मोहन भागवत का बड़ा बयान 75 की उम्र में नेताओं को ले लेना चाहिए संन्यास, क्या पीएम मोदी के लिए है इशारा?”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने फिर से कहा है कि नेताओं को 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए. उन्होंनेनागपुर में एक कार्यक्रम में कहा कि जब आपको कोई 75 साल का होने पर बधाई देता है. तो इसका मतलब है कि आपको रुक जाना चाहिए। दूसरोंको काम करने का मौका देना चाहिए. संघ प्रमुख भागवत ने यह टिप्पणी उस समारोह में की जहां मोरोपंत पिंगले की स्मृति में एक किताब कालोकार्पण किया गया. भागवत ने आपातकाल (1975) के बाद राजनीतिक बदलाव के दौरान पिंगले की भविष्यवाणियों का जिक्र किया. उपलब्धियों का नहीं है कोई जिक्रउन्होंने कहा, जब चुनाव की चर्चा हुई, मोरोपंत ने कहा था कि अगर सभी विपक्षी दल एक साथ आएं तो करीब 276 सीटों पर जीत जाएंगे और जबपरिणाम आए, तो 276 सीटों पर ही जीत हुई. हालांकि वे चुनाव परिणाम के दौरान इन चर्चाओं से दूर रहे पिंगले ने कभी अपनी उपलब्धियों का जिक्रनहीं किया. वह अपनी मुस्कुराहट से विषयों को बदल देते थे और किसी भी सम्मान समारोह में जाने से भी बचते थे.दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीसितंबर में 75 साल के होने वाले हैं. ऐसे में भागवत के इस बयान से बहस छिड़ गई है शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत ने कहा कि संघ प्रमुख नेप्रधानमंत्री मोदी को यह संदेश दिया है हालांकि पांच साल पहले भागवत ने 75 की उम्र में सेवानिवृत्ति के अपने इस बयान पर मोदी को अपवादबताया था.यह भी दिलचस्प है कि पिछले साल मई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि पीएम मोदी 75 साल के होने के बाद भी सक्रियराजनीति से सेवानिवृत्त नहीं होने वाले हैं. भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. शाह ने की टिप्पणीशाह ने यह टिप्पणी उस समय की थी जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभाचुनाव 2024 की सियासी सरगर्मियों के बीच 75 साल में रिटायरमेंट का शिगूफा छेड़ा था. केजरीवाल ने मई, 2024 में ही मोदी के उत्तराधिकारी कोलेकर सवाल किया था। उन्हें जवाब देते हुए शाह ने कहा था कि पीएम मोदी नेतृत्व करते रहेंगे.बावनकुले ने कहा था कि भारतीय संविधान भी इस तरहका कोई प्रावधान नहीं करता है. उन्होंने कहा, ‘पूर्व भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी 79 वर्ष की आयु तक प्रधानमंत्री रहे. जबकि मोरारजी देसाई(83) और डॉ. मनमोहन सिंह (81) भी 75 वर्ष की आयु के बाद भी प्रधानमंत्री रहे. मोहन भागवत नागपुर में मोरोपंत पिंगले की स्मृति में आयोजितएक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए थे.इसी दौरान उन्होंने पिंगले की सादगी और भविष्यवाणी क्षमता की सराहना की और राजनीति में सेल्फरिटायरमेंट कल्चर की ओर इशारा किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संघ की ओर से भाजपा को संकेत हो सकता है कि अब नेतृत्वबदलाव की दिशा में सोचना चाहिए.
केरल में थरूर सबसे लोकप्रिय, लेकिन कांग्रेस नेताओं को नहीं मंजूर, मुरलीधरन बोले पहले तय करें वो किस पार्टी में हैं

हाल ही में केरल में एक सर्वे हुआ जिसमें बताया गया कि अगर केरल में अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन कीसरकार बनती हो तो गठबंधन की तरफ से शशि थरूर पहली पसंद हैं. शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर इस सर्वे को लेकर एक पोस्ट साझा की इसपोस्ट पर कांग्रेस नेताओं ने ही थरूर को निशाने पर ले लिया है. थरूर को पोस्ट पर तंज कसते हुए केरल कांग्रेस के शीर्ष नेता के मुरलीधरन ने कहा किपहले थरूर को तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं.के मुरलीधरन ने कहा कि ‘पहले उन्हें तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं भले ही कोई सर्वेमें आगे भी चल रहा है लेकिन अगर यूडीएफ 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री यूडीएफ से होगा. कांग्रेस में है कई वरिष्ठ नेताकांग्रेस नेता ने कहा कि ‘हमारा लक्ष्य चुनाव जीतना है और हम इस बेकार के विवाद में नहीं पड़ना चाहते. मुरलीधरन के अनुसार केरल कांग्रेस में कईवरिष्ठ नेता हैं. जिनके नाम पर सीएम पद के लिए विचार हो सकता है और किसी सर्वे से कोई फर्क नहीं पड़ता है पार्टी का एक तरीका है नियम हैंजिनके आधार पर तय किया जाता है कि अगला सीएम कौन होगा. कथित तौर पर एक निजी एजेंसी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 28.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि थरूर केरल का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं. थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सर्वेक्षण केबारे में एक समाचार पोस्ट साझा किया था. जिसके जवाब में उन्होंने हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी जोड़ा था. केरल में अगले साल अप्रैल में विधानसभाचुनाव होने हैं। मुरलीधरन ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद शशि थरूर की प्रतिक्रियाओं और थरूर और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच बढ़ती दरार केबीच उन पर कटाक्ष किया. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक लेख में आपातकाल की भी आलोचना की. माणिकम टैगोर ने की टिप्पणीथरूर ने लेख में लिखा कि आपातकाल को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में ही याद नहीं किया जाना चाहिए. बल्कि इससे सबकलेना जरूरी है उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर फैसला बताया. थरूर के इस लेख पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने तीखीटिप्पणी की. टैगोर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘जब कोई सहयोगी भाजपा की बातों को शब्दशः दोहराने लगे तो आपने सोचने लगते हैं किचिड़िया, तोता बन रही है. नकल, पक्षियों में अच्छी लगती है, राजनीति में नहीं. मुरलीधरन ने शशि थरूर पर यह तंज ऐसे समय कसा है जब थरूर नेहाल के दिनों में कई ऐसे बयान दिए हैं. जिनके चलते थरूर को कांग्रेस पार्टी में आलोचना का सामना करना पड़ा है. हाल ही में एक लेख में थरूर नेआपातकाल की भी आलोचना कर पार्टी के कई नेताओं को नाराज कर दिया है. शशि थरूर ने इस सर्वेक्षण को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व मेंट्विटर) पर साझा किया और हाथ जोड़ने वाला इमोजी पोस्ट कर प्रतिक्रिया दी. लेकिन इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन नेसीधे तौर पर थरूर पर निशाना साधा. उन्होंने कहा “उन्हें पहले यह तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं अगर यूडीएफ सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्रीउसी के वरिष्ठ नेता होंगे कोई भी सर्वे इसका फैसला नहीं कर सकता.
पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति में बड़ा बदलाव, 2026 चुनाव से पहले नरम हिंदुत्व को बनाया चुनावी हथियार

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. समिक भट्टाचार्य के नएअध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद पार्टी ने यहां आक्रामक हिंदुत्व की जगह नरम हिंदुत्व को चुनावी हथियार बनाने का फैसला किया है. लोकसभा के बीते दो और विधानसभा के एक चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से पार पाने की कोशिश में नाकाम रहने के बाद पार्टी नेअब राज्य के 30 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के एकतरफा ध्रुवीकरण की काट की कोशिश में लगी है. आक्रामक हिंदुत्व की रहा थी पकड़ीगौरतलब है कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को सियासी अखाड़े मेंचित करने के लिए आक्रामक हिंदुत्व की राह पकड़ी थी. इस रणनीति के कारण भाजपा इस राज्य में नंबर दो की पार्टी का हैसियत तो पा गई. मगरटीएमसी की जगह खुद सत्ता हासिल करने का उसका सपना पूरा नहीं हुआ. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मुद्दे पर भाजपा के आक्रामक रुख के कारण राज्य के मुस्लिम मतदाता कांग्रेस, वाम दलों से करीब-करीब पूरी तरह से किनारा कर सत्तारूढ़टीएमसी के पक्ष में गोलबंद हो गए. राष्ट्रीय राजनीति में मोदी युग की 2014 में शुरुआत के बाद पश्चिम बंगाल की सियासी तस्वीर पलटती चली गई. भाजपा के सत्ता में आने के भय से मुस्लिम मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकतरफा गोलबंद होते चले गए। मसलन 2015 के विधानसभा चुनाव में 44 सीटें और 12 फीसदी वोट हासिल करने वाली कांग्रेस और 26 सीटें और 20 फीसदी वोट हासिल करने वाले वाम दल 2020 के चुनाव में सियासीपरिदृश्य से लगभग गायब हो गए. 16 फीसदी की आई कमीबीते चुनाव में कांग्रेस और वाम दल एक भी सीट नहीं जीत पाई और इनके वोट प्रतिशत में क्रमश: 10 और 16 फीसदी की कमी आई. भाजपामुसलमानों के नहीं बल्कि कट्टरपंथ के खिलाफ है. हम चाहते हैं कि मुसलमानों के हाथ में पत्थर की जगह किताब रहे. राज्य में राजनीतिक हिंसा केशिकार लोगों में 90 फीसदी मुसलमान हैं. हम राज्य का पुराना सांप्रदायिक सौहार्द वापस लाना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि दुर्गा पूजा और मुहर्रम काजुलूस एक साथ शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो। मुसलमानों के शिक्षा और रोजागर पर भी बात हो. -समिक भट्टाचार्य, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा पश्चिम बंगालमें 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने रणनीति बदली है. समिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी अब आक्रामक नहीं, बल्किनरम हिंदुत्व की राह पर चलेगी. मुस्लिम वोटों के टीएमसी के पक्ष में एकतरफा ध्रुवीकरण की काट के लिए यह बदलाव किया गया है.इसी उद्देश्य सेभाजपा अब अपनी छवि एक समावेशी पार्टी की बनाना चाहती है जो “कट्टरपंथ के खिलाफ” है मुसलमानों के खिलाफ नहीं.
भांगर में तृणमूल नेता रज्जाक खान की गोली मारकर हत्या, इलाके में तनाव टीएमसी ने आईएसएफ पर लगाए आरोप जानें क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर इलाके में गुरुवार रात एक सनसनीखेज घटना में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता रज्जाक खान कीगोली मारकर हत्या कर दी गई. रज्जाक खान भांगर इलाके में तृणमूल के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और स्थानीय स्तर पर उनकी अच्छी-खासी पहचानथी.यह घटना काशीपुर थाना क्षेत्र के भांगर खालपार में हुई जहां अज्ञात हमलावरों ने रज्जाक खान पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। पुलिस के अनुसार, हमले में रज्जाक खान की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत वहां पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम केलिए भेज दिया. प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह हमला व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक हिंसा का परिणाम हो सकता है. नौशाद सिद्दीकी के इशारे पर किया है सबतृणमूल कांग्रेस विधायक सौकत मोल्ला ने आरोप लगाया”रज्जाक खान भांगर विधानसभा क्षेत्र में हमारे सक्रिय और मजबूत कार्यकर्ता और नेता थे. आईएसएफ समर्थित असामाजिक तत्वों ने नौशाद सिद्दीकी के इशारे पर यह सब किया है. भांगर क्षेत्र में आईएसएफ के लिए कोई जगह नहीं हैइसलिए वे इस तरह की हरकतें कर रहे हैं. हमने पुलिस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने का अनुरोध किया है. उनकी हत्या कीखबर से इलाके में तनाव का माहौल है. स्थानीय लोगों और तृणमूल समर्थकों में आक्रोश देखा जा रहा है वहीं पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ीकर दी है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी ताकि हमलावरों कीपहचान हो सके. तृणमूल के स्थानीय नेताओं ने इस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है. उनका कहना है किरज्जाक खान एक समर्पित कार्यकर्ता थे. हम सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दीजाए। आपको बता दें. राजनीतिक हिंसा की घटनाएं आ चुकी है सामनेभांगर और आसपास के इलाकों में पहले भी राजनीतिक हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिसके कारण यह क्षेत्र अक्सर चर्चा में रहता है. पुलिस नेस्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और मामले की जांच का भरोसा दिया है। इस हत्या के बाद भांगर में तनावपूर्ण है और प्रशासनस्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है।तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता रज्जाक खान की गुरुवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई।घटना की सूचना मिलतेही पुलिस तुरंत वहां पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया औरपोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में पुलिस को व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की आशंका है. मामले की गंभीरता कोदेखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजखंगालनी शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान कर जल्द से जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. फिलहाल इलाके में धारा 144 लागूकरने पर भी विचार किया जा रहा है.
सावन की शुरुआत पर सीएम योगी का रुद्राभिषेक, जनता दर्शन में 200 लोगों से की मुलाकात

सावन माह के पहले दिन मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार प्रातः काल रुद्राभिषेक व हवन किया. रुद्राभिषेक का अनुष्ठानपूर्ण कर उन्होंने भगवान भोले शंकर से चराचर जगत के कल्याण और सभी नागरिकों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की. शुक्रवार प्रातः गोरखनाथ मंदिर केअपने आवास के प्रथम तल स्थित शक्तिपीठ में सीएम योगी ने भगवान भोलेनाथ को विल्व पत्र, दुर्वा, मदार पत्र, कमल पुष्प समेत अनेकानेक पूजनसामग्री अर्पित करने के बाद जल, दूध और ऋतुफल के रस से रुद्राभिषेक किया. मठ के विद्वत आचार्यगण एवं पुरोहितगण ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता केरुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक संपन्न कराया. रुद्राभिषेक के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन किया. विधि विधान सेपूर्ण हुए रुद्राभिषेक अनुष्ठान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन कीमंगलकामना की. मंदिर परिसर में किए जनता दर्शनमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में ‘जनता दर्शन’ किया. इस दौरान उन्होंने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और कहा कि परेशान मत हों आपकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबंधित मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए. जनता दर्शन में एक महिला इलाज के लिए मुख्यमंत्री से गुहारलगाई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाज का इस्टीमेट मंगा लीजिए. सरकार भरपूर मदद करेगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर परिसर में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक […]
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासत गरम, शाहनवाज हुसैन बोले विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर करना चाहिए भरोसा

Bihar Politics: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद खूब सियासी बयानबाजी हो रही है. विपक्ष ने मतदातासूची पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की है इस पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि विपक्षी दलों काचुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करना बेहद दुखद है उनको सुप्रीम कोर्ट और आयोग दोनों पर भरोसा करना चाहिए.भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैनने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ विपक्षी दल के नेता सुप्रीम कोर्ट गए थे. खासकर मनोज झा उन्होंने कोर्ट से स्टे मांगा लेकिन कोई स्टेनहीं लगा. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सुझाव दिए हैं जो ठीक हैं. आखिरी सुनवाई में फैसला आएगा विपक्षी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा करना चाहिए. मगर वे उस पर भी बयानबाजी करते हैं उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दल किसी राज्य में चुनाव जीत जाते हैं तो चुनाव आयोग अच्छा हो जाता है औरजब हारते हैं तो चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं.चुनाव आयोग से नहीं है कोई दिक्कतविपक्षी दलों का ऐसा करना सही नहीं है. भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जब राहुल गांधी की पार्टी ने रायबरेली, वायनाड, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल और तमिलनाडु में जीत हासिल की, तब उनको चुनाव आयोग से कोई दिक्कत नहीं हुई. मगर, जब वह महाराष्ट्र, हरियाणा औरदिल्ली में चुनाव हार गए. तो उन्होंने चुनाव आयोग को दोषी ठहराया अब उन्हें पता है कि बिहार में भी उन्हें जीरो मिलेगा इसलिए वह सारा दोष चुनावआयोग पर डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिहार में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गए थे. राहुल गांधी वहां बैग टांगकर विरोध करने गए थेलेकिन तेजस्वी यादव ने अपने नेताओं को टांग दिया. न तो पप्पू यादव और न ही कन्हैया कुमार को ट्रक पर चढ़ने दिया गया भले ही वह चुनाव हारजाते हों. लेकिन उन्हें ट्रक पर तो चढ़ने दिया जाता. भाजपा नेता ने कहा कि बिहार में कानून का राज है और जनता को कोई परेशानी नहीं है गोपालखेमका हत्याकांड मामले में आरोपी पकड़े गए हैं और उनका एनकाउंटर भी किया गया है कोई भी हत्या या अपराध से जुड़ी हुई घटनाएं होंगी तोआरोपी बख्शे नहीं जाएंगे नीतीश कुमार अपराध और अपराधियों से कोई समझौता नहीं करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सुनायाइसलिए उन्हें जेल भेजा जाएगा.इससे पहले गुरुवार को बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग की तरफ से वोटर लिस्ट की विशेष जांच कराने के एलानपर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार में वोटर लिस्ट की विशेष जांच जारी रहेगी. कोर्ट ने चुनाव आयोग (ईसीआई) से कहा है कि वो इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को पहचान पत्र के रूप में माननेपर विचार करे. साथ ही तीन मुद्दों पर जवाब दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 28 जुलाई तय की. बता दें कि चुनाव आयोग के इस फैसले को विपक्षी दलों ने चुनौती दी थी. क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कई वैध वोटरों को वोट देनेके अधिकार से वंचित किया जा सकता है. बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष ने पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की है। इस पर भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि विपक्षी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट और चुनावआयोग पर भरोसा करना चाहिए.
उदयपुर फाइल्स की रिलीज़ पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र सरकार को दी फिल्म की समीक्षा की जिम्मेदारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल तेली की हत्या पर आधारित फिल्म ”उदयपुर फाइल्स” की रिलीज पर रोक लगा दी. यहआदेश तब तक लागू रहेगा जब तक केंद्र सरकार फिल्म की सामग्री पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेती. यह निर्णय जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्षमौलाना अरशद मदनी सहित तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया. जिन्होंने फिल्म पर मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगातेहुए प्रतिबंध की मांग की थी. मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 केतहत केंद्र सरकार को अपने संशोधन अधिकारों का उपयोग कर फिल्म की जांच करने का निर्देश दिया. फिल्म की रिलीज शुक्रवार, 11 जुलाई कोप्रस्तावित थी. प्रमाणन के खिलाफ कर सकते है कार्रवाईखंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार स्वतः संज्ञान लेने या किसी शिकायतकर्ता के आवेदन पर फिल्म के प्रमाणन के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. कोर्टने नोट किया कि याचिकाकर्ताओं ने इस कानूनी उपाय का उपयोग नहीं किया था. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद226 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग कर हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन याचिकाकर्ताओं को पहले केंद्र सरकार से संपर्क करनाचाहिए कोर्ट ने आदेश दिया, हम याचिकाकर्ता को दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार से संपर्क करने की अनुमति देते हैं. यदि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार सेसंपर्क करते हैं. तो वे अंतरिम उपायों के लिए भी अनुरोध कर सकते हैं. यदि याचिकाकर्ता संशोधन याचिका दायर करते हैं. तो केंद्र सरकार को निर्माताको सुनवाई का अवसर देने के बाद एक सप्ताह के भीतर इसका निर्णय करना होगा।.कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फिल्म के खिलाफ अंतरिम राहतके अनुरोध पर भी विचार किया जाए। तब तक, फिल्म की रिलीज पर रोक रहेगी. फिल्म की रिलीज पर लगेगी रोकखंडपीठ ने कहा चूंकि हम याचिकाकर्ता को धारा 6 के तहत संशोधन उपाय का उपयोग करने के लिए कह रहे हैं, हम आदेश देते हैं कि फिल्म कीरिलीज पर रोक रहेगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने बुधवार को कोर्ट को सूचित किया था कि फिल्म के कुछ आपत्तिजनकहिस्सों को हटा दिया गया है. कोर्ट ने निर्माता को फिल्म और उसके ट्रेलर की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था. जिसमें याचिकाकर्ता केवकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और सीबीएफसी के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा मौजूद थे मौलाना अरशद मदनी ने अपनीयाचिका में दावा किया कि फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है. याचिकाकर्ताओं नेफिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी. जिसके जवाब में कोर्ट ने केंद्र सरकार को सामग्री की जांच करने का निर्देश दिया. कोर्ट को बताया गया किसेंसर बोर्ड (CBFC) ने पहले ही फिल्म के कुछ आपत्तिजनक दृश्य हटा दिए हैं. कोर्ट के निर्देश पर एक स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठअधिवक्ता कपिल सिब्बल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा, और याचिकाकर्ताओं के वकील मौजूद रहे.
पंजाब जल समझौता न्यायाधिकरण की रिपोर्ट में फिर देरी, एक साल के लिए बढ़ी समय सीमा

पंजाब जल समझौते से जुड़े मामलों के समाधान में लगातार देरी हो रही है. अब इसमें एक साल का अतिरिक्त समय लगेगा. केंद्र ने रावी और ब्यासजल न्यायाधिकरण के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है. अब न्यायाधिकरण को पांच अगस्त, 2026 तकरिपोर्ट पेश करनी होगी. अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत गठित रावी ब्यास न्यायाधिकरण को पंजाब और उसके पड़ोसीराज्यों के बीच रावी और ब्यास नदी के पानी के वितरण से संबंधित मामलों का निपटारा करने का काम सौंपा गया है. न्यायाधिकरण का गठन दोअप्रैल 1986 को किया गया था. जल समझौतों को लेकर न्यायाधिकरण ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 30 जनवरी, 1987 को केंद्र सरकार को सौंप दीथी. समझौतों को लेकर चलती रही समीक्षाइसके बाद केंद्र ने न्यायाधिकरण से समझौतों को लेकर और स्पष्टीकरण मांगे। ऐसे में समझौतों को लेकर समीक्षा प्रक्रिया चलती रही. करीब चारदशक से चल रही समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायाधिकरण को रिपोर्ट सौंपनी थी. मगर जल शक्ति मंत्रालय ने एक बार फिर रिपोर्ट सौंपने कीसमयसीमा में इजाफा कर दिया. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार सरकार ने विस्तार के लिए न्यायाधिकरण द्वाराचिह्नित कार्य की अनिवार्यताओं का हवाला दिया. साथ ही रिपोर्ट सौंपने की सीमा को पांच अगस्त 2026 तक के लिए बढ़ा दिया. केंद्रीय जल शक्तिमंत्रालय में अंतर-राज्यीय जल विवाद पर चर्चा के लिए हुई बैठक में पंजाब-हरियाणा सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद को दूर करने पर सहमत हो गएथे. पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे के लिए दशकों पहले बनाई गई एसवाईएल नहर वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र है. केंद्र सरकार को सौंपनी है रिपोर्टजल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि मंत्रालय जल संसाधनों के न्यायसंगत और बेहतर प्रबंधन के लिए दोनों राज्यों को पूरा सहयोग प्रदानकरेगा. अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत गठित रावी ब्यास न्यायाधिकरण को पंजाब जल समझौते को लेकर केंद्र सरकार कोरिपोर्ट सौंपनी है. मगर सरकार ने रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है. अब करीब चार दशक बीतने के बावजूद विवाद का अंतिमनिपटारा नहीं हो पाया है. हालिया निर्णय में केंद्र ने कहा कि न्यायाधिकरण द्वारा चिह्नित तकनीकी और कानूनी बिंदुओं की जांच व विश्लेषण अभीअधूरी है. इसलिए रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा बढ़ाई गई है.रावी-ब्यास जल विवाद जो एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय मुद्दा है उसकेसमाधान में लगातार देरी चिंता का विषय है. न्यायाधिकरण को बार-बार दी जा रही समय सीमा दर्शाती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिकनिष्कर्ष के अभाव में यह मामला लंबा खिंचता जा रहा है.
सावन में शिवभक्ति चरम पर, कांवड़ यात्रा के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक की कड़ी व्यवस्था,यात्रा के लिए सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक डायवर्जन तक किए गए पुख्ता इंतज़ाम

सावन माह शुरू होने के साथ ही पुलिस ने कांवड़ियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. कांवड़ मार्ग पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है. दो हजार सेअधिक सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों से कांवड़ मार्ग पर निगरानी रखी जाएगी. बृहस्पतिवार रात 12 बजे से रूट डायवर्जन भी लागू हो गया है अंबाला औरदेहरादून रोड फिलहाल वन-वे है एक तरफ से कांवड़िये निकलेंगे. दूसरी तरफ से हल्के वाहनों को चलने की छूट रहेगी. 17 जुलाई से वाहन पूरी तरहप्रतिबंधित होंगे. शुक्रवार से सावन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही राजधानी का माहौल शिवमय हो जाएगा. सावन के अवसर पर राजधानी के प्रमुखशिव मंदिर गौरी शंकर मंदिर, मादीपुर स्थित शिव मंदिर, यमुना बजार स्थित नीली छतरी वाला मंदिर, आसफ अली स्थित श्रीराम हनुमान वाटिका स्थितशिव मंदिर, कनाट प्लेस स्थित शिव मंदिर, कालकाजी शिव मंदिर, पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी शिव मंदिर आदि शिव मंदिर में विशेष तैयारियां की गईहैं. जलाभिषेक की व्यवस्था की जा रही है सुनिश्चितमंदिरों को सजाया गया है और जलाभिषेक की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है. इस दौरान दिल्ली समेत उत्तर भारत के हजारों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री और गोमुख से गंगाजल लेकर लौटेंगे. शिव भक्त इस जल को अपने-अपने इलाकों के शिवालयों में 23 जुलाई को शिवरात्रि को जलाभिषेककरेंगे. सावन का पवित्र महीना आज से शुरू हो गया है. ऐसे में राजधानी दिल्ली के बाजार भगवान शिव की भक्ति में सराबोर हो गए हैं. कांवड़ियों केबीच एआई प्रिंटेड महादेव की टी-शर्ट की मांग ज्यादा है इसकी खास बात यह है कि इन कपड़ों में भगवान शिव को आधुनिक अंदाज में दिखाया गयाहै. साथ ही इन कपड़ों का रंग भी लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है. इन टी-शर्ट की मांग 40 फीसदी तक बढ़ी हुई है. कांवड़िए महादेव को प्रसन्नकरने के लिए हरा, नारंगी, पीला, सफेद, नीला व अन्य रंगों के कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं. सदर बाजार, करोल बाग, चांदनी चौक, लक्ष्मी नगरसमेत अन्य बाजारों व फुटपाथों पर भी एआई भगवान शिव प्रिंटेड टी-शर्ट्स की भरमार देखने को मिल रही है। करीब 100 से 150 अलग-अलगडिजाइन वाले टी-शर्ट बाजारों में बिक रहे हैं. ऐआई प्रिंट में मिल रही है देखने कोइसके अलावा, बाजारों में इस बार कांवड़ पोशाक की कैपरी साधारण न होकर एआई प्रिंट में देखने को मिल रही है. इन पर भी कंकाल की खोपड़ी काएआई प्रिंट छपा हुआ है. कांवड़ यात्रा के लिए डायवर्जन प्लान शुक्रवार रात 10 बजे से 25 जुलाई तक लागू होगा. विभिन्न दिशाओं से नोएडा कीसीमा में प्रवेश कर गाजियाबाद, मुरादाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ आदि की तरफ जाने वाले भारी, मध्यम और हल्के वाहनों के मार्ग में बदलाव किया गयाहै. चिल्ला रेड लाइट से ओखला पक्षी विहार जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों पर पूर्ण रूप से पाबंदी रहेगी. दिल्ली के बदरपुर बॉर्डर और ओखलाबैराज के रास्ते नोएडा व गाजियाबाद होकर जाने वाले भारी, मध्यम व हल्के वाहन चालकों को नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे होकर गंतव्य की ओर भेजाजाएगा. इससे आगे वाहन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे. इसी तरह से दिल्ली से डीएनडी फ्लाईओवर के रास्ते नोएडा-गाजियाबाद होकरगंतव्य की ओर जाने वाले वाहन चालकों को नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे व ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भेजा जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई आक्रामक रणनीति का प्रमाण,भारत की आतंक पर सटीक प्रतिक्रिया

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है. रक्षा विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने सोशल मीडिया पर पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एक लेख लिखा है. जिसमें उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवादके खिलाफ सख्त और स्पष्ट कार्रवाई करता है और इस कार्रवाई का मकसद भविष्य में इस तरह के हमले रोकना है.जॉन स्पेंसर ने लिखा कि ‘पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया में सैन्य सटीकता और रणनीतिक संदेश का संयोजन था. ऑपरेशनसिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंक के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया. जिसमें सीमा पार प्रशिक्षण शिविर शामिल थे. इनकार या टालमटोल को रवैया गया है अपनायामहत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय नेताओं ने इस हमले की व्यापकता को समझा और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद को अब अलग-थलग कृत्यों के रूप में नहीं देखा जाएगा और जो लोग हिंसा का समर्थन या आतंकियों की मदद करते हैं उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा. यह भारतके आतंकवाद-रोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है. स्पेंसर ने लिखा कि ‘वर्षों तक, भारत ने बिना किसी खास रणनीति के बड़े हमलोंको झेला. लेकिन उरी और पुलवामा हमलों के बाद भारत की सोच में बदलाव शुरू हुआ. भारत अब तनाव बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में हिंसाको रोकने के लिए तेजी से और स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया देता है. जॉन स्पेंसर ने कहा कि ‘बीते बीस से अधिक वर्षों से, भारत को पाकिस्तान स्थितआतंकवादी समूहों के बार-बार हमलों का सामना करना पड़ा है. ये हमले पूरी सोची समझी रणनीति के तहत किए गए. ये अक्सर संकट को भड़काने, आर्थिक प्रगति को रोकने और धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए किए गए. प्रमुख आतंकी घटनाओं में 2001 में भारत की संसद पर हमला, 2008 के मुंबई हमला, 2016 में कश्मीर के उरी में एक सैन्य अड्डे पर हमला और 2019 में पुलवामा में भारतीय अर्धसैनिक बलों पर आत्मघाती हमलाशामिल हैं। इन सभी घटनाओं में एक ही रणनीति अपनाई गई. जिसके तहत नागरिक या सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और हमले के जिम्मेदारलोगों द्वारा इनकार या टालमटोल का रवैया अपनाया गया. राजनीतिक प्रभाव के लिए किया गया है पैटर्नपहलगाम में हुआ नरसंहार इसी पैटर्न से मेल खाता है.’रक्षा विशेषज्ञ स्पेंसर ने बताया कि पहलगाम हमले को मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव केलिए डिजाइन किया गया था यह एक सोची-समझी कार्रवाई थी जिसका उद्देश्य तीन लक्ष्य हासिल करना था सामाजिक शांति को तोड़ना, आर्थिकप्रगति को बाधित करना और एक व्यापक संकट को भड़काना. यह कश्मीर को अस्थिर करने की कार्रवाई थी, खासकर जब इस क्षेत्र में विकास हो रहाहै. साल 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां पिछले वर्ष 2.3 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे। कश्मीर में सड़कों, स्कूलों औरव्यवसायों का विस्तार हुआ है. जो कभी उग्रवाद का प्रतीक था वह निवेश का केंद्र बन गया इस प्रकार की स्थिरता उन चरमपंथी समूहों के लिए सीधाखतरा है जो अपने अस्तित्व को सही ठहराने के लिए अराजकता पर निर्भर हैं. स्पेंसर ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले का उद्देश्य केवल लोगों कीहत्या करना नहीं था. बल्कि सांप्रदायिक तनाव को फिर से भड़काना था आतंकियों ने डर और अराजकता फैलाकर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करनेकी कोशिश की. ये हमला दुनिया भर में आतंकवाद की कई बड़ी आतंकी घटनाओं की याद दिलाता है. जैसे यूरोप में आईएसआईएस के हमले, 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इस्राइल पर हमले। रणनीति वही है डर पैदा करना, लोगों को भड़काना और प्रगति की कहानी को पटरी से उतारना.