राज्यसभा में संविधान बदलने के मुद्दे पर हंगामा, सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

राज्यसभा में सोमवार को संविधान बदलने के मुद्दे पर जबरदस्त हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नारेबाजी के चलते सदन कीकार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। मल्लिकार्जुन खड़गे का बयानदोपहर में कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक के मंत्री ने संविधान बदलने जैसीकोई बात नहीं कही है। खड़गे ने कहा, “संविधान बदलने की बात अक्सर सत्ता पक्ष की ओर से ही उठाई जाती है।” उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति से आग्रह करते हुए कहा, “आरएसएस और बीजेपी के नेताओं ने ही दो-तिहाई बहुमत मिलने पर संविधान बदलने कीबात कही थी। लेकिन कांग्रेस हमेशा संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी रहेगी।” सत्ता पक्ष का जवाबखड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का बयान पूरी तरह गलत और झूठा है। उन्होंने कहा किकर्नाटक विधानसभा में मुस्लिम ठेकेदारों को चार प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया गया, जो डॉ. अंबेडकर के विचारों के खिलाफ है। नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, “तेलंगाना विधानसभा में एससी, एसटी और ओबीसी का हक छीनकर मुस्लिमों को आरक्षण दिया गया।इसी तरह कर्नाटक में भी ठेकेदारी में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।” हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगितसत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी के चलते राज्यसभा की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित करनी पड़ी। इस मुद्दे पर सत्ताऔर विपक्ष के बीच मतभेद जारी हैं, जिससे सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर छात्रों को किया संबोधित, आरएसएस पर साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को जंतर मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने इंडिया गठबंधन के छात्र संगठनों के प्रदर्शनमें भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा प्रहार किया। शिक्षा तंत्र को खत्म करने की साजिश: राहुल गांधीराहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि आरएसएस देश के शिक्षा तंत्र को नष्ट करने पर आमादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयोंमें ज्यादातर वाइस चांसलर आरएसएस से जुड़े हुए हैं और जल्द ही राज्यों के विश्वविद्यालयों में भी यही स्थिति हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगरशिक्षा प्रणाली पर आरएसएस का पूर्ण नियंत्रण हो गया, तो यह देश के लिए घातक सिद्ध होगा। बेरोजगारी पर सरकार की चुप्पी पर सवालराहुल गांधी ने सरकार पर बेरोजगारी के मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवाओं को बेरोजगार बनाया जा रहा है और सरकार इससमस्या पर बात नहीं कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों परबात करनी चाहिए, लेकिन उनकी प्राथमिकता सिर्फ उद्योगपतियों को बढ़ावा देना है। ‘हमेशा युवाओं के साथ खड़ा हूं’राहुल गांधी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आश्वासन दिया कि वे हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन केबीच कुछ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आरएसएस और भाजपा की विचारधारा का मुकाबला करने का लक्ष्य सबका एक ही है। छात्रों का आरोप: शिक्षा हो रही महंगी और निजीकरण बढ़ रहाप्रदर्शन में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑलइंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), क्रांतिकारी युवा जनतादल (CRJD) और समाजवादी छात्रसभा जैसे कई छात्रसंगठनों ने भाग लिया। शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांगछात्र संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा महंगी और निजीकरण की ओर बढ़ रही है। गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिएअच्छी शिक्षा तक पहुंच कठिन होती जा रही है। छात्रों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, जिसमें धांधली औरपेपर लीक जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। विश्वविद्यालय चुनाव और पारदर्शिता की मांगप्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालयों में चुनाव बहाल करने, प्रशासन में पारदर्शिता लाने और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को हल करने की मांग उठाई। उन्होंनेकहा कि सरकार की नीतियां गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के भविष्य को अंधकारमय बना रही हैं।
एलायंस एयर की फ्लाइट में तकनीकी खराबी, शिमला एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग

दिल्ली से शिमला जा रही एलायंस एयर की फ्लाइट संख्या 9I821 में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब विमान के ब्रेक में तकनीकीखराबी का सामना करना पड़ा। विमान में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा समेत कुल 44 यात्री सवार थे।शिमला एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, सभी यात्री सुरक्षित हैं और विमान को निरीक्षण के लिए उतार दिया गया है।लैंडिंग के दौरान आई समस्याहिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने घटना के बारे में बताया कि जब विमान उतरने वाला था, तो वह उस निर्धारित स्थान पर नहीं उतराजहां उसे उतरना चाहिए था। विमान रनवे के अंतिम छोर तक पहुंच गया और आपातकालीन ब्रेक का उपयोग करना पड़ा। उन्होंने कहा कि रनवे समाप्तहोने से पहले ही विमान को घुमाया गया और सुरक्षित रूप से रोका गया। यात्रियों को विमान में लगभग 20-25 मिनट तक रुकना पड़ा। पायलट की सूझबूझ से टली दुर्घटनारिपोर्ट के अनुसार, पायलट ने तकनीकी खराबी के कारण विमान की गति धीमी न हो पाने की स्थिति में तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगाए। इस त्वरितप्रतिक्रिया ने संभावित दुर्घटना को टाल दिया। एहतियात के तौर पर धर्मशाला के लिए निर्धारित आगे की उड़ान को रद्द कर दिया गया। हालांकिएलायंस एयर ने अभी तक तकनीकी खराबी या उसके बाद की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। रनवे की लंबाई बनी चुनौतीहिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि रनवे छोटा होने के कारण लैंडिंग में समस्या उत्पन्न हुई। जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डा, जो राज्यकी राजधानी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है, की रनवे लंबाई 1,230 मीटर है। दोनों ओर खड़ी ढलानों के कारण इसे भारत के सबसेचुनौतीपूर्ण हवाई अड्डों में से एक माना जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि टायर फटने के बाद आपातकालीन ब्रेक लगाने पड़े और इस घटना पर नागरविमानन मंत्री से चर्चा की जाएगी। आधिकारिक जांच और सुरक्षा उपायएलायंस एयर ने घटना के बाद विमान का निरीक्षण शुरू कर दिया है। विमानन विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि तकनीकी खराबी कावास्तविक कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चितकरने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सांसदों के वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी,अब मिलेगी 1.24 लाख रुपये मासिक सैलरी और बढ़ा हुआ भत्ता

सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी होगी। नए प्रावधान के तहत सांसदों का वेतन 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.24 लाख रुपये प्रति माह कर दियागया है। इसके साथ ही संसद सत्र के दौरान मिलने वाला दैनिक भत्ता भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, पूर्वसांसदों की पेंशन में भी वृद्धि की गई है। अब पूर्व सांसदों को 25,000 रुपये के बजाय 31,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। यदि कोई सांसदपांच साल से अधिक सेवा करता है, तो उसे मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी गई है। सांसदों के वेतन और भत्तों में आखिरी बार संशोधन अप्रैल 2018 में किया गया था। उस समय सांसदों का मूल वेतन 1 लाख रुपये प्रतिमाह तयकिया गया था, ताकि उनकी सैलरी महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के अनुसार हो। तब सांसदों को अपने क्षेत्र में कार्यालय संचालन औरलोगों से मिलने-जुलने के लिए 70,000 रुपये का भत्ता और कार्यालय के खर्च के लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह मिलता था। संसद सत्र के दौरानप्रतिदिन 2,000 रुपये का भत्ता भी दिया जाता था। अब इन सभी भत्तों में भी वृद्धि की गई है। सांसदों को वेतन और भत्तों के अलावा कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। इनमें यात्रा भत्ता, आवास, बिजली-पानी और संचार सुविधाएं शामिल हैं।सांसद हर साल 34 फ्री डोमेस्टिक फ्लाइट का लाभ उठा सकते हैं और किसी भी समय फर्स्ट क्लास में ट्रेन यात्रा कर सकते हैं। सड़क यात्रा के लिए भीईंधन का खर्च दिया जाता है। इसके अलावा, सांसदों को दिल्ली में 5 साल के लिए बिना किराए का सरकारी आवास मिलता है। सीनियरिटी केआधार पर हॉस्टल का कमरा, अपार्टमेंट या बंगला आवंटित किया जाता है। जो सांसद सरकारी आवास नहीं लेते, उन्हें घर का भत्ता मिलता है। सांसदोंको सालाना 50,000 यूनिट मुफ्त बिजली और 4,000 किलोलीटर मुफ्त पानी भी दिया जाता है। फोन और इंटरनेट के उपयोग के लिए भी वार्षिकभत्ता प्रदान किया जाता है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब देश में महंगाई और बेरोजगारी की स्थिति को लेकर बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दलों और जनता के एक वर्ग नेसवाल उठाया है कि जब देश में आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, तो सांसदों के वेतन और सुविधाओं में वृद्धि कितनी न्यायसंगत है। सरकार ने इस वृद्धिको सांसदों के जीवन यापन और महंगाई के दबाव को देखते हुए आवश्यक बताया है।
कुणाल कामरा विवाद में फिर फंसे,महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी के बाद बवाल

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के खिलाफ की गई एकटिप्पणी ने हंगामा खड़ा कर दिया है। कामरा ने अपने शो में फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के एक गाने का पैरोडी वर्जन पेश किया था। इस गाने में 2022 में शिवसेना में हुई टूट का जिक्र किया गया था, जिसमें उन्होंने “गद्दार” शब्द का इस्तेमाल किया। हालाँकि, कामरा ने सीधे तौर पर शिंदे का नाम नहींलिया था। शिवसेना कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियावीडियो सामने आने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और मुंबई के खार इलाके में स्थित कामरा के स्टूडियो में तोड़फोड़ करदी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में शिवसेना कार्यकर्ता कुर्सियां फेंकते और स्टूडियो में तोड़फोड़ करते नजर आए। कुणाल कामरा का बयानकामरा ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अदालत आदेश देगी, तो वह माफी मांग लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष से किसी भी तरह का वित्तीय समर्थन नहीं मिला है।उन्होंने पुलिस को अपने वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करने की भी अनुमति दी है। कानूनी कार्यवाहीशिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक मुरजी पटेल ने कुणाल कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। इसकेअलावा, शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने धमकी दी है कि अगर कामरा महाराष्ट्र में दिखे तो उन्हें भारत छोड़कर भागना पड़ेगा। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का रुखमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे “बर्दाश्त न करने योग्य” बताया। बीजेपी प्रवक्ता राम कदम ने कहाकि कामरा को जहां भी देखा जाए, उनके चेहरे पर कालिख पोत देनी चाहिए। विपक्ष का समर्थनविपक्षी नेता उद्धव ठाकरे ने कामरा की टिप्पणी को सही ठहराते हुए कहा कि यह व्यंग्य के माध्यम से सच्चाई को उजागर करने का प्रयास था। कांग्रेसने स्टूडियो में की गई तोड़फोड़ की निंदा करते हुए कहा कि अगर किसी की भावना आहत हुई है तो कानूनी मार्ग अपनाया जाना चाहिए, हिंसा नहीं। करियर की शुरुआतकुणाल कामरा मुंबई के रहने वाले स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में एमटीवी में इंटर्नशिप के साथ अपने करियर की शुरुआत कीथी। बाद में वे प्रसून पांडे की कंपनी कॉर्कोइस फिल्म्स में प्रोडक्शन असिस्टेंट के तौर पर काम करने लगे। विज्ञापन इंडस्ट्री में आठ साल बिताने के बादउन्होंने 2013 में स्टैंड-अप कॉमेडी में कदम रखा। लोकप्रियता और विवादकामरा का पॉडकास्ट शो ‘शट अप या कुणाल’ काफी लोकप्रिय है, जिसमें वे राजनीति और समकालीन मुद्दों पर चर्चित हस्तियों के साथ बातचीतकरते हैं। हालांकि, उनके बेबाक विचारों के कारण वे कई बार विवादों में घिर चुके हैं। अर्नब गोस्वामी विवाद2020 में, इंडिगो फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी से उनकी भिड़ंत ने काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद कई एयरलाइंस ने उन पर यात्रा प्रतिबंधलगा दिया था। सोशल मीडिया और धमकियांकामरा को सोशल मीडिया पर भी धमकियों का सामना करना पड़ा है। एक बार तो उन्हें अपने राजनीतिक विचारों के कारण अपार्टमेंट खाली करने कोकहा गया था। कोर्ट में लड़ाई: अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल2023 में, कामरा ने आईटी नियमों में संशोधन को चुनौती देने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कुछ प्रावधानों कोअसंवैधानिक मानते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने का फैसला सुनाया। कामरा का प्रतिक्रियाफैसले के बाद कामरा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को मजबूत करता है।
भारत ने लगाई चीन के चार मुख्य उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटू, लेकिन घरेलों उत्पादों को हो सकता है फायदा “जाने क्या है पूरी प्रक्रिया”

भारत ने चार चीनी उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है. जिन उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है उनमें एल्युमीनियमफॉइल , वैक्यूम फ्लास्क, सॉफ्ट फेराइट कोर्स और ट्राइक्लोरो आइसोसिनोरिक एसिड शामिल हैं.घरेलू उत्पादकों की मदद और भारतीय बाजार में चीनके सस्ता सामान खपाने पर रोक लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है.सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टेक्सेस एंड कस्टम्स,राजस्व विभाग ने एकनोटिफिकेशन जारी कर चीन के उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की जानकारी दी. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वैक्यूम फ्लास्क, सॉफ्ट फेराइटकोर्स और ट्राइक्लोरो आइसोसिनोरिक एसिड के आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी पांच साल के लिए लागू रहेगी.वहीं एल्युमीनियम फॉइल पर फिलहालछह महीने के लिए एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है. फॉइल पर प्रति टन 873 अमेरिकी डॉलर की एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है.ट्राइक्लोरोआइसोसिनोरिक एसिड पर प्रति टन 276 डॉलर से लेकर 986 डॉलर के बीच में शुल्क लगाया गया है. इसका इस्तेमाल वाटर ट्रीटमेंट में होता है सॉफ्टफेराइट कोर्स पर 35 फीसदी शुल्क लगाया गया है. इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जर और टेलीकॉम डिवाइस में होता है.वैक्यूम इंसुलिटिड फ्लास्क पर लगाया गया शुल्कवैक्यूम इंसुलेटिड फ्लास्क पर प्रति टन 1732 डॉलर का शुल्क लगाया गया है. वाणिज्य मंत्रालय के डीजीटीआर विभाग ने भी इन उत्पादों पर शुल्कलगाने का सुझाव दिया था. चीन से सस्ते उत्पादों के आयात से घरेलू उद्योगों को नुकसान हो रहा था. ऐसी स्थिति में घरेलू उद्योगों को बचाने के लिएही विदेशों से आने वाले सस्ते उत्पादों पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया जाता है यह विश्व व्यापार संगठन की व्यवस्था के तहत ही है.डंपिंग का मतलब हैकि कोई देश अपने उत्पादों को दूसरे देश में कम कीमत पर बेचता है. इससे दूसरे देश की घरेलू कंपनियों को नुकसान होता है. डंपिंग-रोधी शुल्कलगाकर सरकार घरेलू कंपनियों को बचाती है अमूमन यह शुल्क तब लगाया जाता है जब कोई देश अपनी वस्तुओं को उनके उचित बाजार मूल्य सेकम कीमत पर निर्यात करता है जिससे दूसरे देश के घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचता है.सरकार का कहना है कि इन शुल्कों से भारतीय उद्योगों कोमदद मिलेगी. इससे वे चीन से आने वाले सस्ते आयात से मुकाबला कर पाएंगे.सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टेक्सेस एंड कस्टम्स,राजस्व विभाग ने एकनोटिफिकेशन जारी कर चीन के उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की जानकारी दी. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वैक्यूम फ्लास्क, सॉफ्ट फेराइटकोर्स और ट्राइक्लोरो आइसोसिनोरिक एसिड के आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी पांच साल के लिए लागू रहेगी. वहीं एल्युमीनियम फॉइल पर फिलहालछह महीने के लिए एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है। फॉइल पर प्रति टन 873 अमेरिकी डॉलर की एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है.
जस्टिस वर्मा ने किया दावा स्टोररुम नहीं है मेरे घर का हिस्सा, न ही वहां पर मिला मौजूद पैसा मेरा

Justice Verma Case: दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने का मामलालगातार गरमाता जा रहा है. अब जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है और दावा किया है कि स्टोररूम में उनके याउनके परिवार के किसी सदस्य के द्वारा कोई नकदी नहीं रखी गई। जस्टिस वर्मा ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश हो रही है. दरअसल मुख्यन्यायाधीश ने नकदी मिलने के मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय नेजस्टिस वर्मा से उनके ऊपर लगे आरोपों पर जवाब मांगा था.जस्टिस डीके उपाध्याय को भेजे पत्र में जस्टिस वर्मा ने लिखा कि ‘मेरे या मेरे परिवार केकिसी सदस्य को स्टोर रूम में मिली नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं है. न ही मेरे या मेरे परिवार को ये नकदी दिखाई गई.जस्टिस वर्मा ने घटना कोयाद करते हुए बताया कि ’14-15 मार्च की रात उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी. यह स्टोर रूम उनके स्टाफ क्वार्टर के पास स्थित है. स्टोर रूम को आम तौर पर इस्तेमाल न होने वाले फर्नीचर, बोतल, क्रॉकरी, इस्तेमाल किए हुए कारपेट आदि रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही उस स्टोर रूम में सीपीडब्लूडी का सामान भी रखा रहता है स्टोर रूम में कोई ताला नहीं है और वहां कई अधिकारी आते जाते रहते हैं. इस स्टोररू में सामने के दरवाजे से और पीछे के दरवाजे से भी आया जा सकता है यह मेरे आवास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ नहीं है और यह मेरे घर का हिस्सानहीं है. जस्टिस वर्मा ने बताया घटना के बारे मेंजस्टिस वर्मा ने बताया कि जिस दिन आग लगने की घटना हुई, उस दिन वे अपनी पत्नी के साथ मध्य प्रदेश में थे. उस वक्त घर पर सिर्फ मेरी बेटीऔर मेरी बुजुर्ग मां ही घर पर थीं मैं 15 मार्च की शाम को भोपाल से दिल्ली लौटा। जब आग लगी तो मेरी बेटी और मेरे निजी सचिव ने फायर ब्रिगेडको फोन किया.आग बुझाने के दौरान मेरे सारे स्टाफ और मेरे घर के सदस्यों को आग वाली जगह से हटा दिया गया था. जब आग बुझ गई और जब येलोग वहां पहुंचे तो मौके पर कोई नकदी नहीं थी. मैं फिर एक बार साफ कर दूं कि न तो मेरे द्वारा या मेरे परिवार के द्वारा कोई नकदी स्टोर रूम में रखीगई थी और न ही कथित तौर पर मिली नकदी से हमारा कोई संबंध है. ये पैसा हमारे द्वारा रखे जाने का दावा पूरी तरह से हास्यास्पद है. उन्होंने कहा किएक ऐसी जगह पर नकदी रखने का विचार ही बेतुका है जहां सब लोग आ जा सकते हैं.कि जस्टिस वर्मा नकदी मिलने की बात से ही इनकार कर रहे हैंवहीं सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार की शाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक वीडियो जारी की जिसमें जस्टिस वर्मा के आवास से मिले जले हुए नोटोंकी गड्डियां दिख रही हैं. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश को दिया निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू करने का दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट नेनिर्देश दिया है कि इस मामले की जांच तक जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई भी न्यायिक जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपलोडवीडियो पर जस्टिस वर्मा ने कहा कि ‘मैं वीडियो की सामग्री को देखकर हैरान हूं. क्योंकि उसमें कुछ ऐसा दिखाया गया है जो मौके पर मिला हीनहीं.भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने शनिवार को न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की. समिति के सदस्यों में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जीएससंधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल हैं. जस्टिस वर्मा ने अपने जवाब में कहा कि ‘इस घटना नेएक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में एक दशक से अधिक समय में बनाई गई मेरी प्रतिष्ठा को दागदार कर दिया है और इसने मुझे अपनाबचाव करने का कोई साधन नहीं छोड़ा है. मैं आपसे यह भी अनुरोध करूंगा कि आप इस बात पर विचार करें कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूपमें मुझ पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया गया और न ही मेरी ईमानदारी पर कभी शक किया गया. बतौर न्यायाधीश मेरे पिछले कामकाज के संबंध मेंजांच करा ली जाए.
परसीमन के बहाने DMK की अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर नजर,वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साधा निशाना

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आरोप लगाया कि द्रमुक के पास अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी उपलब्धियोंको जनता के सामने पेश करने के लिए कुछ नहीं है. इसलिए वह हिंदी थोपने और संसदीय सीटों के परिसीमन जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठा रहीहै.उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति की आलोचना करते हुए इसे अराजकता करार दिया सीतारमण ने अन्ना विश्वविद्यालय की छात्रा के यौनउत्पीड़न मामले को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा और पूछा कि क्या आरोपित द्रमुक पार्टी कार्यकर्ता नहीं है.सीतारमण ने द्रमुक से पूछा किउसकी सरकार ने तमिलनाडु के लिए क्या किया है. उन्होंने कहा कि द्रमुक अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए भावनात्मक मुद्दे उठा रहीहै. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साफ कर चुके हैं कि कि परिसीमन के मामले में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा.उन्होंने कहा किलोकसभा सीट बनाने के लिए जनसंख्या ही एकमात्र मापदंड नहीं है जैसा कि लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे छोटे जनसंख्या वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्वकरने वाले सांसदों से स्पष्ट है. हिंदी थोपने के विवाद पर सीतारमण ने कहा कि यह झूठा प्रचार है.बांघ विवाद को लेकर कर्नाटक में प्रदर्शनतमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर अंतर-राज्यीय जल विवादों में राज्य के अधिकारों को छोड़ने का आरोप लगाते हुए और मेकेदातु बांध विवादको लेकर कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ शनिवार को भाजपाइयों ने काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन किया.विरोध प्रदर्शनका नेतृत्व कर रहे भाजपा के राज्य प्रमुख के.अन्नामलाई ने दावा किया कि तमिलनाडु को केरल और कर्नाटक के साथ जल बंटवारे को लेकर कईसमस्याओं का सामना करना पड़ा है लेकिन स्टालिन ने उन्हें हल करने के लिए कुछ खास नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने परिसीमन को लेकरमुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है और वेवजह का नाटक कर रहे हैं.इस दौरान कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष और वहां के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार नेकहा- ”काला रंग शनि भगवान का है। मैंने थिरुनल्लार (पुडुचेरी में) उनके मंदिर के कई बार दर्शन किए हैं. उन्होंने कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातुमें जलाशय बनाने की योजना पर कहा कि यह बांध तमिलनाडु के लिए कर्नाटक से भी अधिक लाभकारी होगा.आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसजगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शनिवार को अपील की कि परिसीमन प्रक्रिया इस तरह से की जाए कि इससे लोकसभा और राज्यसभा मेंकिसी राज्य के प्रतिनिधित्व में कमी न आए. परसीमन का मुद्दा है गंभीरप्रधानमंत्री को लिखे पत्र में वाईएसआरसीपी प्रमुख ने इस बात पर प्रकाश डाला कि परिसीमन का मुद्दा इतना गंभीर है कि यह देश में सामाजिक औरराजनीतिक सद्भाव को बाधित करने का कारण बन सकता है. विपक्षी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान में इस तरह संशोधन किया जानाचाहिए कि किसी भी राज्य को अपने प्रतिनिधित्व में कमी का सामना न करना पड़े. हालांकि बैठक में में वाईएसआरसीपी को बुलाया गया था लेकिनउसने भाग नहीं लिया.कांग्रेस नेता एम वीरप्पा मोइली ने परिसीमन को लेकर चल रही अस्थिरता की आलोचना की और कहा कि शाह का यहआश्वासन कि दक्षिणी राज्यों की संसदीय सीटें कम नहीं की जाएंगी उन राज्यों के नेताओं द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त नहींहै.मोइली ने कहा देश में परिसीमन के संबंध में ढीली-ढाली बातें करना उचित नहीं है. परिसीमन आयोग की नियुक्ति होनी चाहिए और यह समिति काकाम है कि वह निर्णय ले। सभी दलों को विश्वास में लेकर यह किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि गृह मंत्री का कहना कि दक्षिण भारत में सीटेंकम नहीं होंगी. इसका मतलब यह नहीं है कि उत्तर में सीटें नहीं बढ़ेंगी यह भी दक्षिण को उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने के बराबर है.
आखिरकार कौन था सैयद सालार मसूद गाजी, संभल मेले को लेकर उठा जमकर विवाद “जानें क्या है वजह”

उत्तर प्रदेश में इस वक्त सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाले मेले को लेकर विवाद छिड़ा है. यह विवाद संभल से शुरू होकर अबबहराइच दरगाह में होने वाले मेले तक पहुंच गया है. इसे लेकर यूपी में सियासी हलचल भी तेज हो चुकी है दरअसल, एक पक्ष ने गाजी को सूफी संतबताते हुए मेले के आयोजन को बीते वर्षों की तरह अनुमति देने की अपील की है.वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि मसूद गाजी एक आक्रांता था औरइसलिए उसकी याद में किसी भी तरह के आयोजन की इजाजत नहीं होनी चाहिए.सैयद सालार मसूद गाजी गजनी के आक्रमणकारी महमूद गजनवीका सेनापति और उसका भांजा था.कहा जाता है कि सालार गाजी उत्तर भारत के दिल्ली, मेरठ, बुलंदशहर, बदायूं और कन्नौज के राजाओं को रौंदताऔर प्रमुख देवस्थानों को ध्वस्त करता हुआ बाराबंकी तक आ गया था. वह बहराइच पर आक्रमण कर अयोध्या पहुंचना चाहता था. पर 1034 ईसवीमें कौशल के महाराजा सुहेलदेव ने उसे और उसकी एक लाख 30 हजार की सेना को भी खत्म कर दिया बहराइच जिले में ही सैयद सालार मसूद गाजीकी दरगाह है. यहां उसकी याद में जेठ मेला का आयोजन होता है करीब एक माह तक चलने वाले मेले में जियारत करने के लिए बड़ी संख्या मेंजायरीन पहुंचते हैं. इसमें आम लोगों के साथ-साथ नामी लोग भी शिरकत करते रहे हैं. इसी सालार गाजी की याद में संभल में नेजा मेला आयोजितकिया जाता है. संभल प्रथ्वीराज की है राजधानीनेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी दावा करते हैं कि वर्ष 1015 के आसपास संभल पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी. कहा जाता है कि वर्ष1030 के आसपास पृथ्वीराज चौहान के बेटे संभल के शेख पचासे मियां की बेटी से शादी करना चाहते थे. शेख पचासे मियां की बेटी शादी नहींचाहती थीं इसकी सूचना सैयद सालार मसूद गाजी को भेजी गई. वह अपनी सेना के साथ संभल आए और पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया थाइस युद्ध में सैयद सालार मसूद गाजी के साथियों ने भी जान गंवाई थी. मसूद गाजी के जिन-जिन साथियों ने इस युद्ध में जान गंवाई, उनकी मजारसंभल के आसपास बनाई गई. उन्हीं मजार के आसपास मेले आयोजित किए जाते हैं.वहीं दूसरी ओर 2024 में छपे मुरादाबाद मंडल के गजेटियर मेंनेजा मेले का जिक्र है. इसमें यह भी कहा गया है कि इस मेले की शुरुआत से जुड़े कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं. इसी में सालार गाजी और पृथ्वीराज चौहानका जिक्र करते हुए दोनों के कालखंड को भी अलग-अलग बताया गया है.इस साल प्रशासन ने मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी है पुलिस ने कहाकि जिस सालार मसूद गाजी की याद में यह आयोजन किया जाता है वह महमूद गजनवी का सेनापति था. इतिहास में इस बात का जिक्र है कि सालारमसूद ने लूटपाट और हत्याएं की थीं. लुटेरे और हत्यारे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहींलुटेरे और हत्यारे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अगर इसके बाद भी किसी ने मेला लगाने की कोशिश की तो उसके खिलाफमुकदमा दर्ज किया जाएगा. संभल ASP श्रीश चंद्र ने कहा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा था उसका सेनापति सैयद सालार मसूद गाजीथा. मेले को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है कानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी खतरा है लिहाजा नेजा मेला नहीं लगने दिया जाएगाऔर न ढाल लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि अज्ञानता में यह मेला लगाया जाता रहा है तो अज्ञानी हो और यदि जानबूझकर यह मेला लगाया गया हैतो देशद्रोही हो.समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सैयद सालार मसूद गाजी को सूफी संत बताया है उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर परहमले का जिक्र इतिहास में मिलता है लेकिन उस समय सैयद सालार मसूद गाजी की उम्र मात्र 11 वर्ष थी. इस हमले में सालार गाजी का जिक्र नहींहै. गाजी 12वीं शताब्दी के महान सूफी संत थे उनकी याद में याद में जगह-जगह नेजा मेले आयोजित होते हैं. उनकी बहराइच स्थित कब्र पर बड़ाआयोजन होता है. सांसद ने एक्स पर लिखा है कि उस समय इंसानियत पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सैयद सालार मसूद गाजी ने आवाज उठाई थीवह इंसानियत की खिदमत करते थे उनको याद में लगने वाला नेजा मेला रोकना अनैतिक है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश, शिक्षक विहीन न रहे कोई स्कूल” अप्रैल में शुरु किया जाएगा अभियान”

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है. प्रदेश का कोई भीविद्यालय शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूरा फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर करें वे शनिवार को अपने सरकारी आवास पर बेसिकशिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे.उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट और मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों मेंखेल के मैदान ट्रेनिंग सेंटर और न्यू एज कोर्स की व्यवस्था करने के निर्देश दिए. कहा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 925 तथा वर्ष 2024-25 में785 शासकीय विद्यालयों को पीएमश्री योजना के तहत उच्चीकरण कराया है. इन विद्यालयों को इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में विकसित किया जाए. सीएम ने कहा कि एक से 15 अप्रैल तक और जुलाई में 15 दिन का स्कूल चलो अभियान चलाएं. शिक्षकों, ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्यों केसाथ मिलकर स्कूल चलो अभियान को एक उत्सव का रूप दिया जाए ताकि बच्चों को नया अनुभव मिले.उन्होंने कहा कि शिक्षक और प्रधानाचार्यगांवों में घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाएं. कहाशिक्षकों को अच्छे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना होगा ताकि लर्निंग आउटकम को और बेहतर किया जा सके.2016 में करीब 10784 बच्चें हुए थे लाभान्वितउन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से आरटीई के तहत 2016-17 में 10784 बच्चे लाभान्वित हुए थे.वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 4.58 लाख से अधिक हो गई है. बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, अपर मुख्य सचिव बेसिक, माध्यमिक ववित्त दीपक कुमार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा भी शामिल हुईं.सीएम ने कहा कि सभी आकांक्षात्मक जिलों व ब्लॉकों में शिक्षक-छात्र काअनुपात बेहतर करें. सभी परिषदीय विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. इन विद्यालयोंमें पेयजल,अच्छे क्लास रूम, बिजली की सुविधा, बाउंड्रीवाल व अच्छे फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है.योगी ने कहा कि पहले चरण में 13 डायट कोसेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है. डायट को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ायाजाएगा. इसलिए आईआईएम लखनऊ और बंगलुरू जैसे संस्थानों के ट्रेनिंग मॉड्यूल से इसे जोड़ा जाए. उन्होंने अधिकारियों को समर कैंप चलाने केलिए भी निर्देश दिया. बच्चों को खेल-खेल में नई चीजों को सिखाने पर जोर देते हुए उन्होंने कैंप सुबह ही चलाने के निर्देश दिए.सीएम ने कहा किशिक्षा के क्षेत्र में हुए प्रयासों के परिणाम आज असर रिपोर्ट में साफ दिख रहा है वर्ष 2024 की रिपोर्ट में प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में उल्लेखनीयसुधार हुआ है. इससे यूपी अब टॉप परफॉर्मिंग प्रदेश बन गया है प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष 2010 में 57 फीसदी थी जोवर्ष 2024 में बढ़कर 71.4 प्रतिशत हो गई है. लड़कों की तुलना में बालिकाओं का नामांकन भी बढ़ा है.