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PM मोदी का बड़ा ऐलान डेमोग्राफी मिशन से घुसपैठियों की होगी पहचान, बिहार के हक पर नहीं होगा कब्जा

बिहार में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जा रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष हंगामा कर रहा है। लोकसभा मेंविपक्ष के नेता राहुल गांधी बिहार दौरे पर हैं. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के तमाम नेता वोटरों का नाम हटाए जाने पर हंगामा कर रहेहैं. दूसरी तरफ भाजपा साफ कह रही है कि जो देश का नागरिक नहीं है, उसे चुनकर हटाया जाना गलत नहीं है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहारआकर इस मुद्दे पर बड़ी बात कह दी है. पीएम मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार ने तय किया है कि देश का भविष्य घुसपैठियों को तय करने नहीं देंगे. बिहार के युवाओं का भविष्य घुसपैठियों को बर्बाद करने नहीं देंगे. इस खतरे से निपटने के लिए मैंने डेमोग्राफी मिशन की शुरू करने का संकल्प लियागया है. डेमोग्राफी रहा है बदलगयाजी में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि घुसपैठियों की बढ़ती संख्या देश के लिए चिंता का विषय है. सीमावर्ती इलाकों कीडेमोग्राफी बदल रहा है. एनडीए सरकार जल्द ही डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत करने जा रही है. कांग्रेस और राजद जैसे दल बिहार के गरीबों का हकछीनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं। यह सब वह वोटबैंक और तुष्टिकरण के लिए कर रहे हैं. उन्हें बिहार की कोई परवाह नहीं है. इसलिए लगातारसरकार का विरोध कर रहे हैं. लेकिन, हमलोगों को राजद और कांग्रेस की बुरी नजर से बिहार को बचाना है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमघुसपैठियों को बिहार के युवाओं का रोजगार नहीं छीनने देंगे. जिन सुविधाओं पर भारतीयों का अधिकार है. उसपर घुसपैठियों को डाका नहीं डालनेदेंगे. बहुत जल्द डेमोग्राफी सर्वे का कार्य शुरू होगा. हम हर घुसपैठी को देश से बाहर करके रहेंगे. जमीन पर कब्जापीएम मोदी ने पूछा कि क्या घुसपैठिए आपका रोजगार छिन लें और आपकी जमीन पर कब्जा कर लें यह मंजूर है? कांग्रेस और राजद ने बिहार केलोगों का हक छिनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं. एनडीए को हराने के लिए कांग्रेस-राजद कितना भी नीचे जा सकते हैं। इसलिए बिहार के लोगोंको सतर्क रहने की जरुरत है. हमें बिहार को कांग्रेस-राजद की बुरी नजर से बचाकर रखना है. बिहार के लिए यह समय बेहद खास है. बिहार के लोगोंके सपने पूरे हो. यहां के लोगों की उम्मीदों को नई उड़ान मिले. इसके लिए डबल इंजन की सरकार लगातार मेहनत कर रही है. आज का कार्यक्रम इसीदिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मैं एक बार फिर इन परियोजनाओं के लिए बिहार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं. विपक्ष बिहार में वोट चोरी की बात करतेहुए वोटरों को हटाए जाने पर हंगामा कर रहा है. इस गरम तेल में पीएम मोदी ने छौंक लगा दिया है. पीएम ने कहा कि अब हम डेमोग्राफी मिशन सेघुसपैठियों को ढूंढेंगे.

कर्नाटक विधानसभा में गूंजा संघ का गीत, विपक्ष के आरोपों पर DK शिवकुमार ने गाकर दिया जवाब

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने गुरुवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सभी को स्तब्ध कर दिया. दरअसल विधानसभा में चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई भगदड़ के मामले पर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान डीके शिवकुमार ने विधानसभा में राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ के गीत ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ गाकर सभी को हैरान कर दिया. शिवकुमार ने यह गीत तब गाया जब भाजपा विधायकों नेशिवकुमार पर चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ को ‘बढ़ाने’ का आरोप लगाया और उन पर बड़े पैमाने पर उन्माद फैलाने का आरोप लगाया. भाजपाने आरोप लगाया कि शिवकुमार बंगलूरू हवाई अड्डे पर आरसीबी टीम के आगमन पर उन्हें लेने गए थे और हवाई अड्डे से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक पूरीयात्रा के दौरान कन्नड़ झंडा लहराते रहे. ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि सुनाया गाकरआरोपों का जवाब देते हुए, शिवकुमार ने कहा, ‘मैं कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) का सदस्य हूं और केएससीए सचिव समेत वहां के सभी लोगमेरे मित्र हैं. मैं बंगलूरू का प्रभारी मंत्री हूं. मैं (4 जून को) हवाई अड्डे और स्टेडियम गया था. मैंने कर्नाटक का झंडा भी थामा, उन्हें (आरसीबी को) शुभकामनाएं दीं और कप भी चूमा. मैंने अपना काम किया. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आगे कहा, ‘दुर्घटना हुई, ऐसी घटनाएं दूसरे राज्यों मेंभी हुई हैं. जरूरत पड़ने पर मैं उन घटनाओं की सूची भी पढ़कर सुनाऊंगा जो अन्य जगहों पर भी हुई हैं मैं भी आपके बारे में बहुत कुछ कह सकता हूं. विपक्ष के नेता भाजपा आर अशोक ने शिवकुमार को याद दिलाया कि उन्होंने एक बार कहा था कि वह ‘आरएसएस की चड्डी’ पहनते हैं. इस पर मजाकमें शिवकुमार ने संघ का गीत ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि’ गाकर सुनाया. पंक्तियां रिकॉर्ड से नहीं जाएंगी हटाईजिस समय शिवकुमार संघ गीत गा रहे थे, तो विपक्ष ने मेजें थपथपाकर उनका उत्साहवर्धन किया, लेकिन इस दौरान कांग्रेस खेमे में सन्नाटा छायारहा. भाजपा विधायक वी. सुनील कुमार ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘उम्मीद है कि ये पंक्तियां रिकॉर्ड से नहीं हटाई जाएंगी. शिवकुमार ने ये भी कहा कि’क्या ऐसी घटनाओं के बाद भी सरकारों ने कभी जिम्मेदारी ली? उन्होंने कहा, ‘आपको गर्व होना चाहिए कि इस सरकार ने (भगदड़ के बाद) तुरंत बादकार्रवाई की और पुलिस अधिकारियों और रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. विपक्ष पर निशाना साधते हुए शिवकुमार ने कहा, ‘दुर्घटना हुई, ऐसी घटनाएं दूसरे राज्यों में भी हुई हैं. जरूरत पड़ने पर मैं उन घटनाओं की सूची भी पढ़कर सुनाऊंगा जो अन्य जगहों पर भी हुई हैं मैं भीआपके बारे में बहुत कुछ कह सकता हूं.

बीसीसीआई ने चयन समितियों के लिए मांगे आवेदन , महिला पैनल में होंगे बड़े बदलाव “अजीत अगरकर की टीम में बदलाव संभव”

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने शुक्रवार को पुरुष और महिला राष्ट्रीय चयन समितियों के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए. इसमें सीनियर पुरुष चयन समिति में दो सदस्य और महिला चयन समिति में चार नए पद शामिल हैं. सभी आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर तय की गई है.बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि पात्रता मानदंड पहले की तरह ही रहेंगे. उम्मीदवार को कम से कम सात टेस्ट मैच या 30 फर्स्ट क्लास मैच खेलने काअनुभव होना चाहिए. वैकल्पिक रूप से, जिन खिलाड़ियों ने कम से कम 10 वनडे इंटरनेशनल (ODIs) या 20 फर्स्ट क्लास मैच खेले हों. वे भीआवेदन कर सकते हैं एक बीसीसीआई अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘सेलेक्टर्स का कॉन्ट्रैक्ट हर साल रिन्यू किया जाता है. आवेदन किए आमंत्रितअभी यह तय नहीं हुआ है कि किन मौजूदा सेलेक्टर्स को बदला जाएगा, लेकिन प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी.वर्तमान पुरुष चयन समिति, जिसने हालही में एशिया कप के लिए टीम का चयन किया था, का नेतृत्व पूर्व तेज गेंदबाज अजीत अगरकर कर रहे हैं. समिति में उनके साथ एसएस दास, सुब्रतोबनर्जी, अजय रात्रा और एस शरथ शामिल हैं. बीसीसीआई ने पुरुषों की जूनियर क्रिकेट चयन समिति में भी एक सदस्य के लिए आवेदन मांगे हैं. यहसमिति अंडर-22 तक की उम्र वर्ग की टीमों के लिए कैंप, टूर्स और टूर्नामेंट्स का चयन करती है. यह पद संभवतः मुख्य चयनकर्ता का हो सकता है. महिला राष्ट्रीय चयन समिति में चार पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं.खेलने का होना चाहिए अनुभवमौजूदा महिला पैनल की अध्यक्षता नीतु डेविड कर रही हैं उनके साथ रेनू मारग्रेट, आरती वैद्य, कल्पना वेंकटाचार और श्यामा डे शॉ सदस्य हैं इससमिति ने हाल ही में घरेलू वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का चयन भी किया था. हालांकि, हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बातसामने आई थी कि अगरकर का कार्यकाल जून 2026 तक बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई ने यह फैसला भारतीय टीम कीहालिया सफलताओं को देखते हुए लिया. अगरकर को जुलाई, 2023 में चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. उनके कार्यकाल में टीमइंडिया ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें वनडे विश्व कप 2023 का फाइनल खेलना, टी20 विश्व कप 2024 का खिताब जीतना औरचैंपियंस ट्रॉफी 2025 की जीत शामिल है. बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि पात्रता मानदंड पहले की तरह ही रहेंगे. उम्मीदवार को कम से कम सातटेस्ट मैच या 30 फर्स्ट क्लास मैच खेलने का अनुभव होना चाहिए.

प्रख्यात एनआरआई उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल का निधन, PM मोदी ने जताया शोक

प्रमुख एनआरआई उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन संबंधों मेंउनका योगदान हमेशा याद रहेगा. स्वराज पॉल का गुरुवार शाम को लंदन में निधन हो गया था वे 94 साल के थे. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट मेंस्वराज पॉल के यूके में परोपकार और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और भारत-ब्रिटेन के घनिष्ठ संबंधों में योगदान कीसराहना की. पीएम मोदी ने स्वराज पॉल के साथ अपनी कई मुलाकातों को भी याद किया। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी ने लिखा कि स्वराज पॉल जी के निधन से गहरा दुख हुआ. ब्रिटेन में उद्योग, परोपकार और सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान और भारत केसाथ घनिष्ठ संबंधों के लिए उनके अटूट समर्थन को हमेशा याद किया जाएगा. प्रशंसकों की संवेदनाएंमुझे हमारी कई मुलाकातें याद आती हैं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना. ओम शांति।ब्रिटेन स्थित कैपारो ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक पॉल का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था. 1960 के दशक में वह अपनी छोटी बेटी अंबिकाके कैंसर के इलाज के लिए ब्रिटेन गए थे. लेकिन बेटी की चार साल की उम्र में मृत्यु हो गई, जिसके बाद पॉल ने एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में अंबिकापॉल फाउंडेशन की स्थापना की. इस संस्था ने शिक्षा और स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से दुनिया भर के बच्चों और युवाओं के कल्याण के लिए लाखोंडॉलर का दान किया.लॉर्ड पॉल संडे टाइम्स रिच लिस्ट में नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं. इस साल उनकी संपत्ति लगभग 2 बिलियन पाउंड(GBP) आंकी गई और उन्हें 81वें स्थान पर रखा गया. उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बहुराष्ट्रीय कंपनी कैपारो समूह से आता है. अंतराष्ट्रीय स्तर पर करता है कामजो स्टील और इंजीनियरिंग का बड़ा बिजनेस है कैपारो समूह का मुख्यालय लंदन में है और यह 40 से ज्यादा जगहों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करताहै, जिसका संचालन यूके, उत्तरी अमेरिका, भारत और मध्य पूर्व में स्थित है. उनके बेटे आकाश पॉल कैपारो इंडिया के अध्यक्ष और कैपारो समूह केनिदेशक हैं.ब्रिटिश कारोबारी पॉल को 1983 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. 1975 में उन्होंने इंडो-ब्रिटिश एसोसिएशन की भी स्थापना की थी. यूके में 1.864 मिलियन का एक बड़ा भारतीय प्रवासी है.

दिल्ली में कूड़े के अंबार पर ‘चार इंजन’ की चुप्पी, आप ने उठाए फंड और दिखावटी अभियान पर सवाल

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए एमसीडी के पास पैसा नहीं होने को लेकर भाजपा को आड़े हाथ लिया है. एमसीडी में नेताप्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा की चार इंजन की सरकार के बावजूद एमसीडी के पास पैसा नहीं है. बुधवार को हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठकमें एमसीडी आयुक्त ने बताया कि कूड़े के समाधान के लिए 3500 करोड़ रुपए की जरूरत है और कंसेशनरीज को देने के लिए एमसीडी 70 करोड़ रुपए ही जुटा पा रही है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर तरफ गंदगी फैली है. भाजपा का दिल्ली को कूड़े से आजादी दिलाने का अभियान महज फोटो शूट बनकर रह गया है. सीएम रेखा गुप्ता और मेयर अपनी ही केंद्र सरकार से पैसा नहीं ला पा रहे हैं। मेयर से कहना है कि वह बजट कारोना न रोएं. दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाकर दिल्लीवालों के प्रति अपनी जवाबदेही निभाएं.मुख्यालय में स्टैंडिंग कमेटी की बैठकएमसीडी में “आप” के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि बुधवार को निगम मुख्यालय में स्टैंडिंग कमेटीकी बैठक थी, जिसमें जब कूड़े के मुद्दे पर चर्चा हुई तो यह बात सामने आई कि दिल्ली में ‘दिल्ली को कूड़े से आजादी’ नामक एक महीने का अभियानचल रहा है, जिसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महापौर राजा इकबाल सिंह के साथ मिलकर शुरू किया था. लेकिन जैसा कि आम आदमी पार्टी शुरू सेकहती आई है, यह अभियान महज एक दिखावा है। महापौर या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उन स्थानों पर जाकर फोटो खिंचवाते हैं, जो पहले से ही हमारेकर्मठ सफाई कर्मचारियों द्वारा साफ किए जा चुके होते हैं.अंकुश नारंग ने कहा कि बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में 18 सदस्यों (न सिर्फ आमआदमी पार्टी के, बल्कि भाजपा के पार्षदों) और मैंने भी बताया कि सेंट्रल जोन में हर जगह कूड़ा ही कूड़ा बिखरा हुआ है। सेंट्रल जोन में कूड़ा उठाने कीकोई व्यवस्था नहीं है, जिसके पीछे पहले […]

अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला ‘जेल से सरकार नहीं चलेगी’, नैतिक राजनीति के लिए पेश किया ऐतिहासिक विधेयक”

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर उनके द्वारा पेश किए जेल जाने वाले नेता को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केन्द्र और राज्य सरकारमें मंत्री जैसे अहम पदों से हटाने वाले बिल का विरोध करने पर कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश किया. उन्होंने बताया कि इंदिरागांधी ने अपने आप को कानून के दायरे में आने से बचाने के लिए संविधान में संशोधन लाया था और कांग्रेस उसी संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहती है. जहां कांग्रेस की कार्यसंस्कृति और नीति प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की रही है, वहीं भाजपा की नीति अपने प्रधानमंत्री, मंत्रियों औरमुख्यमंत्रियों को कानून के दायरे में लाने की है. शाह ने कहा कि मोदी सरकार की राजनीति में नैतिक मानकों को बहाल करने की प्रतिबद्धता और जनतामें इस समस्या को लेकर गुस्से को देखते हुए, आज मैंने लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से ऐसे संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किए हैं जिनसे यहसुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति जेल में रहते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री जैसे अहम संवैधानिक पदों पर कार्य नहींकर सकेगा. मानकों को सुधारना और राजनीति में शुचिता बनाए है रखनाविधेयकों का उद्देश्य गिरते नैतिक मानकों को सुधारना और राजनीति में शुचिता बनाए रखना है. इन तीनों बिल से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वहयह है कि कोई भी व्यक्ति अगर गिरफ्तार होकर जेल में है, तो वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र/राज्य सरकार में मंत्री नहीं रह सकेगा. जब संविधानबना था, तब उसके निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि भविष्य में कुछ नेता गिरफ्तारी के बाद भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने से इनकारकरेंगे. हाल के वर्षों में देश ने देखा है कि कैसे कुछ मुख्यमंत्री या मंत्री जेल से ही सरकार चलाते रहे हैं. विधेयक में यह भी प्रावधानविधेयक में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई नेता गिरफ्तार होता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर जमानत लेने का समय दिया जायेगा. यदि 30 दिन मेंजमानत नहीं मिली, तो 31वें दिन प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को उसे पद से हटाना होगा, अन्यथा वह स्वतः ही अयोग्य हो जाएगा. हालांकि, अगर बाद मेंविधिक प्रक्रिया से जमानत मिल जाती है तो उसे फिर से पद पर बहाल किया जा सकता है. अब सवाल देश की जनता के सामने है कि क्या किसीमंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के लिए जेल से सरकार चलाना उचित है? केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि एक तरफ माननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदी जी ने खुद को कानून के दायरे में लाने के लिए संवैधानिक संशोधन प्रस्तुत किया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व में पूरा विपक्ष इसकाविरोध कर रहा है ताकि वे कानून के दायरे में न आएं, जेल से सरकार चलाते रहें और सत्ता से चिपके रहें। राष्ट्र यह भी याद रखता है कि इसी सदन मेंतत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने 39वें संवैधानिक संशोधन के जरिए प्रधानमंत्री को विशेषाधिकार दे दिया था, जिससे उन पर कोई कानूनीकार्यवाही न हो सके. जहां कांग्रेस की कार्यसंस्कृति और नीति प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की रही है, वहीं भाजपा की नीति अपने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को कानून के दायरे में लाने की है. नैतिक मूल्यों के पक्षधरकेंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भाजपा और एनडीए हमेशा नैतिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जीने तो केवल आरोप लगने पर ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. दूसरी ओर कांग्रेस आज भी इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई अनैतिक परंपरा को आगेबढ़ा रही है. लालू प्रसाद यादव को कानून से बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा लाए गए अध्यादेश का विरोध स्वयं राहुल गांधी ने किया था और आजवही राहुल गांधी लालू यादव को पटना के गांधी मैदान में गले लगा रहे हैं. जनता उनके दोहरे व्यवहार को भलीभांति समझती है। यह पहले ही स्पष्टकर दिया गया था कि इस विधेयक को विस्तृत चर्चा के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाएगा. इसके बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व मेंपूरा इंडिया गठबंधन बेशर्मी से एकजुट होकर भ्रष्टाचारियों को ढाल देने के लिए इसका विरोध कर रहा है. आज विपक्ष देश की जनता के सामने पूरीतरह बेनकाब हो चुका है.

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने भरा नामांकन, कहा यह चुनाव भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की है पुष्टि

विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने गुरुवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी कीउपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने अहम टिप्पणी भी की. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अगरवे उपराष्ट्रपति निर्वाचित किए जाते हैं तो क्या करेंगे. नामांकन दाखिल करने के बाद बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि यह चुनाव महज एक व्यक्ति के बारे मेंनहीं है, बल्कि भारत के उस विचार की पुष्टि के बारे में है जहां संसद ईमानदारी से काम करती है. जहां असहमति का भी सम्मान किया जाता है औरसंस्थाएं स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ लोगों की सेवा करती हैं. विनम्रता के साथ किया कामरेड्डी ने कहा कि आज मुझे विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने का सम्मानमिला. मैंने यह काम विनम्रता, जिम्मेदारी और हमारे संविधान में निहित मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की गहरी भावना के साथ किया. उन्होंने कहा कियह चुनाव केवल एक व्यक्ति के बारे में नहीं है यह हमारे संस्थापकों द्वारा परिकल्पित भारत के विचार की पुष्टि करने के बारे में है. एक ऐसा भारत जहांसंसद ईमानदारी से काम करे, जहां असहमति का सम्मान किया जाए और जहां संस्थाएं स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ लोगों की सेवा करें. उन्होंनेकहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति पर संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं की रक्षा करने की जिम्मेदारी है. यदि मैं निर्वाचितहोता हूं तो मैं निष्पक्षता, गरिमा तथा संवाद एवं शिष्टाचार के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ अपनी भूमिका निभाने का वचन देता हूं. नेताओं के प्रति गहरा आभारइस दौरान विपक्षी उम्मीदवार रेड्डी ने विपक्षी दलों के नेताओं के प्रति भी गहरा आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में विश्वास औरहमारे लोगों में आशा के साथ मैं इस यात्रा पर निकल रहा हूं. हमारी लोकतांत्रिक भावना हम सभी का मार्गदर्शन करती रहे. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिएनिर्वाचक मंडल में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं. राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी अपना वोट डालने के पात्र होते हैं. निर्वाचकमंडल की प्रभावी संख्या 781 है और बहुमत का आंकड़ा 391 है सत्तारूढ़ एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. सत्तारूढ़ दल को कम सेकम 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. वाईएसआरसीपी जैसी विपक्षी गठबंधन से इतर पार्टियां पहले ही राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा करचुकी हैं.

हंगामे और वॉकआउट के बीच संसद का मानसून सत्र संपन्न, लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 14 विधेयक पारित

संसद का चल रहा मानसून सत्र हंगामों, वॉकआउट और बार-बार स्थगन का गवाह रहा है. विपक्ष के विरोध और लगातार व्यवधान के बीच लोकसभा ने12 और राज्यसभा ने 14 अहम बिल पास किए. यह सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ और बार-बार विपक्षी मांगों के कारण बाधित होता रहा. शुरुआत मेंविपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया. इसके बाद बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर बहस की मांग ने सत्र को और जकड़ दिया. नतीजा यह रहा कि कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बाधित रही और चर्चा के बजायवॉकआउट और नारेबाजी होती रही. विधेयक हुए राज्यसभा से पारितलोकसभा में जिन 12 विधेयकों को मंजूरी मिली, उनमें गोवा विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा बिल, मर्चेंट शिपिंग बिल, मणिपुर जीएसटी संशोधन विधेयक, मणिपुर विनियोग विधेयक, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन विधेयक शामिल हैं. इसके अलावा आयकर विधेयक, टैक्सेशन लॉज (संशोधन) बिल, भारतीय बंदरगाह विधेयक, खनन और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधनविधेयक, आईआईएम संशोधन विधेयक और ऑनलाइन गेमिंग नियमन से जुड़ा विधेयक भी पास किया गया. राज्यसभा में 14 विधेयक पारित यालौटाए गए. इनमें बिल्स ऑफ लेडिंग बिल, कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी बिल, कोस्टल शिपिंग बिल, मणिपुर से जुड़े दो विधेयक, मर्चेंट शिपिंग बिलऔर गोवा विधानसभा से जुड़ा प्रतिनिधित्व संशोधन विधेयक शामिल हैं. साथ ही राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधनविधेयक, आयकर विधेयक, टैक्सेशन लॉज संशोधन बिल, भारतीय बंदरगाह विधेयक, खनन एवं खनिज संशोधन विधेयक और आईआईएम संशोधनविधेयक भी राज्यसभा से पारित हुए. हंगामा कर चर्चा का गंवाया मौकासरकारी सूत्रों ने कहा कि विपक्ष ने लगातार हंगामा कर चर्चा का मौका गंवाया. इस कारण कई महत्वपूर्ण बिल बिना विपक्ष की सक्रिय भागीदारी केपारित हो गए. राज्यसभा में केवल बिल्स ऑफ लेडिंग बिल ही पहले दिन बिना बाधा पारित हुआ, बाकी विधेयक शोरगुल, आंशिक बहस या विपक्षके वॉकआउट के बीच पारित हुए. सरकार का कहना है कि विपक्ष के असहयोगी रवैये ने लोकतांत्रिक विमर्श को नुकसान पहुंचाया है. संसद के मानसूनसत्र में हंगामे और विपक्षी विरोध के बावजूद लोकसभा ने 12 और राज्यसभा ने 14 विधेयक पास किए. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और बिहार के विशेषपुनरीक्षण को लेकर हुए विवाद ने सत्र की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया. सरकार ने विपक्ष पर असहयोग का आरोप लगाया और कहा कि कईअहम बिल बिना विपक्ष की सक्रिय भागीदारी के पारित हो गए, जिससे लोकतांत्रिक बहस प्रभावित हुई.

गोवा कैबिनेट विस्तार रमेश तावड़कर और दिगंबर कामत ने ली मंत्री पद की शपथ, प्रमोद सावंत मंत्रिमंडल में शामिल

भाजपा विधायक रमेश तावड़कर और दिगंबर कामत ने गुरुवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली गोवा कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल अशोक गजपति राजू ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में कामत और तावड़कर को गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस समारोह मेंसावंत, भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष दामू नाइक और अन्य उपस्थित थे. शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले तावड़कर ने गोवा विधानसभा के अध्यक्षपद से इस्तीफा दे दिया था. 57 साल के भाजपा नेता कैनाकोना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. वह पहली बार 2005 में दक्षिण गोवा कीपोइंगुइनिम सीट से उपचुनाव के माध्यम से विधानसभा के लिए चुने गए थे 2007 में वे इसी निर्वाचन क्षेत्र से फिर से निर्वाचित हुए. गोवा के रहे कांग्रेसी मुख्यमंत्रीपरिसीमन के बाद तावड़कर ने 2012 और फिर 2022 में कैनाकोना निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की 2017 में वे चुनाव हार गए थेतावड़कर इससे पहले अप्रैल 2012 से जनवरी 2017 तक कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने कृषि, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, आदिवासी कल्याणऔर खेल एवं युवा मामलों सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला. मार्च 2022 में वे गोवा के विधानसभा अध्यक्ष चुने गए और इस तटीय राज्य मेंइस पद पर आसीन होने वाले पहले आदिवासी विधायक बने. दूसरे मंत्री दिगंबर कामत, 2007 से 2012 तक गोवा के कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे. विधायकों के साथ भाजपा में शामिलमडगांव निर्वाचन क्षेत्र के 71 वर्षीय विधायक ने अपनी राजनीतिक यात्रा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1989-1994, 2005-2022) से शुरू की. बाद मेंवह सितंबर 2022 में भाजपा में शामिल हो गए. कामत पहली बार 1994 में मडगांव से विधानसभा के लिए चुने गए थे. तब से कई बार इस निर्वाचनक्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं 2022 के चुनावों में उन्होंने मडगांव से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की, लेकिन 14 सितंबर, 2022 को सात अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए.18 जून को गोविंद गौड़े को मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद एक मंत्री पद खाली था, जबकि एक अन्य मंत्री एलेक्सो सेक्वेरा ने बुधवार को निजीकारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था. मुख्यमंत्री सावंत ने बुधवार को पुष्टि की थी कि तावड़कर और कामत को मंत्री बनाया जाएगा.

गगनयान मिशन पर बोले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला: जल्द भारत भेजेगा अंतरिक्ष में मानव, ISRO प्रमुख ने गिनाईं स्पेस सेक्टर की उपलब्धियां

दिल्ली में मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और इसरो प्रमुख वी. नारायण ने एक साथ मीडिया से बात की. इस दौरान शुभांशु नेगगनयान मिशन पर कहा कि जल्द ही भारत अपने रॉकेट और कैप्सूल से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा. उन्होंने यह भी बताया कि इसरोदिसंबर तक पहला गगनयान परीक्षण मिशन लॉन्च करेगा. उन्होंने अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि 20 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद शरीर गुरुत्वाकर्षण भूल जाता है और जमीन पर वापसी पर उसे दोबारा ढलना पड़ता है. इसके साथ ही उन्होंनेएक्सिओम मिशन के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि इसके तहत वे दो हफ्तों तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में रहे. इस दौरान वे मिशनपायलट और कमांडर के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे. लोगों को करता हूं धन्यवादशुक्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा इस मिशन को संभव बनाने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करता हूं. उन्होंने बताया कि आईएसएस पर रहते हुएकई प्रयोग किए गए और पृथ्वी व अंतरिक्ष से जुड़ी तस्वीरें भी ली गईं। उन्होंने कहा कि इसके लिए लंबी ट्रेनिंग ली गई थी और यह अनुभव उनकेजीवन का सबसे अलग और यादगार रहा. शुभांशु शुक्ला ने आगे भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कियह इसरो का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके तहत 2027 में भारतीय वायुसेना के तीन पायलटों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. ये पायलट400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में तीन दिन रहेंगे और इसके बाद हिंद महासागर में सुरक्षित लैंडिंग कराई जाएगी. मिशन की कुललागत लगभग 20,193 करोड़ रुपए है. शुक्ला ने कहा कि गगनयान की तैयारी के लिए पहले दो खाली टेस्ट फ्लाइट भेजी जाएंगी, इसके बाद एकफ्लाइट में रोबोट भेजा जाएगा, अंतरिक्ष यात्रा को मिली नई गतिजब यह सब सफल हो जाएगा, तब इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. वहीं, अपनी बात कहते हुए आखिरी में उन्होंने ये भी कहा कि भारत आज भीअंतरिक्ष से सारे जहां से अच्छा लगता है.कार्यक्रम में इसरो प्रमुख वी. नारायणन भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति मिलीहै. उन्होंने याद दिलाया कि दक्षिण एशियाई सैटेलाइट को भारत ने बनाकर सदस्य देशों को समर्पित किया. इसके अलावा भारत ने जी20 देशों केलिए भी एक सैटेलाइट तैयार किया. नारायणन ने कहा कि 10 साल पहले देश में सिर्फ एक स्पेस स्टार्टअप था, लेकिन आज 300 से ज्यादास्टार्टअप्स अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं. निजी कंपनियों ने अब तक दो सब-ऑर्बिटल मिशन पूरे किए हैं यह दिखाता है कि भारत की स्पेस इकोनॉमीलगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसका और विस्तार होगा. इसरो प्रमुख ने बताया कि 30 जुलाई को जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट ने नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया. यह उपग्रह पूरी तरह से सही ढंग से काम कर रहा है. नारायणन ने कहाकि अगले दो से तीन महीनों में भारत 6,500 किलो का अमेरिकी कम्युनिकेशन सैटेलाइट भी अपने लॉन्च व्हीकल से प्रक्षेपित करेगा. उन्होंने कहा किइस तरह का सहयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से अहम है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसरो की बढ़ती ताकत और क्षमता को भी दर्शाता है.