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पीएम मोदी ने उत्तरकाशी से शीतकालीन पर्यटन को दी नई पहचान, “घाम तापो टूरिज्म” को किया प्रमोट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान उत्तरकाशी पहुंचे, जहां उन्होंने मुखवा और हर्षिल से उत्तराखंड में शीतकालीन तीर्थाटन औरपर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों को उत्तराखंड आनेका निमंत्रण दिया। पीएम मोदी ने प्रदेश के विंटर टूरिज्म को “घाम तापो टूरिज्म” के रूप में प्रस्तुत किया। उत्तराखंड से आत्मीय लगाव व्यक्त कियाहर्षिल में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे पहले माणा में हुए हिमस्खलन में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंनेउत्तराखंड की आध्यात्मिक शक्ति की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें मां गंगा के आशीर्वाद से इस पवित्र भूमि की सेवा का अवसर मिला है। उन्होंनेअपने काशी सांसद बनने का श्रेय भी मां गंगा की कृपा को दिया। “यह दशक उत्तराखंड का होगा”प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह कुछ वर्ष पहले केदारनाथ दर्शन के लिए आए थे, तो उनके मुख से यह वाक्य स्वतः ही निकला था कि “यह दशकउत्तराखंड का होगा।” उन्होंने इसे बाबा केदार का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि अब यह भविष्यवाणी सच होती दिख रही है और राज्य तेजी से विकासकी ओर बढ़ रहा है। 365 दिन पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरतपीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में पूरे साल पर्यटन को सक्रिय बनाए रखना जरूरी है, ताकि कोई भी मौसम “ऑफ-सीजन” न कहलाए। उन्होंने यहभी उल्लेख किया कि वर्तमान में अधिकतर पर्यटक मार्च से जून के बीच उत्तराखंड आते हैं, जबकि अन्य महीनों में पर्यटन गतिविधियां कम हो जाती हैं। विंटर वेडिंग और वेलनेस टूरिज्म पर जोरप्रधानमंत्री ने “वेड इन इंडिया” अभियान के तहत भारतीयों को देश में ही विवाह समारोह आयोजित करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया किउत्तराखंड को शीतकालीन विवाह स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, प्रदेश केप्राकृतिक हॉट स्प्रिंग्स (गर्म जल स्रोत) को वेलनेस स्पा के रूप में विकसित करने की भी जरूरत बताई। डबल इंजन सरकार कर रही उत्तराखंड के विकास को मजबूतप्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने में जुटी हैं। चारधाम यात्रा, ऑल वेदर रोड, आधुनिकएक्सप्रेसवे, रेलवे और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार से प्रदेश में बुनियादी ढांचे को सशक्त किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा और घोषणाओं से उत्तराखंड के पर्यटन और आर्थिक विकास को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

सांसद राघव चड्ढा को हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को अमेरिका के प्रसिद्ध हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेने का निमंत्रणमिला है। यह कार्यक्रम विश्व स्तर पर प्रभावशाली नेताओं को एक मंच पर लाकर सार्वजनिक नीति, नवाचार और नेतृत्व पर गहन विचार-विमर्श काअवसर प्रदान करता है। वैश्विक नीति और नेतृत्व पर होगी चर्चायह कार्यक्रम 5 से 13 मार्च 2025 तक बोस्टन, कैम्ब्रिज में आयोजित होगा, जिसमें दुनिया भर के नीति निर्माता, विशेषज्ञ और नेता भाग लेंगे। इसमेंवैश्विक राजनीति, नीतिगत नवाचार और नेतृत्व से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी। राघव चड्ढा की प्रतिक्रियाइस निमंत्रण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “हार्वर्ड कैनेडी स्कूल का यह कार्यक्रम मेरे लिए एक शानदार अवसर है, जहां मैंदुनिया के श्रेष्ठ नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों से सीखने का मौका प्राप्त करूंगा। यह अनुभव न केवल मेरे व्यक्तिगत विकास में सहायक होगा, बल्किभारत की नीतिगत रणनीतियों को भी बेहतर बनाने में योगदान देगा।” वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत उपस्थितिराघव चड्ढा को पहले भी विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा “यंग ग्लोबल लीडर” के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंचोंपर उनकी भागीदारी भारत की वैश्विक उपस्थिति को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी। युवा नेताओं के लिए सीखने का मंचहार्वर्ड कैनेडी स्कूल का यह कार्यक्रम वैश्विक चुनौतियों जैसे बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता से निपटने के लिए नेताओं कोआवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करता है। इस अनुभव से राघव चड्ढा को भारत की नीति निर्माण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इस निमंत्रण के साथ, राघव चड्ढा ने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव को और सशक्त किया है, जिससे भारत की नीतिगतदिशा को मजबूती मिलेगी।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने अबू आजमी के खिलाफ पेश किया संस्पेंड प्रस्ताव, अबू आजमी ने मांगी माफी

Maharashtra Politics:औरंगजेब विवादित बयान के बाद अबू आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्र से सस्पेंड किया गया था.जिसकोलेकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने विधानसभा सत्र से अबू आजमी को सस्पेंड करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था. औरंगजेब को लेकरविवादित बयान करने के लिए समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा से अभी फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है. लेकिन इसकेबावजूद यह मामला अभी शांत नहीं हुआ है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रक्रिया दी है. औरंगजेब पर अबू आजमीकी टिप्पणी के बाद उनके सस्पेंशन पर शिंदे ने कहा कि अभी तो यह पहला स्टेप है. अभी तो फिलहाल उन्हें इशारा ही दिया गया है दरअसल समझनेवाले कोई सारा ही काफी है. उन्हें समझदारी से काम करना चाहिए जो भी शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का अपमान करेगा उन्हें हम नहींछोड़ेंगे. औरंगजेब पर विवादित बयान के बाद अबू आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्र से सस्पेंड कर दिया गया था. महाराष्ट्र सरकार में मंत्रीचंद्रकांत पाटिल ने विधानसभा सत्र से सस्पेंड कर दिया गया था. सस्पेंड करने के लिए पेश किया प्रस्तावसत्र से अबू आजमी को सस्पेंड करने के लिए एक प्रस्ताव भी पेश किया था. भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि आजमी को विधायक की सेहटना चाहिए ना कि सिर्फ एक सत्र के लिए उन्हें सस्पेंड करना चाहिए.उन्होनें कहा कि छत्रपति शिवाजी पूजनीय है और उनका अपमान करने वाले कोहम आसानी से नहीं जाने दे सकते. औरंगजेब पर दिए बयान के बाद से सियासत गर्माने पर अबू आजमी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मैं शिवाजीमहाराज और संभाजी महाराज के खिलाफ बोलने के बारे में सोच भी नहीं सकता. इस पर अबू आजमी ने कहा कि मेरे शब्दों को तोड़ मरोड़ कर दिखायागया ह. औरंगजेब के बारे में मैंने वही कहा है जो इतिहासकारों और लेखकों ने कहा है मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज संभाजी महाराज या अन्य किसीभी पुरुष के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है. मैं इतना बड़ा नहीं हूं जो कुछ कहा था. वही असल में किन्हीं इतिहासकारों का व्यक्तव्य है. अबू आजमी ने मांगी माफीअबू आजमी ने कहा कि मैने पहले तो ऐसा कुछ नहीं कहा है अगर मेरे इन बयानों की वजह से कोई आहत हुआ है. तो में बिना किसी शर्त के माफीमांगता हूं और अपने बयान को वापस लेता हूं.औरंगजेब पर बयान बाजी को लेकर महाराष्ट्र के ठाणे में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है.आजमी नेऔरंगजेब का बचाव करते हुए बयान दिया था. कि मैं 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या अहिंष्यणु शासक नहीं मानता. इन दोनों फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाह की विक्रत छवि बनाई जा रही है. मालूम हो कि महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 26 मार्च तक समाप्तहो रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ऐसा क्या बोल गए राजदूत, कि विंस्टन पीटर्स चली गई नौकरी

न्यूजीलैंड ने अपने लंदन में तैनात वरिष्ठ राजनयिक को बर्खास्त कर दिया है. इस दूत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का द्वितीय विश्व युद्ध की समझपर सवाल उठाए थे. न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि हाई कमिश्नर फिल गोल के टिप्पणियां”बेहद निराशाजनक” थी और उन्हें अब उनके पद से हटा दिया गया है. मंगलवार को लंदन में एक पैनल चर्चा के दौरान गोफ फिनलैंड की विदेश मंत्रीऔर एलिना वाल्टोनन से सवाल किया. गोफ ने ब्रिटिश योद्धकालीन नेता विंस्टन चर्चिल ने 1938 के एक भाषण का जिक्र करते हुए पूछा राष्ट्रपति ट्रंपने चर्चिल की मूर्ति को ओवल ऑफिस में वापस रखा है. लेकिन क्या आपको लगता है कि वह असल में इतिहास को समझते भी हैं. यह टिप्पणी रूसके यूक्रेन पर आक्रमण के संदर्भ में की गई थी. गोफ ने 1938 के म्यूनिख समझौते की तुलना हाल की घटनाओं से की थी. न्यूजीलैंड सरकार को किया अस्वीकारन्यूजीलैंड सरकार ने गोफ के बयान को अस्वीकार करते हुए कहा कि सरकार या न्यूजीलैंड का आधिकारिक रूख नहीं है. यह टिप्पणियां न्यूजीलैंडसरकार के विचारों को नहीं दर्शाती हैं. और लंदन में हाई कमिश्नर के रूप में उन्हें पद से हटाया है जाता है. गोफ न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री और आकलैंडके मेयर रह चुके हैं. उनको 2022 में पूर्व प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न की सरकार ने इस पद पर नियुक्त किया गया था. न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री हेलेनक्लार्क ने इस बर्खास्त की की निंदा की और इसे एक बेहद सम्मानित पूर्व विदेश मंत्री को हटाने का बहुत कमजोर बहना बताया दूसरी ओर पीटर्स नेकहा कि एक राजनायिक के रूप में गोफ को सरकार की नीतियों या प्रतिनिधित्व करना चाहिए न की व्यक्तिगत राय देनी चाहिए. जब ट्रंप ने हाल ही मेंयूक्रेन के साथ संबंधों में तनाव और रूस के साथ संबंधों को बेहतर करने की कोशिश की है. न्यूजीलैंड अब लंदन में नए हाई कमिश्नर की नियुक्ति कीप्रतिक्रिया शुरू करेगा गोफ ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

उत्तराखण्ड दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी, हिमस्खलन में मजदूरों की मौतों पर जताया शोक

PM uttrakhand visit: पीएम मोदी आज उत्तराखंड दौरे पर है यहां उन्होंने मुखवा में मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल पर पूजा की और हार्षिलमें एक रैली को संबोधित किया. उन्होंने सबसे पहले उत्तराखंड की माणा गांव में हुए हिमस्खलन में हुई मजदूरों की मौतों पर शोक जाहिर किया. उन्होंनेकहा कि माणा में जो हादसा हुआ है उसके प्रति मैं दुख व्यक्त करता हूं मैं हादसे से में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं. इसके बादपीएम मोदी ने उत्तराखंड की अपनी पुरानी यात्राओं को याद किया उन्होंने कहा कि वर्तमान दशक उत्तराखंड का दशक है. उन्होंने यह भी कहा किउत्तराखंड में कोई भी सीजन ऑफ सीजन नहीं होना चाहिए. यहां हमेशा टूरिज्म ऑन रहना चाहिए पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की यह भूमिदेवभूमि आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है. चारधाम और अनंत तीर्थों का आशीर्वाद है मैं मानता हूं कि मैं मां गंगा के आशीर्वाद से काशी तक पहुंचा हूं. और संसद के रूप में काशी की सेवा कर रहा हूं. और मैंने कहा भी था. कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है कुछ महीने पहले ही मुझे यह अनुभूति हुई की मांगंगा ने मुझे गोद ले लिया है. यह उनका स्नेह ही है कि आज मैं उनके मायके मुखवा गांव आया हूं. बाबा केदारनाथ का है आशीर्वाद- पीएम मोदीपीएम मोदी ने कहा कुछ साल पहले जब मैं बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए गया था मैं बोल पड़ा था कि यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा वहशब्द मेरे थे भाव मेरे थे लेकिन उसके पीछे की शक्ति स्वयं बाबा केदारनाथ ने दी थी. बाबा केदारनाथ के आशीर्वाद से वह शब्द वह भाव सच्चाई औरहकीकत में बदल रहे हैं. ये दशक उत्तराखंड का बन रहा है मैं चाहता हूं कि कोई भी सीजन हो टूरिज्म ऑन रहे सर्दियों में रिजॉर्ट खाली पड़े रहते हैं. यहआर्थिक असंतुलन पैदा करता है. अगर देश-विदेश के लोग आए तो यहां की आध्यात्मिक आभा का वास्तविक परिचय मिलेगा. पीएम मोदी ने कहाउत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए हमारी डबल इंजन सरकार मिलकर काम कर रही है. केंद्रीय कैबिनेट ने केदारनाथ रूप में प्रोजेक्ट औरहेमकुंड रूप में प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. केदारनाथ रूप में बनने के बाद जो यात्रा आठ नौ घंटे में पूरी होती थी. अब वही यात्रा 30 मिनट में पूरी होजाएगी इससे बुजुर्गों और बच्चों के लिए केदारनाथ यात्रा और 30 मिनट में पूरी हो जाएगी इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान कर दिया है.

उत्तराखंड कैबिनेट ने दी नई आबकारी नीति को मंजूरी, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शराब की दुकानों को लेकर दिए सख्त आदेश

उत्तराखंड कैबिनेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शासन सुधार पेंशन लाभों की सरलीकरण और कई आबकारी नीति के पुनर्गठन से जुड़ेमहत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. यह फैसला राज्य की आर्थिक वृद्धि जन कल्याण और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. उत्तराखंड कैबिनेट के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आने वाले राज्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना को मंजूरी दे दी गईहै. जिससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद स्थिर और सुनिश्चित पेंशन प्राप्त होगी. दरअसल यूपीएस को एनपीएस के तहत शामिल सरकारी कर्मचारियों केलिए बैकल्प योजना रूप में पेश किया गया है. दरअसल यह योजना सेवा निर्मित कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गईहै.इस योजना को 1 अप्रैल 2025 से लागू कर दिया जाएगा. इसके बाद यूपीएस का उद्देश्य पेंशनरों की स्थिरता सुनिश्चित कर सेवा निवृत्ति के बाद कीअनिश्चित को कम करना है. उत्तराखंड कैबिनेट ने नई आबकारी नीति 2025 को मंजूरी दे दी है. जिसका उद्देश्य शराब बिक्री को नियंत्रित करना वसांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना और राज्य के राजस्व को बढ़ावा देना है. अवैध बिक्री पर जाहिर की शक्तिइस नई आबकारी नीति से राज्य सरकार शराब बिक्री कर को नियंत्रित करने व उपभोक्ताओं अधिकारों की सुरक्षा करने और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करनेका लक्ष्य रखती है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर की संरक्षण के लिए कई योजनाओं की घोषणा कीहै.इसको लेकर कई नीतियों में भी सुधार किया जाएगा. इसको लेकर मंदिर और धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानों को बंद करने का सरकार निर्णयलिया है. दरअसल यह कदम सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. सरकार ने अवैध बिक्री पर भी शक्ति जाहिर कीहै. सरकार ने ऐलान किया है. कि शराब और मेट्रो लिकर बिक्री प्रणाली समाप्त करने का फैसला सरकार की तरफ से लिया गया है. इस कदम सेअवैध शराब बिक्री और इससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं पर भी नियंत्रित किया जाएगा. यदि कोई शराब विक्रेता एमआरपी से अधिक मूल वसूलताहै. तो उसकी लाइसेंस रद्द की जाएगी. साहित्य एवं सांस्कृतिक को दिया बढ़ावाइसके साथ ही सरकार की तरफ से ऐलान किया गया है. विभागीय स्टोर में भी एमआरपी का पालन अब करना अनिवार्य हो गया है.उत्तराखंड सरकार नेसाहित्य एवं सांस्कृतिक को भी बढ़ावा देने की एक पलह की है. जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया है कि साहित्य और सांस्कृतिकधरोहर की संरक्षण के लिए हम प्रतिवर्ष 45 लेखन को वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे. उत्तराखंड साहित्य भूषण पुरस्कार के साथ 21 नए साहित्यिकपुरस्कारों की भी शुरुआत करेंगे. यह वित्तीय सहायता सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि उत्तराखंड की समृद्धि साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत कोसहज ने की एक प्रतिबद्धता है.

क्रिकेटर मोहम्मद शमी के रोजा न रखने पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन, रोजा न रखना है धर्म के खिलाफ

दुबई में टीम इंडिया के शानदार चैंपियन ट्रॉफी में शानदार गेंदबाजी कर रहे मोहम्मद शमी ने रोजा न रखने पर बयानबाजी शुरू हो गई है. बरेली मेंमौलाना शहाबुद्दीन ने तीखी प्रतिक्रिया की है उन्होंने कहा है कि की मोहम्मद शमी इन दिनों दुबई में है और टीम इंडिया के ओर से चैंपियन ट्रॉफी खेलरहे हैं. इस दौरान रमजान का महीना चल रहा है लेकिन उनके रोजा नहीं रखने पर शुरू हो गई है. बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन ने क्रिकेटर की रोज नहींरखने पर कड़ी आलोचना की है मौलाना ने कहा की रोजा रखना इस्लाम में फर्ज करार दिया गया है बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन ने क्रिकेटर मोहम्मदशमी पर पवित्र रमजान के महीने के दौरान रोजा नहीं रखने पर कड़ी आलोचना की है. मौलाना कहा कि रोजा रखना इस्लाम में एक फर्ज करार दियागया है. अगर कोई रोजा नहीं रखता है तो वह गुनहगार है रोजा नहीं रखकर मोहम्मद शमी ने भी गुनाह किया है. उन्होंने मोहम्मद शमी को नसीहत देतेहुए कहा कि शरीयत ने नियम कायदे हैं उन्हें पालन करने की भी सभी की जिम्मेदारी है. लंबे वक्त के बाद हुई शमी की वापसीदरअसल मोहम्मद शमी की लंबे वक्त के बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है वह बीते कहीं महीनों तक फिटनेस की समस्या के कारण टीम से बाहर रहरहे थे. हालांकि वापसी के बाद में टीम इंडिया में लगातार बने हुए हैं चैंपियन ट्रॉफी में भी उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की है. मोहम्मद शमी ने स्वीकार कियाकि भारत के अकेले प्रमुख गेंदबाज होने के नाते उन पर काफी जिम्मेदारियां है. चोट से उबरकर वापसी करने वाली शमी ने चोटिल जसप्रीत बुमराह कीगैर मौजूदगी में चैंपियन ट्रॉफी के दौरान हर्षित राणा या हार्दिक पांड्या के साथ नई गेंद संभाली है. शमी ने अभी तक टूर्नामेंट में आठ विकेट लिए हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया पर सेमीफाइनल में चार विकेट से मिली जीत के बाद मिश्रित जोन में कहा मैं अपनी लय फिर हासिल करके टीम के लिए ज्यादायोगदान देने की कोशिश कर रहा हूं. जो दो विशेषज्ञ तेज गेंदबाज टीम में नहीं है. और मेरे ऊपर इसमें ज्यादा जिम्मेदारी है.

कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने किया बड़ा ऐलान बहुजन समाज पार्टी है अन्य दलों से भिन्न, बीजेपी पर कसा तंज एनडीए न देती साथ तो नहोती आज सरकार

डॉ. उदित राज (पूर्व सांसद) समेत कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी का उत्थान अन्य दलों से भिन्न है. शुरुआत इसकी सामाजिकआंदोलन से हुई और बाद में राजनीतिक पार्टी – बहुजन समाज पार्टी बनी और अब इसका भाजपा करण हो गया है. सामाजिक न्याय और समानता कीसोच रखने वाले किसी समुदाय या दल के रहे होंगे. उनकी सहानुभूति इस आंदोलन के साथ रही है.कांग्रेस पार्टी की सहानुभूति कुछ ज़्यादा ही रहीपिछले चार दशक से आरोप पर आरोप कांग्रेस पर लगाते गए लेकिन कांग्रेस पार्टी ने पलट कर जवाब नहीं दिया. कांग्रेस पार्टी ने दलित आदिवासीऔर पिछड़ों को हिस्सेदारी दी और उसी को अंबेडकर विरोधी और दलित विरोधी बताकर हमला बोला जाता रहा अब जब बसपा का भाजपा करण होगया है तो चुप बैठा नहीं जा सकता बसपा का जन्म और ताक़त देने वाले ग़रीब दलित और कर्मचारी थे. इन्हें हुकुमरान बनाने का सपना दिखाया औरइसी भावना और लक्ष्य को देखते हुए कार्यकर्ता अपनी क़ुर्बानी देता रहा. अन्य पार्टियों जैसे उसका व्यवहार न रहा उसने कोई काम कराने और सहयोगकी आकांक्षा नहीं पाली. इन्होंने अपने खून-पसीने से सीचा है. पहले लोग डर के कारण रखते थे जेब में झंडेउदिन ने कहा कि गांवों में शुरू के दौर में छुप कर प्रचार और वोट डालते थे जब साइकिल से निकलते थे. तो झंडे को जेब में रखते थे ताकि गाँव केदबंग देख न लें वरना मारेंगे. मजदूरी से निकालकर चंदा देते थे और चुनाव प्रचार के लिए जब निकलते थे. तो घर से रोटी लेकर अमीरों के पैसे से येपार्टी नहीं बनी. जैसे सत्ता मिली अब इसको सब भूल गए कार्यकर्ताओं से मिलना तो दूर की बात हो गई कांशीराम जी द्वारा बढ़ाये गए नेतृत्व काअपमान करना और अंत में बाहर का रास्ता दिखा दिया. जो आंदोलन डॉ अंबेडकर के विचारों के आधार पर खड़ा हुआ आज वही विपरीत दिशा में चलपड़ा है. इसलिए निम्नलिखित सवाल पूछना जरूरी हो गया है. क्या यह सच नही है कि 2022 में उ. प्र. चुनाव के समय सुश्री मायावती ने कहा किसमाजवादी पार्टी नहीं जितनी चाहिए चाहे बीजेपी जीत जाए. यह सच नहीं है कि लोकसभा चुनाव के समय जब आकाश आनंद ने बीजेपी के ख़िलाफ़आक्रामक भाषण दिया तो 24 घंटे के अंदर कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया गया था. अगर गठबंधन न होता न बनती भाजपा सरकारउदित राज ने आगे कहा कि अगर लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा होती तो बीजेपी केंद्र में सरकार न बना पाती. इस बातको राहुल गांधी जी ने रायबरेली में भी कहा भी था कि आकाश आनंद ने कहा कि कांग्रेस-सपा से आगामी विधान सभा चुनाव में समझौता करनाचाहिए नहीं तो जीरो ही रहेंगे. इससे अंदरूनी रूप से बीजेपी परेशान हो गई. बीजेपी का वोट बैंक और कहीं से बढ़ने वाला नहीं है. मुसलमान की बातउठाकर भी लाभ नहीं मिला. बीएसपी ही रह जाती और आकाश आनंद के रहते यह मुश्किल होता.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की ब्रिटिश के पीएम कीर स्टार्मर से मुलाकात, खास मुद्दों पर की गई चर्चा

भारत आप सिर्फ सुनने वाला नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर दुनिया को प्रभावित करने वाला बन रहा है. हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद कीब्रिटिश पीएम से मुलाकात इसी बदले में हुई भारत को दर्शाती है. भारत दुनिया में अपनी अलग पहचान बन चुका है. अमेरिका हो या ब्रिटेन, हर जगहभारत अपनी धाक दिखा रहा है. इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टामर्रसे मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज में साफ दिखाई दिया कि भारत वैश्विक राजनीति में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कर रहाहै. एस जयशंकर की बॉडी लैंग्वेज की चर्चा हर जगह हो रही है. लंदन में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ब्रिटिश पीएम की स्ट्रैमर से मिले तो पूरेकॉन्फिडेंस के साथ बातचीत करते नजर आए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं स्टामर्र तक पहुंचाएं और भारत ब्रिटेन संबंधों को लेकरचर्चा की. जयशंकर का आत्मविश्वास इस बात का संकेत था कि भारत अब अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है और किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकता. विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरविदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी इस मुलाकात की तस्वीर में सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीरों में दिख रहा था. कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री खुद आगेबढ़कर जयशंकर का गर्म जोशी से स्वागत कर रहे हैं. जयशंकर की बातचीत का अंदाज ऐसा था जैसे दो समान स्तर के नेता चर्चा कर रहे हों. इसमुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अलावा रूस यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई. जयशंकर ने भारत की स्थिति को स्पष्टकिया कि भारत किसी गुट में शामिल नहीं होगा. और हमेशा शांति का पक्षधर रहेगा.भारत ने यह साफ कर दिया. कि वह अपने फैसले खुद लेता हैऔर अपनी नीति पर चलता है. मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा हमने द्धिपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने और लोगों केबीच संवाद को मजबूत करने पर चर्चा की. ब्रिटिश पीएम ने युद्ध को लेकर अपनी राय शेयर की है.

यूपी के बांदा की शहजादी को दुबई में फांसी, परिवार के लोगों ने सरकार से लगाई गुहार”सरकार ने नहीं सुनी कोई पुकार”जानें क्या है पूरामामला

UP News: यूपी की शहजादी खान को दुबई में फांसी देने का मामला अब चर्चा में है. परिवार के लोगों ने दावा किया है कि उन्हें न्याय नहीं मिलाऔर सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की है. यूपी के बांदा जिले की शहजादी खान का मामला इन दिनों काफी सुर्खियों में है दरअसल 15 फरवरी कोदुबई में फांसी दिए जाने के बाद उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं. शहजादी पर अबू धाबी में चार महीने के बच्चे की हत्या का आरोप था. जिसके चलते उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है. उनके पिता शब्बीर खान का कहना है कि उनकी बेटी निर्दोष थी. और उसे झूठे आरोपों में फसाया गयाथा. शहजादी के पिता का आरोप है कि भारत सरकार ने इस फैसले में उनकी कोई मदद नहीं की. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को 10 फरवरी 2023 को अभी धाबी पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. और 31 जुलाई 2023 को अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई गई. परिवार का कहना है किउन्होंने सरकार से कई बार अपील की लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला. वकील हायर करने के लिए नहीं थे संसाधनवकील हायर करने और कानूनी सहायता लेने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे. जिससे वे अपनी बेटी को न्याय नहीं दिला सके. परिवार काकहना है की शहजादी एक महिला नाजिया के लिए काम कर रही थी. जो हाल ही में मां बनी थी आरोपी के मुताबिक बच्चों को एक ऐसी वैक्सीन देदी गई थी. जो आमतौर पर 6 महीने के बाद दी जाती है. साबिर खान का दावा है कि उनकी बेटी को जानबूझकर फसाया गया और उसमें नाजिया काहाथ था. शहजादी ने हमेशा खुद को निर्दोष बताया लेकिन न्याय ने उनकी बात को नजर अंदाज कर दिया. शाहजादी खान की फांसी ने प्रवासीभारतीय सुरक्षा और कानून ने अधिकार पर सवाल खड़ा कर दिया है. परिवार को न तो सरकार से मदद मिली और ना ही सामाजिक संगठनों से कोईसमर्थन यह मामला विदेश में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक चेतावनी है. कि उन्हें कानूनी मामलों में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए औरसरकार को भी ऐसी मामलों में एक्टिव भूमिका निभानी चाहिए.