दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाली नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की। अब यह रिपोर्ट आगे की जांच के लिए पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) को भेजी जाएगी, जो इसपर विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।
PAC करेगी रिपोर्ट की समीक्षा
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि इस रिपोर्ट की जांच के लिए 12 सदस्यों वाली पीएसी का गठन किया जाएगा। इस समिति मेंसत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों दलों के सदस्य शामिल होंगे।
सीएजी रिपोर्ट में हुए खुलासों के आधार पर पीएसी कथित शराब घोटाले की विस्तृत जांच करेगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करविधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी, जिसमें दोषियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की सिफारिशें शामिल होंगी।
क्या होगी संभावित कार्रवाई?
रिपोर्ट के आधार पर सदन यह निर्णय लेगा कि कथित अनियमितताओं के कारण हुए राजस्व नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदमउठाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आबकारी नीति के निर्माण और उसके कार्यान्वयन में शामिल अधिकारियों, पूर्व मंत्रियों, और निजी व्यक्तियों कोसमन भेजा जा सकता है। संभावित रूप से इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आबकारी नीति तैयार करने वाले मंत्रियों के समूह (GoM) केपूर्व सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।
PAC क्या है?
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) एक संसदीय समिति होती है, जिसका गठन सरकार के राजस्व और व्यय की जांच के लिए किया जाता है। यहसमिति केंद्र और राज्य सरकारों के खर्चों का ऑडिट करती है ताकि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। राज्यों की विधानसभाओं में भी इसीप्रक्रिया के तहत पीएसी गठित की जाती है, जिसमें सत्तारूढ़ दल और विपक्षी पार्टियों के विधायक सदस्य होते है
CAG रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
सीएजी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में दी गई विभिन्न छूटों के चलते नियमों का उल्लंघन हुआ, जिससेसरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पीएसी इस रिपोर्ट की जांच कर यह तय करेगी कि इस कथित घोटाले में किन-किन व्यक्तियों कीभूमिका रही और क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।