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केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 को

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाबमांगा. केजरीवाल ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में उन्हें जारी समन को बरकरार रखने वाले सत्र न्यायालय के आदेश कोचुनौती दी है. न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने ईडी को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले कीअगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 को होगी. ईडी के वकील ने याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताते हुए कहा कि यह याचिका दंडप्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत दूसरी पुनरीक्षण याचिका के रूप में दायर की गई है, जो स्वीकार्य नहीं है. अदालत ने ईडी कोसभी आपत्तियों सहित जवाब दाखिल करने को कहा केजरीवाल ने 17 सितंबर 2024 के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी है. पुनरीक्षण याचिका कर दी खारिजजिसमें 7 मार्च 2024 के मजिस्ट्रेट अदालत के समन आदेश के खिलाफ उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी इसके अलावा, उन्होंने 20 दिसंबर 2024 के सत्र न्यायालय के उस आदेश को भी चुनौती दी. जिसमें उनके मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने से इनकार करने वाले24 अक्तूबर 2024 के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को बरकरार रखा गया था. उच्च न्यायालय ने इस दूसरी याचिका पर भी ईडी को नोटिस जारी करछह सप्ताह में जवाब मांगा. वहीं ईडी ने तर्क दिया कि विशेष अदालत के आदेश को लगभग 10 महीने बाद चुनौती दी गई है. 20 जून 2024 कोनिचली अदालत ने केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दी थी. लेकिन ईडी की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दीइसके बाद 12 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ‘गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता’ से संबंधित तीन प्रश्नों को बड़ी पीठ को भेजते हुए केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी. ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामलाईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक प्राथमिकी से जुड़ा है. जो दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सिफारिशपर 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए दर्ज की गई थी ईडी और सीबीआई का आरोप है किआबकारी नीति में संशोधन के दौरान अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. दिल्ली सरकार ने इस नीति को 17 नवंबर 2021 को लागू किया था. लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 में इसे रद्द कर दिया गया उच्च न्यायालय ने दोनों याचिकाओं परसुनवाई के लिए 10 सितंबर 2025 की तारीख तय की है. इस मामले में ईडी के जवाब और अदालत के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं. दिल्लीउच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर ईडी से जवाब मांगा जिसमें उन्होंने म से जुड़े धन शोधन मामले में समन को बरकरार रखने वालेसत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 को होगी.

मनोज पांडेय, राकेश प्रताप और अभय सिंह को विधानसभा में नई पहचान, अब नहीं हैं सपा के विधायक जानें क्या है पूरा मामला

समाजवादी पार्टी से निष्कासित किए गए विधायकों को यूपी विधानसभा से असंबद्ध घोषित कर दिया गया है. इस संबंध में आदेश जारी कर दियागया है. बता दें कि सपा ने मनोज कुमार पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इस फैसले के बाद तीनोंविधायक को सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की जाएगी. अब वो सपा विधायकों के साथ नहीं बैठ सकेंगे।बता दें कि इन सभी विधायकों ने बीतेसाल हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी और भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन किया था जिसके बाद उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों काहवाला देते हुए कार्रवाई की गई थी.पहले छोड़ दी थी पार्टीमनोज पांडेय रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। हालांकि, उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ दी थी. राज्यसभा चुनाव में क्रॉसवोटिंग के बाद से वह भाजपा के खेमे में आ गए थे. लोकसभा चुनाव के पहले रायबरेली सीट से इस बात के भी संकेत मिल रहे थे कि हो सकता है किमनोज पांडेय को ही टिकट दे दिया जाए बाद में दिनेश प्रताप सिंह को रायबरेली से टिकट मिला. खास बात यह रही कि मनोज पांडेय ने दिनेश प्रतापसिंह की सभाओं से दूरी बनाई थी. उनकी नाराजगी को भांपकर गृहमंत्री अमित शाह उनसे मिलने के लिए घर गए थे इसके बाद वह चुनाव प्रचार केलिए निकले थे. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीन विधायकों पर कार्रवाई के बाद तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें मंत्री बनाने में दिक्कत है. वे सपाके विधानसभा सदस्य हैं। मंत्री बनेंगे तो उन्हें सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ेगा. जहां तक जानकारी है कि इन सभी विधायकों को मंत्री बनाने काआश्वासन दिया गया था उन्होंने कहा कि अब भाजपा की जिम्मेदारी है कि निष्कासित विधायकों को मंत्री बनाए. हमने तकनीकी दिक्कत को दूर करदिया है अखिलेश ने कहा कि अगली खेप में हम इसी तरह से कुछ और विधायक उन्हें मंत्री बनाने के लिए दे देंगे. तकनीकी दूरी को थी सुलझाने वालीसमाजवादी पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक मनोज कुमार पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को यूपी विधानसभा से असंबद्ध घोषितकर दिया गया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान दिया कि यह कार्रवाई एक “तकनीकी दूरी” को सुलझाने वाली थी. जिससे ये विधायक मंत्रीबन सकें. विधानसभा सचिवालय ने बताया कि उन्होंने अब असंबद्ध सदस्य का दर्जा प्राप्त कर लिया है स्प के व्हिप का उनका पालन अब जरूरी नहींहोगा. मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि वह 2024 जून में ही बीजेपी में शामिल हो गए थे इसलिए निष्कासन उन्हें प्रभावित नहीं करता.सपा ने क्रॉसवोटिंग के आरोपित 3 विधायकों को निष्कासित कर विधानसभा में असंबद्ध घोषित किया, जिससे वे पार्टी लाइन से बाहर हो गए। यह कार्रवाई एकसाल बाद हुई, और इसे पार्टी के लिए “तकनीकी दूरी” बनाए रखने वाली रणनीति बताया जा रहा है.

गुजरात में मंत्री बच्चू भाई खाबड़ पर गंभीर आरोप – कांग्रेस ने की जांच और बर्खास्तगी की मांग शक्तिसिंह गोहिल बोले-जनता का पैसा लूट रही है भाजपा सरकार, रिश्तेदारों के नाम पर चल रहा करोड़ों का खेल 

कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने गुजरात सरकार के मंत्री बच्चू भाई खाबड़ पर बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के परिवार औरकरीबियों ने सरकारी योजनाओं में भारी गड़बड़ियाँ की हैं। जनता के हक का पैसा लूटकर अपनों की जेब में डाला जा रहा है। कांग्रेस की मांगें बच्चू भाई खाबड़ के खिलाफ ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग से जांच कराई जाए।राज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने जीएसटी भरा या नहीं, इसकी जांच हो।मनरेगा और नल से जल योजनाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच हो।बच्चू भाई खाबड़ को तुरंत मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। क्या है कांग्रेस के आरोप रिश्तेदारों को ठेका – मंत्री के दो रिश्तेदार, जिनकी सैलरी सिर्फ 10 हज़ार रुपये है, वे करोड़ों की गाड़ी और आलीशान घर में रहते हैं। इन्हीं के ज़रिएसरकारी वर्क ऑर्डर निकाले जा रहे हैं।झूठा काम, झूठे बिल – जहाँ सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये का काम दिखाया गया, वहाँ कांग्रेस की टीम पहुँची तो पाया कि वहाँ कोई काम हुआ हीनहीं था। जीएसटी की चोरी – लाखों का सामान सप्लाई हुआ लेकिन वेबसाइट पर जीएसटी का कोई रिकॉर्ड नहीं है। राज कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम मंत्री के बेटेसे जुड़ा है।मनरेगा में मृतकों के नाम – मनरेगा में ऐसे लोगों के नाम पर काम दिखाया गया जो या तो मर चुके हैं या दिव्यांग हैं।बिना टेंडर अपनों को ठेका – मनरेगा में मटेरियल सप्लाई के लिए नियम है कि सबसे कम दाम वाले सप्लायर को चुना जाए, लेकिन यहां मंत्री के बेटेको ही ठेका दे दिया गया। एक ही गाँव में 2,235 वर्क ऑर्डर मंत्री के गाँव धानपुर में कुछ ही समय में 2,235 सरकारी ऑर्डर पास कर दिए गए। यह गंभीर घोटाले की ओर इशारा करता है। बाँध-कुँआ-जंगल का खेल – पहले एक जमीन पर बाँध बनाया गया, फिर उसी जगह कुआँ खोदा गया, बाद में समतल कर जंगल बना दिया गया।यह सब सरकारी पैसे की बर्बादी है।पुल हादसे ने खोली पोल – महिसागर नदी पर बना गंभीरा पुल गिरने से अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने पहले ही बतायाथा कि पुल हिल रहा है, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। मरम्मत पर पैसा खर्च हुआ लेकिन गुणवत्ता नहीं आई। भाजपा सरकार पर कट-कमीशन का आरोप – शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि गुजरात में ठेकेदार को काम देने से पहले भाजपा कार्यालय में कट-कमीशन देना होता है। इसी वजह से काम ठीक से नहीं होता और आम लोगों की जान पर बन आती है।

दिल्ली में बनेंगे 21,000 स्मार्ट क्लासरूम शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बड़ा ऐलान – एक देश, एक चुनाव से बचेगा 12,000 करोड़ रुपये, विकास कार्यों में होगा उपयोग

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि राजधानी में 900 करोड़ रुपये की लागत से 21,000 स्मार्ट क्लासरूम बनाएजाएंगे। यह कदम दिल्ली के सरकारी स्कूलों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे छात्रों को डिजिटलशिक्षा का बेहतर अनुभव मिलेगा और पढ़ाई में गुणवत्ता भी बढ़ेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से छात्र नए जमाने कीटेक्नोलॉजी से जुड़ सकेंगे और पढ़ाई को रोचक व प्रभावशाली बनाया जाएगा। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि हर छात्र को स्मार्ट शिक्षा का लाभमिले, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या वर्ग से आता हो। इसके साथ ही आशीष सूद ने एक देश, एक चुनाव की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि अगर देश में सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो लगभग12,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह धनराशि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे विकास कार्यों में उपयोग की जा सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल चुनाव कराने में खर्च को घटाना नहीं है, बल्कि इन बचाए गए संसाधनों का इस्तेमाल आमजनता के जीवन स्तर को सुधारने में करना है।दिल्ली में 900 करोड़ की लागत से 21,000 स्मार्ट क्लासरूम बनेंगे।छात्रों को डिजिटल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।एक देश, एक चुनाव से 12,000 करोड़ की बचत संभव।यह राशि देश के विकास कार्यों में लाई जाएगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, यह दोनों फैसले देश की शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे।

रेलवे मंत्रालय का बड़ा फैसला कोविड लॉकडाउन के दौरान घर पर रहे प्रशिक्षु कर्मचारियों को ड्यूटी लाभ, वेतनवृद्धि में मिलेगा सीधा फायदा

प्रशिक्षु रेलकर्मियों के लिए रेलवे मंत्रालय ने एक बड़ा एलान किया है इसके तहत मंत्रालय साफ साफ कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरानप्रशिक्षु रेलकर्मियों द्वारा घर पर बिताया गया समय भी ड्यूटी माना जाएगा, जिससे उनकी तनख्वाह में बढ़ोतरी (इंक्रिमेंट) पर इसका लाभ मिलेगा. मामले में मंत्रालय ने सात जुलाई 2025 को सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को एक सर्कुलर जारी किया है.मंत्रालय की ओर से जारी सर्कुलर में बताया गया है कि यदि ट्रेनिंग के बाद कर्मचारी की नियुक्ति पक्की होती है तो ट्रेनिंग का समय ड्यूटी में गिनाजाता है. चाहे उस दौरान स्टाइपेंड मिल रहा हो या नहीं. वेतन वृद्धि में भी सीधा लाभ मिलेगाबता दें कि यह स्पष्टीकरण तब आया जब एक जोनल रेलवे ने मंत्रालय से पूछा कि कोरोना महामारी के दौरान घर पर बिताया गया समय भी ड्यूटीमाना जाएगा या नहीं. रेलवे मंत्रालय ने बताया कि 2020 में ही ये निर्देश दिए गए थे कि कोविड लॉकडाउन के दौरान जो प्रशिक्षु घर पर रहे, उन्हेंस्टाइपेंड दिया जाएगा. बशर्ते ये अवधि छह महीने से ज्यादा न हो. ऐसे में अब मंत्रालय ने फिर से इस मुद्दे की जांच कर कहा है कि एक बार के विशेषनिर्णय के तहत, कोविड लॉकडाउन के दौरान अधिकतम छह महीने तक घर पर रहे प्रशिक्षु रेलकर्मियों का समय ड्यूटी में गिना जाएगा और इंक्रिमेंट मेंइसका लाभ मिलेगा. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान प्रशिक्षु रेलकर्मियों द्वारा घर पर बिताया गया समय अब ड्यूटी में गिना जाएगा. रेलवे मंत्रालय नेसात जुलाई 2025 को सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी कर यह स्पष्ट किया. इसके साथ ही मंत्रालय ने ये भी बताया कि इससे कर्मियों कोवेतनवृद्धि में भी सीधा लाभ मिलेगा. घर पर रहने की नौबतजिन प्रशिक्षु रेलकर्मियों की ट्रेनिंग के दौरान कोविड लॉकडाउन के कारण घर पर रहने की नौबत आई थी और वे अधिकतम 6 महीने तक घर पर रहे थेउनका वह समय ड्यूटी अवधि के रूप में मान्य होगा. यदि ट्रेनिंग के बाद कर्मचारी की नियुक्ति पक्की हो जाती है. तो ट्रेनिंग का संपूर्ण समय ड्यूटी मेंगिना जाएगा, भले ही उस दौरान उन्हें स्टाइपेंड मिल रहा हो या नहीं।यह निर्णय पहले से लागू निर्देशों के आधार पर ही लिया गया है जिनमें कहा गयाथा कि 2020 में कोविड के समय स्टाइपेंड दिया जाएगा, बशर्ते अवधि 6 महीने से अधिक न हो। रेलवे मंत्रालय ने प्रशिक्षु रेलकर्मियों (Apprentice Railway Employees) के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जिससे हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा. 7 जुलाई 2025 को मंत्रालयद्वारा सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को भेजे गए आधिकारिक सर्कुलर में यह स्पष्ट किया गया है रेल मंत्रालय के 7 जुलाई 2025 के सर्कुलरअनुसार यदि कोई प्रशिक्षु रेलकर्मी कोविड‑19 लॉकडाउन के 2020 की अवधि में घर पर था (छह महीने तक) और बाद में उसकी ट्रेनिंग पूर्णता केबाद स्थायी नियुक्ति हुई. तो उस घर पर बिताए गए समय को ड्यूटी अवधि माना जाएगा तथा वेतन वृद्धि में शामिल किया जाएगा.

PM मोदी की संभावित ब्रिटेन यात्रा ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी, रक्षा और तकनीकी सहयोग भी एजेंडे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत तक ब्रिटेन की यात्रा पर जा सकते हैं. इस दौरान दोनों पक्ष औपचारिक रूप से ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्तव्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर विचार किए जाने की उम्मीद है. राजनयिकसूत्रों ने मंगलवार को बताया कि दोनों पक्ष जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा की तारीखों को अंतिम रूप देनेकी प्रक्रिया में हैं. इससे पहले संकेत मिले थे कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सबसे पहले भारत की यात्रा करेंगे.ब्रिटिश प्रधानमंत्री आ सकते है भारतपता चला है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री इस साल के अंत में भारत आ सकते हैं. सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान भारत औरब्रिटेन द्वारा औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है.मई में भारत और ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते परहस्ताक्षर किए थे. जिससे टैरिफ से 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ब्रिटिश फर्मों के लिए भारत में व्हिस्की कार औरअन्य उत्पादों का निर्यात करना आसान हो जाएगा। साथ ही समग्र व्यापार टोकरी को बढ़ावा मिलेगा. एफटीए के साथ-साथ यूरोपीय संघ छोड़ने केबाद से ब्रिटेन द्वारा किया गया सबसे बड़ा एफटीए किए. प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों समझौतों को दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार, निवेश, विकास औररोजगार सृजन को उत्प्रेरित करने और भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया था. अधिकारियों के अनुसार तीन साल की बातचीत के बाद तय किए गए व्यापार समझौते से सभी क्षेत्रों में भारतीय वस्तुओं के लिए व्यापक बाजार पहुंचसुनिश्चित होने की उम्मीद है. भारत को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों (उत्पाद श्रेणियों) पर टैरिफ उन्मूलन से लाभ होगा. जो लगभग 100 प्रतिशतव्यापार मूल्यों को कवर करता है. साहसिक नया दृष्टिकोण करता है निर्धारितमोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों द्वारा रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार करने के तरीकों का पता लगाने की भी उम्मीद है। दोनों पक्षप्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल (टीएसआई) के कार्यान्वयन पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं. पिछले साल जुलाई में दोनों देशों ने प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहलको अंतिम रूप दिया था, जो दूरसंचार, महत्वपूर्ण खनिजों, अर्धचालकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग के लिएएक साहसिक नया दृष्टिकोण निर्धारित करता है. राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि दोनों पक्ष जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तकप्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा की तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं. इससे पहले संकेत मिले थे कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सबसेपहले भारत की यात्रा करेंगे. पता चला है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री इस साल के अंत में भारत आ सकते हैं.यह समझौता 99% भारतीय उत्पादों पर टैरिफखत्म करने और ब्रिटेन में व्हिस्की, वाहन, मेडिकल डिवाइस इत्यादि पर टैरिफ कम करेगा इसके पहले संकेत मिले थे कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमरसबसे पहले भारत की यात्रा करेंगे. जो संभवतः 2025 के अंत में हो सकती है.

भाजपा नेता जगन्नाथ प्रधान ने किया आत्मसमर्पण, बीएमसी अधिकारी पर हमले के मामले में भेजे गए न्यायिक हिरासत में

भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) के अतिरिक्त आयुक्त रत्नाकर साहू पर हमला करने के मामले में पुलिस ने बृहस्पतिवार शाम को भाजपा नेता जगन्नाथप्रधान को भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया. प्रधान ने भुवनेश्वर में डीसीपी कार्यालय में आत्मसमर्पण किया था. बाद में प्रधान को देर रात निचलीअदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गौरतलब है कि पिछले सप्ताह बीएमसी केअतिरिक्त आयुक्त रत्नाकर को कथित तौर पर उनके कार्यालय से बाहर खींच लिया गया था और बदमाशों के एक समूह ने उन पर हमला कर दियाथा. जिसके बाद, विपक्षी बीजद के नेताओं ने प्रधान की गिरफ्तारी की मांग की थी. सहयोग करने के लिए है तैयारवहीं ओएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था और ओएएस अधिकारी सामूहिकअवकाश पर चले गए थे.भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीना ने बताया कि प्रधान को एफआईआर और साहू तथा आरोपी व्यक्तियों के बयानों केआधार पर गिरफ्तार किया गया है. प्रधान ने कहा कि मैं जांच में सहयोग करने के लिए आया हूं. अगर मेरी गिरफ्तारी से मामला सुलझ सकता है. तो मैंसहयोग करने के लिए तैयार हूं. पुलिस ने बताया कि इस मामले में प्रधान समेत अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है.प्रधान के वकीलअनिल सतपथी ने बताया कि बृहस्पतिवार देर रात निचली अदालत ने प्रधान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. जिसके बाद उन्हें 14 दिनोंकी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इस बीच, प्रधान की गिरफ्तारी के बाद आंदोलनकारी ओएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अपना आंदोलनवापस ले लिया है. ज्योति मिश्रा ने दी जानकारीआंदोलन वापस लिए जाने के बारे में एसोसिएशन की अध्यक्ष ज्योति मिश्रा ने जानकारी दी. भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) के अतिरिक्त आयुक्तरत्नाकर साहू पर हमला करने के मामले में भाजपा नेता जगन्नाथ प्रधान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. भाजपा नेता जगन्नाथप्रधान ने भुवनेश्वर में डीसीपी कार्यालय में आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पिछले सप्ताह रत्नाकर साहू परकथित तौर पर हमला किया गया था जब एक समूह ने उन्हें कार्यालय से बाहर खींचकर मारपीट की. इस हमले के बाद पूरे प्रशासनिक ढांचे में हलचलमच गई. ओएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया था। सैकड़ों ओएएसअधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले गए थे. जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हुआ।भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीना ने पुष्टि की कि जगन्नाथ प्रधानकी गिरफ्तारी एफआईआर, प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के बयानों के आधार पर की गई है. इस मामले में अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार कियाजा चुका है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला ब्राजील का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को ब्राजील के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित कियागया. यह सम्मान ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुखवैश्विक मंचों पर भारत-ब्राजील सहयोग को बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया. मई 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद सेकिसी विदेशी सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया यह 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है. सम्मानित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहामैं अपने मित्र राष्ट्रपति लूला को रियो और ब्रासीलिया में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मुझे ब्राजील का सर्वोच्च सम्मानप्रदान करना मेरे लिए ही नहीं.20 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लिया गया निर्णयबल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है राष्ट्रपति लूला भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी के मुख्य वास्तुकार हैं मैं यह सम्मान हमारीमित्रता और भारत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को समर्पित करता हूं.’उन्होंने कहा कि हमने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियनडॉलर तक ले जाने का निर्णय लिया है. फुटबॉल ब्राजील की आत्मा है, जबकि क्रिकेट भारतीयों का जुनून है. गेंद चाहे बाउंड्री के पार जाए या गोलपोस्ट में 20 बिलियन डॉलर की साझेदारी मुश्किल नहीं है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. पर्यावरणऔर स्वच्छ ऊर्जा दोनों देशों की मुख्य प्राथमिकताएं हैं. इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए आज का समझौता हमारे हरित लक्ष्यों को नई गति देगा. मैंब्राजील में इस वर्ष आयोजित होने वाली COP 30 बैठक के लिए राष्ट्रपति लूला को बधाई देता हूं. रक्षा सहयोग में वृद्धि इसका संकेत है। हमारेबीच गहरे आपसी विश्वास की भावना है. हम अपने रक्षा उद्योग को एक साथ लाने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखेंगे. उल्लेखनीय योगदान के लिए किया गया प्रदानप्रधानमंत्री मोदी को भारत-ब्राजील के द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और वैश्विक मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान केलिए प्रदान किया गया. यह प्रधानमंत्री मोदी को किसी विदेशी सरकार की ओर से प्राप्त 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है. जिसे उन्होंने मई 2014 मेंप्रधानमंत्री पद संभालने के बाद हासिल किया है. यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है. राष्ट्रपति लूला भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी के मुख्य वास्तुकार हैं। मैं यह सम्मान हमारी मित्रता और भारत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को समर्पित करता हूं. फुटबॉल ब्राजील की आत्मा है जबकि क्रिकेट भारत का जुनून। गेंद चाहे बाउंड्री के पार जाए या गोल पोस्ट में, 20 बिलियन डॉलर की साझेदारी कोईमुश्किल लक्ष्य नहीं है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला यह सम्मान न केवल भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है बल्कि भारत-ब्राजील केरणनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्तों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है.ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों नेएक महत्वपूर्ण समझौता किया जो हरित ऊर्जा लक्ष्यों को गति देगा.

यूक्रेन को हथियार सप्लाई रोकने पर पेंटागन और ट्रंप के बीच तनातनी, ट्रंप ने जताई असंतुष्टि पेंटागन ने व्हाइट हाउस को खबर दिए बिना लिया फैसला

International Relations: यूक्रेन को हथियार भेजने के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बताए बिना रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने फैसलाले लिया. इससे नाराज ट्रंप ने पेंटागन के अधिकारी को फटकार भी लगाई। व्हाइट हाउस और पेंटागन के बीच समन्वय की कमी को लेकर समाचारएजेंसी एपी के सूत्रों ने यह चौंकाने वाला दावा किया है. बता दें कि पिछले सप्ताह पेंटागन ने अमेरिका में हथियार की कमी का हवाला देते हुए यूक्रेनमें हथियार भेजने पर रोक लगा दी था. इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बात की थी. 8 जुलाई को ट्रंप ने पेंटागनके फैसले को रद्द करते हुए यूक्रेन को हथियारों की मदद भेजने लिया। सूत्रों की मानें पेंटागन ने व्हाइट हाउस को बिना बताए जो फैसला लिया. इससेट्रंप प्रशासन हैरान है. ट्रंप ने सोमवार रात पेंटागन के फैसले को पलटते हुए माना कि उन्हें अपनी रक्षा करने में सक्षम होना होगा. उन पर इस समय बहुततेज़ हमले हो रहे हैं. इसके साथ ही मामले में जब मंगलवार को एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि इस रोक की मंजूरी किसने दी. हथियार भेजने पर लगाई जा रही है रोकतो ट्रंप नाराज हो गए और बोले कि मुझे नहीं पता आप ही बताओ बता दें कि ये पूरा घटनाक्रम पिछले सप्ताह की है. जब पेंटागन ने कहा था किअमेरिकी भंडार में कमी के कारण यूक्रेन को एयर डिफेंस मिसाइलें सटीक निशाना लगाने वाली तोपें और अन्य जरूरी हथियार भेजने में रोक लगाई जारही है. लेकिन अब ट्रंप ने यह फैसला पलट दिया है और कहा है कि अमेरिका को यूक्रेन को और हथियार भेजने होंगे सूत्रों के मुताबिक, पेंटागन के कुछवरिष्ठ अधिकारियों को भी इस रोक के फैसले से आपत्ति थी. यह रोक रक्षा नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी के जरिए समन्वयित की गई थी। बढ़ते तनावके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर रुख अब सख्त होता दिख रहा है. ट्रंप ने कहा है कि पुतिन बिनाजरूरत के जंग को खींच रहे हैं. जबकि वो इस युद्ध को जल्द खत्म करना चाहते हैं हालांकि शांति वार्ता अब तक ठप पड़ी हुई है. इसको लेकर ट्रंप नेमंगलवार को अपनी कैबिनेट मीटिंग में कहा कि हमें पुतिन की तरफ से बहुत बकवास सुनने को मिलती है अगर सच जानना चाहो तो वो हमेशा बहुतअच्छा बनता है लेकिन उसका कोई मतलब नहीं निकलता. प्रतिबंध लगाने पर दी चेतावनीट्रंप ने रूस की तेल इंडस्ट्री पर नए प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है, लेकिन अभी तक उस पर अमल नहीं किया है. उनका मकसद पुतिन को शांतिवार्ता के लिए मजबूर करना है वहीं अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि ट्रंप ने उन्हें एक नया बिल आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है. इस बिल में उनदेशों से आने वाले सामानों पर 500% टैक्स लगाने का प्रस्ताव है जो अब भी रूसी तेल खरीद रहे हैं। इसका सीधा असर चीन और भारत जैसे देशों परपड़ सकता है. जो बड़ी मात्रा में रूस से तेल लेते हैं। यूक्रेन को अमेरिका से हथियार सप्लाई के मामले में नाटकीय बदलाव हुआ है। बीते एक जुलाईको अमेरिकी हथियार सप्लाई बंद किए जाने की खबर आई. 8 जुलाई को ट्रंप ने इस फैसले को बदलने का एलान किया। अब सूत्रों ने दावा किया हैकि व्हाइट हाउस को बताए बिना पेंटागन ने हथियार सप्लाई रोक दी थी। इस फैसले से राष्ट्रपति ट्रंप बेहद हैरान हुए और उन्होंने नाराजगी भी प्रकट की. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि ट्रंप ने एक नया बिल आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है. जिसमें उन देशों से आने वाले सामानों पर 500% टैक्सलगाने का प्रस्ताव है जो अभी भी रूसी तेल खरीद रहे हैं. इस प्रस्ताव का असर चीन और भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है जो बड़ी मात्रा में रूस सेतेल आयात करते हैं.

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने केजरीवाल की नोबेल पुरस्कार मांग को बताया ‘हास्यास्पद’, उठाए कई गंभीर आरोप

New Delhi: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की अरविंद केजरीवाल द्वारा खुद के लिए नोबल पुरस्कार की मांग करना हास्यास्पद हैएक भद्दा मजाक है. जैसा की हम जानते हैं की केजरीवाल युवा काल से ही विदेशी फंडों से देश में आराजकता फैलाते आये हैं. उनको मैगेसय अवार्डमिलना, उनके अमरीका की फोर्ड फाउंडेशन से रिश्ते सब संदेहास्पद रहे हैं. वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की दिल्ली वाले केजरीवाल की नोबल पुरस्कारकी चाहना को सुन कर स्तब्ध हैं केजरीवाल जान लें की उन्हे नोबल पुरस्कार अवश्य मिलता यदि अकर्मण्यता, आराजकता एवं भ्रष्टाचार के लिएपुरस्कार देने की श्रेणी होतीं.केजरीवाल ध्यान रखें की दिल्ली वाले उनके महिला विरोधी कृत्यों जैसे असहाय महिला पेंशन घोटाला, महिला सुरक्षा से जुड़ पैनिक बटन घोटाला, महिला सहयोगियों से मारपीट के कृत्य, दिल्ली में जलबोर्ड घोटाला, निजी कम्पनियों से मिलकर किये घोटाले, परिवहन घोटाले, लोकनिर्माण विभागमें साढू के साथ किए घोटाले, स्कूल रूम घोटाले, कोविड़काल घोटाले, जासूसी घोटाले शराब पॉलिसी घोटाले के आलावा शीशमहल निर्माण घोटालेको भूले नही है पर हमे केजरीवाल के लिए खेद है की इन घोटालों के लिए नोबल पुरस्कार नही जेल मिलती है.विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह बयान है महत्वपूर्णवैसे दिल्ली वाले उनकी गणतंत्र दिवस 2014 एवं स्वाधीनता दिवस 2024 से पूर्व एवं उपराज्यपाल निवास मे घुस कर की आराजकता भी याद है परइनके लिए भी नोबल पुरस्कार नही मिलता इन सबकी सजा दिल्ली वाले फरवरी 2025 में दे चुके.सचदेवा ने कहा कि “दिल्ली वालों को केजरीवालके इन घोटालों को भुलाना असंभव है लेकिन हमें खेद है कि इन कृत्यों के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं, बल्कि जेल मिलनी चाहिए. उन्होंनेकेजरीवाल की 2014 के गणतंत्र दिवस और 2024 के स्वतंत्रता दिवस से पहले उपराज्यपाल निवास में घुसकर की गई आराजकता को भी याददिलाया और कहा कि इसके लिए भी नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता.वीरेन्द्र सचदेवा ने आगे कहा दिल्ली वाले केजरीवाल की नोबेल पुरस्कार कीचाहना सुन कर स्तब्ध हैं. अगर अकर्मण्यता, आराजकता और भ्रष्टाचार के लिए पुरस्कार दिया जाता तो केजरीवाल को अवश्य मिलता.सचदेवा नेकेजरीवाल द्वारा 2014 के गणतंत्र दिवस और 2024 के उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने फरवरी 2025 में इस सबका जवाब वोट के जरिए देदिया है. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है और दिल्ली की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह बयानमहत्वपूर्ण माना जा रहा है.