Skip to main content

NEWS अब तक

दिल्ली को बीमार कर गई आम आदमी पार्टी की सरकार -मनजिंदर सिरसा और पंकज सिंह का प्रहार

भाजपा नेताओं मनजिंदर सिरसा और पंकज सिंह ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी पर जमकर हमला बोला।उन्होंने कहा कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए पूरी तरह से आम आदमी पार्टी जिम्मेदार है, और आज जो सख्त नियम लागू हो रहे हैं, वह सबन्यायालय के आदेशों के चलते हैं, न कि किसी राजनीतिक मंशा के कारण। मनजिंदर सिरसा ने कहादिल्ली में एक बीमारी थी — आम आदमी पार्टी। इस सरकार ने पूरे शहर को बीमार कर दिया। न हवा सही छोड़ी, न पानी, न व्यवस्था। वर्ष 2015 मेंही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने कहा था कि दिल्ली सरकार निकम्मी है और प्रदूषण पर कोई ठोस काम नहीं कर रही। उन्होंने आगे बताया कि2016 में फिर एनजीटी ने दोहराया कि दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकार आँखें मूँदकर बैठी रही। न सड़कों पर चलने वालेवाहनों की प्रदूषण जांच हुई, न उनकी फिटनेस को लेकर कोई कदम उठाया गया। पंकज सिंह ने कहा,एनजीटी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पुरानी पेट्रोल और डीज़ल की गाड़ियाँ दिल्ली की सड़कों पर नहीं चलनी चाहिए, लेकिन आमआदमी पार्टी की सरकार ने उसे भी नज़रअंदाज़ किया। यही नहीं, यह आदेश केवल दिल्ली के लिए लागू हुआ जबकि देश के अन्य महानगरों में ऐसीपाबंदियाँ नहीं लगीं। ऐसा क्यों उन्होंने आगे कहा, सर्वोच्च न्यायालय भी तब मजबूर हुआ जब देखा कि दिल्ली सरकार न प्रदूषण रोक पा रही है, न हीनागरिकों को स्वच्छ हवा दे पा रही है। तब न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए यह सख्त पाबंदियाँ लगाईं ताकि दिल्ली के लोग कम से कम सांस तो लेसकें। मनजिंदर सिरसा और पंकज सिंह ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय भाजपा सरकार का नहीं बल्कि अदालत का है, जो दिल्ली सरकार की लगातारविफलताओं के कारण सामने आया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सिर्फ राजनीति की है, काम नहीं किया — और अब जनता को उसकाखामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

बीजेपी सरकार का पुरानी गाड़ियों पर तुगलकी फरमान-आतिशी का तीखा प्रहार

दिल्ली में भाजपा सरकार द्वारा 10 से 15 वर्ष पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाने के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधायकआतिशी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस निर्णय को पूरी तरह अवैध, जनविरोधी और जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने वाला बतायाहै।आतिशी ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर चल रही लगभग 62 लाख गाड़ियाँ, जिनमें मोटर साइकिल, स्कूटर, कार, ऑटो रिक्शा और अन्य वाहनशामिल हैं, अब इस आदेश के बाद बाहर हो जाएँगे। यह न केवल एक आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करेगा, बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी को भीठप्प कर देगा। उन्होंने कहा, 40 लाख दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग दफ्तर कैसे जाएँगे? बुज़ुर्ग लोग जो अपने आवागमन के लिए सेकेंड हैंडगाड़ियाँ खरीदते हैं, उनका क्या होगा? क्या सरकार ने उनके बारे में सोचा? प्रदूषण पर सवाल आतिशी ने यह भी कहा कि गाड़ियों की उम्र का प्रदूषण से कोई सीधा संबंध नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि “यदि कोई वाहन ठीक से मेंटेन कियागया हो, तो वह प्रदूषण नहीं फैलाता। कई गाड़ियाँ कुछ ही वर्षों में 3 लाख किलोमीटर तक चल चुकी होती हैं, जबकि कई वाहन 15 वर्षों में केवल50 हजार किलोमीटर ही चले होते हैं। ऐसे में केवल उम्र के आधार पर गाड़ी को हटाना तर्कहीन है।नीति के पीछे छिपा व्यावसायिक लाभ – उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का यह आदेश केवल वाहन निर्माताओं को लाभ पहुँचाने के लिएहै। यदि 62 लाख गाड़ियाँ हटेंगी, तो नई गाड़ियों की माँग भी बढ़ेगी। इसका लाभ उन कंपनियों को होगा जिन्होंने भाजपा को चंदा दिया है, आतिशीने कहा। चुनावी चंदे पर सवाल उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह सामने लाकर बताए कि पिछले पाँच वर्षों में विभिन्न चुनावों के दौरान वाहन निर्माताओं से उसे कितना चंदा मिलाहै। आतिशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, भाजपा केवल अपने चंदा देने वालों की चिंता करती है, दिल्लीवासियों की नहीं। दिल्ली सरकार को शक्तिहीन करने का प्रयास आतिशी ने याद दिलाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली की चुनी हुई सरकार को प्रशासनिक अधिकार दिए थे, तब केंद्र सरकार ने केवल 9 दिनोंमें एक अध्यादेश लाकर उसे निष्प्रभावी कर दिया था। उन्होंने कहा, यदि भाजपा चाहती, तो वह इस आदेश को बदलने के लिए नया कानून ला सकतीथी। झुग्गीवासियों के साथ धोखा आतिशी ने भाजपा द्वारा चुनाव से पहले झुग्गीवासियों के बीच जाकर ‘प्रवास’ करने पर कटाक्ष करते हुए कहा, अब भाजपा उन्हीं झुग्गियों पर बुलडोज़रचला रही है। यह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल से काम की तलाश में आने वाले लोग अक्सर क्लस्टर कॉलोनियों में रहते हैं, और अबभाजपा उन्हें रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताकर निशाना बना रही है। आतिशी के इन बयानों से साफ है कि आम आदमी पार्टी इस आदेश का पूरी तरह विरोध कर रही है और इसे जनता के साथ धोखा मानती है। उन्होंनेयह भी स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में जनता भाजपा को उसका जवाब ज़रूर देगी,वह दिल्ली हो या बिहार।

भाजपा को तगड़ा झटका पार्षद सुमन टिंकू राजोरा ने छोड़ी बीजेपी, फिर से थामा ‘आप’ का हाथ 

दिल्ली की राजनीति में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला जब वार्ड नंबर 50 की पार्षद सुमन टिंकू राजोरा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अलविदा कहकर एक बार फिर आम आदमी पार्टी (आप) का दामन थाम लिया। पार्टी मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेशअध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सुमन राजोरा और उनके पति टिंकू राजोरा का गर्मजोशी से स्वागत किया औरपार्टी का पटका पहनाकर उन्हें ‘‘आप’’ परिवार में शामिल किया। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा, विपक्ष मेंरहकर भी आम आदमी पार्टी दिल्ली के गरीबों की आवाज बनकर खड़ी है। हम हर मोर्चे पर भाजपा सरकार पर नजर रखे हुए हैं, ताकि जनता के हितोंके साथ कोई खिलवाड़ न हो। उन्होंने राजोरा दंपत्ति का पार्टी में स्वागत करते हुए उन्हें जनसेवा के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। बीजेपी में जाना मेरी सबसे बड़ी गलती थी सुमन टिंकू राजोरा भावुक स्वर में अपनी वापसी की वजह बताते हुए सुमन टिंकू राजोरा ने कहा, मैं आम आदमी पार्टी के परिवार में वापस आकर बहुतखुश हूं। यह खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती। जब मैंने ‘आप’ छोड़ी थी, तब महसूस नहीं किया था कि मैं कितनी बड़ी गलती कर रही हूं। बीजेपीमें रहकर मैंने देखा कि कैसे गरीबों के साथ छलावा हो रहा है। भाजपा ने जहां झुग्गी, वहां मकान का वादा किया था, लेकिन बाद में झुग्गीवालों कोउजाड़ दिया गया। गरीबों को बेघर कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की नीतियां गरीबों को कुचलने वाली हैं। भाजपा गरीबों को मिटानाचाहती है। उसे अरविंद केजरीवाल से कुछ सीखना चाहिए जो जो कहते हैं, वही करते हैं। मेरा सपना है कि अरविंद केजरीवाल एक दिन देश केप्रधानमंत्री बनें। राजनीतिक संकेत और प्रभाव सुमन टिंकू राजोरा की वापसी को दिल्ली की नगर राजनीति में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एमसीडी में पार्षदों का समीकरण पहलेसे ही नाजुक बना हुआ है और ऐसे में एक अनुभवी पार्षद की वापसी ‘आप’ को नया संबल देगी। खास बात यह है कि सुमन राजोरा ने एमसीडीचेयरमैन चुनाव में भी भाजपा के विरुद्ध जाकर ‘आप’ के उम्मीदवार को समर्थन दिया था, जिससे उनके इरादे पहले ही स्पष्ट हो चुके थे। पार्षद सुमनटिंकू राजोरा की आम आदमी पार्टी में वापसी सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि एक विचारधारा की ओर लौटने जैसा है। उनकी भावनाएंइस बात की गवाही देती हैं कि राजनीति सिर्फ सत्ता की नहीं, सिद्धांतों और जनसेवा की भी होती है।

वैश्विक शक्ति संतुलन की धुरी बना भारत, अब पर्यवेक्षक नहीं दिशा-निर्धारक दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों का नेतृत्व करता भारत

दक्षिण एशिया अब वैश्विक शक्ति-संतुलन की धुरी बनता जा रहा है और इसमें भारत की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है. हाल ही में चीन केकिंगदाओ में संपन्न शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का साझा घोषणा पत्र जारी नहीं हो सका क्योंकि भारत ने उस पर हस्ताक्षर करने से इसलिएमना कर दिया कि उसमें पहलगाम हमले का जिक्र नहीं था. वैश्विक स्तर पर माना जा रहा है कि भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समुदाय के लिएएक निर्णायक संकेत है कि आतंकवाद पर कतई समझौता नहीं होगा. अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों व कूटनीतिज्ञों ने भारत के इस कदम को नए भारत कीविदेश नीति में उभरती कड़ाई व प्राथमिकता निर्धारण के रूप में देखा है. वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठविश्लेषक जेम्स क्लार्क ने कहा कि भारत अब बहुपक्षीय मंचों पर सिर्फ मौजूदगी जताने नहीं आता, बल्कि वह अपनी संप्रभु सुरक्षा चिंताओं कोमजबूती से उठाने की नीति पर चल रहा है. वाशिंगटन स्थित कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ विश्लेषक एश्ले जे. टेलिस के अनुसारभारत द. एशिया का अकेला ऐसा देश है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ स्थायित्व, विश्वास और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती से संभाल रहा है. भारत की है अहम भूमिकाअफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद जो रणनीतिक खालीपन पैदा हुआ, उसे भरने में भारत की भूमिका बेहद अहम रही है. ऑस्ट्रेलिया केरणनीतिक विश्लेषक रॉरी मेडकैफ बोले, भारत न सिर्फ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीनी प्रभाव संतुलित कर रहा है. बल्कि क्वॉड और हिंद-प्रशांत आर्थिकढांचे में भी अपनी भूमिका निर्णायक बना चुका है. लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस ) की रिपोर्ट कहती है किभारत अब उपभोक्ता अर्थव्यवस्था न रहकर रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष, एआई और साइबर रक्षा में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वह आर्थिकव सैन्य आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है. कनाडा की 2024-25 की राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट में पहली बार यह जिक्र हुआ कि वहां लंबे समय सेखालिस्तान समर्थक सक्रिय हैं. यह रिपोर्ट भारत की दीर्घकालिक आपत्तियों की पुष्टि करती है यानी कनाडा भी भारत की कूटनीति के सामने झुक गयाहै. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की स्थिति अब उस पड़ोसी राष्ट्र की नहीं रही जो क्षेत्रीय घटनाओं का केवल पर्यवेक्षक था. वह अब रणनीतिकनिर्णयों में भागीदार है भारत अब सिर्फ दर्शक की भूमिका में नहीं, दिशा-निर्धारक बन चुका है.

कांवड़ यात्रा में शुद्ध भोजन अनिवार्य “बिना लाइसेंस दुकानें होंगी बंद” ₹2 लाख तक जुर्माना प्रदेश सरकार ने दिए नए निर्देश

प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध व सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं. अब यात्रामार्गों में खाद्य दुकानों पर अनिवार्य रूप से दुकानदार का नाम, लाइसेंस व पहचान पत्र प्रदर्शित करना होगा. सरकार के निर्देशों का पालन न करने पर दोलाख तक जुर्माना लगाया जाएगा. स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश कुमार ने कांवड़ यात्रा के लिए देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ीव उत्तरकाशी जिलों में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने के लिए अभियान चलाने के साथ ही खाद्य कारोबारियों को सख्त निर्देश जारी किए. यात्रामार्गों पर हर खाद्य कारोबारी को अपने लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र को दुकान में प्रदर्शित करना होगा. प्रदर्शित करना होगा जरुरीछोटे व्यापारियों व ठेले-फड़ वालों को भी फोटो पहचान पत्र व पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदर्शित करना जरूरी होगा. निर्देशों का पालन न करने पर खाद्यसुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई कर दो लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा. स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त एफडीए ने कहा कांवड़ यात्रा के दौरानपंडालों, भंडारों के साथ दुकानों में परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवंऔषधि प्रशासन ताजबर सिंह जग्गी ने कहा, बिना लाइसेंस खाद्य व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. आईईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) माध्यमों से जनता और संचालकों को शुद्ध भोजन की पहचान, खाद्य नियमों और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक कियाजाएगा. इसके लिए बैनर, पोस्टर, पर्चे और सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है. गुणवत्ता को लेकर कर सकता है शिकायत दर्जसरकार की ओर से जारी टोल फ्री नंबर–18001804246 पर कोई भी व्यक्ति खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कर सकता है. शिकायत पर प्रशासनिक टीमें तुरंत मौके पर जाकर कार्रवाई करेंगी. उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं बिना नाम वलाइसेंस वाली दुकानें बंद की जाएंगी. निर्देशों का पालन न करने पर दो लाख तक जुर्माना लगाया जाएगा. स्वास्थ्य सचिव एवं एफडीए आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी जिलों में मिलावट रोकने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाया जारहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी भी रूप में खाद्य गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा. एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गीने कहा कि बिना लाइसेंस खाद्य व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.सरकार ने आमजन को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) अभियान शुरू किया है, जिसमें बैनर, पोस्टर, पर्चे और सोशल मीडिया का प्रयोग हो रहा है.

डिजिटल इंडिया पर खरगे के सवालों का सिंधिया का जवाब, कांग्रेस के साथ बफरिंग युग होगा खत्म

डिजिटल इंडिया मिशन पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवारकिया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का बफरिंग युग कांग्रेस के शासन के साथ समाप्त हो गया है. देश अब पीएम मोदी के नेतृत्व में 5जी मेंस्थानांतरित हो गया है खरगे ने केंद्र सरकार पर डिजिटल इंडिया मिशन के बारे में झूठे दावे और अधूरे वादे करने का आरोप लगाया था.केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे आपको ज्ञान देने का एक और अवसर देने के लिए धन्यवाद। जब भी आपने अतीत में हमसे सवालकिए हैं. हमने परिणामों के साथ जवाब दिया है। वर्षों तक जबकि आपकी पार्टी ने डायल-अप वादे किए.शीर्षक से किया एक ब्लॉग साझाहमने जमीनी स्तर पर और बड़े पैमाने पर एक विश्व स्तरीय दूरसंचार नेटवर्क, UPI, आधार और भारतनेट का निर्माण और वितरण किया. इससे पहलेडिजिटल इंडिया मिशन की दसवीं वर्षगांठ पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक लिंक्डइन हैंडल पर डिजिटल इंडिया का एक दशक शीर्षकसे एक ब्लॉग साझा किया. उन्होंने लिखा कि दस साल पहले, हमने एक ऐसे क्षेत्र में पूर्ण विश्वास के साथ ऐसी यात्रा शुरू की थी. जहां पहले कोईनहीं गया था जहां दशकों तक यह संदेह किया गया कि भारतीय तकनीक का उपयोग कर पाएंगे या नहीं हमने उस सोच को बदला और भारतीयों कीतकनीक उपयोग करने की क्षमता पर विश्वास किया. जहां दशकों तक सिर्फ यह सोचा गया कि तकनीक का उपयोग अमीर और गरीब के बीच कीखाई को और गहरा करेगा. तकनीक के माध्यम से किया खत्महमने उस मानसिकता को बदला और तकनीक के माध्यम से उस खाई को खत्म किया. डिजिटल इंडिया की नींव बना-एक ऐसा मिशन, जो सभी केलिए पहुंच को लोकतांत्रिक (आसान) बनाने, समावेशी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने और अवसरों को उपलब्ध कराने के लिए शुरू हुआ. वर्ष 2014 में, इंटरनेट की पहुंच सीमित थी, डिजिटल साक्षरता कम थी, और सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन पहुंच बेहद सीमित थी. कई लोगों को संदेह था किभारत जैसा विशाल और विविध देश वास्तव में डिजिटल बन सकता है या नहीं आज, इस प्रश्न का उत्तर डाटा और डैशबोर्ड में नहीं, बल्कि 140 करोड़भारतीयों के जीवन के माध्यम से दिया जा चुका है. शासन से लेकर शिक्षा, लेन-देन व निर्माण तक, डिजिटल इंडिया हर जगह है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगेने केंद्र सरकार पर डिजिटल इंडिया मिशन के बारे में झूठे दावे और अधूरे वादे करने का आरोप लगाया था. इसका केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नेजवाब दिया वहीं पीएम मोदी ने डिजिटल इंडिया मिशन के 10 साल पूरे होने पर एक ब्लॉग साझा किया.

पंचायत चुनाव 2025 कांग्रेस ने अकेले लड़ने के दिए संकेत, संगठनात्मक तैयारियां तेज “कांग्रेस गठबंधन से अलग दिखेगी राह”

कांग्रेस और सपा का गठबंधन आने वाले पंचायत के त्रिस्तरीय चुनावों में नहीं दिखेगा. कांग्रेस और सपा की राहें इसमें अलग-अलग हो सकती हैं. कांग्रेस ने इसको लेकर संकेत भी दे दिए हैं अगर सब कुछ पार्टी की सोच के मन मुताबिक हुआ तो कांग्रेस पंचायत चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी. ऐसे में वह न सिर्फ संगठनात्मक ढांचा दुरुस्त कर रही है. बल्कि जनहित के मुद्दों को लेकर निरंतर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है. अब पार्टी कीओर से सभी जिलों में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की तैयारी है. कांग्रेस ने 133 जिला व शहर अध्यक्षों की घोषणा कर दी है करीब 40 जिला व शहर की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है. कार्यकारिणी का होगा शपथ ग्रहणअन्य जिलों और शहर की जल्द ही कार्यकारिणी घोषित होने की उम्मीद है पार्टी की रणनीति है कि पंचायत चुनाव में माहौल बनाने के लिए जिला वशहर इकाई का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाए. तीन से सात जुलाई के बीच घोषित जिला व शहर कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोहहोगा. इसमें पार्टी के सांसद, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक सहति अन्य वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे. शपथ ग्रहण के बाद इन जिलों में विधानसभा क्षेत्र औरब्लॉक स्तरीय कमेटियां गठित की जाएंगी. फिर उनका भी शपथ ग्रहण होगा. प्रयास है कि 15 अगस्त तक सभी बूथ कमेटियों का गठन पूरा कर लियाजाए. आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी पंचायत चुनाव में दमदारी से उतरने की तैयारी तेज कर दी है. आगामी चुनाव के लिए दिशा निर्देशमंगलवार को इंदिरानगर स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार चित्तौड़ ने इसे लेकर बैठक की. साथ ही निर्देश दिए कि आगामी पंचायतचुनाव को देखते हुए जल्द से जल्द वार्ड स्तर तक संगठन को मजबूत करने का काम करें. प्रदेश के सभी मुख्य मंडल प्रभारी, मंडल प्रभारी और मंडलप्रभारी भाईचारा के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने आगामी चुनावों के लिए निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता अभियानचलाकर ज्यादा से ज्यादा प्रबुद्धजनों को पार्टी से जोड़ें। भाईचार कमेटियों का भी गठन करें. इसके साथ ही प्रयागराज जैसी घटना पर पदाधिकारियों वकार्यकर्ताओं को अनावश्यक बयानबाजी से बचने का भी सुझाव दिया. प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों में कांग्रेस अकेली लड़ते हुईदिख सकती है। इसके लिए पार्टी ने तैयारी भी शुरू कर दी है.

चुनाव चिन्ह विवाद सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई, 14 जुलाई तक टली हफ्ते की सफाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने आज शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई की. इस याचिका में महाराष्ट्र निकाय चुनाव को देखते हुए पार्टी चुनाव चिन्ह पर जल्दफैसला देने की मांग की गई. शिवसेना यूबीटी की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि अगर एक बार राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होगई तो फिर चुनाव चिन्ह में बदलाव नहीं हो सकेगा. पहले से ही यह मामला दो साल से लंबित है शिवसेना यूबीटी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की किविवाद को लेकर अंतरिम निर्देश दिए जाएं. अदालत ने दलीलें सुनने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी। अब अदालत 14 जुलाई 2025 को फिर से इसमामले पर सुनवाई करेगी. शिवसेना दो गुटों में गई बंटजून 2022 में अविभाजित शिवसेना टूटकर दो गुटों में बंट गई. जिनमें से एक गुट बना एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और दूसरा गुट बना उद्धवठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी. दोनों गुटों ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुष बाण पर दावा किया और मामला चुनाव आयोग के पास गया. चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पक्ष में फैसला दिया और उसे असली शिवसेना माना. जिसके बाद शिवसेना का चुनावचिन्ह धनुष बाण एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मिला. सुप्रीम कोर्ट से की अपीलइस फैसले के खिलाफ शिवसेना यूबीटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. बुधवार को सुनवाई के दौरान शिवसेना यूबीटी के वकील देवदत्त कामत नेजस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष दलीलें पेश कीं और पार्टी चिन्ह के मामले पर इस हफ्ते या अगले हफ्ते हीसुनवाई की मांग की. बुधवार को सुनवाई के दौरान शिवसेना यूबीटी के वकील देवदत्त कामत ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रनकी पीठ के समक्ष दलीलें पेश कीं और पार्टी चिन्ह के मामले पर इस हफ्ते या अगले हफ्ते ही सुनवाई की मांग की.यह मामला दो वर्षों से लंबित हैऔर फिलहाल अदालत ने सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तारीख 14 जुलाई 2025 तय की है. शिवसेना का यह विवाद जून 2022 से चला आरहा है जब पार्टी दो गुटों—एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे—में बंट गई थी. चुनाव आयोग ने धनुष-बाण चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे के पक्ष में तयकिया था जिसे शिवसेना यूबीटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

हिंदी थोपने के विरोध में शिवसेना यूबीटी का एलान’त्रिभाषा नीति मंजूर नहीं’ , संजय राउत ने राज्य सरकार पर बोला हमला

महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा से जुड़े सरकारी आदेश (जीआर) के वापस होने के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने बड़ा एलान किया है. उन्होंनेकहा कि हम भविष्य में भी ऐसी नीति को स्वीकार नहीं करेंगे. महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा शुरू करने को लेकर बढ़ते विरोध के बाद राज्य सरकार नेत्रिभाषा नीति के दो जीआर (सरकारी आदेश) वापस लेने का फैसला किया था. संजय राउत ने कहा कि फडणवीस को समितियां और एसआईटीगठित करने का शौक है लेकिन वह कुछ नहीं करते. त्रिभाषा समिति के अध्यक्ष बनाए गए जाधव एक अर्थशास्त्री के तौर पर सम्मानित हैं. अब नहीं है कोई प्रासंगिकतालेकिन इस समिति की अब कोई प्रासंगिकता नहीं है. हम भविष्य में भी तीन भाषा नीति को स्वीकार नहीं करेंगे. पांच जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसे के मराठी विजय दिवस समारोह मनाने को लेकर राउत ने कहा कि इस बारे में दोनों पक्षों के नेता विचार-विमर्श कर रहे हैं. हमने प्रमुख नेताओं और जनता को आमंत्रित किया है. सरकारी आदेश रद्द करने की सफलता मराठी लोगों की है हम केवल आयोजक हैं. यहां तक किमनसे प्रमुख राज ठाकरे और हमारे नेता उद्धव ठाकरे से भी सलाह ली गई है. व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित नहीं कर सकतेअब बहुत कम समय बचा है हम सभी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित नहीं कर सकते. सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा उन्होंनेआरोप लगाया कि सरकार ने धन, धमकी, ईडी, सीबीआई और चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर शिवसेना और एनसीपी का बंटवारा कर दिया. पहलगाम आतंकी हमले को लेकर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारत में आतंकवादी गतिविधियों में पाकिस्तान का हाथ होने का पता लगाने में विफलरही है. राउत ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में महाराष्ट्र में 1,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली. क्या प्रधानमंत्री को इसकीजानकारी है? सरकार अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर अपडेट जानकारी ठीक से साझा नहीं कर रही है। दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक कोलेकर राउत ने दावा किया कि आरएसएस और भाजपा भाई की तरह हैं. अगर आरएसएस चाहे तो वह भाजपा को सबक सिखा सकता है. आज भाजपाकी ताकत आरएसएस कार्यकर्ताओं के प्रयासों के कारण है.

बिग ब्यूटीफुल बिल पर ट्रंप और मस्क आमने-सामने, निर्वासन की धमकी के बाद बदले मस्क के सुर

बिग ब्यूटीफुल बिल को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अरबपति एलन मस्क के बीच विवाद में नया मोड़ आया है. ट्रंप की निर्वासन कीधमकी के बाद मस्क के सुर बदल गए हैं मस्क ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक संघर्षों को बेहतर तरीके से हल किया है. एलन मस्कने ट्रंप की निर्वासन वाली धमकी का भी जवाब दिया. एलन मस्क के बिग ब्यूटीफुल बिल की आलोचना करने पर ट्रंप ने कहा था कि वह मस्क कोनिर्वासित करने पर विचार कर सकते हैं. उनका प्रशासन टेस्ला प्रमुख की एजेंसी ‘DOGE’ या सरकारी दक्षता विभाग को उनके खिलाफ ही इस्तेमालकर सकता है. उन्होंने कहा कि हमें एलन पर DOGE लगाना पड़ सकता है. सोशल मीडिया पर किया साझाआप जानते हैं कि DOGE क्या है? DOGE वह राक्षस है, जो वापस जाकर एलन को ही खा सकता है. निर्वासन की धमकी के बाद एलन मस्क नेएक्स पर ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि इस्राइल ने गाजा में 60 दिनों के युद्ध विराम पर सहमति व्यक्त की है. उन्होंने वैश्विकसंघर्षों को हल करने के लिए ट्रंप को श्रेय दिया उन्होंने लिखा कि जहां श्रेय देना चाहिए, वहां श्रेय दिया जाना चाहिए. इससे पहले निर्वासन की धमकीका जवाब देते हुए मस्क ने कहा था कि इस मामले को आगे बढ़ाना बहुत लुभावना है. बहुत ही ज्यादा दिलचस्प है हालांकि मैं अभी इससे दूर रहूंगा. मस्क ट्रंप के ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ की आलोचना कर रहे हैं. क्योंकि इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाले फायदे कम हो जाएंगे. मदद कम कर दीजाएगी और समर्थन देने के उपाय भी हटा दिए जाएंगे. मस्क की तकरारउन्होंने बिल के पक्ष में मतदान करने वाले सांसदों को चुनावी चुनौतियों के लिए आगाह भी किया है. ट्रंप और मस्क की यह तकरार इसलिए भी चौंकानेवाली है. क्योंकि मस्क ने 2024 के चुनाव में ट्रंप का पूरी ताकत के साथ समर्थन किया था. मस्क रिपब्लिकन के लिए सबसे बड़े दानकर्ता थे उन्होंनेट्रंप के साथ चुनावी रैलियों में मंच भी साझा किया था और ट्रंप के लिए समर्थन जुटाया था। ट्रंप की जीत के बाद भी हर वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति केसाथ नजर आते थे. ओवल ऑफिस में भी अक्सर मस्क और ट्रंप साथ दिखाई देते थे. हालांकि फिर मस्क ने DOGE से इस्तीफा दे दिया और फिरबात बिगड़ती चली गई। इसकी वजह भी बिग ब्यूटीफुल बिल को ही बताया गया. नौबत यहां तक आ गई थी कि मस्क ने ‘अमेरिका पार्टी’ नामक एकनई राजनीतिक पार्टी के गठन का आह्वान कर दिया था.