नई दिल्ली: दुष्यंत गौतम, राज कुमार गौतम, अधिवक्ता प्रियंका गौतम, रिंकु कुमारी, खुशी राम चुनार, दीपक बल्मीकी, दीप्ती इंदोरा और कमलबागड़ी ने मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर के नेतृत्व में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की चुप्पी की निंदा की।इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा पर हुए हमले को लेकर पंजाब के अमृतसर में हुई घटना पर अरविंद केजरीवालऔर भगवंत मान की खामोशी को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
1. अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की चुप्पी पर सवाल
सभी नेताओं ने अमृतसर में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा पर हुए हमले पर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की चुप्पी की कड़ीआलोचना की। नेताओं का कहना था कि इस चुप्पी से यह साबित होता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल का दलितों के प्रतिरवैया एक सच्चाई है। यह चुप्पी दिखाती है कि उनका दलितों के मुद्दों पर कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं है।
2. राजीव सभा में दलितों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं
दुष्यंत गौतम और अन्य नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने राजीव सभा में एक भी दलित को प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। यहआरोप बीजेपी के दलित नेताओं द्वारा लगाया गया था, जिन्होंने कहा कि केजरीवाल का दलितों के लिए कोई स्थान नहीं है।
3. बीजेपी का दलितों के लिए अतिरिक्त प्रतिनिधित्व
प्रेस कांफ्रेंस में नेताओं ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) दलितों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करती है। उदाहरण के तौर पर, BJP ने बल्लिमारान और मटिया महल जैसी सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को स्थान दिया है।
4. AAP के दलित उम्मीदवारों को चुनौती
बीजेपी के दलित उम्मीदवारों ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 12 दलित उम्मीदवारों से सवाल किया कि वे बाबा साहेब की प्रतिमा पर हमले पर चुपक्यों हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर आज वे इस मुद्दे पर चुप हैं, तो भविष्य में अरविंद केजरीवाल भी सामान्य दलितों के मुद्दों पर खामोश रह सकतेहैं।
5. दलित नेता संतोष कोली के लिए न्याय की मांग
बीजेपी के दलित उम्मीदवारों ने पार्टी के पहले दलित नेता संतोष कोली की हत्या को लेकर न्याय की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमीपार्टी ने उनके लिए कोई आवाज़ नहीं उठाई और उनकी मौत पर चुप्पी साधी।
यह प्रेस कांफ्रेंस इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि दलित समुदाय के प्रतिनिधि अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के प्रति गहरी नाराजगीऔर असंतोष महसूस कर रहे हैं, खासकर दलितों के अधिकारों और सम्मान के मुद्दे पर।