स्वस्थ जीवन के मंत्र, अमित शाह ने युवाओं को दी जीवनशैली सुधारने की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिवर एवं पित्त विज्ञान संस्थान (ILBS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने युवाओं को बेहतरऔर लंबा जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताईं और खुद के जीवन में आएबदलावों पर भी प्रकाश डाला। नींद, आहार और व्यायाम से बदली ज़िंदगीअमित शाह ने कहा कि मई 2020 से उन्होंने अपनी जीवनशैली में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, भरपूर पानी औरनियमित व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार पाया है। उन्होंने बताया कि अब वह एलोपैथिक दवाओं औरइंसुलिन से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। युवाओं को दी सलाहगृह मंत्री ने खासतौर पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें रोज़ अपने शरीर के लिए दो घंटे और दिमाग के लिए कम से कम छह घंटे कीनींद अवश्य लेनी चाहिए। ऐसा करने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी बड़ा बदलाव महसूस होगा। बुद्ध की कहानी से समझाया आत्म-अनुशासन का महत्वअमित शाह ने महात्मा बुद्ध से जुड़ी एक प्रेरणादायक कथा भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक महिला अपने बेटे की गूड़ खाने की आदत छुड़वाने केलिए बुद्ध के पास गई। बुद्ध ने उस महिला को एक सप्ताह बाद आने को कहा। जब वह दोबारा पहुंची, तब बुद्ध ने लड़के को गूड़ न खाने की सलाहदी। मां के पूछने पर कि यही बात पहले क्यों नहीं कही, बुद्ध ने उत्तर दिया कि वे स्वयं भी गूड़ खाते थे और पहले अपनी आदत सुधारना चाहते थे।अमित शाह ने इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया कि दूसरों को सलाह देने से पहले खुद पर अमल करना जरूरी है।स्वस्थ जीवन ही देश के विकास की नींवअमित शाह ने यह भी कहा कि आज के युवा जो आने वाले दशकों तक देश को आगे बढ़ाएंगे, उन्हें अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। एकस्वस्थ शरीर और मस्तिष्क ही राष्ट्र निर्माण में वास्तविक योगदान दे सकता है।
19 साल बाद ठाकरे बंधु साथ आने को तैयार? महाराष्ट्र के हित में एकता की नई पहल

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में एक साक्षात्कार में संकेत दिया है कि वह अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मतभेदभुलाने को तैयार हैं। राज ठाकरे का कहना है कि उनके और उद्धव के बीच के झगड़े व्यक्तिगत नहीं हैं और इन मतभेदों को दरकिनार कर महाराष्ट्र औरमराठी भाषा के हित में एकजुट हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा, “एक साथ आना मुश्किल नहीं, यह केवल इच्छाशक्ति की बात है।”हिंदी अनिवार्यता पर दोनों दलों का विरोधराज ठाकरे की MNS और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) दोनों ने ही फडणवीस सरकार द्वारा कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य बनाने केनिर्णय का विरोध किया है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के एक जैसे विचार सामने आए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि भविष्य में वे एक मंच पर आसकते हैं। ‘व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बड़ी सोच की जरूरत’राज ठाकरे ने यह भी कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत इच्छा नहीं है, बल्कि सभी मराठी लोगों को एकजुट होकर एक बड़ी राजनीतिक ताकतबनानी चाहिए, जो महाराष्ट्र के हितों के लिए कार्य करे। उद्धव ठाकरे का जवाब: पहले नीति स्पष्ट होवहीं, उद्धव ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह छोटे-मोटे विवादों को किनारे रखने को तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्टकिया कि सहयोग उन्हीं के साथ संभव है, जो महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ नहीं जाते। उद्धव ने कहा, “हम बार-बार समर्थन और विरोध नहीं कर सकते।पहले यह तय हो कि कौन सच में महाराष्ट्र के पक्ष में है, फिर हम मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।”मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए एक मंच की जरूरतदोनों नेताओं ने यह स्वीकार किया है कि मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए सभी मराठी समर्थक दलों को एकजुट होने की आवश्यकता है।यह देखा जाना बाकी है कि क्या यह बयानबाज़ी किसी ठोस राजनीतिक गठबंधन में बदलेगी या सिर्फ एक भावनात्मक अपील बनकर रह जाएगी।
आम आदमी पार्टी ने भाजपा के डबल इंजन पर उठाए सवाल, संजय सिंह ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकाकहना है कि दिल्ली में डबल इंजन की सरकार के बावजूद कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और दुनिया के तमाम राजदूत रहते हैं, वहां भी अपराध पर काबू नहीं पाया जा रहा है, जबकि यही सरकार देश की कानून-व्यवस्थासंभालने की जिम्मेदारी निभा रही है।सीलमपुर हत्या पर भाजपा की खामोशी पर निशानासंजय सिंह ने सीलमपुर में हुए नाबालिग बच्चे की हत्या पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल दंगा प्रभावित क्षेत्रों कादौरा कर रहे हैं, तो दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) को भी पीड़ित परिवार से मिलने जाना चाहिए था। सिंह ने सवाल किया कि भाजपा वाले अब कहांछिपे हैं, खासकर जब दिल्ली में अपराध बढ़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा किए गए सुधारों का नुकसानसंजय सिंह ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में बेहतरीन सुधार किए थे, लेकिन भाजपासरकार ने उसे मात्र दो महीने में बर्बाद कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी स्कूलों ने बच्चों की फीस बढ़ा दी है, और अब मोहल्लाक्लीनिक भी बंद हो रहे हैं। दिल्ली में बढ़ती हिंसा पर कड़ा कदम उठाने की आवश्यकतासंजय सिंह ने दिल्ली में बढ़ती हत्याओं और गैंगवार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब दिल्ली में लोग पलायन के पोस्टर लगा रहे हैं। उन्होंनेभाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री से सवाल पूछा कि वे अपराध नियंत्रण के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सड़कों पर गैंगवार हो रहेहैं और कोर्ट के अंदर भी हत्याएं हो रही हैं, जो कि किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। भाजपा के दंगाई रुख पर तंजसंजय सिंह ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी देश के माहौल को खराब करने में सक्रिय रहती है। उनका कहना था कि भाजपा विपक्षीसरकारों के खिलाफ दुर्भावना दिखाती है और जहां उनकी सरकार होती है, वहां भी वही आग लगाती है।
भारत का नया अंतरिक्ष अध्याय, शुभांशु शुक्ला मई में जाएंगे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

भारत एक नई दिशा में बढ़ रहा है, स्पेस की अंधेरी गहराइयों में नया इतिहास रचने की ओर।अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के सहयोग से भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अगले महीने यानी मई में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओररवाना होंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी। नासा और एक्सिओम स्पेस के साथ ट्रेनिंगशुभांशु शुक्ला पिछले 8 महीनों से नासा और प्राइवेट स्पेस कंपनी एक्सिओम स्पेस के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस मिशन के तहत शुभांशु को भेजनेके लिए भारत ने करीब 60 मिलियन डॉलर का भुगतान किया है। यह एक प्राइवेट कॉमर्शियल मिशन है, जो भारतीय अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में एकमहत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्रीकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर बताया कि “भारत अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक निर्णायक अध्याय लिखने के लिए तैयार है।” उन्होंनेकहा, “ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) का दौरा करने वाले पहले भारतीय होंगे।” वे राकेश शर्मा के बाद चार दशकों मेंअंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री होंगे। कम उम्र के अंतरिक्ष यात्रीशुभांशु शुक्ला इसरो द्वारा चुने गए सबसे कम उम्र के अंतरिक्ष यात्री हैं। उनकी उम्र सिर्फ 40 साल है, और उनके पास एक लंबा करियर है। इस मिशनकी कमांडर नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन होंगी, जो अब एक्सिओम स्पेस के लिए काम करती हैं। मिशन और स्पेसएक्स क्रू ड्रैगनइस मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल में बैठेंगे, जो स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। यह मिशनअमेरिकी फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा।
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने पश्चिम बंगाल हिंसा पर की कड़ी टिप्पणी, ‘हिंसा के पंथ को खत्म करना होगा’

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में हाल ही में हुई हिंसा ने बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों को प्रभावित किया। इस संदर्भ मेंराज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इन घटनाओं को “मौत का नाच” करार दिया और हिंसा को जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंनेकहा कि बंगाल में फैलती हिंसा की खबरें भयावह हैं, और इसे पूरी तरह से खत्म करना जरूरी है। राज्यपाल ने आगे कहा, “हिंसा के पंथ को ताबूत में बंद कर आखिरी कील भी ठोकनी होगी। यह हमारे राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिएअत्यंत आवश्यक है।”हिंसा के खिलाफ एक्शन प्लान: राज्यपाल बोस का बयानराज्यपाल बोस ने कहा कि मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे स्थानों पर होने वाली हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंनेकहा कि इन हिंसक घटनाओं के बाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद उनके पास एक ठोस कार्ययोजना होगी, जिस पर मिशन मोड में कामकिया जाएगा। बोस ने यह भी कहा कि हिंसा प्रभावित इलाकों में कोई भी हिंसा नहीं होनी चाहिए और सरकार हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने हिंसाको लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और इसके खिलाफ ठोस कदम उठाने की बात की। राज्यपाल का हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरासंसद द्वारा पारित वक्फ संशोधन कानून के विरोध में बंगाल में हिंसा हुई थी। बृहस्पतिवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों कादौरा करने का निर्णय लिया। उन्होंने मालदा और मुर्शिदाबाद का दौरा करने का समय तय किया है, जहां वह इन क्षेत्रों में हो रहे घटनाक्रमों कीजानकारी प्राप्त करेंगे। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और एसआईटी गठनकेंद्र सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा की जरूरत को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इन हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती काआदेश दिया। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने इन क्षेत्रों में हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की निगरानी का भी निर्देश दिया। मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच के लिए उच्च न्यायालय ने एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया है, जिसमें डीआईजी मुर्शिदाबाद रेंज के नेतृत्व मेंएक नौ सदस्यीय टीम काम करेगी। एसआईटी में सीआईडी और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी शामिल हैं, जो जांच के माध्यम से हिंसा के पीछे कीसच्चाई सामने लाने की कोशिश करेंगे। एसआईटी का गठन: मुर्शिदाबाद में भड़कती हिंसा की जांच11-12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद जिले के सुती, धुलियान और जंगीपुरइलाकों में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस घटना में महिलाओं केउत्पीड़न की भी खबरें आई थीं, जो जांच का विषय बन गई हैं। इस हिंसा के चलते मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ और अब एसआईटीकी मदद से जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। राज्यपाल बोस ने हिंसा को खत्म करने और शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाने का भरोसा दिया है।
मनोज श्रीवास्तव ने की देव भूमि सम्भल की यात्रा, प्राचीन मंदिरों का किया दर्शन

संभल: भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत तिब्बत सहयोग मंच के क्षेत्र संयोजक, मनोज श्रीवास्तव ने 16 अप्रैल को देव भूमिसम्भल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के प्राचीन मंदिरों का दर्शन किया और धार्मिक स्थलों की पुनर्निर्माण गतिविधियों का अवलोकन किया। प्राचीन हनुमान मंदिर और हरियर मंदिर की परिक्रमामनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सम्भल में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की हाल ही में पुनः प्राण प्रतिष्ठा की गई है, जिसका उन्होंने दर्शन किया। इसकेअलावा, उन्होंने सम्भल के प्रसिद्ध हरियर मंदिर (जिसे वर्तमान में सम्भल जमा मस्जिद के नाम से जाना जाता है) की परिक्रमा भी की। श्रीवास्तव ने इसेएक ऐतिहासिक घटना बताया, यह दावा करते हुए कि वह और उनके सहयोगी संभवतः पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 500 वर्षों के बाद इस मंदिर कीपरिक्रमा की। पुलिस चौकी का निरीक्षण और परिवारिक मित्र के साथ जलपानसम्भल यात्रा के दौरान श्रीवास्तव ने जमा मस्जिद के सामने स्थित नई पुलिस चौकी का भी निरीक्षण किया, जो अच्छे रूप से तैयार हुई है। इस यात्रा केदौरान उनके साथ वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह तोमर भी थे। बाद में, श्रीवास्तव और उनके सहयोगी सम्भल में अपने परिवारिक मित्र रूपसिंह राणा के यहां जलपान करने पहुंचे। नगीना में स्वागत और आगामी यात्रा की योजनाइसके अतिरिक्त, नगीना में कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत का आयोजन किया गया। श्रीवास्तव ने यह भी साझा किया कि यह यात्रा उनकी व्यक्तिगत यात्राथी और वह जल्द ही लखनऊ से वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सम्भल का दौरा करेंगे। देव भूमि सम्भल का महत्वमनोज श्रीवास्तव ने सभी मित्रों से निवेदन किया कि जब भी वे सम्भल का उल्लेख करें, तो उसे “देव नगरी सम्भल” के रूप में ही लिखें या बोलें। उन्होंनेइस क्षेत्र को तीर्थों का तीर्थ बताया, जहां भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का प्रवास हुआ था और कई अन्य पवित्र स्थान स्थित हैं। श्रीवास्तव ने अपनी यात्रा का समापन “जय कल्कि भगवान की” और “जय पवित्र स्थल देव भूमि सम्भल की” के उद्घोष के साथ किया।सम्भल की यात्रा से जुड़ी आगामी योजनाएंमनोज श्रीवास्तव ने बताया कि भविष्य में, वह और उनके वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही सम्भल का दो दिवसीय दौरा करेंगे, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिकमहत्व के स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा।
जातिवाद और भेदभाव पर राहुल गांधी का आक्रोश, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी ने हाल ही में संसद में दलित, आदिवासी और OBC समुदाय के छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात की, जहांउन्होंने बातचीत के दौरान जातिवाद और भेदभाव की गंभीर समस्या का सामना कर रहे छात्रों के अनुभव सुने। राहुल गांधी ने बताया कि इस बातचीत के दौरान इन समुदायों के छात्रों ने उन्हें बताया कि उन्हें उच्च शिक्षा के संस्थानों में जातिगत भेदभाव का सामनाकरना पड़ता है, जो कि शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह से नकारता है। उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर के शिक्षा के महत्व को याद करते हुए कहा किअंबेडकर ने हमेशा यह कहा था कि शिक्षा ही वह साधन है जिसके द्वारा वंचित वर्ग सशक्त बनकर जातिवाद को समाप्त कर सकते हैं। जातिवाद के कारण कई छात्रों की जान गई: राहुल गांधीराहुल गांधी ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि दशकों बाद भी लाखों छात्रों को हमारी शिक्षा व्यवस्था में जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जातिवाद के कारण कई होनहार छात्रों की जान चली गई, जैसे कि रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी।राहुल गांधी ने इन घटनाओं को “भयावह” बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।कर्नाटक में ‘रोहित वेमुला एक्ट’ की आवश्यकताराहुल गांधी ने इस संबंध में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राज्य में रोहित वेमुला एक्ट लागू किया जाए।उनका कहना है कि भारत के किसी भी बच्चे को वह जातिवाद नहीं सहना चाहिए जिसे बाबासाहेब अंबेडकर, रोहित वेमुला और करोड़ों लोगों ने सहाथा। राहुल गांधी का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब देश में जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ एक व्यापक बहस हो रही है, और उनके इस कदमको छात्रों और समाज के एक बड़े हिस्से ने सराहा है।
वक्फ संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कांग्रेस ने किया स्वागत, बताया संविधान की जीत

कांग्रेस पार्टी ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। पार्टी ने इस संशोधन को सिर्फएक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक वैचारिक हमले के रूप में परिभाषित किया है। कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार जिसे सुधार कह रही है, वह असल में धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। संविधान के अनुच्छेद 26 का हवालाडॉ. सिंघवी ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 हर नागरिक और धार्मिक समूह को अपने धर्म की स्वतंत्रता के साथ-साथ उससे संबंधितसंस्थाओं को संचालित करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम में किया गया बदलाव, जैसे कि वक्फ बोर्ड में चुनाव की जगह100 प्रतिशत नामांकन का प्रावधान, स्वायत्तता के सिद्धांत का उल्लंघन है। धारा 9 और 14 पर सुप्रीम कोर्ट की रोकसिंघवी ने वक्फ अधिनियम की धारा 9 और 14 का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे इन प्रावधानों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की बहुलता का प्रावधानकरके धार्मिक संस्थाओं की आत्मनिर्भरता को कमजोर किया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 9 के अनुसार, केंद्रीय वक्फ परिषद के 22 में से 12 सदस्य गैर मुस्लिम हो सकते हैं, वहीं धारा 14 वक्फ बोर्ड में 11 में से सात गैर मुस्लिम सदस्यों की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बिंदुओं परफिलहाल रोक लगा दी है। गैर लोकतांत्रिक प्रावधानों की आलोचनाउन्होंने बताया कि नए कानून के अनुसार, यदि वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित भी कर दें, तब भी उसे सरकारकी अनुमति के बिना नहीं हटाया जा सकता। साथ ही वक्फ बोर्ड का सीईओ गैर मुस्लिम हो सकता है, जिसे सिंघवी ने “हास्यास्पद” करार दिया। वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टतासिंघवी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक घोषित या पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिनियममें कलेक्टर द्वारा एक शिकायत के आधार पर संपत्ति को विवादित घोषित करने के प्रावधान की भी आलोचना की गई, क्योंकि इसमें कोई समय सीमाया स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं की गई है। प्रतापगढ़ी का बयान – अगली सुनवाई में और राहत की उम्मीदराज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षद्वारा संसद और जेपीसी में दिए गए सुझावों को अनदेखा कर यह कानून पारित किया गया था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाई है, तो आगे की सुनवाई में और राहत मिलने की संभावना है।कांग्रेस की प्रतिबद्धता – संविधान की रक्षा में अडिगप्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा संविधान को बनाने और उसकी रक्षा करने के लिए खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी। उन्होंने इस कानूनको सिर्फ एक समुदाय का मुद्दा न मानते हुए इसे संविधान की आत्मा पर हमला करार दिया।
भाजपा युवा मोर्चा का कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन, राहुल गांधी से इस्तीफे की मांग

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के नेतृत्व में भाजपा युवा मोर्चा ने आज नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी का नाम सामने आने के बादकांग्रेस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी के इस्तीफे और उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग की। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा” – वीरेन्द्र सचदेवावीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि यह मामला 2012 का है, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और याचिका भी उसी पार्टी के लोगों द्वारा दायर की गई थी।ऐसे में भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाना बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि अब जब जांच एजेंसियां कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई कर रही हैं, तो कांग्रेसनेताओं को आपत्ति क्यों हो रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) और यंग इंडिया कंपनी ने जनता के टैक्स से जुटाए गए पैसों का दुरुपयोग किया।उन्होंने कहा, “नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने देश की संपत्ति को लूटा है और अब जनता जवाब मांग रही है। जब तक जवाब नहीं मिलता, हमारासंघर्ष जारी रहेगा।” कांग्रेस को देनी होगी जवाबदेही” – सागर त्यागीयुवा मोर्चा अध्यक्ष सागर त्यागी ने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जिसने देश को लूटने, बांटने और देश विरोधी ताकतों को शरण देने काकाम किया, उससे अब हिसाब लेने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर देश को एकजुट किया, अबराहुल गांधी को भी नेशनल हेराल्ड केस पर जवाब देना होगा। कांग्रेस परिवार बेल पर, पार्टी सड़क पर” – रोहित चहल का कटाक्षभाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रोहित चहल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में आज माता जी, भैया जी और जीजा जी सभी ‘बेल’ पर हैं।उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता खुद को निर्दोष बताने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं, जबकि कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने पूछा कि अगर कुछगलत नहीं किया, तो जांच से डर क्यों? प्रदर्शन में प्रमुख नेता रहे मौजूदइस विरोध प्रदर्शन में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री अरुण दराल, गौरव जोरासिया, पुनीत शर्मा समेत अन्य कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी नेएक स्वर में राहुल गांधी के इस्तीफे और कांग्रेस से जवाबदेही की मांग की।
उपराष्ट्रपति के बयान पर कपिल सिब्बल की तीखी प्रतिक्रिया, नयाय पालिका पर हमला न करें

वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा किउपराष्ट्रपति को किसी राजनैतिक पार्टी के प्रवक्ता की तरह नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष संवैधानिक पदाधिकारी की तरह व्यवहार करना चाहिए। सिब्बलने कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति का यह बयान सुनकर न केवल दुख हुआ, बल्कि हैरानी भी हुई। “अनुच्छेद 142 की शक्ति सुप्रीम कोर्ट को है” – सिब्बलसिब्बल ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जिससे वह पूर्ण न्याय सुनिश्चित करसकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल केवल औपचारिक पद हैं और उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही कार्य करना होता है। ऐसे मेंराज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबित रखना या मनमाने ढंग से निर्णय लेना संविधान की भावना के विपरीत है। तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामलासुप्रीम कोर्ट द्वारा तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में यह स्पष्ट किया गया था कि राज्यपाल विधानसभा से पारित विधेयकों कोअनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकते। इस पर उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतें लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हावी हो रही हैं। इस परसिब्बल ने पलटवार करते हुए कहा कि न्यायपालिका की भूमिका संविधान के अनुरूप है और उसमें हस्तक्षेप अनुचित है। कोर्ट का फैसला हो, तो सबको मानना चाहिएकपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला, चाहे वह दो जजों का हो या पांच का, सभी नागरिकों और संस्थाओं पर बाध्यकारी होताहै। उन्होंने उपराष्ट्रपति को सलाह दी कि अगर किसी फैसले से असहमति है तो उसके लिए पुनर्विचार याचिका या अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति कीओर से सलाह ली जा सकती है, न कि सार्वजनिक आलोचना की जानी चाहिए। सिब्बल का व्यंग्य: “मिसाइल कोर्ट नहीं, नोटबंदी थी”उपराष्ट्रपति ने अनुच्छेद 142 को लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ ‘परमाणु मिसाइल’ बताया था। इस पर सिब्बल ने कटाक्ष करते हुए कहा किअसली मिसाइल तो नोटबंदी थी, जिससे पूरे देश को परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले को मिसाइल कहना न्यायपालिका का अपमानहै। जज जवाब नहीं दे सकते, उन्हें निशाना न बनाएंसिब्बल ने कहा कि जज संविधान के तहत काम करते हैं और सार्वजनिक रूप से अपने बचाव में कुछ नहीं कह सकते। इसलिए उन पर इस तरह केबयान देकर दबाव बनाना या उन्हें बदनाम करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आए वीरास्वामी फैसले के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश की अनुमतिके बिना किसी जज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सिब्बल के सवालकपिल सिब्बल ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के घर से बरामद नकदी का मामला उठाते हुए कहा कि इतने बड़े खुलासे के बावजूद एफआईआर क्योंनहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि जब महाभियोग के लिए 55 सांसदों ने दस्तखत किए थे, तब भी उपराष्ट्रपति कार्यालय ने महीनों तक पुष्टि नहींकी। कार्यपालिका निष्क्रिय रहेगी तो न्यायपालिका दखल देगीसिब्बल ने कहा कि जब कार्यपालिका अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करती, तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है। उन्होंने यह भी पूछा कि जबपूर्व चीफ जस्टिस पर आरोप लगे थे, तब सरकार ने एफआईआर की मांग क्यों नहीं की? सांप्रदायिक बयानों पर दोहरे मापदंडसिब्बल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज द्वारा दिए गए कथित सांप्रदायिक बयान का हवाला देते हुए कहा कि उस समय उपराष्ट्रपति की ओर सेकोई आपत्ति नहीं आई। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है और पक्षपातपूर्ण रवैया उचित नहीं है।