ट्रंप ने बताया भारत-पाक संघर्षविराम का सूत्रधार, कांग्रेस ने मोदी से मांगा जवाब ‘जानें क्या है पूरा मामला”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारतीय समानों पर 50 % टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए है. ऐसे मेंजब चर्चा का बाजार गर्म हुआ तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दूसरे को गर्मजोशी भरे संदेश भी दिए. इसके बादअब इस मामले में कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है कांग्रेस ने तंज कसते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत और अमेरिका वाकईइतने पक्के दोस्त हैं कि ट्रंप ने 35 से ज्यादा बार खुद को भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का सूत्रधार बताया है? बता दें कि मामले में बढ़तेविवाद के बीच ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं जारी हैं औरउन्हें विश्वास है कि दोनों देश जल्द ही एक सफल समझौते पर पहुंचेंगे. भारत और अमेरिका है निचुरल पार्टनरउन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपने अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी से बात करने को लेकर उत्साहित हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने बुधवारको एक्स पर लिखा कि भारत और अमेरिका अच्छे दोस्त हैं और नेचुरल पार्टनर हैं हमें विश्वास है कि चल रही व्यापारिक बातचीत दोनों देशों की असीमसंभावनाओं के द्वार खोलेगी. ऐसे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप से कहा कि भारत औरअमेरिका ‘नेचुरल पार्टनर’ हैं. संघर्षविराम का बताया सूत्रधारसवाल ये है कि क्या इतने ‘नेचुरल’ कि ट्रंप ने 35 बार ये दावा किया कि उन्होंने 10 मई की शाम को भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया औरइसमें ट्रेड को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया? अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद रिश्तों में आई तल्खी के बीचपीएम मोदी और ट्रंप के बीच गर्मजोशी भरे संदेशों का आदान-प्रदान हुआ. इस पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत-अमेरिकाइतने पक्के दोस्त हैं कि ट्रंप ने 35 बार खुद को भारत-पाक संघर्षविराम का सूत्रधार बताया है?
मिल्कीपुर की पीड़िता की गुहार, DM-SSP और विधायक से फूट-फूट कर मांगा न्याय “प्रशासन बना मौन दर्शक”

कर्नाटक के मांड्या में भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान हुई हिंसा को लेकर सियासी रार मच गई है. मामले को लेकर कर्नाटक सरकारऔर भाजपा के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हो रही है भाजपा ने हिंसा के लिए कर्नाटक सरकार को जिम्मेदार ठहराया है वहीं कर्नाटक सरकार ने भाजपा परविभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है.भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि एक शांतिपूर्ण गणेश विसर्जन जुलूस पर कुछ उपद्रवियों ने हमला किया और पथराव किया. राज्यसरकार और पुलिस विभाग पूरी तरह से विफल रहे हैं हिंसा भड़काने वाले राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने हिंदूकार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. लोगों को भड़काने के आलावा नहीं और कोई कामउन्होंने आरोप लगाया कि जुलूस के दौरान महिलाओं को निशाना बनाया गया, लेकिन एक भी महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी. इससे साफजाहिर होता है कि पुलिस विभाग पूरी तरह से तैयार नहीं था इसमें खुफिया तंत्र की भी विफलता थी. प्रदेश अध्यक्ष ने तनाव बढ़ाने के लिए कांग्रेस नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दावा किया कि जिला प्रभारी मंत्री और एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेसविधायक के बयान से कर्नाटक में और अधिक अशांति पैदा हो गई है. हम स्थिति का आकलन करने और पार्टी की अगली कार्रवाई पर निर्णय लेने केलिए बुधवार को मद्दुर का दौरा करेंगे. कांग्रेस गंदी राजनीति और फूट डालो और राज करो में विश्वास रखती है. उनकी अल्पसंख्यक तुष्टिकरण कीराजनीति के कारण पूरे कर्नाटक में काफी अशांति है.कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान पथराव की घटना को लेकर भाजपा पर राजनीति करने और लोगों कोबांटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा के पास राजनीति करने, लोगों को बांटने और आग भड़काने के अलावा कोई काम नहीं है. नहीं देना चाहते कोई प्रतिक्रियाउनके पास करने के लिए और कुछ नहीं है उन्हें दिल्ली जाकर राज्य के लिए केंद्र से धन प्राप्त करने दीजिए उन्हें राज्य नरेगा निधि, कर हिस्सेदारी प्राप्तकरने दीजिए. उन्हें मेकेदातु और महादयी (नदी) परियोजनाओं के लिए अनुमति प्राप्त करने दीजिए। उन्हें पहले यह काम करने दीजिए. डिप्टी सीएमशिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, गृह मंत्री जी परमेश्वर और जिला प्रभारी मंत्री एन चेलुवरायस्वामी हिंसा को लेकर प्रतिक्रिया दी है मैं शहरमें नहीं था और मुझे घटना की पूरी जानकारी नहीं है मैंने मीडिया रिपोर्ट देखी हैं। जानकारी मिलने पर ही मैं कुछ कहूंगा बिना उचित जानकारी के मैंकोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता.कर्नाटक के मांड्या में भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान सांप्रदायिक झड़पों के बाद मांड्या जिले के मद्दुर कस्बे में तनाव फैल गया. दूसरेसमुदाय के उपद्रवियों की ओर से कथित तौर पर पथराव किए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इससे इलाके में व्यापक अशांति फैल गई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह झड़प तब शुरू हुई, जब लोग राम रहीम नगर में गणेश विसर्जन जुलूस में हिस्सा ले रहे थे दोनों समुदायों के युवकों केबीच झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा. मांड्या के पुलिस अधीक्षक मल्लिकार्जुन बालादंडी ने कहा कि दो प्राथमिकी दर्ज कीगई हैं। एक प्राथमिकी अपने आप दर्ज की गई है और दूसरी एक घायल व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है 21 लोगों को हिरासत में लिया गयाहै और आगे और गिरफ्तारियां होंगी.
लोकतंत्र की सुरक्षा में सवाल,चुनाव आयोग और बिहार मतदाता सूची प्रकरण- अभिषेक मनु सिंघवी

बिहार में अचानक शुरू हुई प्रक्रियाबिहार में जून के अंत में मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया अचानक शुरू की गई। चुनाव तक सिर्फ चार महीने बचे थे। 2003 में ऐसी प्रक्रिया चुनाव सेएक-दो साल पहले की जाती थी। तब महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में इसे स्थगित कर दिया गया था। सवाल उठता है कि अब ऐसा क्यों नहीं कियागया और आयोग ने इसका जवाब नहीं दिया। आधार कार्ड को क्यों रखा बाहरचुनाव आयोग ने दस्तावेजों की लंबी सूची बनाई, लेकिन इसमें आधार कार्ड शामिल नहीं था। आजकल हर सरकारी काम में आधार जरूरी है। ऐसे मेंमतदाता सूची सुधार में आधार को बाहर रखना समझ से बाहर है। लाखों मतदाता सूची से हटाए गएबिहार में लगभग 65 लाख मतदाता सूची से हटाए गए। इसके पीछे चुनाव आयोग ने कोई कारण नहीं बताया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भीकुछ अधिकारियों ने जब आधार कार्ड स्वीकार किया, तो उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया। पवन खेड़ा का मामला2 सितंबर को दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिस ने पवन खेड़ा और उनकी पत्नी को नोटिस भेजा। इसमें उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक कर दीगई और भाषा दोषी ठहराने जैसी थी 2017 में पवन खेड़ा ने अपने नाम को नए पते पर स्थानांतरित कराया था। चुनाव आयोग ने उस समय उनका नामनई सूची में डाल दिया था। अब आठ साल बाद यह आरोप लगाया गया कि उनका नाम दो जगह दर्ज है। आयोग की निष्पक्षता पर सवालपवन खेड़ा लगातार सवाल पूछते रहे कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाता क्यों सूची से हटाए गए और आधार कार्ड क्यों शामिल नहीं किया गया। ऐसालगता है कि आयोग ने पुराने मामले को उठाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की। संवैधानिक संस्था का ऐसा रवैया लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। मतदाता का विश्वास ही लोकतंत्र की नींवलोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब मतदाता का विश्वास मजबूत हो। मतदाता सूची में जल्दबाजी और त्रुटि इसे कमजोर कर देती है। चुनाव आयोग काकाम लोगों को जोड़ना है, हटाना नहीं। यदि आयोग समय पर जांच करता, तो आठ साल बाद नोटिस भेजने जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।
अंकुश नारंग बोले – पंजाब ने देश के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियाँ दीं, अब हमारी बारी है सेवा करने की

पंजाब में आई भयंकर बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी कठिन बना दी है। लोग अपने घर, सामान और रोज़मर्रा की ज़रूरतें खो बैठे हैं। कई जगहों परपानी भर गया है और लोग सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को मजबूर हैं। ऐसे समय में आम आदमी पार्टी के दिल्ली के पार्षद भी मदद के लिए आगेआए हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग के नेतृत्व में सभी आप पार्षदों ने मिलकर राहत सामग्री इकट्ठा की है। यह सामग्री खास तौर पर पंजाबकी ज़रूरतों को ध्यान में रखकर जुटाई गई है। इसमें मच्छरदानी, मच्छर भगाने की क्रीम, फॉगिंग मशीन और बच्चों-बड़ों के लिए चप्पलें शामिल हैं।यह सारा सामान ट्रक के ज़रिए पंजाब भेजा जा रहा है ताकि बाढ़ से जूझ रहे परिवारों को तुरंत राहत मिले। पंजाब की सेवा करना हमारा कर्तव्यप्रेस वार्ता में अंकुश नारंग ने कहा कि पंजाब ने हमेशा देश के लिए सबसे ज्यादा बलिदान दिए हैं। चाहे सरहद की रक्षा हो या देश को संकट सेनिकालना, पंजाबियों ने हमेशा आगे बढ़कर योगदान दिया है उन्होंने कहा आज जब पंजाब पर मुसीबत आई है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकीसेवा करें। पंजाब ने हमें बहुत कुछ दिया है और अब समय है कि हम उनके साथ खड़े हों। आप पार्षदों की एकजुटताइस राहत सामग्री को इकट्ठा करने में सभी आप पार्षदों ने सहयोग किया। इस मौके पर रोहिणी से पार्षद ममता गुप्ता के पति दीपक गुप्ता, सदर बाजारसे पार्षद और सिटी एसपी जोन की उपाध्यक्ष पूजा, और सदर बाजार विधानसभा की अध्यक्ष पूजा मान सिंह भी मौजूद रहीं। अंकुश नारंग ने कहा किसभी आप पार्षद एक परिवार की तरह मिलकर पंजाब के लोगों की मदद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह सेवा केवल पंजाब की नहीं, बल्किपूरे देश की सेवा है। पंजाब आत्मनिर्भर है, लेकिन आज मदद की जरूरत हैअंकुश नारंग ने कहा कि पंजाब देश का सबसे आत्मनिर्भर राज्य है। वहां के लोग मेहनती और स्वाभिमानी हैं। लेकिन इस बार की बाढ़ ने वहां कीस्थिति को बहुत खराब कर दिया है। खेत, घर और बाज़ार सब डूब गए हैं। लोग बुनियादी चीज़ों के लिए परेशान हो रहे हैं।उन्होंने कहा हम वही चीजेंभेज रहे हैं जो पंजाब से मांगी गई थीं। मच्छरदानी, मच्छर भगाने की क्रीम, फॉगिंग मशीन और चप्पलें वहां की ज़रूरत हैं। हमारी कोशिश है कि येसामान बाढ़ पीड़ितों तक जल्दी पहुँच जाए और उन्हें थोड़ी राहत मिले। भाजपा और मेयर पर लापरवाही का आरोपअंकुश नारंग ने एक बड़ा आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रस्ताव रखा था कि सभी निगम पार्षदों का एक महीने का भत्ता औरएमसीडी कर्मचारियों की एक दिन की तनख्वाह पंजाब के राहत कोष में दी जाए। लेकिन उनके अनुसार, मेयर और भाजपा ने इस पर कोई रुचि नहींदिखाई। नारंग ने कहा देश का प्रधानमंत्री भाजपा का है, पंजाब भी देश का हिस्सा है, फिर भी भाजपा इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। पंजाब ने देशके लिए शहादत दी है, इसलिए भाजपा को आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए। केजरीवाल और भगवंत मान की सक्रियताअंकुश नारंग ने यह भी बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले ही राहत कार्यों में जुटेहुए हैं। दोनों नेताओं ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है और पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया है कि कोई भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।उन्होंने कहा कि इसी भावना से दिल्ली के आप पार्षदों ने भी योगदान देने का निर्णय लिया है। वाहेगुरु से प्रार्थनाअंत में अंकुश नारंग ने भावुक होते हुए कहा मैं वाहेगुरु से प्रार्थना करता हूँ कि पंजाब के लोग जल्दी इस आपदा से बाहर निकलें। हमारी पूरी पार्टी औरपार्षद सेवा के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। भविष्य में जहां भी जरूरत होगी, हम पंजाब और पंजाबियों की मदद करेंगे। इस तरह, राहत सामग्री भेजकरऔर जनता से सहयोग की अपील कर अंकुश नारंग ने यह संदेश दिया कि पंजाब अकेला नहीं है। पूरी आम आदमी पार्टी और उसके पार्षद पंजाब केसाथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
बिहार में लाखों नाम काटे गए, लोग सरकारी योजनाओं से भी वंचित-राजेश राम

बिहार में मतदाता सूची से 65 लाख से ज्यादा नाम गायबबिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से 65 लाख 64 हज़ार लोगों के नाम हटा दिए।उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नाम काटे जाना सिर्फ एक गलती नहीं हो सकती। यह साफ़ दिखाता है कि जानबूझकर जनता का मताधिकारछीना गया। वोट का अधिकार छीना तो योजनाओं से भी वंचित हुए लोगराजेश राम ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने का असर सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं रहा। जिनका नाम सूची से गायब हुआ, वे अब सरकारीयोजनाओं के लाभ से भी वंचित हो गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति, और कई अन्य योजनाओं के लिए मतदातासूची में नाम होना ज़रूरी है। जब नाम ही सूची से हटा दिया गया, तो गरीब और जरूरतमंद लोग इन सुविधाओं से वंचित हो गए।राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और जनता का समर्थनराजेश राम ने कहा कि राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को बिहार की जनता ने बहुत बड़ा समर्थन दिया। इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी नेजनता को दिखाया कि कैसे उनके वोट चुराए जा रहे हैं। हजारों लोग यह देखकर हैरान रह गए कि उनके नाम मतदाता सूची से गायब हैं। यही कारणथा कि इस यात्रा के दौरान हर वर्ग – किसान, मजदूर, छात्र और महिलाएं – बड़ी संख्या में जुड़े और इस मुद्दे को गंभीरता से समझा। वोट चोरी का असली मतलब क्या हैराजेश राम ने कहा कि वोट चोरी का मतलब सिर्फ वोट का गायब होना नहीं है। उन्होंने बताया कि इसका असली मतलब है अधिकार कीचोरी,आरक्षण की चोरी, रोजगार की चोरी, शिक्षा की चोरी, लोकतंत्र की चोरी और सबसे ज़्यादा, युवाओं के भविष्य की चोरी उन्होंने कहा कि अगरवोट ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो जनता अपने अधिकारों के लिए लड़ भी नहीं पाएगी। यही कारण है कि वोट चोरी सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अपराध है। कांग्रेस की पुरानी मांग और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसलाराजेश राम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से मांग कर रही थी कि आधार कार्ड को पहचान का वैध दस्तावेज माना जाए क्योंकि बिहार जैसे राज्यों मेंगरीब और मेहनतकश वर्ग के पास अक्सर सिर्फ आधार कार्ड ही होता है। बाकी कागज़ात जुटाना उनके लिए मुश्किल है। अब सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेसकी इस मांग को सही ठहराते हुए आदेश दिया है कि आधार कार्ड को भी मतदाता सूची से नाम जोड़ने के लिए मान्यता दी जाए। उन्होंने कहा कि यहफैसला जनता के हक़ में है और इसे राहुल गांधी की लगातार लड़ाई और जनता के संघर्ष की जीत माना जाना चाहिए। जनता के अधिकारों की वापसीराजेश राम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश जनता को फिर से उनका हक़ दिलाएगा। जिन लोगों का नाम सूची से गायब हो गया था, उन्हें अबदोबारा अपना नाम जुड़वाने का अधिकार मिलेगा।उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं बल्कि जनता के अधिकारों की वापसी है। इससे गरीब, दलित, किसान और आम लोग फिरसे लोकतंत्र की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता की बड़ी जीत, भाजपा-चुनाव आयोग की मिलीभगत से हुई वोट चोरी-कृष्णा अल्लावरु

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जनता की जीतबिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का स्वागत किया है। इस आदेश में कहा गया है कि अब एसआईआर प्रक्रिया(स्पेशल समरी रिविजन) में आधार कार्ड को पहचान के दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाएगी अल्लावरु ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कियह सिर्फ एक कागज़ी बदलाव नहीं है, बल्कि जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि अब लाखोंऐसे लोग जिन्हें पहचान के अभाव में मतदाता सूची से बाहर किया गया था, उन्हें न्याय मिलेगा। भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोपअल्लावरु ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ने मिलकर वोट चोरी की सोची-समझी साजिश रची।उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए सबसे पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रियामें बदलाव किया। उन्होंने कहा कि पहले चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस भी होते थे, लेकिन अब गृहमंत्री को शामिल कर दिया गया, जिससे पूरा तंत्र सरकार के नियंत्रण में आ गया। इसके बाद चुनाव आयोग को किसी भी तरह की जांच और कार्रवाई से बचाने का रास्ता बनाया गया। मतदाता सूची से लाखों नाम गायबकांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची से लाखों नाम जानबूझकर हटाए गए। यह सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि सुनियोजित योजनाथी। उन्होंने कहा कि वोट डालने का अधिकार हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से यहअधिकार छीन लिया गया। मतदान के दिन धांधली और संदिग्ध बढ़तकृष्णा अल्लावरु ने कहा कि मतदान वाले दिन भी संदिग्ध घटनाएं होती हैं। शाम पाँच बजे के बाद अचानक वोटिंग प्रतिशत तेज़ी से बढ़ जाता है, जबकि दिनभर यह बेहद कम रहता है। उन्होंने वाराणसी लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कई राउंड तकआगे थे। अचानक लाइव अपडेट बंद कर दिया गया और कुछ घंटों बाद नतीजे बदलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विजेता घोषित कर दिया गया।अल्लावरु ने इसे सीधा-सीधा मैच फिक्सिंग बताया। उनका कहना था कि जैसे क्रिकेट में अंपायर पहले से खरीदे जाते हैं, उसी तरह यहाँ भी चुनावआयोग अंपायर की भूमिका में फिक्स कर दिया गया। वोट चोरी से बनी सरकार जनता की समस्याओं से बेखबरअल्लावरु ने आगे कहा कि वोट चोरी करके सत्ता में आई सरकार जनता की असल समस्याओं से पूरी तरह बेखबर रहती है। उन्होंने कहा कि बेरोज़गारी, महंगाई और अपराध जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना था कि जब सत्ता का आधार हीधांधली और फरेब हो तो ऐसी सरकार जनता की परेशानियों को कभी गंभीरता से नहीं ले सकती। हर समस्या की जड़ है वोट चोरीकृष्णा अल्लावरु ने जोर देकर कहा कि देश की हर समस्या चाहे वह युवाओं की बेरोज़गारी हो, किसानों की बदहाली हो, महंगाई हो या कानून-व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति सबका मूल कारण वोट चोरी है। उन्होंने कहा कि जनता को अब इस सच्चाई को समझना होगा कि अगर उनका वोटसुरक्षित नहीं है, तो उनका भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता। जनता से अपीलअंत में अल्लावरु ने जनता से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अब इस साजिश को पहचानना होगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आना होगा।सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह साबित कर दिया है कि जनता की आवाज़ और संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता।
10 साल की देरी के बाद बारापुला फेज-3 को मिली हरी झंडी, अब दिल्ली को मिलेगा सिग्नल फ्री कॉरिडोर

एक दशक से अटका बारापुला फेज-तीन कॉरिडोर का काम आखिरकार अब पूरा होगा केंद्रीय सशक्त समिति (सीइसी) ने परियोजना के लिए पेड़ों कोकाटने और प्रत्यारोपण की मंजूरी दे दी है इसके बाद 333 पेड़ों में से 85 पेड़े काटे जाएंगे और बाकी का प्रत्यारोपण होगा लोक निर्माण विभाग(पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने घोषणा की कि अगले एक साल में यह कॉरिडोर पूरा कर जनता के लिए खोल दिया जाएगा. इससे पूर्वीदिल्ली के मयूर विहार फेज-एक से दक्षिणी दिल्ली के आईएनए तक का सफर सिग्नल फ्री हो जाएगा. बारापुला कॉरिडोर के फेज-1 और फेज-2 पहले ही पूरे हो चुके हैं। तीसरे चरण में सराय काले खां को मयूर विहार फेज-1 से जोड़ने की योजना 2014 में मंजूर हुई थी और अप्रैल 2015 मेंनिर्माण कार्य शुरू हुआ पर्यावरण संबंधी अड़चनों और पेड़ों की कटाई-स्थानांतरण के लिए अनुमति न मिलने से यह परियोजना लगभग दस साल से ठपपड़ा था अब सीईसी की मंजूरी के बाद इस पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा परियोजना की लागत भी समय के साथ बढ़ी है. 111 को रखा जाएगा सुरक्षितशुरुआती अनुमान 964 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 1330 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है,करीब 3.5 किलोमीटर लंबे इसएलिवेटेड कॉरिडोर को पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ डिजाइन किया गया है यमुना के सक्रिय प्रवाह क्षेत्र में कम से कम पिलर लगाने के लिए पियर-सपोर्टेड संरचना और एक्स्ट्राडोब्रिज तकनीक का इस्तेमाल किया गया है कॉरिडोर में दोनों ओर तीन-तीन लेन होंगी साथ ही आठ लूप बनाए जा रहे हैं, जिनमें चार सराय काले खां और चार मयूर विहार पर होंगे. इसके अलावा पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए अलग ट्रैक और फुटपाथ बनाएजाएंगे.सीईसी के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी और वन विभाग ने संयुक्त सर्वे कर पेड़ों का मूल्यांकन किया इसमें पेड़ों की संख्या, प्रजाति और स्थान का ब्योरा लियागया. रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल फॉरेस्ट डिवीजन में कुल 155 पेड़ हैं। इनमें से 10 पेड़ों को काटना होगा, 34 का प्रत्यारोपण किया जाएगा और 111 को सुरक्षित रखा जाएगा. बाढ़ सुरक्षा भी करेगा सुनिश्चितवहीं साउथ फॉरेस्ट डिवीजन में कुल 178 पेड़ हैं। इनमें से 75 को काटना पड़ेगा, 53 का प्रत्यारोपण होगा और 50 को बचाया जाएगा. कुल 333 पेड़ों में से 85 काटे जाएंगे, 87 का प्रत्यारोपण होगा और 161 को संरक्षित रखा जाएगा कई पेड़ों को सिर्फ हल्की छंटाई या ट्रिमिंग की जरूरत होगी. यह कॉरिडोर एनएच-24, डीएनडी फ्लाई-वे और रिंग रोड पर यातायात का दबाव घटाने में अहम भूमिका निभाएगा. साथ ही यह बहु-मॉडल ट्रांजिट हबजिसमें एनसीआरटीसी, रेलवे, आईएसबीटी, मेट्रो और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल है तक सीधी और सुगम पहुंच सुनिश्चित करेगा. अनुमान है किइसके शुरू होने के बाद दिल्ली में प्रतिदिन करीब 2 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 30 हजार पेड़ों के बराबर है.पेड़ों को बचाने के लिए डिजाइन में बदलाव किए गए, पिलर की स्थिति बदली गई और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अपनाई गई. सीईसी और वन विभागका आभार व्यक्त करता हूं अगले एक साल में यह कॉरिडोर तैयार कर दिया जाएगा। यह दिल्लीवासियों को जाम से राहत देने के साथ यमुना के बाढ़क्षेत्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा.
धनखड़ के इस्तीफे के बाद पहली बार उपराष्ट्रपति चुनाव, कांग्रेस ने कसा तंज “कांग्रेस ने कसा तंज”

मंगलवार को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की चुप्पी पर सवालउठाए. कांग्रेस ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति ने बीते 50 दिनों से असामान्य चुप्पी साधी हुई है और देश उनके बोलने का इंतजार कर रहा है। बीती जुलाईमें जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद ही आज फिर से उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. मंगलवार को हो रहे उपराष्ट्रपति चुनाव मेंएनडीए के सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्ष के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बढ़तहासिल है. असामान्य चुप्पी साध रखीकांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में धनखड़ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लिखा, ‘पिछले 50 दिनों सेधनखड़ ने असामान्य चुप्पी साध रखी है आज जब उनके उत्तराधिकारी के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है तो देश उनके अभूतपूर्व और अप्रत्याशितइस्तीफे के बाद उनके बयान का इंतजार कर रहा है. मोदी सरकार द्वारा किसानों की घोर उपेक्षा और सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार से पैदा खतरों आदिपर अपनी चिंता व्यक्त करने के बाद धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था. उपराष्ट्रपति पद से दे दिया था इस्तीफाकांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी जगदीप धनखड़ की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, ‘उपराष्ट्रपति चुनाव क्यों हो रहे हैं? पूर्व उपराष्ट्रपतिजगदीप धनखड़ कहां हैं? एनडीए को चुनावों में अपना बहुमत साबित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि भारतीय गठबंधन के उपराष्ट्रपतिपद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी बहुत मजबूत हैं मुझे उम्मीद है कि नतीजे हमारे पक्ष में होंगे. जयराम रमेश ने लिखा कि ‘मोदी सरकार द्वारा किसानोंकी घोर उपेक्षा और सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार से पैदा खतरों आदि पर अपनी चिंता व्यक्त करने के बाद धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देदिया था.
प्रधानमंत्री मोदी का हिमाचल दौरा आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण, केंद्र से राहत पैकेज की उम्मीद

प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश का दर्द बांटने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षणकरने के साथ ही पीएम कांगड़ा में सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. पीएम मोदी के इस दौरे से प्रदेश को केंद्र से राहतपैकेज मिलने की उम्मीद बंधी है प्रधानमंत्री के दौरे पर पूरे हिमाचल की निगाहें हैं. कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी विशेष विमान से दोपहर 1:20 बजे गगल एयरपोर्ट पहुंचेंगे करीब डेढ़ बजे एयरपोर्ट पर ही प्रधानमंत्री सीएम सुक्खू समेत अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और राज्य में हुए नुकसानकी समीक्षा करेंगे. दोपहर 2:15 बजे तक मीटिंग चलेगी उसके बाद पीएम आपदा प्रभावित चंबा, मंडी और कुल्लू का हवाई निरीक्षण करेंगे. बतायाजा रहा है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक में 20 के करीब लोगों को शामिल होने की अनुमति रहेगी. वास्तविक स्थित का लगेगा पतापीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. पुलिस के करीब 400 जवान सुरक्षा के लिए जगह-जगह तैनात रहेंगे. ड्रोन से भी पूरे इलाके परनजर रखी जाएगी. पीएम के दौरे के मद्देनजर दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक कांगड़ा जिला नो फ्लाई जोन रहेगा. इस दौरान किसी भी तरह की हवाईउड़ान व पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियों पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा एसपीजी ने सोमवार को दिनभर एयरपोर्ट पर सुरक्षा इंतजाम जांचे पीएम के दौरे सेपहले सोमवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर धर्मशाला पहुंच चुके हैं. मुख्यमंत्रीसुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को भारी बारिश से 5,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष राहत पैकेजकी मांग की जाएगी, ताकि आपदा प्रभावितों को समय पर राहत दी जा सके। प्रधानमंत्री के हिमाचल दौरे से बहुत आशाएं हैं। मंगलवार को पीएमजब स्थिति का जायजा लेंगे, तो उन्हें वास्तविक स्थिति का पता लगेगा. छूट देने का किया आग्रहप्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू मंगलवार सुबह शिमला से धर्मशाला रवाना होंगे. सोमवार को शिमला में सुक्खू ने कहा किहिमाचल में आपदा से कई लोग भूमिहीन हुए हैं, ऐसे लोगों को मकान बनाने के लिए एक बीघा जमीन देने के लिए फॉरेस्ट राइट एक्ट में छूट देने काआग्रह किया जाएगा. इन सब मांगों को लेकर राज्य सरकार ने एक मेमोरेंडम भी तैयार किया है मैदानी राज्यों के नियम हिल स्टेट पर लागू नहीं होनेचाहिए मैदानी इलाकों में एक किमी सड़क बनाने को 75 हजार मिलते हैं हिमाचल में 75 हजार में 10 मीटर सड़क भी नहीं बनती. इन नियमों को भीबदलने की मांग की जाएगी.वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ट्वीट कर लिखा कि ‘आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल की धरती पर आपदा से हुई बर्बादी का जायजा लेनेआ रहे हैं उनका हिमाचल की इस पावन धरती पर हार्दिक स्वागत है. प्रधानमंत्री देश के लिए अभिभावक के समान होते हैं हमारी सुंदर धरती आजभयंकर पीड़ा से गुजर रही है-घर उजड़ गए हैं, अपनों को खोने का’
भाजपा पर सौरभ भारद्वाज का बड़ा हमला

बंगाली समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है भाजपाआम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता की और भारतीय जनता पार्टी व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावी राजनीति के लिए हिंदू समाज और खासकर बंगाली समाज की आस्था का इस्तेमाल कर रही है। दुर्गा पूजा पर विवाद क्यों खड़ा हुआदिल्ली में हर साल दुर्गा पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। चितरंजन पार्क, द्वारका, रोहिणी, ग्रेटर कैलाश जैसे इलाकों में विशाल पंडाल सजते हैंऔर लाखों लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। इन आयोजनों का बजट लाखों-करोड़ों रुपए तक होता है। सौरभ भारद्वाज ने बताया कि दुर्गा पूजा समितियों को आयोजन के लिए कई सरकारी विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नेसमितियों से मीटिंग करके वादा किया था कि इस बार सिंगल विंडो सिस्टम बनेगा और समितियों को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट – समितियां अब भी इधर-उधर भटक रही हैं और सहयोग नहीं मिल पा रहा। इसी बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नेआदेश दिया कि दुर्गा प्रतिमा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाई जाए। इसी पर सबसे ज्यादा विवाद खड़ा हुआ। मां दुर्गा के साथ प्रधानमंत्री की फोटो लगाना गलतसौरभ भारद्वाज ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं। उनसे पहले भी कई प्रधानमंत्री हुए, लेकिन आज तक किसीभी मुख्यमंत्री ने ऐसा आदेश नहीं दिया कि दुर्गा पूजा या किसी धार्मिक आयोजन में प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाई जाए। यह परंपरा और आस्था दोनोंका अपमान है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति से होता है, इसमें किसी नेता की तस्वीर लगाने की मजबूरी बिल्कुल गलत है। 1200 यूनिट बिजली बनाम करोड़ों का आयोजनसौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने दुर्गा पूजा समितियों को सहयोग देने के नाम पर 1200 यूनिट मुफ्त बिजली देनेका ऐलान किया है। उन्होंने कहा जो समितियां 50 लाख से 1 करोड़ तक खर्च करके पूजा का आयोजन करती हैं, क्या वे 1200 यूनिट बिजली काखर्चा नहीं उठा सकतीं? बंगाली समाज की आस्था इतनी सस्ती नहीं कि 1200 यूनिट बिजली में बिक जाए। रामलीला भूमि पूजन पर भी सवालभारद्वाज ने यह भी कहा कि भाजपा सिर्फ दुर्गा पूजा ही नहीं, बल्कि रामलीला को भी राजनीति से जोड़ रही है। इस बार रामलीला के भूमि पूजन परजबरन प्रधानमंत्री मोदी जी के मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण करवाया गया। उन्होंने कहा यह साफ दिखाता है कि भाजपा अब धार्मिक आयोजनोंको अपनी राजनीति का साधन बना रही है। लोग अब मोदी जी की मन की बात सुनना नहीं चाहते, तभी इसे ऐसे आयोजनों में जबरदस्ती शामिलकिया जा रहा है। बंगाली समाज में नाराजगी बढ़ीसौरभ भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने कई दुर्गा पूजा समितियों और बंगाली समाज के लोगों से बात की है। सभी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश परनाराजगी जताई है। उन्होंने चेतावनी दी बंगाली समाज आपकी इस जबरदस्ती को कभी स्वीकार नहीं करेगा। मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ प्रधानमंत्रीकी फोटो लगाकर पूजा नहीं होगी। यह तुगलकी फरमान बंगाली समाज को मंजूर नहीं है। दुर्गा पूजा खुद ही सेवा का प्रतीक हैमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी घोषणा की थी कि मोदी जी के जन्मदिन (17 सितम्बर) से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा और इसे दुर्गापूजा से जोड़ा जाएगा। इस पर भारद्वाज ने कहा दुर्गा पूजा अपने आप में सेवा का पर्व है। यहां सुबह से शाम तक प्रसाद बांटा जाता है, हजारों लोगोंकी सेवा होती है। इसे किसी नेता के जन्मदिन से जोड़ना गलत है। बंगाली समाज पहले से ही सेवा करता है, उसे भाजपा से सेवा का पाठ पढ़ने कीजरूरत नहीं है। भाजपा को दिया सुझावसौरभ भारद्वाज ने भाजपा को खुली सलाह दी अगर भाजपा को प्रधानमंत्री जी के जन्मदिन पर सेवा करनी है तो उनके कार्यकर्ता अपनी पार्टी का पटकापहनकर सड़कों पर उतरे, लोगों की मदद करें, गरीबों की सेवा करें, सोशल मीडिया पर वीडियो-पोस्ट करें। लेकिन धार्मिक आयोजनों में लोगों कीआस्था से खिलवाड़ न करें।प्रेस वार्ता के दौरान सौरभ भारद्वाज ने साफ कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए हिंदुओं और खासकर बंगाली समाज की आस्थाका इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि आस्था का सम्मान होना चाहिए, न कि उसे राजनीतिक प्रचार का साधन बनाया जाए।