प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति ने रचा नया इतिहास: सुधांशु त्रिवेदी

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की विदेश यात्रा को ऐतिहासिक और देशकी कूटनीति के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत की विदेश नीति पूरी दुनिया में एक नई दिशा और पहचान बना चुकी है, जिसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को जाता है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि हमारी सरकार के आने से पहले भारत को BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) समूह में सबसे कमज़ोर कड़ी माना जाता था, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। उन्होंने कहा, आज भारतBRICS का सबसे उज्ज्वल और प्रभावशाली केंद्र बन चुका है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जोBRICS और क्वाड (चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद) दोनों का सदस्य है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब किसी एक खेमे तक सीमित नहीं है, बल्किविश्व मंच पर संतुलित, बहुपक्षीय और प्रभावी भूमिका निभा रहा है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा, एक समय था जब भारत गुटनिरपेक्ष देशों में गिना जाता था, लेकिन आज भारत सर्वसमावेशी नेतृत्व की ओर अग्रसर है। हम अबकेवल विश्व में अपनी पहचान दर्ज नहीं करवा रहे, बल्कि विश्व के निर्णयों में भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक२७ देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हो चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मंच पर भारत के प्रति आदर, विश्वास और सहयोग कीभावना कितनी प्रबल हो चुकी है।सांसद त्रिवेदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की हाल की यात्रा से भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयांमिली हैं। उन्होंने विदेश नीति को आत्मनिर्भर भारत और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्शों से जोड़ते हुए कहा कि भारत अब विश्व को दिशा देने वाला राष्ट्रबन चुका है। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की छवि एक ऐसे देश के रूप में उभरी है जो अपने सिद्धांतों सेसमझौता किए बिना, दुनिया के साथ मिलकर कार्य कर सकता है। उन्होंने अंत में यह संदेश दिया कि भारत अब सिर्फ एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित हो चुकाहै। प्रधानमंत्री की यह यात्रा इस दिशा में एक और बड़ा कदम है।
भाजपा की दलित और कर्मचारी विरोधी मानसिकता फिर हुई उजागर,आप पार्षदों ने निगम सदन में उठाई मज़दूरों की आवाज़, मेयर ने बैठक स्थगित की

दिल्ली नगर निगम के सदन की बैठक में आज उस समय हंगामेदार दृश्य देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने नगर निगम के 12 हज़ारअनुबंधित कर्मचारियों को स्थायी करने की माँग ज़ोर-शोर से उठाई। यह कर्मचारी वर्षों से नियमितीकरण की माँग कर रहे हैं, लेकिन हर बार उनकीआवाज़ को अनसुना किया जाता है। बैठक में जब आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने इस मुद्दे पर चर्चा की माँग की और इसे सदन में प्रमुखता से उठाया, तो मेयर राजा इक़बाल सिंह ने बिनाकोई ठोस उत्तर दिए बैठक को ही स्थगित कर दिया। यह निर्णय साफ़ दर्शाता है कि भाजपा को न तो मज़दूरों की चिंता है और न ही दलित समाज केसाथ कोई संवेदनशीलता। 12 हज़ार मज़दूरों में अधिकतर दलित यह जानकारी सामने आई है कि जिन 12 हज़ार कर्मचारियों को स्थायी करने की माँग की जा रही है, उनमें बहुसंख्या दलित समुदाय से है। वर्षों सेसफाई कर्मचारी, दफ्तरी, माली, ड्राइवर जैसे पदों पर कार्यरत ये मज़दूर न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व से वंचित हैं। लेकिन भाजपाशासित निगम प्रशासन लगातार इनकी उपेक्षा करता आया है। भाजपा का दलित विरोधी चेहरा फिर सामने – आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से ही दलितों और मेहनतकश तबके के विरोध मेंकाम करती रही है। आज जब उनके स्थायीकरण की माँग सदन में उठाई गई तो भाजपा के मेयर ने न केवल चर्चा से बचने की कोशिश की, बल्किजनहित से जुड़ी बैठक को ही बीच में रोक दिया। आप पार्षदों ने यह स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। वे जब तक इन कर्मचारियों को उनका हक़ नहीं दिलवा देते, तब तक सदन औरसड़क – दोनों पर संघर्ष जारी रखेंगे।जनता से किया धोखा – भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि निगम के अनुबंधित कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा, लेकिन सत्ता में आतेही वे वादे भूल गए। आज जब दलित और मेहनतकश कर्मचारी उम्मीद लेकर सदन की ओर देख रहे थे, तब उन्हें सिर्फ़ निराशा और उपेक्षा मिली।आज की घटना ने एक बार फिर साफ़ कर दिया कि भाजपा की प्राथमिकता में दलितों और मज़दूरों का स्थान नहीं है। आम आदमी पार्टी ने यह संकल्पलिया है कि वह सदन के भीतर और बाहर, दोनों जगह इन 12 हज़ार कर्मचारियों के हक़ की लड़ाई लड़ेगी और उन्हें न्याय दिलाकर रहेगी।
रंगमहल की राजनीति जनता से वादे और सत्ता में विलासिता अनिल झा

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर से सत्ता और सादगी को लेकर बहस तेज़ हो गई है। आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा ने राज्य सरकारपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो सरकार जनता के कल्याण के नाम पर सत्ता में आई थी, वही अब शाही जीवनशैली की ओर बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि यह वही पार्टी है जो 27 वर्षों के बाद दिल्ली में सत्ता में लौटी है, और जिसे अब तक केवल 5 महीने ही हुए हैं। लेकिन इतने कम समयमें ही सरकार का असली चेहरा सामने आने लगा है। जो नेता विपक्ष में रहते हुए जनता के धन के दुरुपयोग का विरोध करते थे, वे अब खुद उसी राहपर चल पड़े हैं।मायामहल से रंगमहल तक – अनिल झा ने खुलासा किया कि दिल्ली में 9, शामनाथ मार्ग स्थित बंगले में बड़े पैमाने पर निर्माण और बदलाव का कामचल रहा है। उन्होंने कहा, इस बंगले को कपिल मिश्रा जी के नाम पर आवंटित किया गया है, जिसमें पूरी खिड़कियां, बाथरूम आदि बदले जा रहे हैं।शौचालय में एसी और टीवी लगाने की योजना बन रही है, ताकि ‘मायामहल की गुप्त योजनाएं’ आसानी से बन सकें। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा किजब ये नेता विपक्ष में थे तो कहते थे कि जनता का पैसा फालतू खर्च किया जा रहा है, लेकिन अब खुद शाही ठाठ में डूबे हुए हैं। टेंडर रद्द, अनुमान करोड़ों का – अनिल झा ने यह भी सवाल उठाया कि मायामहल निर्माण का जो टेंडर केवल 60 लाख रुपये का था, उसे रद्द कर दियागया। उन्होंने आशंका जताई कि शायद मुख्यमंत्री को यह रकम कम लगी और अब उसी पर 5–7 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकते हैं। उन्होंने कहा कियह जनधन का खुला दुरुपयोग है, और यह बताता है कि सरकार की प्राथमिकताएं जनता नहीं, बल्कि विलासिता है। सामाजिक मूल्यों को किनारे रखा गया अनिल झा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले समाजिक मूल्यों, पारदर्शिता और जनसेवा की बातें की थीं। लेकिन आज उन्हींमूल्यों को दरकिनार कर दिया गया है। इस सरकार में क्या मिला? मंत्री अपना रंगमहल बना रहे हैं, 14-14 गाड़ियों में घूम रहे हैं और दिल्ली में जातिऔर धर्म के आधार पर कार्यवाही कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जनता के लिए जो काम होने चाहिए थे, वे अब सत्ता के वैभव में दब गए हैं। दिल्लीकी सड़कों पर बारिश से लोग परेशान हो रहे हैं, लेकिन सरकार शौचालय में टीवी लगवाने की योजनाएं बना रही है। सत्ता के केंद्र पर सवाल – अनिल झा ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री यह तर्क देती हैं कि उन्हें जो कार्यालय मिला वह पिछली सरकार का बना है, और वह इसलिए नया कार्यालय बनवा रही हैं, तो फिर उन्हें उसी पुराने कार्यालय से भी काम नहीं करना चाहिए। सत्ता में आने से पहले कहते थे हमेंजैसा मिलेगा सरकार चला देंगे – लेकिन आज वही सरकार जनता के पैसों से नया ‘रंगमहल’ बना रही है।अनिल झा का यह आरोप स्पष्ट करता है कि सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी की नीतियों और व्यवहार में भारी बदलाव आया है। सरकार केशुरुआती महीनों में ही जिस तरह से शाही खर्चे सामने आ रहे हैं, वह जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात जैसा है।दिल्ली की जनता अब यह सवाल पूछ रही है – क्या हमने जनसेवा के लिए वोट दिया था, या सत्ता के रंगमहलों के लिए? यह समय है जब जनता कोसजग होना होगा और सत्ता से जवाब मांगना होगा.
हर हादसे के बाद एक ही कहानी-‘मुआवज़ा दो और मामला रफा-दफा करो’,विधायक जिग्नेश मेवानी और लालजी देसाई ने उठाए सरकार सेसवाल

गुजरात में एक बार फिर पुल गिरने से कई लोगों की जान चली गई और कई लोग अब भी लापता हैं। इस हादसे ने फिर से सरकार की कार्यशैली औरलापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जब गुजरात के लोग जान गंवा रहे हैं, उस समय प्रधानमंत्री विदेश में ढोल-नगाड़े बजा रहे हैं और मस्तीकर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जनता की जान की परवाह नहीं है। भ्रष्टाचार का खेल – कांग्रेस सेवा दल का कहना है कि गुजरात में जिन कंपनियों को पहले खराब काम की वजह से ब्लैकलिस्ट किया गया था, उन्हेंफिर से काम दिया जा रहा है, क्योंकि वे बीजेपी को चुनाव के समय चंदा देती हैं। यही वजह है कि पुल, सड़क और डैम जैसी ज़रूरी चीजें समय से नहींबनतीं या बहुत घटिया तरीके से बनाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 4 साल में गुजरात में कम से कम 16 बार पुल गिरे हैं, लेकिन आज तक किसी बड़े अफसर या नेता को सज़ा नहींमिली,जनता की जान की कीमत सिर्फ 4 लाख?कांग्रेस नेता ने कहा – गुजरात में जैसे सरकार ने तय कर लिया है कि दुर्घटना हो, लोग जान गंवाएं और फिर उनके परिवार को 4 लाख का मुआवज़ादेकर चुप करा दिया जाए। क्या एक इंसान की जान की कीमत सिर्फ 4 लाख है? कांग्रेस की मांग – कांग्रेस ने सरकार से माँग की है कि एक विशेष जांच दल (SIT) बनाकर सभी 16 हादसों की जांच करवाई जाए। साथ ही, हाल मेंजो पुल गिरा है, उसकी भी पूरी जांच हो। अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से इस्तीफे की माँगकरेगी। पुराने हादसों का ज़िक्रकांग्रेस सेवा दल ने कुछ पुराने बड़े हादसों की याद दिलाई,मोरबी पुल हादसा- 135 लोगों की मौत,राजकोट में गेमिंग ज़ोन में आग- कई लोगों कीजान गई,वडोदरा में नाव पलटी: बच्चों समेत 14 लोगों की मौत,डीसा की फैक्ट्री में आग- 22 लोगों की मौत,सूरत में तक्षशिला अग्निकांड- कई छात्रमरे. इन सभी घटनाओं में सरकार की लापरवाही सामने आई, लेकिन न कोई बड़ी गिरफ्तारी हुई और न ही कोई सख़्त कदम। अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध कांग्रेस सेवा दल ने कहा कि जिन पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का नाम जुए, शराब और ड्रग्स से जुड़ी कमाई में आता है, उन्हीं को इन हादसों कीजांच दी जाती है। यह साफ दिखाता है कि सरकार गंभीर नहीं है। जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है गुजरात में अब लोग कहने लगे हैं – रोड नहीं, तो टोल नहीं। यानी जब सड़कें ही नहीं हैं, तो टोल टैक्स क्यों दिया जाए? लोग सरकार से नाराज़ हैं औरजगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं।कांग्रेस सेवा दल ने साफ कहा – अब सिर्फ बयान नहीं होंगे, अब जनांदोलन होगा। जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती और ईमानदारी से जांचनहीं होती, कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी।गुजरात में पुल गिरना अब आम बात हो गई है। हर बार सरकार एक ही बात कहती है – दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा, लेकिन आज तक कोई बड़ादोषी पकड़ा नहीं गया। कांग्रेस सेवा दल ने जनता की आवाज़ उठाई है और सरकार से जवाब माँगा है। अब देखना यह है कि क्या सरकार कोई सख़्तकदम उठाएगी या फिर एक और हादसा होने का इंतज़ार करेगी?
लोकदल का ऐलान बिहार में लोकतंत्र की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन के साथ पूरी मजबूती से उतरेगा मैदान में, “लोकतंत्र पर मंडरा रहा हैखतरा” लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने साधा निशाना

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने आगामी बिहार चुनाव को लेकर कहा है कि लोकसभा चुनावों में जिस प्रकार इंडिया गठबंधन में तीसरीसबसे बड़ा पार्टी ने निर्णायक और सशक्त भूमिका निभाई, उसी प्रकार अब आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में भी लोकदल पूरी प्रतिबद्धता के साथINDIA गठबंधन के साथ मिलकर लोकतंत्र की रक्षा करेगा. लोकदल का विश्वास है कि बिहार की जनता सच का साथ देगी और लोकतंत्र को बचानेके इस संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाएगी. सुनील सिंह ने आगे कहा है कि बिहार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कास्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है उन्होंने कहा कि बिहार में जो भी गड़बड़ियां हुई हैं उनकी निष्पक्षजांच होनी चाहिए, चुनाव आयोग कर रहा है सरकारी एजेंसी की तरह व्यवहारसिंह ने आरोप यह भी लगाया है कि यदि चुनाव आयोग खुद को एक “सरकारी एजेंसी” की तरह व्यवहार करेगा और निष्पक्षता के बजाय “राजनीतिकदबाव” में काम करेगा. तो यह न केवल लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन होगा. बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ होगा. लोकदलअध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया है कि जैसे लोकसभा चुनाव में जनभावनाओं के अनुरूप मजबूत रणनीति बनाई गई, वैसी ही रणनीति अब बिहार चुनाव में भीअपनाई जाएगी। हमारा संकल्प है. लोकदल बिहार बचाएगा, लोकतंत्र बचाएगा. इसके साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली परसुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सिंह ने यह भीमांग की कि बिहार में हुई चुनावी गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि अगर चुनाव आयोग एक “सरकारी एजेंसी” कीतरह व्यवहार करता है और निष्पक्षता छोड़कर राजनीतिक दबाव में काम करता है, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और संविधान की भावना दोनों केखिलाफ है. लोकदल अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे लोकसभा चुनावों में जनभावनाओं के अनुरूप एक मजबूत रणनीति तैयार की गई थी. वैसेही अब बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भी ठोस रणनीति बनाई जा रही है.
आपातकाल को बताया ‘क्रूरता का काल’, शशि थरूर का कांग्रेस पर बड़ा हमला “कांग्रेस की नीतियों पर उठाए सवाल”

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़े हुए हैं इस बार उन्होंने कांग्रेस को आपातकाल को लेकर घेरा है. उन्होंने कहाकि आपातकाल में अनुशासन और व्यवस्था के नाम पर क्रूरता की गई. आपातकाल को भारत के इतिहास का महज काला अध्याय नहीं मानना चाहिए. बल्कि इसके सबक को पूरी तरह से समझना जरूरी है उन्होंने आपातकाल में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के कामों को लेकर सवाल उठाए.एकमलयालम अखबार में प्रकाशित लेख में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 25 जून 1975 और 21 मार्च 1977 के बीच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वाराघोषित आपातकाल के काले युग को याद किया. उन्होंने कहा कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए किए गए प्रयास क्रूरता में बदल दिए गए. जिन्हेंउचित नहीं ठहराया जा सकता.कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य शशि थरूर ने कहा कि इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियानचलाया. हिंसा और की गई जबरदस्तीयह आपातकाल का गलत उदाहरण बना. ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती की गई. नई दिल्ली जैसेशहरों में झुग्गियों को बेरहमी से ध्वस्त कर दिया गया और उन्हें साफ कर दिया गया हजारों लोग बेघर हो गए. उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दियागया.उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. यह एक बहुमूल्य विरासत है जिसे निरंतर पोषित और संरक्षित किया जाना चाहिए. इसे दुनिया भर के लोगों के लिए एक स्थायी अनुस्मारक के रूप में काम करने दें. आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अधिकआत्मविश्वासी, अधिक विकसित और कई मायनों में अधिक मजबूत लोकतंत्र हैं फिर भी आपातकाल के सबक अभी भी चिंताजनक रूप से प्रासंगिक हैं. प्रलोभन हो सकता है विभिन्न रुपों में प्रकटथरूर ने कहा कि सत्ता को केंद्रीकृत करने, असहमति को दबाने और सांविधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने का प्रलोभन विभिन्न रूपों में फिर सेप्रकट हो सकता है. अक्सर ऐसी प्रवृत्तियों को राष्ट्रीय हित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जा सकता है. इस लिहाज से आपातकाल एक कड़ीचेतावनी है लोकतंत्र के रक्षकों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है उन्होंने इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी की नीतियों पर भी सवाल उठाए।विशेष रूप से जबरन नसबंदी अभियान और झुग्गी बस्तियों के निर्मम ध्वस्तीकरण को लेकर उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों मेंमनमाने लक्ष्य पूरे करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती की गई, जबकि शहरी इलाकों में हजारों लोगों को बेघर कर दिया गया, बिना उनके पुनर्वास कीव्यवस्था किए. थरूर ने लोकतंत्र की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि “लोकतंत्र को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. यह एक बहुमूल्य विरासत हैजिसे लगातार पोषित और संरक्षित करना चाहिए.
औद्योगिक विकास मंत्री नंदी का बड़ा आरोप, नोएडा में 2007 के रेट पर 2018 में बांटी गई ज़मीन “करोड़ों का नुकसान”

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने अपने लिखित पत्र में विभाग पर गड़बड़ियों के तमाम आरोप लगाए हैं. ऐसे ही एक मामले कीशिकायत में कहा है कि नोएडा की एक कंपनी को करोड़ों रुपये का अनुचित फायदा पहुंचाया गया और शिकायतों के बावजूद चुप्पी साध ली गई. उच्च पदस्थ सूत्रों ने मंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. नंदी ने अपने शिकायती पत्र में अफसरशाही पर मनमानेपन का आरोप लगाते हुएकहा गया है कि एम्बिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कम्पनी को 18 जुलाई 2007 को नोएडा प्राधिकरण ने एक जमीन आवंटित की थी. जिसकी लीज डीड वर्ष2018 को की गई. बीच के समय को जीरो पीरियड का अनुचित लाभ दिया गया ताकि कंपनी को ब्याज व दंड न देना पड़े. इस प्रकार आवंटी को2018 में 11 वर्ष बाद 2007 की दर पर भूखंड मिल गया. इसके बाद भी वर्ष 2022 तक आवंटी ने सैकड़ों करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान नहींकिया और न ही निर्माण के लिए कोई मानचित्र दाखिल किया. साजिश के विरुद्द नहीं उठाया कोई कदमइतना ही नहीं आवंटी ने भूखंड एक थर्ड पार्टी को बेच दिया और सैकड़ों करोड़ का प्रीमियम हड़प लिया. पत्र में कहा गया है कि इस साजिश के विरुद्धकोई कदम नहीं उठाया गया. पत्रावली पर आवंटन निरस्त कर कब्जा प्राप्त करने के आदेश तो हुए लेकिन कार्यवाही पर चुप्पी साध ली गई.अधूरी पड़ी(लीगेसी स्टाल्ड) ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा करने के लिये सह विकासकर्ता का शासनादेश 21 दिसंबर 2023 को किया गया था. आरोपलगाया गया है कि इस मामले की अनियमितताओं पर पर्दा डालने और थर्ड पार्टी को सह विकासकर्ता के रूप में दिखाने के लिये इस प्रकरण कोप्राधिकरण की बोर्ड बैठक के एजेंडा में शामिल कर लिया गया. जबकि भूखण्ड के थर्ड पार्टी को ट्रांसफर व मानचित्र पास कराने की तारीखों (दिसम्बर2022 व अप्रैल 2023) तक लीगेसी स्टाल्ड ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए शासनादेश अस्तित्व में ही नहीं था. अभी भी इस प्रोजेक्ट में फ्लैटकी रजिस्ट्रियां की जा रहीं हैं. दी गई 79000 वर्गमीटर जमीनमंत्री ने एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) नीति के तहत फूजी सिल्वरटेक कंपनी को बैकडेट से लाभ देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनीको बीम कालम बनाने के लिए यमुना एक्सप्रेस वे के पास करीब 79000 वर्गमीटर जमीन दी गई. एफडीआई नीति के तहत जमीन पर 75 फीसदीसब्सिडी की मंजूरी दी गई. लेकिन कंपनी ने 100 करोड़ की अर्हता के सापेक्ष 15 करोड़ निवेश किए। बाद में मंत्रिपरिषद ने इस नीति में संशोधन करएफसीआई यानी फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट को भी एफडीआई पालिसी में शामिल कर दिया. आरोप है कि कंपनी को 75 फीसदी सब्सिडी काफायदा नीति में संशोधन की तारीख से पहले यानी बैकडेट से दिया गया. विभागीय सूत्रों के मुताबिक ये फैसला लिया ही नहीं गया है बल्कि कैबिनेटमें भेजा गया है. वहीं शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने साफ कहा कि पत्र में लगाए गए मंत्री के आरोप पूरी तरह से आधारहीन हैं. औद्योगिक विकास मंत्रीनंद गोपाल गुप्ता नंदी ने अपने लिखित पत्र में कहा है कि नोएडा में वर्ष 2007 के रेट पर 2018 में बेच दिया भूखंड। इससे करोड़ों का नुकसान हुआहै.
उत्तराखंड में हाइब्रिड कारों को टैक्स छूट पर ब्रेक, टाटा-महिंद्रा के विरोध से फैसला लटका “सरकार कर रही पुनर्विचार”

यूपी की तर्ज पर उत्तराखंड में हाइब्रिड कारों को वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट देने का फैसला विरोध के बीच लटक गया है. टाटा और महिंद्रा ने इसफैसले को नुकसानदायक बताते हुए सरकार से वापस लेने की मांग की है. जिस पर सरकार अब पुनर्विचार कर रही है कैबिनेट ने जून के पहले सप्ताह मेंउत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम में केंद्रीय मोटरयान (9वां संशोधन) नियम 2023 के नए नियम 125-एम के तहत केवल प्लग इनहाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार व स्ट्रांग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार को वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट पर मुहर लगाई थी. यह छूट वित्तीय वर्ष 2025-26 केलिए वैध की गई थी टैक्स में छूट के बाद हाइब्रिड कारें यहीं पंजीकृत होतीं. इससे राज्य को वाहन कर का नुकसान होता, लेकिन इन कारों की बिक्रीपर लगने वाला 28 से 43 प्रतिशत जीएसटी राज्य को मिलता. राज्य में किया जा चुका है भारी निवेशटोयोटा, मारूति, होंडा हाइब्रिड कारें बनाती हैं. लेकिन टाटा, महिंद्रा जैसी कंपनियों की इस तरह की कारें नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, टाटा और महिंद्राने राज्य में भारी निवेश किया हुआ है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने सरकार को बताया कि कैसे इस फैसले से उनका कारोबार प्रभावित होगा. हाइब्रिड कारोंके प्रति ग्राहकों का रुझान बढ़ेगा, जिससे इन दोनों कंपनियों की ईवी कारों का बाजार भी प्रभावित होगा. लिहाजा, कंपनी प्रतिनिधियों ने इस फैसलेको वापस लेने की मांग की है. बताया जा रहा कि राज्य में निवेश करने वाली इन कंपनियों के प्रस्ताव को सरकार ने गंभीरता से लिया है. आने वालेसमय में कैबिनेट में इस फैसले को रद्द करने का प्रस्ताव आ सकता है. इस पर मंथन चल रहा है।परिवहन विभाग के अफसरों का तर्क था कि अभी तकयूपी समेत कई राज्य इलेक्ट्रिक वाहनों की तर्ज पर हाइब्रिड कारों को भी वाहन टैक्स में छूट दे रहे हैं. राज्य को हो रहा है नुकसानइस कारण राज्य की ज्यादातर हाइब्रिड कारों का पंजीकरण उत्तराखंड के बजाय उन राज्यों में हो रहा है. जिससे वाहन स्वामियों को तीन से साढ़े तीनलाख रुपये का लाभ होता है. जिससे हमारे राज्य को नुकसान होता है. पिछले एक साल में राज्य में केवल 750 हाइब्रिड कारों का पंजीकरण हुआ था. जो छूट लागू होने के बाद आगामी वर्ष में 2000 पार जाने का अनुमान था.ऑटोमोबाइल कंपनियों के विरोध से हाइब्रिड कारों पर टैक्स छूट लटकगई. जून में कैबिनेट ने टैक्स छूट देने का निर्णय लिया था अब वापस लेने की तैयारी है हालांकि, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों ने सरकार के इसनिर्णय को गैर-प्रतिस्पर्धी बताया है. उनका तर्क है कि चूंकि उनके पास इस समय हाइब्रिड तकनीक आधारित कारें नहीं हैं. इसलिए यह नीति टोयोटा, मारुति और होंडा जैसी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाएगी. इससे उनकी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बिक्री भी प्रभावित हो सकती है.
रेखा गुप्ता के बंगले के रेनोवेशन का टेंडर रद्द, विपक्ष के हमलों के बाद PWD का यू-टर्न स्मार्ट “टीवी से सीसीटीवी तक का खर्च अब टेंडर हुआ कैंसिल”

Dellhi latest News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बंगले के रेनोवेशन के लिए निकला टेंडर रद्द कर दिया गया है. पीडब्ल्यूडी विभाग ने पत्रजारी कर प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है. टेंडर जारी होने के बाद से ही आम आदमी पार्टी (आप) के साथ-साथ कांग्रेस लगातार दिल्ली सरकारपर हमलावर थी। पीडब्ल्यूडी विभाग ने बंगले के रेनोवेशन के लिए 60 लाख रुपये का टेंडर जारी किया था. आप ने तो सीएम रेखा गुप्ता के बंगले को’माया महल’ नाम दे दिया था. जानकारी के मुताबिक रेखा गुप्ता को दो बंगले आवंटित हुए थे. इनमें से पीडब्ल्यूडी ने बंगला नंबर-1 के लिए रेनोवेशनका टेंडर जारी किया था. यहां मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद रहेंगी वहीं उनका दूसरा बंगला, बंगला नंबर-2 फिलहाल कैंप ऑफिस के तौर पर इस्तेमालकिया जाएगा. बंगला नंबर-1 को लेकर खास बात यह है कि पहले यहां दिल्ली के उपराज्यपाल का दफ्तर था. कमरों को बांटा गया था केबिनों मेंइसके चलते बंगले में कमरों को अलग-अलग केबिन में बांट दिया गया था. एक-एक कमरे को दो या तीन वर्गों में किया गया था. ताकि यहां सरकारीकर्मियों के लिए क्यूबिकल्स बनाए जा सकें. ऐसे में जब रेखा गुप्ता ने जून में इस बंगले को अपना निवास बनाए जाने के लिए चुना था तब अनुमानलगाया जा रहा था कि इसका रेनोवेशन नए सिरे से कराया जाएगा. गौरतलब है कि रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक अपने परिवार केसाथ अपने शालीमार बाग स्थित निजी निवास पर रह रही हैं. एक मीडिया ग्रुप ने कुछ समय पहले ही जानकारी दी थी कि रेखा गुप्ता पहले लुटियंसदिल्ली में अपने रहने के लिए घर ढूंढ रही थीं. लेकिन पीडब्ल्यूडी के पास केंद्र सरकार के प्रबंधन के अंतर्गत आने वाले बंगलों से बदलने के लिए कोईढंग का बंगला नहीं था. पहले जारी हुए टेंडर के मुताबिक, 60 लाख रुपये का जो टेंडर जारी हुआ था उसमें खर्च किसी निर्माण कार्य में नहीं होना था. बल्कि सिर्फ इलेक्ट्रिकल और इंटीरियर फिटिंग से जुड़े काम कराए जाने थे. यूपीएस सिस्टम भी लगाना किया गया था तयरिपोर्ट्स में कहा गया है कि राजनिवास पर सीएम रेखा गुप्ता को जो बंगला मिला है, वह टाइप-7 का बंगला है. इसमें चार बेडरूम, ड्रॉइंग रूम, बिजनेसहॉल, एक कॉमन हॉल, आगंतुकों के लिए एक विजिटर हॉल, हाउस हेल्प के लिए कमरा, सभी में बाथरूम, एक बड़ा लॉन, किचन और घर के पीछेएक बैक यार्ड शामिल है. पहले के टेंडर के मुताबिक, जिस बंगले का रेनोवेशन होना था. वहां पहले चरण का टेंडर जारी किया गया था. यहां 2 टनवाले 14 एसी लगाए जाने थे, जिनका खर्च 7.7 लाख रुपये तय किया गया था इसके अलावा पांच स्मार्ट टीवी लगाए जाने थे, जिनके लिए 9.3 लाख रुपये दर्शाए गए थे इसके अलावा 6.03 लाख की लाइटें लगाई जानी थीं. बंगले में सुरक्षा के लिए 14 सीसीटीवी भी लगाए जाने थे, जिनकेलिए 5.73 लाख रुपये अलग से तय किए गए थे. दूसरी तरफ बंगले में छत पर 23 प्रीमियम पंखे (सीलिंग फैन) लगने थे. इन पर करीब 1.8 लाखरुपये का खर्च तय किया गया था इसके अलावा 16 दीवार वाले फैन लगने थे. बंगले में बिजली की निर्बाध व्यवस्था के लिए दो लाख रुपये सेयूपीएस सिस्टम लगाना भी तय किया गया था.
ओवरएज वाहनों पर फ्यूल बैन 1 नवंबर तक टला, दिल्ली सरकार ने फैसले का किया स्वागत “AAP ने बताया जनविरोधी”

Dellhi Goverment latest Update: दिल्ली सरकार ने सेंटर फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) द्वारा ओवरएज वाहनों पर ईंधन प्रतिबंधके कार्यान्वयन को 1 नवंबर तक स्थगित करने के फैसले का स्वागत किया.मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह जनहित में लिया गया सराहनीय निर्णयहै. यह फैसला पर्यावरण संबंधी चिंताओं और नागरिकों की आजीविका के प्रति संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। वहीं आम आदमीपार्टी (आप) लगातार इस आदेश की आलोचना कर रही है. दिल्ली आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा इन्होंने (दिल्ली की भाजपा सरकार) सेंटर फॉरएयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को चिट्ठी लिखकर कहा कि वे जो कर रहे हैं ठीक कर रहे हैं. हम सीएक्यूएम के साथ हैं और इसी तरह प्रदूषणकम होगा. ईओएळ वाहनों में तत्काल कार्रवाईसीएक्यूएम ने कहा है कि 1 नवंबर से ईएलवी वाहनों पर बैन दिल्ली समेत गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और सोनीपत मेंलगेगा. इस पर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इन्होंने दिल्ली और आसपास के सभी लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. राजधानी में 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर लगी ईंधनबंदी फिलहाल हटा दी गई है. यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग(सीएक्यूएम) की 24वीं बैठक में मंगलवार को लिया गया. ऐसे में आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन(एएनपीआर) कैमरा सिस्टम या ईंधन पंप स्टेशनों पर स्थापित अन्य ऐसी प्रणालियों के माध्यम से पहचाने गए सभी समय पूरा कर चुके वाहन(ईओएल) वाहनों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और सोनीपत के पांच उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में 1 नवंबर, 2025 और शेष एनसीआर में 1 अप्रैल, 2026 से ईंधन भरने से मना कर दिया जाएगा.आयोग ने कहा है कि ऐसे ईओएल वाहनों के संबंध में तत्कालकानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आरवीएसएफ नियम, 2021 और अन्य मौजूदा प्रावधानों के अनुसार जब्त करना और आगे का निपटान करनाशामिल है. जनशक्ति का किया जाए प्रशिक्षणइसके अलावा, दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों के परिवहन विभाग को (एएनपीआर) प्रणाली की उचित स्थापना और संचालन सुनिश्चित करनेका निर्देश दिया गया है. परिवहन विभागों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि एएनपीआर प्रणाली का परीक्षण किया जाए औरसमय पर जनशक्ति का प्रशिक्षण किया जाए. वे ईंधन स्टेशनों सहित सभी हितधारकों के बीच इस निर्देश का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे और प्रभावीप्रवर्तन उपायों के माध्यम से इसका सख्त अनुपालन सुनिश्चित करेंगे. साथ ही, ईओएल के बड़े बेड़े के परिसमापन की दिशा में सभी संबंधित एजेंसियोंकी तरफ से शुरू की गई समन्वित कार्रवाइयों की रिपोर्ट मासिक आधार पर आयोग को दी जाएगी. सीएक्यूएम ने कहा है कि 1 नवंबर से ओवरएजवाहनों पर बैन दिल्ली समेत गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और सोनीपत में लगेगा. इस पर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्लीसरकार ने लोगों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है.