिए और नेताओं के करीबी लोग शामिलहैं। इस पूरे मामले में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के वरिष्ठ अधिकारियों की भारीलापरवाही और भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।कैसे शुरू हुआ घोटाला? – 6 अप्रैल 2022 को फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. मोंटू पटेल ने अपने कुछ खास लोगों को नियमों को ताक पर रखकरएक अहम कमेटी में शामिल कर लिया। यह वही कमेटी थी, जो फार्मेसी कॉलेजों को मान्यता (अप्रूवल) देती है। उन्होंने इन लोगों को पूरी ताकत दीताकि वह बिना किसी रुकावट के कॉलेजों को अनुमोदन दे सकें। न तो किसी से कोई सलाह ली गई, और न ही किसी नियम का पालन किया गया। निरीक्षण की प्रक्रिया में धोखा – आम तौर पर किसी भी कॉलेज को अनुमति देने से पहले फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक निरीक्षण) किया जाता है।इसमें देखा जाता है कि कॉलेज के पास जरूरी भवन, क्लासरूम, लैब, शिक्षक और अन्य सुविधाएं हैं या नहीं। लेकिन इस घोटाले में यह प्रक्रिया पूरीतरह स्क्रैप कर दी गई और उसकी जगह केवल ऑनलाइन ज़ूम वीडियो कॉल पर 7 से 9 मिनट का निरीक्षण किया गया। बिना दस्तावेज़ देखे, बिनाइमारत का निरीक्षण किए, केवल एक वीडियो कॉल के ज़रिये कॉलेजों को मंजूरी दी गई। यह पूरी प्रक्रिया एक मज़ाक बनकर रह गई। फर्ज़ी एप और आवेदन की हेराफेरीएक गूगल फॉर्म के ज़रिये 908 कॉलेजों ने आवेदन भेजे।इनमें से 870 को ऑनलाइन निरीक्षण के लिए चुन लिया गया।जांच के लिए जो डीजी फार्मा मोबाइल एप इस्तेमाल होता था, उसे भी छेड़छाड़ (टैम्पर) कर दिया गया। 14 अक्टूबर 2022 को इस एप का एक्सेस बाकी अधिकारियों के लिए बंद कर दिया गया ताकि सारा नियंत्रण केवल डॉ. पटेल के पास रहे।सीबीआई जांच और खुलासे – सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) में बताया गया कि इस पूरे घोटाले में 23 कॉलेजों को मंजूरी दी गईजबकि वे जरूरी मानकों पर खरे नहीं उतरे।, 6 कॉलेजों को तो मंजूरी दी गई जबकि उनके पास नकारात्मक निरीक्षण रिपोर्ट थी।, चुनाव प्रक्रिया में भीअनियमितता हुई और नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई गईं।डॉ. जीतू लाल मीणा की भूमिका -एनएमसी के तत्कालीन सदस्य डॉ. जीतू लाल मीणा को इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। उन्होंनेकरोड़ों रुपये की रिश्वत ली और हवाला के ज़रिये पैसा इधर-उधर भेजा। यह पैसा डॉ. वीरेंद्र कुमार और शिवम पांडे जैसे बिचौलियों के माध्यम सेलिया गया। सूत्रों के अनुसार, डॉ. मीणा ने इस पैसे से राजस्थान में 75 लाख रुपये की लागत से हनुमान मंदिर का निर्माण भी शुरू किया है। घोटाले में शामिल प्रमुख कॉलेज इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, इंदौरस्वामीनारायण मेडिकल संस्थान, गुजरातएनसीआर मेडिकल कॉलेज, मेरठश्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज, बिहाररावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज, रायपुर (जिसका संचालन एक स्वयंभू बाबा द्वारा किया जाता है)बड़ा सवाल- क्या मंत्री जिम्मेदार नहीं? इस पूरे घोटाले में अभी तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा का नाम सामने नहीं आयाहै, जबकि यह घोटाला उनके मंत्रालय के अंतर्गत हुआ है। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी अनियमितता और रिश्वतखोरी के बीच मंत्री कैसे अनजानरहे? क्या उन्होंने जानबूझकर इसे नज़रअंदाज़ किया? विपक्ष का सीधा आरोप प्रधानमंत्री और नड्डा पर – विपक्ष की नेता ओनिका जी ने सवाल उठाया हैजब डॉ. पटेल और डॉ. मीणा जैसे लोग प्रधानमंत्री के करीबी माने जाते हैं, तो क्या प्रधानमंत्री को इस घोटाले की जानकारी नहीं थी? क्या बीजेपी अध्यक्ष नड्डा को इसका कोई जिम्मा नहीं लेना चाहिए?क्या प्रधानमंत्री अब खुद नड्डा से इस्तीफ़ा लेंगे?क्या सीबीआई निष्पक्ष जांच करेगी और राजनीतिक नेताओं को भी नामज़द करेगी?घोटाले का मकसद- छात्रों का भविष्य बेच देना – इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को हुआ है। मेडिकल और फार्मेसी जैसे क्षेत्रों में फर्ज़ीकॉलेज, भ्रष्ट अधिकारी, और नियमों की अनदेखी ने लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। यह घोटाला व्यापम से भी बड़ा माना जा रहा है, जिसमें सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं बल्कि राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, बिहार और कई राज्यों के कॉलेज शामिल हैं। क्या होगी सज़ा? -अब देश की जनता और छात्र यह जानना चाहते हैं कि क्या इन घोटालों के जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिलेगी?क्या प्रधानमंत्री और उनके मंत्री सच्चे दोषियों पर कार्रवाई करेंगे?या फिर यह भी एक और घोटाला बनकर भुला दिया जाएगा?
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर आधारित नाटक का मंचन – वीरेंद्र सचदेवा

दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि एक कार्यकर्ता के रूप में हम सिर्फ धरना या प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि एक विचारधारा कोजीते हैं। यह विचार है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का, जो राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कभी पद के लिए काम नहीं किया, बल्कि देश और विचारधारा के लिए काम किया। उन्होंने दो बार मंत्री पद से इस्तीफा दिया, क्योंकि उनके लिए राष्ट्र सबसे पहले था। इन्हीं विचारों को लोगों तक पहुँचाने के लिए दिल्ली बीजेपी की टीम पिछले एक महीने से तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में कल शाम कमानी प्रेक्षागृहमें डॉ. मुखर्जी के जीवन पर आधारित एक नाटक का आयोजन किया जा रहा है। इस नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, कैसे पंडित नेहरू के मंत्रीमंडल से मतभेद हुआ और उन्होंने इस्तीफा दिया। साथही उनके बलिदान और रहस्यमयी निधन को भी मंच पर दिखाया जाएगा। वीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि आज शाम 6 बजे इसका पूरा रिहर्सल कमानी प्रेक्षागृह में होगा। उन्होंने कहा कि यह उनके 37 साल के राजनीतिक जीवनका ऐसा काम है जिससे उन्हें सच्ची खुशी और संतोष मिला है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम को जरूर कवर करें। कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा भी मौजूद रहेंगे।
200 Crore Helpless Women Pension Scam Unearthed, Delhiites Demand Kejriwal’s Accountability

Delhi Latest News: Delhiites want the Rekha Gupta-led government to initiate a high-level probe into the massive scam in the helpless women’s pension scheme under the Kejriwal government As per current findings, over 83,000 registered women cases are fake or suspicious A scam of over ₹200 crore annually has occurred in the name of more […]