झुग्गियों को लेकर गोपाल राय का विवादित बयान “पीएम आवास पर कर लेंगे कब्ज़ा”, BJP ने बताया राष्ट्रविरोधी और अराजक सोच

आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय ने यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि यदि दिल्ली की झुग्गियां तोड़ी जाती हैं तो लोग प्रधानमंत्रीआवास पर कब्जा कर लेंगे. वे जंतर-मंतर पर दिल्ली में झुग्गियों को तोड़ने के मामले में आयोजित एक प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे. भाजपा ने इसेअराजक और राष्ट्रद्रोही सोच का प्रमाण बताया है और कहा है कि इस तरह की आक्रामक और उग्र बयानबाजी से किसी भी नेता को बाज आनाचाहिए. गोपाल राय ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावों में झुग्गी वालों को आवास देने की बात कही थी लेकिन आज उनके आवास तोड़े जा रहेहैं. उन्होंने कहा कि इससे भाजपा की असलियत सामने आ गई है और यह साफ हो गया है कि वह गरीब जनता के साथ नहीं बल्कि कुछ अमीर लोगोंके साथ खड़ी है. अधिकार छीनने का लगा आरोपराय ने दिल्ली सरकार पर गरीबों का अधिकार छीनने का आरोप लगाया. दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि एक लोकतंत्र मेंकिसी राजनीतिक दल के द्वारा इस तरह की अपील किया जाना लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि गोपाल राय ने भीड़ को जिस तरह प्रधानमंत्रीआवास में घुसने और उस पर हमला करने की बात कही है. यह आपत्तिजनक है और आम आदमी पार्टी नेताओं की राष्ट्रद्रोही सोच को दिखाता है. प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दस बजे जनसभा बुलाई थी जिसमें दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों से कोई आदमी नहीं पहुंचा। आमआदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता दो बजे के करीब पहुंचे जिसके बाद केजरीवाल और गोपाल राय ने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए आपत्तिजनकबयानबाजी कर डाली. भाजपा नेता ने दावा किया कि केजरीवाल की इन हरकतों के बाद भी जनता उनका साथ नहीं देगी. उन्होंने कहा कि भाजपादिल्ली की जनता से किया गया अपना हर वादा निभाएगी. आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय ने कहा कि यदि दिल्ली की झुग्गियां तोड़ी गईं तो लोगपीएम आवास पर कब्जा कर लेंगे. इतना ही नहीं राय ने भाजपा पर गरीबों से वादा तोड़ने और अमीरों के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया. भाजपा ने राय के इस बयान पर पलटवार किया साथ ही इसे अराजक और राष्ट्रविरोधी बताते हुए कड़ी आलोचना की है
मोदी सरकार ने ₹1.07 लाख करोड़ की ELI स्कीम, ₹1 लाख करोड़ की RDI योजना और खेल नीति 2025 को दी मंजूरी

मोदी सरकार ने देश में रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने1.07 लाख करोड़ रुपये के एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इन्सेंटिव (ईएलआई) स्कीम को मंजूरी दे दी है. यह योजना खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर परफोकस करेगी। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और शोध को भीबढ़ावा मिलेगा. केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि इस योजना के दो हिस्से होंगे। पहला हिस्सा उन लोगों के लिए होगा जो पहली बार रोजगार शुरू कररहे हैं. वहीं दूसरा हिस्सा लगातार रोजगार देने वाली कंपनियों को समर्थन देने के लिए होगा. इसके अलावा सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्चडेवलेपमेंट और इनोवेशन स्कीम, राष्ट्रीय खेल नीति 2025 और परमकुडी-रामनाथपुरम नेशनल हाईवे के चार लेन बनाने के लिए 1,853 करोड़ रुपयेकी मंजूरी भी दी है. कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रोत्साहनसरकार ने मंगलवार को रोजगार सृजन कौशल बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना(Employment Linked Incentive Scheme) को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत ₹1.07 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है जिसकाविशेष फोकस निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र पर रहेगा. यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया. इस बारे में जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी. इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों में देश में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार केअवसर सृजित करना है. इसके साथ ही योजना के अंतर्गत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा. प्रत्येक नएकर्मचारी के लिए ₹3,000 प्रति माह तक की प्रोत्साहन राशि दो वर्षों तक दी जाएगी. यह प्रोत्साहन उन नियोक्ताओं को मिलेगा जो ऐसे कर्मचारियोंको नियुक्त करेंगे जिनका वेतन 1 लाख रुपए प्रतिमाह तक है. निर्माण क्षेत्र के लिए यह प्रोत्साहन तीसरे और चौथे वर्ष तक भी जारी रहेगा.सरकार नेदेश में शोध नवाचार और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए बड़े फैसले लिए हैं. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को जानकारी दी किकेंद्रीय कैबिनेट ने रिसर्च डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत देश में शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा. 1 लाख करोड़ रुपये का बजट किया तैयारइस योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन वाली योजना कोतैयार करने से पहले अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (ANRF) ने दुनिया के कई देशों के सफल शोध मॉडलों का अध्ययन किया. इनमें अमेरिका, इजरायल, सिंगापुर और जर्मनी जैसे देशों के मॉडल शामिल हैं. इन देशों में शोध से लेकर प्रोडक्ट बनाने तक की जो मजबूत व्यवस्था है. उसी से सीखलेते हुए भारत में यह नई योजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में न केवल शोध को बढ़ावा मिलेगा. बल्कि इनोवेशन के जरिएनए उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एक व्यापक खेलो भारत नीति, 2025 को मंजूरी दे दी है. जिसका उद्देश्य 2047 तक भारत को शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में से एक बनाना है. कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में जानकारीदेते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलों पर ध्यान केंद्रित किया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं को आगे लानेके लिए प्रयास किए हैं. उन्होंने कहा कि नई नीति इसी प्रयास का हिस्सा है मंत्री ने कहा कि दूसरा मुख्य उद्देश्य खेलों को “जन आंदोलन” बनाना है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में महेंद्र भट्ट दूसरी बार निर्विरोध चुने गए, राष्ट्रीय परिषद में आठ वरिष्ठ नेता निर्वाचित

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर महेंद्र भट्ट का लगातार दूसरी बार चुना जाना गया है. प्रदेश अध्यक्ष पद पर नामांकन की प्रक्रिया में केवल भट्ट का हीनामांकन हुआ था. राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह समेत आठ वरिष्ठ नेताओं काचुना गया है। आज मंगलवार को प्रांतीय परिषद की बैठक में केंद्रीय चुनाव अधिकारी हर्ष मल्होत्रा भट्ट के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्योंके निर्वाचित होने का औपचारिक ऐलान किया. सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए नामांकन कीप्रक्रिया शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में महेंद्र भट्ट ने प्रदेशअध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र प्रदेश चुनाव अधिकारी खजान दास को सौंपा. कल्पना समेत कई नेताओं ने किया नामांकनइस पूरी संगठन चुनाव प्रक्रिया के दौरान सह चुनाव अधिकारी पुष्कर काला, मीरा रतूड़ी, राकेश गिरी के साथ सरकार में दायित्वधारी ज्योति गैरोला, सुभाष बड़थ्वाल, कुलदीप कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश कोली,प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवंवरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे. नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के बाद चुनाव अधिकारी खजान दास ने कहा कि पांच सेटों में दाखिल उनके नामांकन पत्र पर10 अलग-अलग प्रस्तावकों ने हस्ताक्षर किए थे. जिसमें सभी सेटों के मुख्य प्रस्तावक मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राष्ट्रीयमीडिया प्रभारी एवं गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, नैनीताल सांसद अजय भट्ट व अल्मोड़ा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा शामिलहुए. अन्य प्रस्तावक के रूप में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कल्पनासैनी, टिहरी लोकसभा सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवंविधायक बिशन सिंह चुफाल, विधायक विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, विनोद कंडारी, राम सिंह कैड़ा, महंत दिलीप सिंह रावत व बृजभूषण गैरोलाप्रमुख थे. राष्ट्रीय परिषद सदस्य के लिए कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्रसिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, अजय भट्ट, माला राज्य लक्ष्मी शाह व कल्पना सैनी ने नामांकन किया था. चुनाव में विजय मिली संगठन का हुआ विस्तारइन सभी नेताओं का राष्ट्रीय परिषद के लिए चुना गया. महेंद्र भट्ट के अध्यक्ष बनने के बाद हमें सभी चुनाव में विजय मिली संगठन का विस्तार हुआसामान्य कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की यात्रा में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है. उन्होंने सबको साथ लेकर संगठन को गति देने मेंबड़ा योगदान दिया है। सभी वरिष्ठ नेताओं ने आज उनके नामांकन का प्रस्ताव किया था. लगातार दूसरी बार वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं।आज भाजपा का संगठन पर्व चल रहा है. भाजपा देश की अकेली ऐसी पार्टी है जहां सबसे निचली इकाई से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक चुनाव कीप्रक्रिया अपनाई जाती है. चुनाव में प्रत्येक सक्रिय व आम कार्यकर्ता भाग ले सकता है. प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय परिषद सदस्य पद के लिए आजघोषणा कर दी गई है.
एलजी मनोज सिन्हा ने बालटाल आधार शिविर का किया दौरा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं की ली उच्चस्तरीय समीक्षा

अमरनाथ यात्रा 2025 की सुरक्षा और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को सोनमर्ग में बालटाल आधारशिविर का दौरा किया और सुरक्षाबलों और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा की।जानकारी के अनुसार इस दौरानएलजी मनोज सिन्हा ने जमीनी स्तर की व्यवस्था का जायजा लिया और विभिन्न सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच तैयारियों और समन्वय काआकलन करने के लिए विस्तृत चर्चा की अध्यक्षता की. बालटाल पवित्र अमरनाथ गुफा के दो प्राथमिक मार्गों में से एक है जो हर साल लाखों यात्रियोंके लिए एक महत्वपूर्ण पारगमन और आधार बिंदु के रूप में कार्य करता है। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना, निगरानी बुनियादी ढांचे की स्थापना और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर चर्चा हुई।उन्होंने कहा कि प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए काफी बेहतर व्यवस्था की है. एजेंसियों के आपसी समन्वय की भी सराहनाउन्होंने श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के आपसी समन्वय की भी सराहना की. बैठक में वरिष्ठप्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे. बालटाल में समीक्षा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एलजीमनोज सिन्हा ने कहा कि पिछली चार यात्राओं को खुद मैंने देखा है. इस बार प्रशासन ने श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के साथ मिलकर काफी बेहतरइंतजाम किए हैं. एलजी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने भी सुरक्षा के बहुत ही चाक चौबंद इंतज़ाम किए हैं. आपस में उनका समन्वय बहुत अच्छा है मैंउम्मीद करता हूं कि यात्रा इस बार पहले की तुलना में अधिक सफलतापूर्वक कर सकेंगे. जो भी देश भर से श्रद्धालु आएंगे वो एक बेहतर अनुभव लेकरके यहां से वापस जाएंगे. एलजी ने सुरक्षाबलों और नागरिक प्रशासन के बीच तालमेल पर संतोष व्यक्त किया और सभी हितधारकों को यात्रा अवधिके दौरान उच्च स्तर की सतर्कता और समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बालटाल आधार शिविर का दौरा करअमरनाथ यात्रा 2025 की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की. उन्होंने कहा कि इस बार की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक होगी.
भारत-अमेरिका संबंधों को चीन के नजरिये से जोड़ना भ्रामक, बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर जानें क्या कुछ कहा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चीन के नजरिये के बारे में स्पष्ट जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिकासंबंधों को चीन की नजर से देखना बेहद सरलीकरण और भ्रामक है हमारे संबंधों में कई और भी चीजें हैं. मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेडसेंटर में न्यूजवीक के मुख्यालय में न्यूजवीक के सीईओ देव प्रसाद के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा गया कि वे भारतअमेरिका संबंधों को लेकर चीन के रुख के बारे में क्या सोचते हैं? इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि चीन के नजरिये से भारत-अमेरिकाको जोड़ना बहुत बड़ा सरलीकरण है. गेम चेंजर होगा साबितयह कई बार भ्रामक भी है भारत-अमेरिका संबंध कई अन्य चीजों से भी जुड़े हैं जैसे अमेरिका में विशाल भारतीय समुदाय जो यहां में महत्वपूर्ण योगदानदेता है. उन्होंने कहा कि यह गेम चेंजर साबित होगा. इसका चीन से कोई लेना-देना नहीं है. वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच बहुत मजबूत आर्थिक संबंधहैं. हमारे व्यापार के आंकड़ों को देखें और उस व्यापार की हमारी संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के लिए प्रासंगिकता को देखें. हमारे प्रौद्योगिकी संपर्क कोदेखें. हम वैश्विक शिपिंग के लिए अरब सागर को सुरक्षित रखने के लिए काम करते हैं. जयशंकर ने कहा कि यह तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने कायुग है. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसमें न पड़ें मुझे लगता है कि दुनिया बहुत अधिक छोटी है। यह बहुत अधिक बहु-कारण वाली है. हमारेपास सिर्फ एक देश से ज्यादा कई हित हैं मैं निश्चित रूप से यह मानना चाहूंगा कि रिश्ते अच्छे चल रहे हैं क्योंकि हमारे अंदर बहुत योग्यता है. अमेरिका के साथ है अच्छे संबंधइस परिदृश्य की कुछ वास्तविकताएं हैं और उनमें से एक यह है कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध पहले जैसे नहीं रहे. बल्कि अब उनमें प्रतिस्पर्धाबढ़ गई है. विदेश मंत्री ने कहा कि जहां तक हमारा सवाल है हम इन दोनों देशों को देखते हैं. उनमें से प्रत्येक ने इस बारे में अपना मन बना लिया है किवे दूसरे को किस तरह देखते हैं. जाहिर है इसमें रणनीति का तत्व भी होगा. उनके पास एक दूसरे के बारे में एक बड़ा रणनीतिक दृष्टिकोण है. हम पूरीईमानदारी से यह देखना चाहते हैं कि इन सबके बीच हमारे हितों को किस तरह आगे बढ़ाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कई मायनोंमें आप देख सकते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हमारे बहुत मजबूत संबंध हैं. साथ ही हम चीन के सबसे बड़े पड़ोसी हैं हम एक भूमि सीमासाझा करते हैं हम चीन के साथ स्थिर संबंध चाहते हैं. बीजिंग एक बहुत बड़ा व्यापार साझेदार भी है, भले ही यह एक असंतुलित व्यापार है. उन्होंनेकहा कि चीन के साथ संबंधों को कैसे स्थिर किया जाए, एक संतुलन कैसे बनाया जाए जो हमारे लिए उचित हो (और) साथ ही, आप संयुक्त राज्यअमेरिका के साथ अभिसरण कैसे काम करते हैं और इसका अधिकतम लाभ कैसे उठाते हैं। हम इस पर काम करेंगे.
रथ नहीं रुका, आस्था रुकी है-कांग्रेस सांसद अरबिंद दास का सरकार पर तीखा प्रहार

पुरी की पवित्र धरती पर हर वर्ष होने वाली भगवान श्रीजगन्नाथ जी की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि उड़ीसा की आत्मा है। लेकिनइस वर्ष, इस परंपरा पर ऐसा आघात हुआ कि सदियों की आस्था सवालों के कटघरे में आ खड़ी हुई। उड़ीसा से कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद अरबिंद दास नेएक प्रेस वार्ता कर रथ यात्रा से जुड़ी अनियमितताओं और भाजपा सरकार की लापरवाहियों पर तीखा हमला बोला। 1 मीटर में रुकी रथ यात्रा – क्या अब श्रद्धा भी वीआईपी पास से चलेगी? अरबिंद दास ने बताया कि इस वर्ष की रथ यात्रा कुछ कदम चलते ही रोकदी गई। परंपरा अधूरी रह गई, और हजारों भक्तों की भावनाएं कुचली गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह यात्रा इसलिए रोकी गई क्योंकि कुछवीआईपी मेहमान, खासतौर पर कॉरपोरेट उद्योगपति गौतम अडानी के प्रतिनिधि, समय पर नहीं पहुंच सके। क्या अब भगवान जगन्नाथ को भी किसी”मुख्य अतिथि” के आने का इंतजार करना पड़ेगा? 5000 पास बांटे गए — भक्त नहीं, सत्ता के लोग शामिल – प्रेस वार्ता में अरबिंद दास ने खुलासा किया कि रथ यात्रा में लगभग 5000 विशेष पासबांटे गए, जो आम श्रद्धालुओं को नहीं, बल्कि भाजपा के विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिए गए। उन्होंने कहा, न प्रभु का आदर हुआ, नभक्तों का सत्कार। व्यवस्था केवल सत्ता और पैसे वालों के लिए थी। भगवान की यात्रा को बना दिया प्रचार का मंच – सांसद का कहना था कि यह रथ यात्रा अब भक्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक इवेंट बन चुकी है। मोहनमांझी की सरकार ने सदियों पुरानी इस परंपरा को कॉरपोरेट इवेंट में बदल दिया, जहां भगवा झंडों से ज़्यादा कैमरों की फ्लैश चमकती रही, और दर्शनकी जगह दिखावा हुआ। जनता डरी, क्या सरकार सुरक्षा दे सकती है? – इस अव्यवस्था और अविश्वास के माहौल में सवाल खड़ा होता है — क्या ऐसी सरकार पर भरोसा कियाजा सकता है? अरबिंद दास ने कहा, जब आस्था के सबसे बड़े पर्व में आम लोग असुरक्षित महसूस करें, तो वह सरकार अपने आप में असफल है। इसघटना ने लोगों के दिलों में शंका और भय पैदा कर दिया है। मृतकों के परिजनों को 50 लाख, घायलों को 25 लाख की सहायता की मांगप्रेस वार्ता में सांसद ने यह भी बताया कि रथ यात्रा में अव्यवस्था के कारण कई लोगों की मृत्यु हो गई और दर्जनों घायल हुए। उन्होंने सरकार से मांगकी कि मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए और घायलों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता तुरंत दी जाए। यह सरकार की नैतिक जिम्मेदारीहै।मोहन मांझी इस्तीफा दें, प्रभु से क्षमा मांगें – सांसद अरबिंद दास ने मुख्यमंत्री मोहन मांझी से इस्तीफे की मांग की और कहा कि उन्हें भगवान जगन्नाथसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने न केवल परंपरा का अपमान किया, बल्कि पूरी श्रद्धा को मज़ाक बना दिया।आस्था पर सत्ता का हस्तक्षेप कब तक? भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि उड़ीसा की आत्मा है। इसे किसी भीराजनीतिक या कॉरपोरेट हस्तक्षेप से अछूता और पवित्र रहना चाहिए। सांसद अरबिंद दास की इस मांग के साथ एक बड़ा सवाल खड़ा होता है क्याहम अपने धार्मिक मूल्यों को सत्ता के इशारों पर खोने को तैयार हैं?
शिक्षा में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा अंकुश नारंग-एक सशक्त बयान जो व्यवस्था की नींव को झकझोरता है

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अंकुश नारंग ने हाल ही में एक गंभीर मुद्दे पर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि शिक्षा केवल एक विभाग नहीं, बल्कि हमारे जीवन और समाज की बुनियाद है। जब दिल्ली सरकार में आम आदमी पार्टी सत्ता में थी, तब हर वर्ष शिक्षा के लिए 25% से 40% तकबजट आवंटित किया जाता था। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्कूलों में आधारभूत सुधार किए, अध्यापकों की स्थिति बेहतर की और विद्यार्थियों कोएक सम्मानजनक माहौल देने का प्रयास किया। नगर निगम के स्कूलों में भी बदलाव की उम्मीद थी – नारंग ने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी ने जब नगर निगम में कामकाज शुरू किया, तो यहीसोचकर आगे बढ़े थे कि नगर निगम के स्कूल भी सरकारी स्कूलों की तरह सुधरेंगे। लेकिन वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सिर्फ अरविंद केजरीवाल याआतिशी जैसे नेताओं से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि हर नागरिक को आगे आकर अपने स्तर पर योगदान देना होगा। भाजपा शासन में फैला भ्रष्टाचार शिक्षा पर सबसे बड़ा खतरा – उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में नगर निगम के अंदर जिसप्रकार भ्रष्टाचार फैल चुका है, वह चौंकाने वाला है। हाल ही में भाजपा ने एक सर्कुलर जारी कर सीनियरिटी सूची (वरिष्ठता सूची) तैयार करने की बातकही है। प्रश्न यह है कि भाजपा ने इतने वर्षों तक यह सूची क्यों नहीं बनाई? अब जब 2025 चल रहा है, तब यह 2002 तक की सूची बनाना केवलराजनीतिक लाभ लेने का प्रयास प्रतीत होता है।सीनियरिटी सूची में धांधली और नियमों की अवहेलना – नारंग ने सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी की वरिष्ठता उसीदिन से मानी जानी चाहिए, जिस दिन उसने सेवा में योगदान दिया हो। ऐसे में जब वरिष्ठता सूची ही गलत है, तो उस पर आधारित पदोन्नति (प्रमोशन) भी कैसे वैध हो सकती है? अपनों को लाभ देने के लिए बनाई गई फर्जी सूची – उन्होंने खुलासा किया कि भाजपा के कुछ पूर्व नेताओं ने 1997-98 में अपने नजदीकी लोगों कोनगर निगम के स्कूलों में नियुक्त कराया था, और अब उन्हीं लोगों को इस फर्जी वरिष्ठता सूची में डालकर अन्य मेहनती और वरिष्ठ शिक्षकों के ऊपरपदोन्नति दी जा रही है। यह न केवल अन्याय है, बल्कि पूरी प्रणाली के साथ छलावा है। अंकुश नारंग ने यह भी बताया कि हाल ही में नगर निगम ने46 शिक्षकों का स्थानांतरण (ट्रांसफर) किया है, जिनमें से 23 ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने कभी स्थानांतरण की मांग ही नहीं की थी। यह इसलिए कियागया ताकि भाजपा के नजदीकी 23 लोगों को मनचाही जगहों पर समायोजित किया जा सके। यह प्रक्रिया पूरी तरह से अपारदर्शी और मनमानी से भरीहुई है। मेयर को करनी चाहिए निष्पक्ष जांच – अंकुश नारंग ने दिल्ली के मेयर श्री राजा इकबाल से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सघन और निष्पक्ष जांचकरवाई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक या कर्मचारी का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्रका नुकसान है। अंकुश नारंग का यह बयान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने बच्चों के भविष्य से समझौता कर रहे हैं? यदि शिक्षामें पारदर्शिता, ईमानदारी और न्याय नहीं होगा, तो समाज का भविष्य भी अंधकारमय होगा। अब समय आ गया है कि हम शिक्षा को राजनीति से ऊपररखें और योग्य व्यक्तियों को उनका अधिकार दिलाएं।
विधायिका का अपमान या वोट बैंक की राजनीति, तेजस्वी के बयान पर भाजपा का पलटवार ” जानें क्या है पूरा मामला”

विपक्षी इंडी गठबंधन ने वक्फ कानून के खिलाफ रविवार को पटना के गांधी मैदान में मुस्लिम संगठनों की विशाल रैली का आयोजन किया. इस दौरानतेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में उनकी सरकार बनी तो वक्फ कानून राज्य में लागू नहीं होगा और उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस कानून कोकूड़ेदान में फेंकने का काम करेगी. अब भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर तीखा हमला बोला. भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कोसंबोधित करते हुए कहा कि ‘भारत के लोकतांत्रित इतिहास के सबसे काले अध्याय आपातकाल की हाल ही में 50वीं वर्षगांठ मनाई गई. कानून को फेंक देंगें कूड़ेदान मेंलेकिन ये दुख की बात है कि कल पटना के गांधी मैदान में आयोजित रैली में तेजस्वी यादव ने कहा कि वे संसद द्वारा पारित कानून को कूड़ेदान में फेंकदेंगे. उन्होंने वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कही जिसे भारत की संसद के दोनों सदनों ने पारित किया. इसका मतलब है कि उनके मन मेंविधायिका न्यायपालिका के लिए कोई सम्मान नहीं है. तेजस्वी यादव और इंडी गठबंधन के नेताओं ने वोट बैंक के लिए ऐसा कहा इससे साफ है किये लोग अभी भी 50 साल पुरानी संविधान को कूड़ेदान में फेंकने वाली मानसिकता से बाहर नहीं आए हैं. भाजपा सांसद ने कहा कि ‘मैं इंडी गठबंधनके लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या वे बिहार में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं. नेता बार- बार साध रहे है निशानावक्फ कानून के जिन प्रावधानों के खिलाफ विपक्षी नेता बार-बार बोल रहे हैं क्या वो इस्लाम की जन्मस्थली सऊदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्किये में लागूहैं? नहीं, यहां तक कि आईएसआईएस के प्रभाव वाले सीरिया, इराक में भी ऐसा कानून नहीं है क्या विपक्षी गठबंधन सऊदी अरब, इंडोनेशिया से भीबड़ा शरिया कानून बिहार में लागू करना चाहते हैं?’यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस वक्फ कानून को भारत की संसद के दोनों सदनों ने पारित किया है, उसेतेजस्वी यादव कूड़ेदान में फेंकने की बात कर रहे हैं. यह सीधा-सीधा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था विधायिका और न्यायपालिका का अपमान है. यहां तक कि सीरिया और इराक जैसे आईएसआईएस प्रभावित देशों में भी ऐसा कानून नहीं है तो क्या तेजस्वी यादव इससे भी बड़ा वक्फ या शरियाकानून लागू करना चाहते हैं वक्फ एक्ट 1995 भारत का एक केंद्रीय कानून है, जिसके अंतर्गत मुस्लिम धर्मस्थलों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों, मदरसों आदिकी संपत्तियों की देखरेख के लिए वक्फ बोर्ड बनाए जाते हैं. भाजपा का कहना है कि यह कानून संविधान और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित है वहींविपक्ष इसे ‘जनविरोधी और दखलकारी’ बता रहा है.
कोलकाता गैंगरेप पर सियासी घमासान महुआ बनाम कल्याण, टीएमसी में फूटा आंतरिक विरोध

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में विधि छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर कलत्ता में सियासी पारा हाई हो गया है. जहां विपक्षइसे मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तंज कस रही है वहीं टीएमसी नेताओं में भी एक दूसरे के बयानों को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है. हालांकि पार्टी ने अपनेनेताओं के विवादित बयान से किनारा कर लिया है वहीं बाद में महुआ मोइत्रा ने कल्याण बनर्जी को उनके बयानों के लिए खरीखोंटी सुनाई महुआ नेउन्हें स्त्री विरोधी करार दिया. इसके जवाब में कल्याण बनर्जी ने उनके निजी जीवन को आधार बनाकर पलटवार किया है. महुआ मोइत्रा पर पलटवारकरते हुए पश्चिम बंगाल में सेरामपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले कल्याण बनर्जी ने कहा वे अपने हनीमून के बाद भारत वापस आ गईंऔर अब मुझपर हमला करना शुरू कर दिया. महिला विरोधी होने का आरोपउन्होंने मुझ पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है? लेकिन वह क्या हैं? उन्होंने खुद 40 साल की शादी तोड़कर 65 साल के व्यक्ति से शादीकी. ऐसा करके क्या उन्होंने महिलाओं को ठेस नहीं पहुंचाई? देश की महिलाएं इसका फैसला करेंगी। गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा ने हाल ही मेंबीजद के पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा से शादी की है. बनर्जी ने रविवार को तीखे पलटवार में दावा किया कि मोइत्रा 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता मेंआने के बाद उसमें शामिल हो गयी थीं. मैं किसी भी महिला के प्रति प्रतिगामी मानसिकता या स्त्रीद्वेषी दृष्टिकोण रखने वाला अंतिम व्यक्ति होऊंगा. यह विवाद तब शुरू हुआ जब कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर कल्याण बनर्जी ने विवादित बयान दिया. उनके बयान कोलेकर विपक्षी दलों ने टीएमसी को घेरना शुरू की. जिसके बाद टीएमसी ने उनके बयान की निंदा की और खुद को बयान से अलग कर दिया. इसकेबाद कल्याण बनर्जी पर पार्टी की स्थिति को महुआ मोइत्रा ने खुले तौर पर खारिज कर दिया। और कहा कि वह पार्टी के रुख से पूरी तरह असहमत हैंऔर उन्होंने नेताओं पर मामले से जुड़े लोगों को बचाने का आरोप लगाया. महुआ मोइत्रा ने किया साफकोलकाता में एक लॉ कॉलेज में हुई गैंगरेप की घटना पर अपनी पार्टी के नेताओं के बयानों को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने साफ कहा हैकि महिलाओं के प्रति नफरत किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है फर्क बस इतना है कि टीएमसी ऐसी ‘घिनौनी’ टिप्पणियों की निंदा करती है चाहे वहकोई भी करे.महुआ मोइत्रा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत में महिलाओं के प्रति नफरत सभीराजनीतिक पार्टियों में देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि टीएमसी में फर्क सिर्फ इतना है कि पार्टी ऐसी शर्मनाक टिप्पणियों की खुलकर निंदा करतीहै. साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी के बयान पर बवालमचा हुआ है. कोलकाता दुष्कर्म मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा था कि अगर कोई दोस्त अपने दोस्त के साथदुष्कर्म करता है तो क्या किया जा सकता है. क्या स्कूलों में पुलिस होगी? यह छात्रों द्वारा एक अन्य छात्रा के साथ किया गया. पीड़िता की सुरक्षा कौनकरेगा? सारा अपराध और छेड़छाड़ कौन करता है? कुछ पुरुष ऐसा करते हैं. महिलाओं को किसके खिलाफ लड़ना चाहिए? महिलाओं को इन विकृतपुरुषों के खिलाफ लड़ना चाहिए. उन्होंने मुख्य आरोपी के तृणमूल कांग्रेस से संबंध पर बात करने से इनकार कर दिया. सांसद कल्याण बनर्जी ने कहाकि जिसने भी ऐसा किया है उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए. सुरक्षा और संरक्षा की स्थिति हर जगह एक जैसी है जब तक पुरुषों कीमानसिकता ऐसी ही रहेगी ये घटनाएं होती रहेंगी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बरेली के IVRI में दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, कहा पशु जीवन भी ‘धन’ हैं जैव विविधता बचाना समय की मांग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के 11वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों कोपदक व उपाधि देकर सम्मानित किया. उन्होंने पशु चिकित्सा क्षेत्र में उपाधि और पदक पाने वाले मेधावियों को बधाई दी. कहा कि इस समारोह मेंछात्राओं की बड़ी संख्या में देखकर गर्व की अनुभूति होती है. बेटियां अन्य क्षेत्रों की तरह पशु चिकित्सा क्षेत्र में भी आगे रही हैं यह बहुत ही शुभ संकेतहै. राष्ट्रपति ने कहा कि आप सब ने निरीह और बेजुबान पशुओं की चिकित्सा और कल्याण के क्षेत्र को अपने करियर के रूप में चुना है. इस चुनाव केपीछे ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:’ की भारतीय सोच का भी योगदान रहा है. योगी आदित्यनाथ ने किया राष्ट्रपति का स्वागतराष्ट्रपति सुबह करीब 9:50 बजे भारतीय वायु सेना के विमान से त्रिशूल एयरबेस पर उतरीं. वहां उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. इस मौके पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि राज्यमंत्रीभागीरथ चौधरी भी मौजूद रहे. यहां से वह सीधे आईवीआरआई परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार पहुंचीं. दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने स्नातक, मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री के विद्यार्थियों को अपने हाथ से प्रमाण पत्र व गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया. राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ईशावास्यम् इदम्सर्वम्’ के जीवन मूल्य पर आधारित हमारी संस्कृति, सभी जीव-जंतुओं में ईश्वर की उपस्थिति को देखती है. पशुओं से हमारे देवताओं व ऋषि-मुनियोंका संवाद होता है. पशुओं के कल्याण की मन में भावनाभगवान के कई अवतार भी इसी विशिष्ट श्रेणी में हैं. उन्होंने कहा कि चिकित्सक या शोधकर्ता के रूप में कार्य करें तो बेजुबान पशुओं के कल्याण कीभावना मन में हो. पशु और मानव में एक परिवार का रिश्ता है. उन्होंने कहा कि पशुओं में बीमारियों की रोकथाम में टीकाकरण की अहम भूमिका है. पशु चिकित्सा अनुसंधान में आईवीआरआई से जुड़े वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं का योगदान सराहनीय है. इस संस्थान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों कोप्राप्त किया है. राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में अनके टीके यहीं पर विकसित किए गए हैं यह गर्व की बात है.द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि पशु हमारेलिए ‘साधन’ (परिवहन के लिए) और किसानों के लिए ‘बल’ रहे हैं. पशु के बिना किसान आगे नहीं बढ़ सकता है पशु जीवन धन हैं उनके बिना हमजिंदगी सोच नहीं सकते.राष्ट्रपति ने विलुप्त हो रहे जीव-जंतुओं पर चिंता जताई. कहा कि जब विभिन्न प्राणियों का संवर्धन होगा, तब जैव-विविधताबढ़ेगी और यह धरती तथा मानव जाति खुशहाल होगी. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान जैसी संस्थाओं से अपील है कि वे जैव-विविधता कोबढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाएं और आदर्श प्रस्तुत करें.